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लोगों के लिए फ्री है ट्यूलिप फेस्टिवल में एंट्री, दिल्ली में कहां देख सकते हैं?


फरवरी के महीने को वसंत ऋतु कहा जाता है। इस महीने में फूलों का खिलाना शुरू हो जाता है। दिल्ली में अमृत उद्यान के बाद ट्यूलिप फेस्टिवल की शुरुआत हो चुकी है। यह फेस्टिवल प्रकृति प्रेमियों के लिए बहुत खास है। यहां पर आपको 7 अलग-अलग रंगों में 2 लाख से ज्यादा ट्यूलिप के फूल देखने को मिल जाएंगे।

 

अगर आप फूलों को देखना पसंद करते हैं तो इस जगह पर दोस्त और परिवार के लोगों के साथ जरूर घूमने जाएं। हर साल नई दिल्ली नगर निगम ट्यूलिप फेस्टिवल का आयोजन  करती है। इस साल भी 16 से 20 फरवरी तक ट्यूलिप फेस्टिवल लगा हुआ है। यह फेस्टिवल भारत मंडप नई दिल्ली में हो रहा है। एनडीएमसी ने इसके लिए काफी तैयारियां की हैं।

 

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ट्यूलिप फेस्टिवल कहां देख सकते हैं?

डीडीए से मिली जानकारी के अनुसार 21 और 22 फरवरी को फ्लावर शो का आयोजन भी किया जाएगा। डीडीए कुछ अलग जगहों पर भी ट्यूलिप से बल्ब को सजा रहा है। शांति पथ और एसीपी मार्ग पर ट्यूलिप के बल्ब दिखने भी लगे हैं।

 

एनडीएमसी एरिया में चाणक्यपुरी के शांतिपथ सड़क के दोनों तरफ ग्रीन बेल्ट में ट्यूलिप को सजाया जाता है। इसके अलावा नेहरू पार्क, लोदी गार्डन, डीडीए के विभिन्न पार्क, कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क, एसपी मार्ग, एनडीएमसी कंवेंशन सेंटर लॉन, मंडी हाउस, विंडसर प्लेस और एनडीएमसी के राउंड अबाउट पर ट्यूलिप लगाए जाते हैं।

एंट्री फीस कितनी है?

ट्यूलिप फेस्टिवल में एंट्री बिल्कुल फ्री है। आपको बस आपके परिवार और दोस्तों के साथ आना है। इस बार दिल्ली में 2.25 लाख ट्यूलिप बल्ब को अलग-अलग जगहों पर लगाया गया है। करीब 1 लाख ट्यलिप को गमलों में लगाया गाया है जिसे आम लोगों को बेचा जाएगा। ट्यलिप फेस्टिव घूमने का सबसे सही समय 8 से 11 बजे के बीच में है।

 

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टूरिस्ट ट्यूलिप फेस्टिवल में क्या-क्या कर सकते हैं?

 

  • इस फेस्टिवल में आपको एक साथ लाल, पीला, पिंक और सफेद रंग के ट्यूलिप बल्ब साथ में देखने को मिलेंगे। यह एक मनमोहक नजारा है।
  • आप ट्यूलिप फेस्टिवल में फोटोग्राफी प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं। 
  • आप अपने परिजनों और दोस्तों के साथ आकर इस जगह पर खूबसूरत तस्वीरें ले सकते हैं।

 

एकादशी पर क्या कह रही हैं आपकी राशियां? राशिफल से समझिए


ज्योतिषी नजरिए से देखे तो 13 फरवरी शुक्रवार का दिन बेहद खास है। चंद्रमा धनु राशि में गोचर कर रहे हैं, जो हमें  नई चीजों को सीखने और उत्साह के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। इसके साथ ही आज का मूलांक 7 है, जिसका स्वामी केतु होने के कारण आज का दिन उन लोगों के लिए बहुत अच्छा है जो रिसर्च, ध्यान या किसी भी तरह के क्रिएटिव काम से जुड़े हैं।

 

शुक्रवार का दिन वैसे भी सुख-सुविधाओं का कारक माना जाता है और मूलांक 7 की रहस्यमयी ऊर्जा के साथ मिलकर यह आंतरिक शांति और तरक्की के नए रास्ते खोलता है। आइए जानते हैं कि आज के सितारे आपकी राशि के लिए क्या संकेत दे रहे हैं।

 

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सभी 12 राशियों का हाल 

मेष: 

आज आप ऊर्जा से भरपूर रहेंगे। करियर में नई शुरुआत का मौका है। बस ध्यान रखें कि जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला न लें। साथ ही योग के जरिए अपनी एनर्जी को सही दिशा दें।

वृषभ: 

आर्थिक नजरिए से दिन बढ़िया है। निवेश की योजना बनाना फायदेमंद रहेगा। पुराने दोस्तों से मिलें लेकिन फिजूलखर्ची से बचें।

मिथुन: 

आपकी बातों का जादू आज लोगों पर चलेगा। नई चीजें सीखने के लिए दिन अच्छा है, बस दूसरों की गॉसिप से खुद को दूर रखें।

कर्क: 

घर-परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। पुरानी बातों को भूलकर वर्तमान का आनंद लें। घर की सजावट पर ध्यान देना आपको खुशी देगा।

सिंह: 

नेतृत्व करने का मौका मिलेगा। आपके नए आइडियाज की तारीफ होगी। अहंकार को खुद पर हावी न होने दें, बाकी दिन शानदार है।

कन्या: 

काम के सिलसिले में आपकी बारीकियां आपको लाभ दिलाएंगी। सेहत का ख्याल रखें और खान-पान में लापरवाही न बरतें।

तुला: 

पार्टनर के साथ समय बिताने और रिश्तों को बेहतर बनाने का दिन है। खरीदारी सोच-समझकर करें, ताकि बजट न बिगड़े।

वृश्चिक: 

आज आपका मन गूढ़ विषयों और रिसर्च में लगेगा। मेडिटेशन करना शांति देगा। किसी पर शक करने के बजाय बातचीत पर जोर दें।

धनु: 

यात्रा के योग बन रहे हैं। कुछ नया पढ़ने या जानने की इच्छा पूरी होगी। वाहन चलाते समय सावधानी रखना जरूरी है।

मकर: 

करियर में तरक्की के संकेत हैं। ऑफिस में सीनियर की सलाह आपके काम आएगी। काम के साथ-साथ परिवार को भी समय दें।

 

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कुंभ: 

दोस्तों के साथ मिलकर कुछ नया शुरू कर सकते हैं। सामाजिक दायरे में आपकी पहचान बढ़ेगी। अपनी सेहत का नियमित चेकअप कराते रहें।

मीन: 

आपकी क्रिएटिविटी आज सातवें आसमान पर होगी। संगीत या कला में मन लगेगा। हालांकि, पैसों के लेन-देन में थोड़ी सावधानी बरतें।

 

डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जानकारी के लिए ज्योतिषि से संपर्क करें।

‘तेल पर पहले धमकाया, अब गिड़गिड़ा रहे…’ ईरान ने ली अमेरिका की चुटकी


ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका पर तंज कसते हुए कहा है कि जो वाशिंगटन कल तक भारत को रूसी तेल न खरीदने के लिए धमका रहा था, वह ईरान के साथ जंग छिड़ने के बाद अब भारत और दुनिया के अन्य देशों से रूसी तेल खरीदने के लिए गिड़गिड़ा रहा है।

अब्बास अराघची ने यूरोपीय देशों की भी आलोचना की है और आरोप लगाया है। ईरान के विदेश मंत्री ने  कहा है कि रूस के खिलाफ अमेरिकी समर्थन पाने के लालच में यूरोपीय देश, ईरान का साथ दे रहे हैं। यह जंग अवैध है और यूरोप का रुख गलत है। 

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अमेरिका ने रूस पर अचानक बदला ट्रेड

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने हाल ही में एलान किया था कि भारत को 30 दिनों के लिए रूस से तेल खरीदने की छूट दी जा रही है। यह छूट अस्थाई है। स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधा को देखते हुए यह कदम उठाना जरूरी था। 

रूसी तेल टैंकर पहले से ही समुद्र में हैं। मेरिका का कहना है कि अगर भारत भारत इन बैरलों को नहीं खरीदता है तो वे चीन के पास चले जाएंगे। अब भारतीय रिफाइनरियों तक सप्लाई पहुंचाना, अमेरिका की प्राथमिकता है। 

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ईरान ने अमेरिका पर कसा तंज

ईरान ने अमेरिका पर तंज कसा है कि अमेरिका अब रूसी तेल खरीदने के लिए दुनिया और भारत के सामने गिड़गिड़ा रहा है। ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने X पर लिखा, ‘अमेरिका ने कई महीनों तक भारत को रूस से तेल खरीदने से रोकने के लिए धमकाया था। ईरान के साथ दो हफ्ते की जंग के बाद अब व्हाइट हाउस दुनिया और भारत से रूसी क्रूड ऑयल खरीदने के लिए गिड़गिड़ा रहा है।’

सैयद अब्बास अराघची ने कहा, ‘यूरोप ने ईरान के खिलाफ गैरकानूनी जंग का समर्थन किया। उन्होंने यह सोचा कि अमेरिका बदले में रूस के खिलाफ जंग में उनकी मदद करेगा। अब स्थिति उलट गई है।’

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ईरान का इशारा किस ओर है?

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी गई है। इसका कारण वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष से ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट है। उन्होंने बताया कि रूसी तेल पहले से जहाजों पर लदा हुआ है, इसलिए इसे भारत की रिफाइनरियों तक उन्हें पहुंचाया जा सकता है। स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अगर भारत न खरीदे तो ये बैरल चीन को चले जाते। 

ईरान क्या कर रहा है?

ईरान एक तरफ जंग में उलझा है, दूसरी तरफ 2 LPG जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की इजाजत दी है। सऊदी से खरीदे गए तेल से भरा एक टैंकर भी भारत पहुंचने वाला है। अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर हमला बोल रहे हैं। दुनियाभर में तेल की कीमतें बढ़ गईं हैं। 

बिजली के नियमों में बड़े बदलाव, आप पर क्या असर पड़ेगा?


भारत सरकार ने बिजली प्रोडक्शन को लेकर नियमों में संशोधन किया है, जिससे कैप्टिव पावर प्लांट्स से जुड़े 3 नियमों में बदलाव किया गया है। यह विद्युत अधिनियम 2003 का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। कैप्टिव पावर प्लांट्स वे होते हैं जिनमें कोई कंपनी अपनी जरूरत के हिसाब से बिजली का उत्पादन करती है।इन्हीं कैप्टिव पावर प्लांट्स के नियमों में बदलाव लाया गया है। इस बदलाव का मकसद साफ है कि उद्योगों के लिए अपनी खुद की बिजली पैदा करने की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जा सके। संशोधित नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे।


विद्युत मंत्रालय ने 14 मार्च को संशोधित नियमों के बारे में अहम बातें बताई हैं। मंत्रालय ने कहा है कि इन नियमों को कई लोगों से सलाह लेने के बाद संशोधित किया गया है। साथ ही मंत्रालय ने बताया कि पहले कैप्टिव पावर प्लांट्स से जुड़े नियमों में अस्पष्टता थी, जिसे दूर करने के लिए नियमों में बदलाव लाया गया है। अब सवाल उठता है कि कैप्टिव पावर प्लांट के नियमों में क्या स्पष्टता लाई गई है।

 

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बिजली के नियम अब आसान

संशोधित नियमों के तहत कंपनियां अपनी जरूरत के हिसाब से बिजली ले सकेंगी। बस उन्हें मालिकाना हक और खपत की कानूनी शर्तों के हिसाब से पूरा करना होगा। विद्युत मंत्रालय ने साफ तौर पर कहा है कि भारतीय उद्योग अब टिकाऊ विकास और लागत कम करने के लिए सौर या पवन ऊर्जा जैसे सस्ते स्रोतों की ओर बढ़ रहा है। इसी लिए कैप्टिव बिजली उत्पादन के लिए एक लचीला और भरोसेमंद नियम होना बेहद जरूरी था। सरल नियमों से 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी।

कैप्टिव पावर प्लांट के लिए नई गाइडलाइन

कैप्टिव प्लांट वह है, जो कई उद्योग कंपनियां अपनी बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए लगाती हैं। नए नियम इन्हीं पर केंद्रित हैं। संशोधित नियमों के अनुसार अब कंपनियों की सहायक कंपनियां और होल्डिंग कंपनियों को भी एक ही कैप्टिव यूजर माना जाएगा। इससे कॉर्पोरेट समूहों के लिए मिलकर बिजली प्लांट लगाना आसान हो जाएगा। इसके अलावा अगर कई कंपनियां मिलकर एक प्लांट लगाती हैं, तो किसी एक कंपनी के तय सीमा से अधिक या कम बिजली इस्तेमाल करने पर पूरे प्लांट का कैप्टिव स्टेटस रद्द नहीं होगा।

 

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सरचार्ज से राहत

संशोधित नियमों के अनुसार जब तक किसी प्लांट की वेरिफिकेशन पूरी नहीं हो जाती, तब तक कंपनियों पर सरचार्ज यानी अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इससे उद्योगों पर तत्काल वित्तीय बोझ कम होगा और वे अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।

मोटापा कम करने में इंटरमिटेंट फास्टिंग ज्यादा फायदेमंद नहीं, स्टडी में दावा


वजन घटाने के लिए लोग तरह-तरह के फिटनेस रूटीन को फॉलो करते हैं। पिछले कुछ समय में इंटरमिटेंट फास्टिंग का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। लोगों को लगता है अगर आप 15 से 16 घंंटे तक भूखे रहते हैं तो वजन तेदी से घटता है। हाल में एक स्टडी हुई जिसमें कहा गया कि यह वजन घटाने के मामले में पारंपरिक आहार सलाह से अधिक प्रभावी नहीं है। यह निष्कर्ष कोक्रेन कोलाबोरेशन द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आया है।

 

इस समीक्षा में 2016 से 2024 के बीच उत्तरी अमेरिका, यूरोप, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका में प्रकाशित 22 अध्ययनों का विश्लेषण किया गया। ये अध्ययन 1,995 वयस्कों पर किये गये। सभी प्रतिभागी अधिक वजन वाले थे। इन अध्ययनों में छह से 12 महीने तक, रुक-रुक कर किए जाने वाले उपवास के प्रभाव को परखा गया। अध्ययन में अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त वयस्कों के परिणामों की तुलना की गई।

 

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स्टडी में क्या पाया गया?

प्रतिभागियों को या तो मानक आहार संबंधी सलाह दी गई। उन्होंने अंतराल उपवास अपनाया या फिर उनके मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया/प्रतीक्षा सूची में रखा गया।शोधकर्ताओं ने पाया कि ऊर्जा-सीमित आहार अपनाने वाले और रुक-रुक कर उपवास करने वाले लोगों में वजन घटाने का स्तर लगभग समान रहा। 21 अध्ययनों (1,713 प्रतिभागियों) के विश्लेषण में दोनों समूहों में 10 प्रतिशत वजन घटने से लेकर एक प्रतिशत वजन बढ़ने तक के परिणाम दर्ज किए गए। आहार संबंधी सलाह में कैलोरी कम करना, फल-सब्जियां और साबुत अनाज पर आधारित भोजन या अन्य आहार योजनाएं शामिल थीं। छह अध्ययनों (448 प्रतिभागियों) में रुक-रुक कर किए जाने वाले उपवास की तुलना कोई हस्तक्षेप नहीं समूह से की गई। अंतराल उपवास समूह में औसतन प्रतिभागियों का लगभग 5% वजन घटा जबकि नियंत्रण समूह में लगभग 2% वजन की कमी देखी गई। 

क्या होता है इंटरमिटेंट फास्टिंग?

शोध मानकों के अनुसार 3% का अंतर चिकित्सकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं माना जाता। इसलिए लेखकों ने निष्कर्ष निकाला कि रुक-रुक कर किया जाने वाला उपवास वजन घटाने में ‘कुछ भी न करने’ से खास बेहतर साबित नहीं हुआ। समीक्षा में जीवन-गुणवत्ता पर भी अंतराल वाले उपवास के असर का आकलन किया गया, लेकिन उपलब्ध सीमित अध्ययनों के आधार पर इसका प्रभाव बहुत कम पाया गया। रुक-रुक कर किया जाने वाला उपवास वजन प्रबंधन की एक रणनीति है। यह उपवास एक ऐसी आहार पद्धति है, जिसमें कुछ निश्चित घंटों या दिनों में भोजन करने और उपवास रखने का एक क्रम चलता है। यह वजन घटाने और मेटाबोलिज्म को सुधारने के लिए बहुत लोकप्रिय है। इसमें क्या खाना है, इसके बजाय कब खाना है, इस पर ध्यान दिया जाता है।

 

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विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि उपलब्ध अध्ययनों की संख्या और गुणवत्ता सीमित है। कोई हस्तक्षेप नहीं तुलना वाले केवल छह अध्ययन थे और उनमें भी तरीकों में विविधता थी। साथ ही, समीक्षा केवल 12 महीने तक की अवधि के अध्ययनों पर आधारित थी। दीर्घकालिक प्रभावों, विशेषकर वजन बनाए रखने में इसकी भूमिका, पर और शोध की जरूरत बताई गई है।हालांकि कुछ अध्ययनों में अंतराल उपवास से रक्तचाप में कमी, मेटाबोलिक सिंड्रोम के जोखिम में कमी और चयापचय सुधार जैसे संभावित लाभों के संकेत मिले हैं। समीक्षा का निष्कर्ष है कि अंतराल उपवास कुछ लोगों के लिए व्यवहारिक विकल्प हो सकता है, लेकिन इसे पारंपरिक आहार से बेहतर मानने के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।

 

वर्तमान साक्ष्यों के अनुसार अगर कोई व्यक्ति अंतराल उपवास अपना रहा है या अपनाने पर विचार कर रहा है तो यह वजन प्रबंधन का सुरक्षित और प्रभावी तरीका हो सकता है। हालांकि किसी भी वजन घटाने की रणनीति के सफल होने के लिए उसका व्यक्तिगत पसंद और जीवनशैली के अनुरूप होना जरूरी है। किसी भी नए आहार की शुरुआत से पहले विशेषकर यदि कोई अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या हो, तो स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करना उचित है।

वैलेंटाइन डे पर ‘नंबर 5’ चमकाएगा इन राशियों की किस्मत, पढ़ें अपना राशिफल


वैलेंटाइन डे पर सितारों की चाल, आज ‘नंबर 5’ चमकाएगा इन राशियों की किस्मत

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वैलेंटाइन डे यानी 14 फरवरी को कई ग्रहों पर कृपा बरस रही है। फाल्गुन मास की द्वादशी तिथि और शनिवार का दिन होने के साथ-साथ आज का मूलांक 5 है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मूलांक 5 का स्वामी बुध होता है, जो बुद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक है। आज चंद्रमा भी धनु राशि में बैठे हैं, जिससे लोगों में कुछ नया करने का जज्बा देखने को मिलेगा।

 

यह दिन उन लोगों के लिए बेहतरीन साबित होने वाला है जो अपने रिश्तों में नयापन लाना चाहते हैं या किसी नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने की सोच रहे हैं। शनिवार के अनुशासन और मूलांक 5 की चंचलता का यह मेल आज आपके व्यक्तित्व में एक अलग ही निखार लाएगा। आइए जानते हैं, आपकी राशि के हिसाब से आज का दिन आपके लिए क्या खास लेकर आया है। 

 

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जानें कैसा रहेगा आपकी राशि का हाल?

मेष: आज का दिन जोश से भरा है। अगर किसी से दिल की बात कहनी है, तो हिचकिचाएं नहीं। बस ध्यान रखें कि जल्दबाजी में कोई ऐसा फैसला न लें जिससे विवाद हो।

 

वृषभ: आपके लिए आज का दिन काफी रोमांटिक रहने वाला है। इन्वेस्टमेंट के लिए भी समय अच्छा है लेकिन फिजूलखर्ची से बचें। पुराने झगड़ों को भूलकर आगे बढ़ें।

 

मिथुन: अपनी बातों से आप आज किसी का भी दिल जीत सकते हैं। दोस्तों और पार्टनर के साथ छोटी यात्रा का प्लान बन सकता है। अफवाहों पर ध्यान न दें।

 

कर्क: आज घर-परिवार और अपनों के साथ वक्त बिताने का दिन है। भावनाओं में बहकर कोई बड़ा फैसला न लें, खुद को शांत रखने के लिए एक्सरसाइज का सहारा लें।

 

सिंह: आज आप महफिल की जान बनेंगे। पार्टनर को सरप्राइज देने के लिए दिन बढ़िया है। बस अपने व्यवहार में घमंड को जगह न दें।

 

कन्या: आज अपनी सेहत और डेली रूटीन पर ध्यान दें। पार्टनर के साथ शांति से वक्त बिताएं। छोटी-छोटी बातों पर तनाव लेने से बचना ही समझदारी है।

 

तुला: रिश्तों में तालमेल बिठाने का हुनर आज आपके काम आएगा। पार्टनर को कोई खास तोहफा दें। कंफ्यूजन की स्थिति से बचें और खुद पर भरोसा रखें।

 

वृश्चिक: आज का दिन रिसर्च और गहराई से सोचने का है। रिश्तों में शक को जगह न दें। यात्रा के योग बन रहे हैं जो आपके लिए फायदेमंद रहेंगे।

 

धनु: चंद्रमा आपकी ही राशि में है, इसलिए आज आप काफी एनर्जेटिक महसूस करेंगे। नए अवसरों को हाथ से न जाने दें लेकिन जोश में आकर कोई गलत वादा न करें।

 

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मकर: करियर के लिहाज से आज का दिन काफी मजबूत है। मेहनत का फल मिलेगा। खुद को अकेला न समझें, परिवार का साथ आपकी हिम्मत बढ़ाएगा।

 

कुंभ: आज कुछ नया सोचने और करने का दिन है। दोस्तों के साथ पार्टी का आनंद लें। व्यवहार में जिद्दीपन न लाएं और अपनी सेहत का ख्याल रखें।

 

मीन: आपकी इमेजीनेशन आज सातवें आसमान पर होगी। पार्टनर के साथ अच्छा समय बीतेगा। भावनाओं में बहने के बजाय हकीकत को समझकर फैसले लें।

 

डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जानकारी के लिए ज्योतिषि से संपर्क करें।

पहले NSA लगाया, अब रिहाई, सोनम वांगचुक पर सरकार ने फैसला क्यों बदला?


केंद्र सरकार ने लद्दाख के मशहूर क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हुई हिरासत को तुरंत रद्द कर दिया है। सरकार ने यह आदेश 14 मार्च को जारी किया है। सरकार का कहना है कि इससे लद्दाख में शांति बहाल करने और बातचीत का माहौल बनाने में मदद मिलेगी।

सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को जोधपुर सेंट्रल जेल में नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत बंद किया गया था। यह फैसला लेह शहर में 24 सितंबर 2025 को हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद लिया गया था। इन प्रदर्शनों में 4 लोगों की मौत हो गई थी। 160 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। 

सरकार का आरोप था कि सोनम वांगचुक ने लोगों को भड़काया और अशांति फैलाई थी। सोनम वांगचुक को लद्दाख हिंसा का सबसे बड़ा विलेन बताया जा रहा था। सोनम वांगचुक को ही लद्दाख हिंसा का सूत्रधार तक बता दिया गया था। 

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सरकार ने रिहाई का क्या कारण बताया?

गृह मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर यह बयान जारी किया है। सरकार का कहना है कि सोनम वांगचुक की हिरासत से लद्दाख में बंद, विरोध और अशांति का माहौल बना रहा, जिससे छात्र, नौकरी चाहने वाले, व्यापारी, टूर ऑपरेटर, पर्यटक और पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है।
 
सरकार ने कहा कि सोनम वांगचुक ने NSA की अधिकतम 12 महीने की हिरासत का लगभग आधा समय पूरा कर लिया है। अब शांति, स्थिरता और सभी पक्षों के साथ सार्थक बातचीत के लिए उनकी रिहाई जरूरी है। सरकार हाई-पावर्ड कमिटी जैसे प्लेटफॉर्म पर लद्दाख की मांगों को सुलझाने के लिए तैयार है।

त्सेरिंग दोरजे लकरूक, अध्यक्ष, लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन:-
मेरा मानना ​​है कि यह लद्दाख के लोगों के लिए अच्छी खबर है। दूसरी बात, यह सोनम वांगचुक की एक निजी जीत भी है। हम शुरू से ही यह कहते आ रहे हैं कि उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद थे। सरकार सुप्रीम कोर्ट में इन आरोपों को साबित करने में नाकाम रही।

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लद्दाख में क्या मांगें चल रही हैं?

लद्दाख को 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग करके केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। तब से लोग कई मांगें कर रहे हैं। लेह एपेक्स बॉडी और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के जरिए लद्दाख के लोग अपनी मांगे रख रहे हैं। ये मांगें 2024 से तेज हुईं हैं, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में सरकार मिल गई है। लद्दाख में अभी भी केंद्र का ही नियंत्रण है। आइए जानते हैं कि लद्दाख के लोग क्या चाह रहे हैं- 

  • लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले
  • भारतीय संविधान की छठी अनुसूची लागू हो
  • आदिवासी इलाके की संस्कृति और जमीन की सुरक्षा हो  
  • लद्दाख के लिए अलग लोक सेवा आयोग बने
  • लद्दाख को एक की बजाय दो लोकसभा सीटें मिलें

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सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला 

वांगचुक की पत्नी डॉ गीतांजलि अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि हिरासत गैरकानूनी है और पुरानी FIR, वीडियो के आधार पर की गई है। सुप्रीम कोर्ट 17 मार्च को फैसला सुनाने वाला था, लेकिन सरकार ने इससे तीन दिन पहले ही रिहाई का फैसला ले लिया।

क्या कह रहे हैं लोग?

करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के नेता सज्जाद कारगिली ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा चाहिए, यह मांग जारी रहेगी। उन्होंने डेल्डन नामग्याल और स्मानला डोरजे की रिहाई की भी मांग की है। वह चाहते हैं कि 24 सितंबर के मामलों में सभी आरोप अब हटा लिए जाएं।

 

 

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NSA क्या है?

नेशनल सिक्योरिटी एक्ट, 1980 एक सख्त कानून है। इसके तहत बिना ट्रायल के किसी को 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है। अगर सरकार को लगे कि कोई देश की सुरक्षा, रक्षा या विदेश संबंधों के लिए खतरा है। यह आम गिरफ्तारी से अलग है, क्योंकि इसमें चार्ज या कोर्ट ट्रायल की जरूरत नहीं पड़ती। सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर देशभर में हंगामा हुआ था। वह पर्यावरण कार्यकर्ता हैं, जो लद्दाख में कई कल्याणकारी प्रोजेक्ट चला रहे हैं। 

5 राज्यों के लिए विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान, 4 मई को आएंगे नतीजे


चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी के लिए चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है। इन राज्यों के विधानसभा का कार्यकाल मई और जून की कई तारीखों को समाप्त हो रहा है। नियम के मुताबिक चुनाव आयोग को कार्यकाल खत्म होने के पहले ही चुनाव कराना होता है।


मुख्य चुनाव अधिकारी ज्ञानेश कुमार के मुताबिक इन तारीखों को पांचों राज्यों के लिए इन तारीखों को चुनाव करवाए जाएंगे-


पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 शुरू होंगे – 23 अप्रैल, 29 अप्रैल

तमिलनाडु चुनाव 2026 शुरू होंगे – 23 अप्रैल

केरल चुनाव 2026 शुरू होंगे – 9 अप्रैल

असम चुनाव 2026 शुरू होंगे – 9 अप्रैल

पुडुचेरी चुनाव 2026 शुरू होंगे – 9 अप्रैल

सभी पांच चुनावों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

 

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बुधवार को हुई थी मीटिंग

EC की यह घोषणा इस हफ़्ते की शुरुआत में 11 मार्च (बुधवार) को पोल बॉडी की मीटिंग के बाद आई है। इसमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव शेड्यूल और फेज़-वाइज़ पोलिंग प्लान को फ़ाइनल किया गया था।

 

इन राज्यों में वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) पूरा हो चुका है, फ़ाइनल वोटर रोल पहले ही पब्लिश हो चुके हैं, हालांकि बंगाल में सप्लीमेंट्री लिस्ट हो सकती हैं।

रिव्यू का काम पूरा

EC के सीनियर अधिकारी पिछले मंगलवार को कई राज्यों में अपनी तैयारियों का रिव्यू पूरा करके दिल्ली लौटे थे। एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार और इलेक्शन कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बुधवार को ‘राज्य चुनाव मशीनरी और सेंट्रल ऑब्जर्वर द्वारा जमा की गई फील्ड रिपोर्ट का आकलन करने’ के लिए मुलाकात की, जिसके बाद पोलिंग के फेज पर आखिरी फैसला लिया गया।

 

EC अधिकारियों ने देश भर में रिव्यू के आखिरी हिस्से में पश्चिम बंगाल का दो दिन का दौरा किया, इस दौरान उन्होंने सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव और पुलिस अधिकारियों, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों के साथ मीटिंग की।

 

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उपचुनाव की भी तारीखें घोषित

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के अलावा चुनाव आयोग ने 6 राज्यों के लिए उपचुनावों की भी घोषणा की है-

 

गोवा, कर्नाटक, नागालैंड, त्रिपुरा

 

• नोटिफिकेशन: 16 मार्च 2026

 

• नॉमिनेशन की आखिरी तारीख: 23 मार्च 2026

 

• स्क्रूटनी: 24 मार्च 2026

 

• नाम वापस लेने की तारीख: 26 मार्च 2026

 

• पोलिंग: 9 अप्रैल 2026

 

गुजरात और महाराष्ट्र

 

• नोटिफिकेशन: 30 मार्च 2026

 

• नॉमिनेशन की आखिरी तारीख: 6 अप्रैल 2026

 

• स्क्रूटनी: 7 अप्रैल 2026

 

• नाम वापस लेने की तारीख: 9 अप्रैल 2026

 

• पोलिंग: 23 अप्रैल 2026

 

सभी उपचुनावों के लिए काउंटिंग

 

• 4 मई 2026

कम फेज में चुनाव क्यों?

भारत के चुनाव आयोग ने रविवार को घोषणा की कि पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 दो फेज़ में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे, जबकि 2021 में आठ फेज़ में चुनाव हुए थे। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के वोटों की गिनती 4 मई को असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु के साथ होगी।

 

यह पूछे जाने पर कि पश्चिम बंगाल में फेज़ की संख्या आठ से घटकर सिर्फ़ दो क्यों हो गई है, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग ने इस पर विस्तार से विचार-विमर्श किया था और फेज़ की संख्या कम करना और इसे इतना कम करना ज़रूरी समझा ताकि यह सबके लिए आसान हो।

2 लाख से ज्यादा पोलिंग स्टेशन

ज्ञानेश कुमार के मुताबिक 2 लाख 19 हजार पोलिंग स्टेशनों पर चुनाव कराए जाएंगे। इस दौरान करीब 25 लाख चुनाव अधिकारी और कर्मचारी ड्यूटी पर होंगे। ज्ञानेश कुमार ने कहा कि हर पोलिंग स्टेशन पर 750-900 मतदाता होंगे।

ज्यादा पानी पीना शरीर के लिए जानलेवा, जानिए कितनी मात्रा में पानी पीना सही?


ज्यादातर लोगों को लगता है कि पानी पीना सबसे आसान काम है। जब आपको प्यास लगती हैं तब पानी पीते हैं और जब नहीं लगती है तो नहीं पीते हैं लेकिन ये आदत हमारी किडनी के लिए नुकसानदायक है। किडनी टॉक्सिन को रिलीज करता है, इलेक्ट्रोलाइट्स को बैलेंस करता है और शरीर में तरल पदार्थ को नियंत्रित करने का काम करता है। जब आप पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते हैं तो किडनी में स्टोन, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन और किडनी की गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। 

 

कुछ लोग दिन भर कॉफी, चाय और जूस पीते हैं। कैफीन या शुगर वाली ड्रिंक शरीर से पानी को सोखने का काम करते हैं जिससे किडनी को शरीर में पानी बनाए रखने में दिक्कत होती है। एक आम गलतफहमी है कि पानी तभी पीना चाहिए जब आपको प्यास लगे। आपको प्यास तब लगती है जब शरीर पूरी तरह से डिहाइड्रेट हो चुका होता है। इस कारण किडनी पर दबाव पड़ता है। 

 

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अधिक पानी पीने से होती है ये समस्या

ज्यादातर लोगों को कम पानी पीने के नुकसान पता है। डिहाइड्रेशन से बचने के लिए कुछ लोग बहुत अधिक पानी पीते हैं। अधिक पानी पीने के कारण Hyponatremia की समस्या का खतरा बढ़ जाता है। Hyponatremia एक ऐसी स्थिति है जब बल्ड में सोडियम का लेवल कम हो जाता है। इस वजह से कोशिकाओं में सूजन आ जाती है। इसका प्रभाव आपके लिवर और किडनी पर पड़ता है। गंभीर स्थिति में दिमाग में पानी भर जाता है, व्यक्ति कोमा में चला जाता है।

 

अधिक पानी पीने से टॉक्सिन बाहर निकलते हैं

 

कई लोगों को लगता है कि अधिक पानी पीने की वजह से टॉक्सिन आसानी से बाहर निकल जाते हैं। अधिक पानी पीने की वजह से खून में सोडियम घूलता है जिसकी वजह से  हाइपोनेट्रमिया का खतरा बढ़ जाता है। 

 

प्यास लगने का मतलब आप ठीक है

 

आप पानी तब पीते हैं जब प्यास लगती है तो यह गलत तरीका है। हमें प्यास तब लगती है जब किडनी पर दबाव बढ़ता है। इस कारण से पेशाब का रंग पीला होता है। इसके अलावा किडनी में स्टोन, यूटीआई समेत अन्य परेशानियां भी हो सकती है। 

 

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कितनी मात्रा में पानी पीना चाहिए?

एक महिला को दिन भर में 2.2 लीटर और पुरुष को 3 लीटर पानी पीना चाहिए। किडनी या अन्य किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को डॉक्टर की सलाह से पानी पीना चाहिए।

क्या है शिव के डमरू मंत्र का महत्व? जानें फल और इतिहास


हिंदू धर्म में भगवान शिव के स्वरूप के साथ जुड़ी हर वस्तु का अपना एक गहरा आध्यात्मिक रहस्य है। ऐसा कहा जाता है कि उनके त्रिशूल पर बंधा ‘डमरू’ केवल एक वाद्य यंत्र नहीं बल्कि सृष्टि के सृजन और विनाश की धुन है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब सृष्टि की रचना हुई थी, तब संसार में आवाज तो थी लेकिन उसमें कोई लय या ताल नहीं था। देवी सरस्वती के प्रकट होने के बाद भगवान शिव ने 14 बार डमरू बजाया, जिससे निकले नाद ने दुनिया को संगीत, व्याकरण और ‘माहेश्वर सूत्र’ का उपहार दिया।

 

यह डमरू नाद साधना का प्रतीक है जिससे ‘ॐ’ की उत्पत्ति हुई। धार्मिक जानकारों का मानना है कि शिव जब आनंदित होकर तांडव करते हैं, तो डमरू की थाप से प्रकृति में नई ऊर्जा का संचार होता है। वहीं, आध्यात्मिक नजरिए से डमरू का ऊपरी और निचला हिस्सा आकाश और पाताल को जोड़ता है, जबकि बीच का हिस्सा वह बिंदु है जहां से जीवन की शुरुआत होती है।

 

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‘माहेश्वर सूत्र’

माहेश्वर सूत्र डमरू से निकला 14 मंत्र का सूत्र है। यह माना जाता है कि डमरू से निकले गूंज से नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं। भगवान शिव के डमरू से जो 14 ध्वनियां निकली थीं, उन्हें ही ‘माहेश्वर सूत्र’ कहा जाता है। ये मंत्र इस प्रकार हैं: अइउण्, ऋऌक्, एओङ्, ऐऔच्, हयवरट्, लण्, ञमङणनम्, झभञ्, घढधष्, जबगडदश्, खफछठथचटतव्, कपय्, शषसर्, हल्।

डमरू मंत्र के लाभ

शास्त्रों के अनुसार, इन सूत्रों का उपयोग प्राचीन काल में इलाज के लिए भी किया जाता था। इसके नियमित जाप से कई तरह के फायदे मिलते हैं। माना जाता है कि शिव पूजा के बाद इन 14 सूत्रों का 11 बार जाप करने से पुराने बीमारियों में सुधार होता है। लोगों का तो यह भी मानना है कि जहरीले जीवों के असर को कम करने के लिए भी इसका निरंतर जाप प्रभावी माना गया है।

 

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आदि शंकराचार्य अपने शिष्यों का ध्यान केंद्रित करने के लिए डमरू का उपयोग करते थे। आज भी यह तनाव दूर करने और फोकस बढ़ाने का बेहतरीन जरिया है।

 

लोगों को ऐसा विश्वास है कि डमरू की ध्वनि घर के वास्तु दोष और बुरी नजर के प्रभाव को खत्म करती है।  छात्रों के लिए इन मंत्रों का जाप याददाश्त और सीखने की क्षमता बढ़ाने वाला माना जाता है।