Home Blog Page 36

गर्मी से राहत, किसानों के लिए आफत, बारिश, तेज आंधी और ओले, जानिए मौसम का हाल

देशभर में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। मार्च के महीने में ही कई राज्यों में लू चलने से लोग परेशान हो गए थे लेकिन अब बदलते मौसम के कारण लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से उत्तर, पूर्व और मध्य भारत के कई राज्यों में बारिश, तेज हवाएं, गरज-चमक और ओले गिरने की संभावना बनी हुई है। देशभर में पिछले 48 घंटों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है, जिससे अधिकांश राज्यों के न्यूनतम और अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। अगले 48 घंटों में भी मौसम इसी तरह रह सकता है। 

 

दिल्ली-एनसीआर में पिछले 48 घंटों में बादलों की आवाजाही और हल्की बूंदाबांदी के बाद लोगों को गर्मी और प्रदूषण से राहत मिली है। न्यूनतम और अधिकतम तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है जिससे मौसम काफी सुहावना है। मौसम विभाग के अनुसार, आज भी दिल्ली में बादलों की आवाजाही जारी रहेगी। आज दिल्ली में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने की संभावना बै। मौसम में इस बदलाव के कारण एयर क्वालिटी में सुधार देखने को मिल रहा है। सीपीसीबी के अनुसार, आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर कम होकर 100-150 के बीच रह सकता है। 

 

यह भी पढ़ें: कांग्रेस ने ओडिशा में सोफिया फिरदौस सहित तीन विधायकों को पार्टी से निकाला

आज का मौसम 

 

हिमाचल-कश्मीर में बारिश-बर्फबारी

मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी पश्चिम विक्षोभ के सक्रिय रहने की संभावना जताई है। जम्मू-कश्मीर में अगले कई दिनों तक बारिश और बर्फबारी का क्रम जारी रहेगा, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी। यानी कश्मीर वालों को अभी कुछ दिन और ठंड का सामना करना होगा। हिमाचल प्रदेश के चंबा, मंडी, केलांग, कांगड़ा, कुल्लू, शिमला, हमीरपुर, सोलन, ऊना और सिरमौर समेत करीब 10 जिलों में आज मौसम खराब रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने इन जिलों में 40 से 50 किलोमीट प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने और बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। हिमाचल में बढ़ते तापमान से राहत जरूर मिलेगी और रात और सुबह के समय सर्दी बढ़ेगी। 

यूपी-बिहार में कैसा रहेगा मौसम?

उत्तर भारत के अन्य राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश में भी मौसम में बदलाव से गर्मी से राहत मिली है। हालांकि, तेज हवाओं और ओले गिरने से फसलों को नुकसान हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, आज पश्चिम विक्षोभ के सक्रिय होने का असर उत्तर प्रदेश में भी देखने को मिलेगा। आज भी उत्तर प्रदेश में आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है, जिसने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने कुछ जिलों में तो येलो अलर्ट भी जारी कर दिया है। 

ओले

 

वहीं, बिहार की बात करें तो बिहार में भी मौसम ने करवट ली है। मौसम में बदलाव से गर्मी से राहत तो मिली है लेकिन ओले गिरने से फसलों के नुकसान की संभावना बनी हुई है। पटना, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, रोहतास, गया, औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल गोपालगंज, सिवान, सारण, वैशाली, ईस्ट चंपारण, वेस्ट चंपारण, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, अररिया, सुपौल, किशनगंज, कटिहार, मधेपुरा, पूर्णिया, सहरसा, भागलपुर, खगड़िया, बांका, मुंगेर, बेगूसराय, लखीसराय, शेखपुरा, नवादा और जमुई में आंधी-बारिश और बिजली गिरने का येलो अलर्ट जारी किया गया है। 

इन राज्यों में भी होगी बारिश

मौसम विभाग ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और राजस्थान के लिए आने वाले कुछ दिनों के लिए हल्की बारिश की संभावना जताई है। उत्तराखंड में 19 और 20 मार्च को,हिमाचल प्रदेश में 18 और 19 मार्च को, पंजाब-हरियाणा, चंडीगढ़ और राजस्थान में 19 और 20 मार्च को कुछ स्थानों बारिश के साथ ओले गिरने की संभावना जताई है। 

 

यह भी पढ़ें: महामारी के बाद बूम…फिर ब्रेक, विदेशी टूरिस्टों में भारी गिरावट, क्या हैं आंकड़े?

अन्य राज्यों का मौसम

 

अन्य राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र ,गुजरात , कोंकण और गोवा के लिए हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया है। विदर्भ में और छत्तीसगढ़ में मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। इन दोनों जगहों पर ओले गिरने की संभावना है। इसके अलावा दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में भी बारिश की संभावना जताई गई है। कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु में मौसम की गतिविधियां आज भी जारी रहेंगीं। वहीं, पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश होने की संभावना है। 

देशभर में शुरू होगा HPV वैक्सीनेशन, कहां मिलेगी यह सुविधा?


हर साल कैंसर से लाखों लोगों की मौत होती है। महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का खतरा सबसे आम है। यह महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। भारत की केंद्र सरकार ने महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए टीकाकरण अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। इस अभियान के तहत देशभर में 14 साल या उससे अधिक उम्र की लड़कियों को ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) की वैक्सीन लगाई जाएगी।

 

इस अभियान में लड़कियों को Gardasil का इंजेक्शन फ्री में लगाया जाएगा। यह वैक्सीन एचपीवी के खतरे से बचाता है। सरकार स्वैच्छिक टीकाकरण कार्यक्रम शुरू करने जा रही है जिसे पूरे देश में लागू किया जाएगा। यह पूरी तरह से मुफ्त होगा। इस कार्यक्रम के जरिए हर वर्ग की महिला को लाभ मिलेगा।

 

यह भी पढ़ें: डेस्क जॉब वाले हो जाएं सावधान, घंटों एक जगह बैठने से फैटी लिवर का खतरा बढ़ा

एचपीवी वैक्सीन क्या करती है?

इस कार्यक्रम के तहत जो एचपीवी वैक्सीन दी जाएगी। वह 4 प्रकार के एचपीवी वायरस से बचाती है।

 

टाइप 16 और 18- ये ज्यादातर सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं।
टाइप 6 और 11- ये अन्य प्रकार के वायरस के लिए जिम्मेदार होते हैं।

 

इस वैक्सीन की एक ही डोज बहुत कारगर है जो आपको लंबे समय तक सर्वाइकल कैंसर के जोखिम से बचाने का काम करती है।

कहां लगेगी वैक्सीन?

यह वैक्सीव केवल सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर दी जाएगी। इसमें आयुष्मान आरोग्य मंदिर (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), जिला अस्पताल, सरकारी मेडिकल कॉलेज शामिल है। इन केंद्रो पर प्रशिक्षित डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ की देखरेख में टीकाकरण होगा। स्वस्थ नारी सशक्त अभियान भारत में महिलां और बच्चों के लिए अब तक का सबसे बड़ा स्वास्थ्य अभियान बताया गया है।  इस अभियान को स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण मंत्रालय और महिला एवं विकास मंत्रालय ने मिलकर चलाया है। इस अभियान के तहत 17 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच पूरे देश में लाखों स्वास्थ्य शिविर केंद्र लगाए गए।

 

यह भी पढ़ें: शहर में अकेला महसूस करते हैं आप? इन ऐप्स पर पैसे देकर कर सकते हैं दोस्ती

क्या होता है सर्वाइकल कैंसर?

सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के यूटरस निचले हिस्से यानी सर्विक्स में होता है। यह हिस्सा यूटरस को योनि से जोड़ता है। यह कैंसर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस संक्रमण की वजह से होता है। यह वायरस इंटरकोर्स के जरिए फैलता है।

सर्वाइक्ल कैंसर के लक्षण

  • इंटरकोर्स के समय ब्लीडिंग आना
  • व्हाइट डिस्चार्ज से बदबू आना
  • कमर, पेट और पैल्विक एरिया में दर्द
  • शरीर में खून की कमी
  • थकावट।

कैसे करें बचाव?

  • एचपीवी वैक्सीन लगावएं- यह वैक्सीन 9 से 26 साल की उम्र में ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
  • इंटरकोर्स करते समय कंडोम का इस्तेमाल करें।
  • स्मोकिंग से बचें।
  • प्राइवेट पार्ट को स्वच्छ रखें।

रोजा के नियम, तौबा-जकात की अहमियत और सेहत टिप्स जानें


चांद दिखने के साथ ही दुनिया भर में रमजान का पाक महीना शुरू हो गया है। इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना रमजान मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। यह सिर्फ भूख और प्यास सहने का नाम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सब्र, परहेजगारी (तकवा ), तौबा और इंसानियत की राह पर चलने का महीना है। सुबह सहरी से लेकर शाम इफ्तार तक रोजा रखकर मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं और अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस महीने में अल्लाह की रहमत अपने चरम पर होती है और नेकियों का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है। 

 

यह महीना इंसान को सोचने, खुद को सुधारने और रिश्तों को मजबूत करने की सीख देता है। रोजा सिर्फ पेट का नहीं, बल्कि नीयत, नजर और व्यवहार का भी होता है। माना जाता है कि रमजान में की गई इबादत और नेकियां कई गुना बढ़ा दी जाती हैं, इसलिए लोग इस दौरान ज्यादा से ज्यादा दुआ, कुरान पढ़ते हैं, खैरात पर ध्यान देते हैं, ताकि अल्लाह की रहमत हासिल कर सकें।

किन्हें छूट, कब टूटता है रोजा?

रमजान के दौरान हर स्वस्थ और बालिग मुसलमान पर रोजा फर्ज है। हालांकि इस्लाम में इंसानी सेहत और मजबूरी को अहमियत दी गई है। बीमार, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, दूध पिलाने वाली माताएं, मासिक धर्म से गुजर रही महिलाएं और सफर में रहने वाले लोगों को रोजा रखने से छूट दी गई है। ऐसी स्थिति में वे बाद में छूटे हुए रोजों की कजा रख सकते हैं या जरूरत पड़ने पर फिदयाह ( रमजान का रोजा न रखने पर दिया जाने वाला दान ) अदा कर सकते हैं।

 

यह भी पढ़ें: पांच वक्त की होती है नमाज, फज्र, ज़ुहर, अस्र, मग़रिब और ईशा के क्या अर्थ हैं?

 

धार्मिक जानकारों के अनुसार रोजा केवल खाना-पीना छोड़ने तक सीमित नहीं है। यह आंख, कान और जुबान की हिफाजत का भी नाम है। झूठ बोलना, गाली देना, चुगली करना या किसी को तकलीफ पहुंचाना रोजे की रूह के खिलाफ माना गया है। इस्लामी विद्वान बताते हैं कि जानबूझकर कुछ खा-पी लेने, खुद से उल्टी करने या यौन संबंध बनाने से रोजा टूट जाता है। वहीं भूल से कुछ खा लेने या अनजाने में उल्टी हो जाने पर रोजा नहीं टूटता है।

 

इंसानियत को इस्लाम में सर्वोच्च स्थान दिया गया है। विद्वानों का कहना है कि यदि किसी की जान बचाने के लिए रक्तदान करना जरूरी हो और रोजा तोड़ना पड़े, तो यह जायज है। बाद में उस रोजे की कजा रखी जा सकती है। रमजान का असली संदेश भी यही है कि इंसान दूसरों के दुख-दर्द को समझे और जरूरतमंद की मदद करे।

रमजान में तौबा और जकात की अहमियत 

रमजान में तौबा और जकात की खास अहमियत होती है। कुरआन की सूरह अज-ज़ुमर (39:53) में कहा गया है कि अल्लाह की रहमत से मायूस न हों, वह सारे गुनाह माफ करने वाला है। वहीं सूरह अल-बकरा (2:110) में नमाज कायम करने और जकात देने का आदेश है। जकात इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है और आर्थिक रूप से सक्षम मुसलमानों पर अनिवार्य है। इसका मकसद समाज में बराबरी और भाईचारे को बढ़ावा देना है। जकात आमतौर पर गरीबों, अनाथों, विधवाओं और जरूरतमंदों को दी जाती है। इसके अलावा सदका भी दिया जाता है, जो स्वेच्छा से किया गया दान होता है।

 

यह भी पढ़ें: चांद न दिखने पर क्या बढ़ जाता है रमजान का महीना?

 

मस्जिदों में तरावीह की नमाज का विशेष आयोजन होता है, जिसमें कुरआन की तिलावत की जाती है। कई लोग पूरे महीने में कुरआन को मुकम्मल पढ़ने का संकल्प लेते हैं। रमजान 29 या 30 दिनों का होता है, जिसका निर्धारण चांद दिखने पर किया जाता है। आखिरी 5 दिन अहम माने जाते हैं, जिनमें शबे-कद्र की रात आती है जिसे हजार महीनों से बेहतर बताया गया है।

रमजान में सेहत का ख्याल

सेहत के लिहाज से भी रमजान में संतुलन जरूरी है। डॉक्टरों के अनुसार इफ्तार की शुरुआत खजूर और पानी से करना फायदेमंद है, क्योंकि यह तुरंत ऊर्जा देता है और शुगर लेवल को संतुलित करता है। तला-भुना और ज्यादा तेल वाला भोजन पेट की समस्या, गैस और डिहाइड्रेशन का कारण बन सकता है। सेहरी में प्रोटीन और फाइबर युक्त आहार जैसे दही, अंडा, दलिया, ओट्स और दाल लेना बेहतर माना जाता है ताकि दिनभर ऊर्जा बनी रहे।

 

यह भी पढ़ें: खाटू श्याम का लक्खी मेला शुरू, मान्यता से महत्व तक, पढ़ें हर सवाल का जवाब

रमजान का संदेश

विशेषज्ञों के अनुसार रमजान आत्मानुशासन की ट्रेनिंग है। यह इंसान को भूख के जरिए गरीबों की तकलीफ समझने, गुस्से पर काबू पाने और समाज के कमजोर वर्गों की मदद करने की सीख देता है। रोजा इंसान के भीतर सब्र और करुणा पैदा करता है। रमजान केवल एक इबादत का नाम नहीं है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का महीना है। यह वह समय है जब इंसान खुद को बेहतर बनाने, गुनाहों से तौबा करने और जरूरतमंदों के साथ खड़े होने का संकल्प लेता है। धार्मिक विद्वानों के मुताबिक, जो व्यक्ति रमजान की असल रूह को समझ लेता है, उसके लिए यह महीना जिंदगी बदल देने वाला साबित हो सकता है।

ईरान पर अकेला पड़ा अमेरिका, NATO और चीन को धमका रहे ट्रंप, नई मुसीबत की आहट?

इजरायल, अमेरिका और ईरान की जंग, दुनिया के मुसीबत बनकर आ रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जहाजों की आवाजाही ईरान ने रोक दी है, जिसकी वजह से कई देशों में तेल और गैस संकट पैदा हो गया है। ईरान के साथ जारी जंग अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलने की बजाय बड़े देश, अमेरिकी नीति से दूरी बना रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप, कई देशों को अपने टैरिफ से नाराज कर चुके हैं, ऐसे में उनके साथ किसी की भी हमदर्दी नहीं है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब नॉर्थ अटलांटिक ट्रिटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) के सहयोगियों को कड़ी चेतावनी दी है। डोनाल्ड ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि अगर NATO के सदस्य देश होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित बनाने में अमेरिका की मदद नहीं करते हैं तो संगठन का भविष्य बहुत बुरा हो सकता है। 

यह भी पढ़ें: ईरान युद्ध से भारत क्या सीख सकता, सस्ते ड्रोन से निपटने का इलाज क्या है?

NATO को क्यों धमकाने लगे ट्रंप?

ईरान ने जंग शुरू होने के बाद से ही इजरायल और अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है। अब वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हुई है। अचानक तेल की कीमतें बेतहाशा बढ़ने लगीं हैं। अब कच्चे तेल की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। 

डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका:-
यह ठीक है कि जो देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से मुनाफा हासिल करते हैं, वे इसे सुरक्षित रखने में मदद करें। अगर कोई जवाब नहीं आता या नकारात्मक जवाब आता है तो NATO का भविष्य बहुत बुरा होगा। अब सहयोगियों को अमेरिका की मदद करनी चाहिए, नहीं तो NATO एकतरफा सड़क बन जाएगा। 

यह भी पढ़ें: बेंजामिन नेतन्याहू को ढूंढकर मार डालेगा ईरान? पीछा करने की ली कसम

 

डोनाल्ड ट्रंप की यह धमकी NATO के भीतर तनाव बढ़ा रही है। संगठन का मकसद सदस्य देशों की रक्षा करना है, न कि किसी सदस्य की ओर से छेड़ी गई जंग में उस देश की मदद करना। अमेरिका की मदद करने से NATO के देश इसी वजह से कतरा रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप फ्रांस और दूसरे यूरोपीय देशों जंगी जहाज भेजे जाने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन कोई भेजने को तैयार नहीं है। अब फारस की खाड़ी में अमेरिका कमजोर पड़ रहा है।

ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। Photo Credit: PTI

NATO का क्या बिगाड़ सकते हैं ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप की इस आक्रामक रणनीति से नई मुसीबत की आहट सुनाई दे रही है। NATO सहयोगी इस दबाव को NATO की एकता के लिए खतरा मान रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की मदद का हवाला देते हुए कहा कि अब सहयोगियों को अमेरिका की मदद करनी चाहिए। अगर NATO में फूट पड़ती है तो अमेरिका के लिए भी यह जोखिम है। 

यह भी पढ़ें: ‘ईरान जलाने चले थे ट्रंप, खुद झुलसे…’, अमेरिका से चूक कहां हुई? इनसाइड स्टोरी

इजरायल के लिए जंग लड़ रहा अमेरिका?

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल के सैन्य लक्ष्य समान हैं। इजरायल ने कहा है कि उसकी कार्रवाई कम से कम तीन सप्ताह और जारी रहेगी। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि युद्ध कुछ हफ्तों में समाप्त हो सकता है। ईरान ने 700 मिसाइल और 3,600 ड्रोन हमलों का दावा किया है। अब इस जंग पर अमेरिका में ही डोनाल्ड ट्रंप का विरोध हो रहा है। 

 

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू। Photo Credit: IDF

चीन को क्यों धमकाने लगे हैं ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप, अब चीन पर दबाव बढ़ाने लगे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से सीधे अपील की कि वह होर्मुज स्ट्रेट में सहयोग करे, क्योंकि चीन अपनी 90 प्रतिशत तेल इसी राह से हासिल करता है। उन्होंने कहा कि वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित शिखर सम्मेलन को टाल सकते हैं, अगर चीन अपना रुख साफ नहीं करता है।

डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका:-
चीन को भी मदद करनी चाहिए। हम स्थिति जानना चाहते हैं, क्योंकि दो सप्ताह लंबा समय है। हम इसे टाल सकते हैं।
 

यह भी पढ़ें: गैस-तेल छोड़िए… एक और संकट आने वाला है; ईरान युद्ध ने बदले समीकरण

अलग पड़ गए हैं डोनाल्ड ट्रंप?

ब्रिटेन, फ्रांस और जापान जैसे देशों ने डोनाल्ड ट्रंप की मांग पर तटस्थ रुख अभी तक अपनाया है। अमेरिका की मदद करने के लिए कोई तैयार नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से भी अपील की है कि वह इस संकट में सहयोग करे, क्योंकि चीन अपनी तेल की जरूरतों के लिए इस रूट पर निर्भर है। डोनाल्ड ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए साक्षात्कार में कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट से जिन देशों को लाभ मिलता है, उन्हें अमेरिका की मदद करनी चाहिए। डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर भी नाराजगी जताई है। उन्होंने दावा किया है कि ब्रिटेन ने तुरंत मदद नहीं की।

NATO देश भी अमेरिका की मदद के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। Photo Credit PTI

यह भी पढ़ें: ‘उम्मीद है चीन, जापान और फ्रांस भेजेंगे जहाज,’ ईरान के आगे बेबस हुए ट्रंप

नया खतरा क्या है?

डोनाल्ड ट्रंप का जैसा रुख है, कोई देश उनकी मदद करने के लिए तैयार नहीं है। वह खीजकर एक बार फिर टैरिफ बढ़ाने पर जोर दे सकते हैं, आर्थिक प्रतिबंध बढ़ा सकते हैं, जिसकी वजह से अमेरिका पर निर्भर देशों में आर्थिक अस्थिरता और बढ़ सकती है। डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले ही पश्चिम एशिया को जंग के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।

खाड़ी के देशों को ईरान तबाह कर रहा है, इजरायल की राजधानी येरुशलम में बम मार रहा है, खाड़ी के तेल ठिकानों को निशाना बना रहा है। कुवैत पर भी ईरान की टेढ़ी नजर है। अगर यह जंग कुछ दिन और चली तो भारत जैसे देश में भी पेट्रोलियम संकट पैदा हो सकता है। 

महामारी के बाद बूम…फिर ब्रेक, विदेशी टूरिस्टों में भारी गिरावट, क्या हैं आंकड़े?


भारत में पर्यटन क्षेत्र के लिए पिछला कुछ समय उतार-चढ़ाव भरा रहा है। कोरोना महामारी की पाबंदियों के खत्म होने के बाद जहां एक ओर वर्ष 2024 में भारतीय पर्यटन ने एक नया इतिहास रचा और रिकॉर्ड संख्या में विदेशी सैलानियों का स्वागत किया, वहीं अब ताजा आंकड़े कुछ चिंताजनक संकेत दे रहे हैं। पर्यटन मंत्रालय द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, जिस रफ्तार से विदेशी पर्यटकों (International Tourist Arrivals – ITA) की संख्या में उछाल आया था, अब उसमें ब्रेक लगता नजर आ रहा है।

 

पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में कहा कि 2024 में भारत आने वाले अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या ने महामारी से पहले के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। 2019 में 17.91 मिलियन टूरिस्ट आए थे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 20.57 मिलियन (प्रोविजनल) तक पहुंचने का अनुमान था, जो 14.82% की बढ़ोतरी है। हालांकि, 2025 के प्रोविजनल आंकड़ों ने इस बूम पर रोक लगा दी है और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों में गिरावट आई है।

 

यह भी पढ़ें: ‘सारे पोस्ट हटाएं…’, एपस्टीन केस में HC ने हरदीप पुरी की बेटी को दी राहत

2024 और 2025 के आंकड़ों की तुलना

पर्यटन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत आने वाले पर्यटकों की कुल संख्या 2,05,68,622 रही थी, जो कि 2023 की तुलना में 8.9% की वृद्धि दर्शाती थी। लेकिन साल 2025 के शुरुआती और अनंतिम आंकड़े इस रफ्तार के धीमे होने का प्रमाण दे रहे हैं। वर्ष 2025 में पर्यटकों की संख्या घटकर 2,00,85,644 रह गई है। यह पिछले वर्ष (2024) की तुलना में -2.4% की गिरावट है। यह कमी उन उम्मीदों के विपरीत है जिनमें पर्यटन क्षेत्र के निरंतर विस्तार की संभावना जताई जा रही थी।

क्या हैं गिरावट के संभावित कारण?

माना जा रहा है कि पर्यटन क्षेत्र में इस मामूली गिरावट के पीछे कई वजहें हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक दबाव, हवाई किराए की बढ़ती कीमतें और कुछ इलाकों में भू-राजनीतिक तनाव ने ट्रैवल प्लान पर असर डाला है। इसके अलावा, कई प्रतिस्पर्धी वाले देशों ने पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए जोरदार कैंपेन शुरू किए हैं, जिससे टूरिस्ट की दिलचस्पी कम हो गई है।

 

यह भी पढ़ें: गोद लेने पर भी मिल जाएगी मैटरनिटी लीव, सुप्रीम कोर्ट ने हटाया 3 महीने वाला नियम

क्या है सरकार का प्लान?

विदेशी पर्यटकों को लुभाने के लिए सरकार हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठी है। मंत्रालय ने साफ किया है कि संभावित पर्यटक बाजारों में भारत की पैठ बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर प्रचार अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके तहत प्रमुख देशों में ‘पर्यटन रोड-शो’ आयोजित किए जा रहे हैं और अंतर्राष्ट्रीय यात्रा व्यापार प्रदर्शनियों एवं मेलों में भारत अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। साथ ही, विदेशी टूर ऑपरेटरों, मीडिया घरानों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के लिए ‘परिचायक दौरों’ का आयोजन किया जा रहा है ताकि वे भारत के पर्यटन स्थलों का प्रत्यक्ष अनुभव ले सकें और उनका प्रचार कर सकें।

हर चौराहे पर दिखने वाले कबूतर खराब कर सकते हैं आपके फेफड़े, समझिए क्या है खतरा

आजकल भारतीय शहरों की ऊंची इमारतों, बालकनियों और पार्कों में कबूतरों का दिखना एक आम बात है। बहुत से लोग इन्हें दाना खिलाना पुण्य का काम समझते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनकी बढ़ती संख्या हमारी सेहत के लिए एक गंभीर चेतावनी है? ‘स्टेट ऑफ इंडियाज बर्ड्स 2023’ की हालिया रिपोर्ट एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश करती है।

 

इस रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2000 के बाद से भारत में कबूतरों की तादाद में 150% से भी अधिक का उछाल आया है। सरल शब्दों में कहें तो पिछले 25-30 वर्षो के भीतर इनकी आबादी दोगुनी से भी ज्यादा हो चुकी है। उदाहरण के तौर पर, अकेले देश की राजधानी दिल्ली में ही लगभग 2 से 2.5 करोड़ कबूतर होने का अनुमान लगाया गया है।

 

वैश्विक स्तर पर देखें तो दुनिया भर के 1 अरब से अधिक कबूतरों में से करीब 30 से 40 करोड़ अकेले भारत में ही मौजूद हैं। जहां एक ओर इन्हें दाना खिलाना एक धार्मिक और दयालु कार्य माना जाता है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नगर निगमों की रिपोर्ट्स इसे एक ‘साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी’ करार दे रही हैं।

 

यह भी पढ़ें: सिर मुंडवाने से रूसी खत्म हो जाती है या नहीं? सच्चाई जान लीजिए

फेफड़ों की गंभीर बीमारियां

मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, कबूतरों की मल और उनके झड़ते हुए पंखों में ‘एवियन एंटीजन’ नाम के बारीक कण होते हैं। जब यह गंदगी सूखती है, तो हवा के साथ मिलकर हमारे फेफड़ों में पहुंचती है। इस बीमारी का नाम है,’हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस’ जिसे बर्ड फैंसीयर्स लंग भी कहते हैं। अगर समय से इसका पता न चले, तो यह फेफड़ों को स्थायी रूप से सुखा सकती है जिसे फाइब्रोसिस कहते हैं। इससे इंसान को सांस लेने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर तक की जरूरत पड़ सकती है।

 

हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस: एक स्टडी के अनुसार, फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लगभग 60-70% मरीजों में कबूतरों के संपर्क में आने का इतिहास पाया गया है।

 

संक्रमण के 60 प्रकार: पशु चिकित्सा वैज्ञानिकों की रिपोट्स बताती है कि कबूतरों के मल में लगभग 60 तरह के अलग-अलग रोगजनक पाए जाते हैं, जो इंसान को बीमार कर सकते हैं।

 

बर्ड फैंसीयर्स लंग: यह एक स्थिति है जहां कबूतरों के मल के बारीक कण फेफड़ों में स्थायी घाव बना देते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।

 

सफाई और शहरी जीवन पर बुरा असर

स्वास्थय के अलावा, कबूतरों की वजह से स्वच्छता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इनका मल बहुत ज्यादा एसिडिक होता है, जो इमारतों के पेंट, कंक्रीट और यहां तक कि लोहे के ढांचों को भी धीरे-धीरे गला देती है। बालकनी में जमा गंदगी न केवल बदबू फैलाती है, बल्कि वहां अन्य हानिकारक कीटों और चूहों को भी आकर्षित करती है, जिससे घर का पूरा वातावरण दूषित हो जाता है।

 

यह भी पढ़ें: ताकत नहीं बीमार दे रहे हैं एनर्जी ड्रिंक, सारे खतरे समझ लीजिए

बचाव और सावधानी के तरीके

इस समस्या से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह कि हम अपने घर के आसपास सफाई रखें। अपनी बालकनी या खिड़कियों पर जाली लगवाना एक बहुत अच्छा उपाय है ताकि कबूतर वहां अपना घोंसला न बना सकें।

 

साथ ही, अपने घर के एकदम पास उन्हें दाना डालने से बचना चाहिए। अगर आपको कभी कबूतर की गंदगी साफ करनी पड़े, तो हमेशा चेहरे पर मास्क जरूर पहनें ताकि धूल के बारीक कण आपके शरीर के अंदर न जा सकें।

सूर्य कैसे इन राशियों का बदल रहे हैं भाग्य? पढ़ें राशिफल


ज्योतिषीय अंक गणित की मानें तो 22 फरवरी का दिन ऊर्जा और उत्साह से भरा रहने वाला है। 22 फरवरी का दिन रविवार की छुट्टी के साथ-साथ मेष राशि में चंद्रमा का होना नेतृत्व क्षमता को बढ़ाएगा। सबसे खास बात यह है कि 22 फरवरी और मूलांक 4 का स्वामी राहु है। राहु की यह छिपी हुई ऊर्जा अचानक मिलने वाली सफलताओं और नए विचारों के लिए बहुत शुभ मानी जा रही है। 

 

गणना के अनुसार, यह दिन उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो कुछ नया शुरू करना चाहते हैं। चाहे करियर हो या पर्सनल लाइफ, बड़े निर्णय लेने से पीछे न हटें। आइए जानते हैं कि आपके सितारों और अंकों का यह अद्भुत मेल आपकी राशि के लिए क्या खास लेकर आया है। 

 

यह भी पढ़ें: फुलेरा दूज 2026: मथुरा-वृंदावन में 19 फरवरी को मनाई जाएगी फूलों की होली

 

राशियों का हाल

मेष

आज आप ऊर्जा से भरे होंगे। किसी भी नई शुरुआत के लिए यह दिन बहुत अच्छा है।

क्या करें: बड़े और साहसिक फैसले ले। अपनी लीडरशिप दिखाएं। एक्सरसाइज पर ध्यान दें।

क्या न करें: जल्दबाजी में किसी भी काम को न बिगाड़ें और बहस से दूर रहें।

वृषभ

आर्थिक मोर्चे पर आज का दिन आपके पक्ष में रहेगा। साथ ही परिवार का साथ मिलेगा।

क्या करें: निवेश के नए रास्ते तलाशें। अगर हो सके तो एक रूटीन चेकअप करवाएं।

क्या न करें: फालतू के खर्चों और बहसबाजी में अपना समय बर्बाद न करें।

मिथुन

करियर में तरक्की के नए मौके मिलेंगे। आपकी क्रिएटिविटी आज लोगों को प्रभावित करेगी।

क्या करें: अपनी कम्युनिकेशन स्किल सुधारें। नई चीजें सीखने पर जोर दें।

क्या न करें: सुनी-सुनाई बातों और खासकर अफवाहों पर भरोसा करने से बचें।

कर्क

आज आप खुद को मानसिक रूप से बहुत मजबूत महसूस करेंगे। घर-परिवार में खुशहाली रहेगी।

क्या करें: घर का कोई भी पेंडिंग काम निपटाएं और अपनी मां के साथ समय बिताएं।

क्या न करें: पुरानी कड़वी बातों को याद कर अपना मूड खराब न करें।


यह भी पढ़ें: चमकने वाला है इन राशियों का भाग्य, जानें क्या कहता है आपका सितारा

सिंह

आत्मविश्वास के मामले में आज आपका कोई मुकाबला नहीं है। बड़े प्रोजेक्ट्स हाथ में आ सकते हैं।

क्या करें: सामाजिक मेलजोल बढ़ाएं। अपनी सेहत का भी ख्याल रखें।

क्या न करें: अहंकार को अपने काम के बीच न आने दें।

कन्या

किस्मत का साथ मिलने से आपके रुके हुए काम आज अच्छे से पूरे होंगे।

क्या करें: बारीकी वाले कामों पर ध्यान दें। जरूरत पड़ने पर अनुभवी लोगों से सलाह लें।

क्या न करें: हर काम में बहुत ज्यादा परफेक्शन ढूंढने के चक्कर में तनाव न लें।

तुला

रिश्तों के लिहाज से आज का दिन बेहद खुशनुमा है। तालमेल बिठाने में आप सफल रहेंगे।

क्या करें: अपने लाइफ पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं। कलात्मक रुचि दिखाएं।

क्या न करें: दुविधा में रहकर फैसले लेने में देरी न करें।

वृश्चिक

आज आपके भीतर एक अलग तरह की शक्ति रहेगी। कुछ बड़ा हासिल करने का दिन है।

क्या करें: अपनी योजनाओं को गुप्त रखें और भविष्य के लिए निवेश की प्लानिंग करें।

क्या न करें: अपने गुस्से को काबू में रखें, वरना बनी बनाई बात बिगड़ सकती है।

धनु

यात्रा के योग बन रहे हैं। उत्साह भी बना रहेगा। किस्मत आपके साथ खड़ा है।

क्या करें: दूर और बड़े टारगेट न बनाएं। अपना ज्ञान बढ़ाने की कोशिश करें।

क्या न करें: जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास में आकर जोखिम भरे फैसले न लें।

मकर

प्रोफेशनल लाइफ में बड़ी प्रगति देखने को मिलेगी। सीनियर्स आपके काम की तारीफ करेंगे।

क्या करें: अपनी मेहनत का लुत्फ उठाएं। आने वाले समय के लिए नए टारगेट तय करें।

क्या न करें: सारा काम खुद करने की जिद न पालें, टीम की मदद लें।


यह भी पढ़ें: पांच वक्त की होती है नमाज, फज्र, ज़ुहर, अस्र, मग़रिब और ईशा के क्या अर्थ हैं?

कुंभ

नेटवर्किंग और तकनीक के इस्तेमाल से आज आपको बड़ा फायदा हो सकता है।

क्या करें: सोशल मीडिया पर एक्टिव रहें। नए लोगों से जुड़ने की कोशिश करें।

क्या न करें: खुद को अकेला न रखें। पुरानी बोरिंग आदतों को छोड़ें।

मीन

मानसिक शांति और सुकून का अनुभव होगा। दान-पुण्य के कामों में मन लगेगा।

क्या करें: क्रिएटिव कामों में समय बिताएं। यह आपको रिलैक्स महसूस कराएगा। 

क्या न करें: किसी भी तरह के कंफ्यूजन या बहुत ज्यादा इमोशनल होने से बचें।

 

डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जानकारी के लिए ज्योतिषि से संपर्क करें।

RSS और रॉ पर बैन लगे…, अमेरिकी आयोग ने ऐसी सिफारिश क्यों की है?


अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने अपनी 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में भारत को उन देशों की सूची में रखा है, जहां ‘विशेष चिंता’ की जरूरत है। USCIRF ने अमेरिकी सरकार से सिफारिश की है कि भारत को ‘कंट्री ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न’ की लिस्ट में रखा जाए। आसान भाषा में इसे ‘विशेष चिंता वाला देश’ कह सकते हैं।
 

USCIRF ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&W) पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। अमेरिकी संस्था का दावा है कि भारत में धार्मिक आजादी खतरे में है, अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। आयोग का कहना है कि रॉ और RSS धार्मिक स्वतंत्रता के मामलों में भेदभावपूर्ण नीति अपनाते हैं। 

यह भी पढ़ें: ईरान पर अकेला पड़ा अमेरिका, NATO और चीन को धमका रहे ट्रंप, नई मुसीबत की आहट?

USCIRF का नया दावा क्या है?

USCIRF की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति 2025 में और बिगड़ी है, जिसमें धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनके पूजा स्थलों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट में अमेरिकी सरकार से अपील की गई है कि वह भारत को हथियार न बेचे और ऐसी बिक्री को रोकने के लिए आर्म्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्ट की धारा 6 लागू कर दे। सुरक्षा सहायता और द्विपक्षीय व्यापार नीतियों को धार्मिक स्वतंत्रता में सुधार से जोड़े। 

USCIRF ने अमेरिकी संसद से ‘ट्रांजिशनल रिप्रेशन रिपोर्टिंग एक्ट 2024’ को फिर से पारित करने की मांग की थी। यह मांग की जा रही है कि अमेरिका में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ भारतीय सरकार की ओर से किए जा रहे दमन की सालाना रिपोर्ट भी दी जाए। 

यह भी पढ़ें: मीडिया कंपनियों को ट्रंप की धमकी, ईरान को लेकर फेक न्यूज वाली कही बात

भारत सरकार ने क्या कहा है?

 भारत सरकार ने इस रिपोर्ट पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। बीते कुछ साल में USCIRF की रिपोर्टों को पूर्वाग्रह और राजनीति से प्रेरित बताया है। भारत ऐसे आरोपों को एक सिरे से खारिज करता रहा है। 

USCIRF क्या चाहता है?

  • भारत को विशेष चिंता वाला देश माना जाए
  • RSS और R&W पर रोक लगे, संपत्ति जब्त हो
  • अमेरिका में संस्था से जुड़े लोगों पर प्रतिबंध लगे 
  • हथियार बिक्री रोकने के लिए आर्म्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्टर की धारा 6 लागू हो 
  • सुरक्षा सहायता और व्यापार नीतियों को धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ा जाए  
  • भारत में USCIRF और राज्य विभाग को जांच करने की इजाजत मिले

किस आधार पर USCRIF कह रहा है ऐसा?

USCIRF का इशारा वक्फ कानूनों की तरफ है। आयोग का कहना है कि साल  2025 में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति और खराब हुई, सरकार ने अल्पसंख्यक समुदायों और उनके पूजा स्थलों को निशाना बनाने वाली नई विधेयकों को लागू किया।  

अमेरिका का कहना है कि धर्म परिवर्तन से जुड़े कानूनों को देश के कई राज्यों ने सख्त किया है, कड़ी जेल योजनाओं का खाका तैयार किया है। भारतीय अधिकारियों ने नागरिकों और धार्मिक शरणार्थियों को डिपोर्ट करने की आसान योजनाएं बनाई हैं। भारत ने अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर सही समय पर कार्रवाई नहीं की है। 

USCIRF का कहना है कि महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सांप्रदायिक झड़पें हुईं, जिनमें RSS से जुड़े विश्व हिंदू परिषद जैसे समूहों को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। वक्फ (संशोधन) अधिनियम और उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण अधिनियम जैसी विधेयकों की आलोचना की गई है।  

यह भी पढ़ें: ‘उम्मीद है चीन, जापान और फ्रांस भेजेंगे जहाज,’ ईरान के आगे बेबस हुए ट्रंप

USCIRF पर लगते हैं दुष्प्रचार के आरोप

अमेरिका की यह संस्था, भारत के खिलाफ नफरती सोच से भरी है। ऐसे आरोप इस संस्था पर कई बार लगे हैं। साल 2025 में विदेश मंत्रालय ने USCIRF की रिपोर्ट को पूर्वाग्रही और राजनीतिक रूप से प्रेरित करार दिया था। मंत्रालय ने कहा था कि USCIRF अलग-थलग घटनाओं को गलत तरीके से पेश कर भारत की जीवंत विविधतापूर्ण संस्कृति का अपमान करती है। यह अमेरिका का सुनियोजित एजेंडा है। भारत सरकार ने कहा था कि भारत में डेढ़ अरब लोग रहते हैं, यहां हर धर्म के अनुयायी हैं। भारत सह अस्तित्व में भरोसा करता है। भारत ने कई बार USCIRF को वीजा देने से इनकार किया है। यह संस्था भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करती है।

यह भी पढ़ें: ‘उम्मीद है चीन, जापान और फ्रांस भेजेंगे जहाज,’ ईरान के आगे बेबस हुए ट्रंप

USCIRF है क्या?

यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) की स्थापना साल 1998 में हुई थी। साल 1998 में ही अमेरिकी संसद ने इसे एक अधिनियम बनाकर स्थापित किया था। यह विदेश में धार्मिक स्वतंत्रता की जांच करने का दावा करती है। अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और संसद को यह सिफारिशें भेजती है। इस आयोग में 9 कमिश्नर होते हैं, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति और अमेरिकी संसद के सीनियर नेता करते हैं। 

केदारनाथ जाने के लिए गैर-हिंदुओं को माननी होंगी शर्तें, सारा को भी होगी परेशानी


हर साल लाखों श्रद्धालु केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और इस साल भी लाखों लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान भी इन धामों की यात्रा करती हैं लेकिन अब इस साल उन्हें यात्रा करने के लिए पहले एफिडेविड जमा करना होगा और अपनी आस्था साबित करनी होगी। नए नियमों के अनुसार, गैर हिंदूं श्रद्धालुओं को इन धामों में दर्शन के लिए अपनी आस्था साबित करनी होगी, जिसके लिए एफिडेविट देना होगा। अब सारा अली खान इस्ताम धर्म से हैं इसलिए उन्हें भी एफिडेविट देना होगा। इस फैसले की जानकारी  बद्रीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी। 

 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में गैर–सनातनी श्रद्धालु प्रवेश कर सकते हैं लेकिन इसके लिए उन्हें एक एफिडेविट या लिखित घोषणा देनी होगी कि वे हिंदुत्व और सनातन धर्म में आस्था रखते हैं। अब उनके इस बयान की चर्चा सोशल मीडिया पर हो रही है। 

 

यह भी पढ़ें: बिहार में जाली नोट गिरोह का भंडाफोड़, नेपाल सप्लाई करने की तैयारी में थे आरोपी

सारा अली खान पर क्या बोले?

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे पूछा गया कि क्या फिल्म अभिनेत्री सारा अली खान केदारनाथ आ सकती हैं, तो उन्होंने कहा कि अगर वह भी एफिडेविट में यह लिखकर दें कि उन्हें सनातन धर्म और हिंदुत्व में विश्वास है, तो वह भी आ सकती हैं। इस फैसले के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने आगे बताया कि मंदिर समिति इस शपथ पत्र का  फॉर्मेट उपलब्ध करवाएगी और इसी फॉर्मेट में सभी गैर हिंदूओं को यह शपथ पत्र जमा करवाना होगा। 

समीति की बैठक में हुआ फैसला

हाल ही में बद्रीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति की बोर्ड बैठक हुई थी। उस बैठक में यह मुद्दा उठा था कि धामों में गैर–सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाई जाए। इसके बाद मीटिंग में फैसला लिया गया कि गैर-सनातनियों के लिए अलग व्यवस्था की जाएगी और उन्हें शपथ पत्र देना होगा। इस बैठक के बाद द्रीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि यह शपथ पत्र मंदिर परिसर में ही उपलब्ध रहेगा, ताकि इच्छुक श्रद्धालु वहीं पर इसे भर सकें।

सारा अली खान चर्चा में

सारा अली खान के पिता सैफ अली खान हैं और उनकी मां अमृता सिंह है। सारा को उनकी आस्था के लिए भी जाना जाता है। वह मंदिर से लेकर मस्जिद तक हर जगह जाती हैं और दर्शन करती हैं। सारा का केदारनाथ से खास जुड़ाव है। उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत ‘केदारनाथ’ फिल्म से ही की थी और इस फिल्म की शूटिंग इसी इलाके में हुई थी। इसके बाद भी वह कई बार केदारनाथ आई हैं और मंदिर में पूजा-अर्चना करते हुए उन्होंने कई बार तस्वीरें भी शेयर की हैं। 

 

यह भी पढ़ें: एक अंग्रेज के पैर पड़े और बदल गई पूरे देश की तकदीर, क्या है केरल की पूरी कहानी?

कांग्रेस ने उठाए सवाल

अब इस फैसले पर सवाल भी उठने लगे हैं क्योंकि केदारनाथ-बद्रीनाथ जैसे धामों में कई गैर हिंदू भी आस्था रखते हैं और दर्शन के लिए जाते हैं। कांग्रेस प्रवक्ता सुजाता पॉल ने हेमंत द्विवेदी और बीजेपी से तीखे सवाल किए। उन्होंने कहा कि हेमंत द्विवेदी की हिम्मत कैसे हुई कि वह बाबा केदार और उनके भक्तों के 

 

बिना मछली खाए भी मिल सकता है ओमेगा-3, क्या खाना है जान लीजिए


आजकल के भागदौड़ भरे जीवन में व्यक्ति के शरीर का फिट रहना बेहद जरूरी है। शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए अलसी के बीज खाना फायदेमंद है क्योंकि अलसी के बीज में ओमेगा 3 होता है। ओमेगा 3 से दिल और दिमाग स्वस्थ रहता है। कई लोगों का मानना है कि ओमेगा 3 सिर्फ मछली खाने से मिलता है लेकिन यह सच नहीं है। मछली के अलावा अलसी खाने से भी हमें ओमेगा 3 मिलता है।

 

भारत में कई लोग ऐसे हैं जो शाकाहारी भोजन खाते हैं और मछली नहीं खाते हैं। इसलिए वे लोग अलसी के बीज खाकर ओमेगा 3 के फायदे पा सकते हैं। अलसी के बीज खाने से न सिर्फ ओमेगा 3 बल्कि फाइबर, प्रोटीन और विटामिन भी मिलते हैं, जिससे शरीर को कई फायदे होते हैं। अब सवाल उठता है कि अलसी खाने से क्या फायदे होते हैं, क्या नुकसान होते हैं और ओमेगा 3 क्या है और यह सेहत के लिए क्यों जरूरी है।

 

यह भी पढ़ें: बिना तंबाकू खाए भी हो जाता है मुंह का कैंसर, कारण और बचाव के तरीके जान लीजिए

ओमेगा 3 क्या है?

ओमेगा 3 एक हेल्दी फैटी एसिड है, जिसे हमारा शरीर खुद नहीं बना सकता। इसलिए हमें इसे आहार के जरिए लेना पड़ता है। ओमेगा 3 दिल और दिमाग में सूजन को कम करने में मदद करता है, जिससे वे सही ढंग से काम करते हैं। साथ ही, यह शरीर में मौजूद खराब फैट को कम करने में भी सहायक होता है। इसी वजह से ओमेगा-3 युक्त आहार खाना चाहिए। अलसी के बीज में ओमेगा 3 होता है, इसलिए रोजाना सीमित मात्रा में अलसी का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है।

अलसी के बीज में ओमेगा 3 के अलावा क्या है?

अलसी के बीज आज के दौर में शरीर के लिए वरदान से कम नहीं हैं। इनमें फाइबर, प्रोटीन, विटामिन बी1 और ओमेगा 3 होता है, जो सेहत के लिए बेहद लाभदायक है। अगर अलसी के बीज नियमित रूप से खाए जाएं तो इसके कई फायदे देखने को मिल सकते हैं।

 

यह भी पढ़ें: सिर्फ तीखेपन के लिए नहीं होती मिर्च, कितने फायदे हैं जान लीजिए

 

बेहतर डाइजेशन -अलसी के बीज में अच्छी मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करता है। इससे कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है।


वजन घटाने में मददगार– अलसी के बीज में फाइबर होता है, जिसे खाने के बाद लंबे समय तक पेट भरा रहता है और भूख कम लगती है। भूख कम लगने की वजह से व्यक्ति कम खाता है, जिससे वजन कम करने में मदद मिल सकती है।


स्किन में निखार- अलसी के बीज में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो त्वचा को अंदर से पोषण देता है। इससे त्वचा संबंधी समस्याएं कम हो सकती हैं और स्किन में निखार आ सकता है।

 

हार्मोन संतुलन- अलसी के बीज में लिग्निन पाया जाता है, जो महिलाओं के हार्मोन संतुलन में मदद करता है। इसके सेवन से मासिक धर्म नियमित समय पर आता है।

कैसे खाएं अलसी के बीज?

अलसी के बीज अलग-अलग तरीकों से खाए जा सकते हैं। आप अलसी के बीज को दरदरा पीसकर एक साफ जार में रख सकते हैं। इसके बाद रोज एक चम्मच अलसी पाउडर को पानी, दही, आटे या सलाद में मिलाकर खा सकते हैं। चाहें तो साबुत अलसी के बीज भी खाए जा सकते हैं, लेकिन उन्हें अच्छी तरह चबाना जरूरी है।

 

यह भी पढ़ें: छोटे शहरों के लोगों को क्यों चाहिए मेट्रो सिटी वाले पार्टनर? वजह समझिए

अलसी के बीज के नुकसान

किसी भी चीज का अधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है। उसी प्रकार अलसी के बीज ज्यादा खाने से कुछ दिक्कतें हो सकती हैं।

 

लूज मोशन– अगर अलसी का ज्यादा सेवन किया जाए तो दस्त की समस्या हो सकती है। इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए ताकि यह आसानी से पच सके।

 

अनपच- ज्यादा मात्रा में अलसी खाने से अपच हो सकता है, क्योंकि इसमें फाइबर अधिक होता है। ज्यादा फाइबर लेने से पेट में गैस, कब्ज या अनपच की समस्या हो सकती है।


खून पतला होना – अलसी के बीज में ओमेगा-3 होता है। अधिक मात्रा में सेवन करने से खून पतला हो सकता है। इसलिए जरूरत से ज्यादा अलसी खाने से बचना चाहिए।