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पत्नी को कमरे में बंद कर पति ने तीन दोस्तों से कराया यौन शोषण, म्यांमार के नागरिक की तलाश में जुटी हैदराबाद पुलिस

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डिजिटल डेस्क, हैदराबाद। हैदराबाद में किराये के एक मकान में म्यांमार की 18 वर्षीय युवती को उसके पति द्वारा कथित तौर पर बंधक बनाकर रखने का मामला सामने आया है।

यहां एक पति ने अपनी 18 साल की पत्नी को एक किराए के कमरे में जबरन बंद करके रखा साथ ही उसने पिछले कुछ महीनों में अपने तीन दोस्तों से कई बार उसका यौन शोषण करवाया। मंगलवार को पुलिस ने इस बात की जानकारी दी।

पति ने 18 वर्षीय पत्नी को कमरे में बंधक बनाया

महिला का पति और उसके तीनों दोस्त म्यांमार के नागरिक हैं और शहर के एक शरणार्थी शिविर (रिफ्यूजी कैंप) में रह रहे हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि महिला ने अपनी शिकायत में कहा है कि उसके पति ने उसे एक कमरे में बंद कर दिया और अपने तीन दोस्तों को अंदर भेज दिया, जिन्होंने उसका कई बार यौन शोषण किया।

23 अक्टूबर को जब मकान मालिक किराया लेने के लिए वहां पहुंचा, तो उसने महिला को एक कमरे में बंद पाया और दरवाजा तोड़कर उसे बाहर निकाला। इसके बाद महिला ने शरणार्थी शिविर में रह रहे अपने रिश्तेदारों से संपर्क किया और कंचनबाग पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने मामला दर्ज कर तलाश शुरू की 

अधिकारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर, पुलिस ने बीएनएस (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत बलात्कार, गलत तरीके से कैद रखने और आपराधिक धमकी देने का मामला दर्ज किया है।

मुख्य आरोपी इस साल मई में महिला को बांग्लादेश से हैदराबाद लाया था, उससे शादी की और उसे एक किराए के मकान के कमरे में बंद करके रखा। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है। मामले की आगे की जांच जारी है।

हाइवे पर 120 की स्पीड से भरिए रफ्तार, नहीं होगा ओवरस्पीड का चालान; जानिए नए नियम

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। देशभर में एक्सप्रेसवे का नेटवर्क बड़ा होता जा रहा है। यह समस्या है कि तेज गति के कारण वाहन दुर्घटनाओं का जोखिम अधिक रहता है, लेकिन ऐसी शिकायतें भी मिल रही हैं कि कई एक्सप्रेसवे पर निर्धारित गति सीमा के भीतर भी वाहन चालकों के पास चालान पहुंच रहे हैं।

अब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट कर दिया है कि 120 किलोमीटर की गति या उससे 20 प्रतिशत भी अधिक गति से चलने वाले वाहनों का चालान नहीं किया जाएगा। उन्होंने दावा किया है कि इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दे दिया गया है।

हालांकि, वाहन चालकों द्वारा लेन बदलने को अधिक जोखिम भरा मानते हुए उन्होंने बताया कि लेन अनुशासन का पालन कराने के लिए नेशनल हाईवे को एआई आधारित आटोमैटिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से लैस करने की शुरुआत की जा रही है।

हाइवे पर 120 किमी/घंटा तक गति पर चालान नहीं होगा

सीआईआई के कार्यक्रम में मंगलवार को केंद्रीय मंत्री गडकरी ने बताया कि अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 120 किलोमीटर प्रतिघंटा या उससे 20 प्रतिशत से भी अधिक की गति सीमा कोई पार करे तो चालान भेजा जाए। उल्लेखनीय है कि उन्होंने स्वयं माना कि कई लोगों को ओवरस्पीडिंग के चालान भेजे जा रहे हैं।

वहीं, एटीएमएस को लेकर उन्होंने बताया कि इसे लेकर गति दिवस ही उनके सामने अधिकारियों द्वारा प्रेजेंटेशन दिया गया है। इसके तहत पहले चरण में दस हजार किलोमीटर के एनएचए नेटवर्क पर एटीएमएस लगाया जाना है। ध्यान रहे कि अभी कुछ प्रमुख एक्सप्रेसवे पर ही यातायात प्रबंधन की इस उन्नत तकनीक की शुरुआत की जा सकी है।

बिहार की सभी नदियों की ड्रेजिंग कराएगा सड़क परिवहन मंत्रालय

बिहार में बाढ़ की समस्या विकराल है। इस वर्ष भी वहां बाढ़ के कारण त्राहि-त्राहि मची रही। नितिन गडकरी ने बताया कि उनका मंत्रालय बिहार सरकार के साथ जल्द ही एक एमओयू करने जा रहा है, जिसके लिए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आने वाले हैं। उन्होंने बताया कि एमओयू के तहत सड़क परिवहन मंत्रालय बिहार की सभी नदियों की ड्रेजिंग कराएगा।

उससे निकलने वाले स्लज का उपयोग हाईवे निर्माण में किया जाएगा। बिहार सरकार का एक पैसा भी खर्च नहीं होगा और इससे बिहार बाढ़ मुक्त हो सकता है। मंत्री ने दावा किया कि इसी तरह वह अब तक 1600 तालाब खुदवा चुके हैं और उसकी मिट्टी का उपयोग हाईवे परियोजनाओं में किया गया है।

ई-20 को लेकर चलाया गया ‘पेड प्रोपेगेंडा’

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने देश पर 22 लाख करोड़ रुपये के पेट्रो पदार्थों के आयात के भार का दावा करते हुए बायो फ्यूल, बायो बिटुमिन आदि के उपयोग पर जोर दिया। साथ ही कहा कि कई कंपनियां अब फ्लेक्स फ्यूल की गाड़ियां बना रही हैं।

2022 से चार करोड़ कारें और 20 करोड़ दोपहिया वाहन ई-20 पर चल रहे हैं, लेकिन तीन माह पहले काफी हंगामा किया गया। गडकरी ने आरोप लगाया कि यह ई-20 को लेकर पेड प्रोपेगेंडा था, लेकिन अब सब कुछ शांत हो गया। उन्होंने चुनौती दी कि देश में कोई एक भी व्यक्ति हो तो सामने आए, जिसकी गाड़ी ई-20 के कारण खराब हुई हो।

चक्रवात अर्नब का कहर: विजयवाड़ा एयरपोर्ट पर कई उड़ानें रद, बुधवार को इंडिगो की सभी सेवाएं सस्पेंड

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डिजिटल डेस्क, विजयवाड़ा। आंध्र प्रदेश के तट की ओर चक्रवात अर्नब के बढ़ने के कारण उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ है। बुधवार, 28 अक्टूबर को विजयवाड़ा एयरपोर्ट से इंडिगो की सभी उड़ानें रद कर दी गई हैं।

इलके अलावा, फ्लाई91 की हैदराबाद सेवाएं और दिल्ली-विजयवाड़ा के बीच चलने वाली वाली एयर इंडिया की एक उड़ान भी आज के लिए रद कर दी गई है।

चक्रवात के असर के कारण, मंगलवार 27 अक्टूबर को चेन्नई और बेंगलुरु को विजयवाड़ा से जोड़ने वाली इंडिगो की दो सेवाएं भी रद कर दी गई थीं।

गंभीर चक्रवाती तूफान का रूप ले लेगा ‘अर्नब’

भारतीय मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि चक्रवात अर्नब और अधिक शक्तिशाली होकर एक बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान का रूप ले लेगा। 28 अक्टूबर की सुबह तक यह बापटला और विशाखापत्तनम के बीच आंध्र प्रदेश और यनम के तटों को पार करेगा।

115-125 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

इस तूफान के दौरान 115-125 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से लगातार हवाएं चलने की संभावना है, जबकि हवा के झोंके 140 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकते हैं। तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में बहुत भारी बारिश और तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है।

28 अक्टूबर को विजयवाड़ा से इंडिगो की सभी उड़ाने रद

मिली जानकारी का अनुसार, बुधवार 28 अक्टूबर को विजयवाड़ा हवाई अड्डे से संचालित होने वाली इंडिगो की सभी उड़ाने रद कर दी गई हैं। फ्लाई91 ने भी बुधवार के लिए अपनी हैदराबाद की सेवाएं रद कर दी हैं।

यात्रियों के लिए सलाह

विजयवाड़ा हवाई अड्डे से यात्रा करने वाले यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे हवाई अड्डे के लिए निकलने से पहले संबंधित एयरलाइंस से अपनी उड़ान की स्थिति जांच लें, क्योंकि चक्रवात के कारण यात्रा योजनाओं में रुकावट आ सकती है।

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INDI गठबंधन में होगी जगन मोहन रेड्डी की एंट्री? 2029 लोकसभा चुनाव के लिए क्या है YSRCP की रणनीति

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। क्या वाईएसआरसीपी प्रमुख जगन मोहन रेड्डी अब कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDI गठबंधन की ओर रुख कर रहे हैं? या फिर वे भाजपा के प्रति ‘नरम’ मानी जाने वाली अपनी छवि को तोड़ने की कोशिश में हैं? आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने सत्ता में रहते हुए संसद में भाजपा नीत एनडीए सरकार के कई महत्वपूर्ण कानूनों को मुद्दा-आधारित समर्थन दिया था।

लेकिन अब तक वे किसी भी गठबंधन से दूर ही रहे। हाल ही में जगन रेड्डी ने 2023 में लाए गए मुख्य चुनाव आयुक्त चयन संबंधी एनडीए कानून का समर्थन करने को अपनी ‘गलती’ बताया और इस पर पछतावा जताया। इस बयान ने उनके भविष्य के राजनीतिक रुख को लेकर नई अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।

जगन मोहन रेड्डी का पछतावा 

YSRCP प्रमुख ने हाल ही में कहा, ‘हमें उस प्रक्रिया का समर्थन करने पर पछतावा है जिसके तहत सत्ताधारी पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को चुना। न तो CEC और न ही SEC (राज्य चुनाव आयुक्त) की नियुक्ति सत्ताधारी पार्टी द्वारा की जानी चाहिए।

चयन समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल होने चाहिए और इन तीनों को ही मतदान का अधिकार होना चाहिए।’

उन्होंने मौजूदा चयन प्रणाली को ‘दोषपूर्ण’ करार दिया। जगन की इन टिप्पणियों का समय और संदर्भ काफी मायने रखता है। ऐसा इसलिए क्योंकि क्या वह अपनी ‘अकेले’ चलने वाली राजनीति पर फिर से विचार कर रहे हैं?

अगर ऐसा है, तो क्या कांग्रेस आंध्र प्रदेश में उनके साथ हाथ मिलाने को तैयार होगी? आखिरकार, अलग-अलग राज्यों में क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन करना कांग्रेस के लिए हमेशा से एक बड़ी कमजोरी साबित हुआ है।

NDA के अहम बिलों पर जगन का समर्थन

2019 से 2024 के बीच लोकसभा और राज्यसभा दोनों में, जगन मोहन रेड्डी के सांसदों ने कई महत्वपूर्ण कानूनों पर मोदी सरकार का समर्थन किया। हालांकि, जब 2024 के चुनावों के लिए गठबंधन बनाने की बात आई तो BJP ने जगन की मदद को नजरअंदाज कर दिया और उनके कट्टर प्रतिद्वंद्वी चंद्रबाबू नायडू के साथ हाथ मिला लिया।

आंध्र प्रदेश में TDP और BJP ने मिलकर चुनाव में शानदार जीत हासिल की; उन्होंने विधानसभा की 175 में से 164 सीटें और लोकसभा की 25 में से 21 सीटें जीतीं। वहीं, YSRCP विधानसभा में 11 और लोकसभा में 4 सीटों पर सिमट गई।

BJP द्वारा ठुकराए जाने और अपनी पार्टी की करारी हार के बावजूद, जगन मोहन रेड्डी को BJP के साथ अपने संबंधों को लेकर भरोसा था। आखिरकार, उनके पास अभी भी 15 सांसद (लोकसभा में 4 और राज्यसभा में 11) थे, जो केंद्र में BJP की अल्पमत सरकार को बहुत जरूरी समर्थन दे सकते थे।

जगन ने यह भी घोषणा की कि उनके सांसद राष्ट्रीय और राज्य हित के मुद्दों पर NDA सरकार को समर्थन देंगे। लेकिन, केंद्र में अपनी सरकार को बचाए रखने के लिए BJP पूरी तरह से चंद्रबाबू नायडू के समर्थन पर निर्भर थी, इसलिए BJP के पास जगन रेड्डी को साथ लेने की कोई गुंजाइश नहीं थी।

लगभग ढाई साल बीत जाने के बाद, ऐसा लगता है कि रेड्डी ने इस कड़वी सच्चाई को स्वीकार कर लिया है और शायद 2029 की अगली राजनीतिक चुनौती के लिए एक नया रास्ता खोजने की तैयारी कर रहे हैं।

जगन रेड्डी बनाम कांग्रेस

हालांकि, INDI गठबंधन के साथ किसी भी सफल गठबंधन के लिए, YSRCP और कांग्रेस का एक ही राय पर होना जरूरी होगा और शायद जगन मोहन रेड्डी के लिए यही सबसे बड़ी चुनौती होगी।

2010 में, अपने पिता YS राजशेखर रेड्डी के निधन के एक साल बाद, जगन मोहन रेड्डी कांग्रेस से काफी कड़वाहट के साथ अलग हो गए थे। 2 सितंबर 2009 को एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में वाईएसआर रेड्डी की मौत हो गई, उस समय वे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में अपना दूसरा कार्यकाल पूरा कर रहे थे।

जगन के समर्थकों ने, जिनकी संख्या काफी अधिक थी, इस शीर्ष पद के लिए कांग्रेस आलाकमान पर काफी दबाव डाला, लेकिन सोनिया गांधी अपनी बात पर अडिग रहीं और के. रोसैया को मुख्यमंत्री बना दिया।

कांग्रेस नेतृत्व को जगन की ‘ओदारपु यात्रा’ पसंद नहीं आई। यह यात्रा उनके उस घोषित कार्यक्रम का हिस्सा थी, जिसके तहत उन्हें उन कई लोगों के परिवारों से मिलना था, जिन्होंने उनके पिता की मौत के बाद अपनी जान दे दी थी।

इसी घटनाक्रम के चलते अंततः उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। उन्होंने 29 नवंबर 2010 को सोनिया गांधी को एक खुला पत्र लिखकर कांग्रेस छोड़ने की घोषणा की। इस पत्र को बहुत सोच-समझकर लिखा गया था, ताकि उनके राजनीतिक करियर के दूसरे चरण के लिए जनता की सहानुभूति उन्हें मिल सके।

YSRCP की शानदार शुरुआत 

2014 के विधानसभा चुनावों में, YSRCP ने शानदार शुरुआत की और 44.46% वोट शेयर के साथ 175 में से 67 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को केवल 2.8% वोट शेयर ही मिल पाया। राज्य को बांटकर तेलंगाना बनाने के कांग्रेस के फैसले ने राज्य में पार्टी की गिरती राजनीतिक स्थिति में बड़ी भूमिका निभाई।

6 नवंबर 2017 को, जगन ने ‘प्रजा संकल्प यात्रा’ शुरू की और 341 दिनों में 3648 किमी की दूरी तय करते हुए 134 विधानसभा क्षेत्रों को पार किया।

इडुपुलापाया के YSR घाट से शुरू होकर इच्छापुरम के उत्तर-पूर्वी छोर तक गई इस यात्रा ने जगन मोहन रेड्डी को 2019 के चुनावों में 175 सदस्यीय विधानसभा में 151 सीटों का ऐतिहासिक जनादेश दिलाया।

कांग्रेस का वोट शेयर घटकर 1% से भी कम रह गया। तब से, कांग्रेस राज्य में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है। पार्टी को पुनर्जीवित करने की योजना के तहत, उन्होंने जगन रेड्डी की बहन Y S शर्मिला को अपने साथ जोड़ा।

शर्मिला, जिन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत अपने भाई जगन मोहन रेड्डी के साथ की थी, बाद में कांग्रेस की ओर चली गईं और जनवरी 2024 में उन्हें आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। हालांकि, 2024 के चुनावों में जगन मोहन रेड्डी और उनकी बहन Y S शर्मिला, दोनों ही कोई खास प्रभाव नहीं डाल पाए।

2024 के चुनावों में जगन की चुनावी किस्मत बुरी तरह लड़खड़ा गई और उनकी पार्टी सिमटकर केवल 11 सीटों पर रह गई। कांग्रेस एक बार फिर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में नाकाम रही।

2029 लोकसभा चुनाव की चुनौती

अब बात आती है 2029 के चुनावों की, जो जगन मोहन रेड्डी और कांग्रेस, दोनों के लिए ‘करो या मरो’ की चुनौती है। CEC नियुक्ति बिल का समर्थन करने पर जगन की टिप्पणी, BJP का साथ देने को लेकर उनका पहला खुला ‘पछतावा’ है। लेकिन क्या इस ‘खुले पछतावे’ का मतलब कांग्रेस की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाना है?

अगर दोनों का विलय हो जाता है, तो सच कहूं तो उन्हें बहुत बड़ा फायदा होगा, क्योंकि तब केंद्रीय कांग्रेस और जगनमोहन की कांग्रेस एक ही दिशा में काम कर सकेंगी।’

हालांकि, वे यह भी मानते हैं कि दोनों पार्टियों का विलय एक मुश्किल प्रक्रिया हो सकती है, जबकि गठबंधन करना शायद आसान हो। संजय झा आगे कहते हैं, ‘एक बार जब कोई राजनीतिक पार्टी स्वतंत्र हो जाती है और उसके पास सत्ता आ जाती है, तो वह जल्दी से उसे छोड़ना नहीं चाहती। टीएमसी (TMC) या एनसीपी (NCP) इसके अच्छे उदाहरण हैं।

ऐसे में, उनके बीच गठबंधन ही एक विकल्प हो सकता है।’ संजय झा के अनुसार, तीसरा विकल्प यह है कि कांग्रेस आंध्र प्रदेश में खुद को फिर से मजबूती से खड़ा करे इसके लिए उसे चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ मौजूद असंतोष के वोटों को हासिल करना होगा और कांग्रेस के उन वफादार समर्थकों को वापस लाना होगा, जो जगनमोहन रेड्डी के साथ चले गए थे।

कहना आसान और करना मुश्किल

जिन राज्यों में कांग्रेस सत्ता गंवा चुकी है, वहां उसे वापस पाने के मामले में उसका रिकॉर्ड काफी खराब रहा है। देश के कई राज्यों में हमने देखा है कि कांग्रेस ने न केवल अपनी सरकार खोई, बल्कि अपना जनाधार भी गंवा दिया और उसे वापस पाने के लिए पार्टी ने कोई खास कोशिश नहीं की।

आंध्र प्रदेश में, चंद्रबाबू नायडू और बीजेपी अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। हाल ही में एक सम्मेलन में नायडू ने दक्षिणी राज्यों के बीच बेहतर सहयोग और तालमेल की जो बात कही, वह शायद अपनी अहमियत और प्रासंगिकता बनाए रखने की एक कोशिश है। पिछले विधानसभा चुनावों में विजय की TVK से सत्ता गंवाने से पहले, DMK के एम.के. स्टालिन ने भी कुछ ऐसे ही कदम उठाए थे।

2029 में जगन मोहन रेड्डी और कांग्रेस के सामने चुनावी लड़ाई काफी कठिन होने वाली है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे चंद्रबाबू नायडू और बीजेपी का मुकाबला करने के लिए आपस में गठबंधन कर पाते हैं या नहीं।

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‘चुनाव आयोग का हलफनामा भ्रामक, छलपूर्ण और चालबाजी से परिपूर्ण दस्तावेज’, कांग्रेस का EC पर हमला

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कांग्रेस ने विवादित SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अपने बचाव में दाखिल हलफनामे को भ्रामक, छलपूर्ण तथा चालबाजी से परिपूर्ण बताते हुए इसे खुद आयोग के लिए बेहद नुकसानदेह करार दिया है।

इसे SIR विवाद को ढ़ंकने का प्रयास बताते हुए कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि कि ”जब हम धोखा देने की शुरुआत करते हैं तो खुद ही एक उलझा हुआ जाल बुन लेते हैं मगर कुछ समय बाद यह किसी न किसी तरीके से सामने आ जाता है।” पार्टी ने फॉर्म-6 को लेकर भी आयोग पर झूठ बोलने का आरोप लगाया।

चुनाव आयोग ने साफ तौर पर धोखा देने की कोशिश की- जयराम

हलफनामे का कानूनी जवाब देने से पहले कांग्रेस की ओर से जयराम रमेश ने मंगलवार को सियासी निशाना साधते हुए कहा कि फॉर्म-6 में गैरकानूनी संशोधन कर चुनाव आयोग ने साफ तौर पर धोखा देने और शब्दों की बाजीगरी करने की कोशिश की है।

आयोग ने पहले दावा किया कि फॉर्म-6 के साथ जोड़ी गई नई घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया था। जबकि बाद में कोर्ट ने खुद इस दावे को खारिज किया।

दूसरा, अब चुनाव आयोग दावा कर रहा है कि नया डिक्लेरेशन फॉर्म अलग है और फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया। लेकिन यह भी एक धोखा है क्योंकि इस अनिवार्य डिक्लेरेशन को भरे बिना ऑनलाइन फॉर्म-6 जमा ही नहीं किया जा सकता था।

तीसरा, चुनाव आयोग स्टैंड लगातार बदल रहा है, 26 सितंबर 2026 को उसने कहा कि यह डिक्लेरेशन फॉर्म-6 के साथ जोड़ा गया है। अब कह रहा है कि यह फॉर्म-6 का हिस्सा नहीं है और ऐसा कर चुनाव आयोग रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स 1960 के खुलेआम उल्लंघन पर पर्दा नहीं डाल सकता।

एकतरफा फैसले से जुड़े विवाद की दिशा बदलने की कोशिश- जयराम

जयराम ने आरोप लगाया कि हलफनामे के जरिए चुनाव आयोग सीईसी ज्ञानेश कुमार के एकतरफा फैसले से जुड़े विवाद की दिशा बदलने की कोशिश कर रहा है कि SIR से जुड़े प्रमुख आदेशों को तीनों चुनाव आयुक्तों ने औपचारिक रूप से मंजूरी दी थी।

जबकि दोनों चुनाव आयुक्तों ने सीईसी के आदेशों पर हो रहे गंभीर उल्लंघनों और गैरकानूनी कार्रवाइयों के खिलाफ आधिकारिक रिकॉर्ड में आपत्तियां दर्ज कराई थीं जिन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। यह सर्वसम्मति से फैसले का नहीं एकतरफा निर्णय लेने का मामला है।

ईआरओ के फैसलों को पलटे जाने के सबूत- जयराम

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि ECINet के जरिए मतदाता सूचियों के गैरकानूनी केंद्रीकरण के मुद्दे को भी दोनों चुनाव आयुक्तों ने आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज कराया था। कई राज्यों से ईआरओ के फैसलों को पलटे जाने के सबूत सामने आए हैं जिसमें गोवा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्य शामिल हैं।

चुनाव आयोग के आईटी डिविजन की मनमानी को लेकर भी दोनों चुनाव आयुक्तों ने बार-बार चिंता जताते हुए कहा था कि वह अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर अपारदर्शी है तरीके से काम कर रहा है। लेकिन न तो उसके कामकाज में कोई बदलाव हुआ है और न ही कोई कार्रवाई की गई है।

जयराम ने कहा कि SIR की विनाशकारी प्रक्रिया में कई गैरकानूनी कार्रवाइयां और नियमों के उल्लंघन सामने आए हैं तथा हर राज्य में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 का दुरुपयोग किया गया है और यह हलफनामा सीईसी द्वारा की गई गंभीर गड़बड़ियों और कानूनी उल्लंघनों की एक और पुष्टि है।

जनता दर्शन में पुलिस अधीक्षक ने सुनी जन समस्याएं, संबंधित को शीघ्र निस्तारण हेतु दिए निर्देश

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श्रावस्ती। पुलिस अधीक्षक राहुल भाटी द्वारा पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित जनता दर्शन के दौरान आमजन की शिकायतों व समस्याओं को गंभीरता से सुना गया। इस दौरान जमीनी, साइबर, मार-पीट, महिला संबंधी, पारिवारिक विवाद एवं अन्य प्रकार के प्रकरणों से संबंधित प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए। प्रत्येक प्रकरण पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए संबंधित अधिकारियों को शीघ्र, निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए गए। जनता दर्शन के माध्यम से पुलिस प्रशासन और आमजन के मध्य संवाद स्थापित कर त्वरित न्याय की भावना को सशक्त करने का प्रयास किया जा रहा है।

SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में घमासान, सिंघवी ने कोर्ट से कहा- फाइल नोटिंग रखें; चीफ जस्टिस बोले- हमें सब पता है

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के हलफनामे का प्रति उत्तर दाखिल करने के लिए याचिकाकर्ता को 10 दिन का समय दे दिया है। इसके अलावा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाली राज्यसभा सांसद डोला सेन की याचिका पर आयोग को नोटिस जारी किया है।

मंगलवार को याचिकाकर्ता की ओर से मांग की गई कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि फाइल नोटिंग और आंतरिक पत्राचार संरक्षित रखे। हालांकि कोर्ट ने तत्काल कोई निर्देश नहीं दिया और कहा कि वह इसे जांचेगा यानी विचार करेगा। मामले में 17 नवंबर को फिर सुनवाई होगी।

ये निर्देश प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जोयमाल्या बाग्ची और वी. मोहना की पीठ ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाली राकेश कुमार सिंह व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान मंगलवार को दिये।

विपक्ष के 11 नेताओं ने दाखिल की याचिका

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्ष के 11 नेताओं ने भी याचिका दाखिल कर रखी है। इसके अलावा डोला सेन की भी याचिका है। चुनाव आयोग ने गत सोमवार शाम राकेश कुमार सिंह की याचिका का जवाब देते हुए सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया।

याचिकाकर्ताओं की ओर से लगाए आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि SIR पर सारे फैसले आयोग ने सर्वसम्मति से लिए और फार्म छह में कोई बदलाव नहीं किया। याचिकाकर्ता के वकीलों ने कहा कि चुनाव आयोग ने सोमवार देर शाम हलफनामा दाखिल किया है जिसका प्रति उत्तर दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाए।

कोर्ट ने 10 दिन का समय दे दिया

कोर्ट ने अनुरोध स्वीकार करते हुए 10 दिन का समय दे दिया। विकास सिंह, राहुल गांधी व अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट से आग्रह किया कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि वह फाइल नोटिंग और आंतरिक पत्राचार को संरक्षित रखे ताकि यह पता लगाया जा सके कि विवादित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

सिंघवी ने कहा कि यह पूरा मामला निर्णय लेने की प्रक्रिया आपसी परामर्श और इस बात पर निर्भर करता है कि फैसला सर्वसम्मति से लिया गया था या नहीं। इसलिए फाइल नोटिंग आदि को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। इन दलीलों पर चीफ जस्टिस ने कहा हमें सब पता है, हम इसकी जांच करेंगे।

टीएमसी सांसद डोला सेन की वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि चुनाव आयोग का हलफनामा याचिकाकर्ता के तर्कों की पुष्टि करता है। चुनाव आयोग ने फॉर्म छह के साथ छेड़छाड़ की है, और यहां तक कि प्रेस विज्ञप्ति जारी करके यह दावा भी किया कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे मंजूरी दी। आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने इन आरोपों को खारिज किया।

दीवाली के बाद 17 नवंबर को सुनवाई 

कोर्ट ने सेन की याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए सभी मामलों को एक साथ दीवाली के बाद 17 नवंबर को सुनवाई के लिए लगाने का निर्देश दिया। इस बीच चुनाव आयोग भी चाहेगा तो अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर सकता है। इस मामले में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की भी याचिकाएं हैं।

 

‘बेईमानी की तो ऐसा ठोकूंगा कि जीवन भर रखोगे याद’, नितिन गडकरी ने किसे दी चेतावनी?

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मुखर अंदाज के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मंगलवार को एक बार फिर कड़े तेवर दिखाए। उन्होंने बताया कि अब नेटवर्क सर्वे व्हीकल की रिपोर्ट के आधार पर हाईवे परियोजनाओं की समीक्षा शुरू की है।

दावा किया तीन-चार माह में वह सात-आठ सौ प्रोजेक्ट की समीक्षा कर चुके हैं। अब कहीं भी गड्ढा हो तो पता चल जाता है। इससे ठेकेदार डरे हुए हैं।

ऐसा ठोकूंगा कि जीवन भर नहीं भूल पाएंगे- गडकरी

गडकरी ने कहा कि अब अधिकारी कुछ छिपा नहीं सकते। ठेकेदार, कंसल्टेंट और अधिकारियों के कपड़े उतर गए हैं। जो हाथ में आता है, उनकी ठुकाई करता हूं। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि जहां बेईमानी होगी, वहां ऐसा ठोकूंगा कि जीवन भर नहीं भूल पाएंगे।

दरअसल, नेटवर्क सर्वे व्हीकल (एनएसवी) विशेष रूप से तैयार किया गया हाईटेक वाहन है। इसके माध्यम से हाईवे की निगरानी की जाती है। एनएसवी में लगे आधुनिक कैमरों, सेंसर और एआई तकनीक के माध्यम से हाईवे की गुणवत्ता, सुरक्षा आदि खामियों की रिपोर्ट तैयार होती है।

एनएचएआई ने इसके माध्यम से निगरानी के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी कर रखे हैं। वहीं, सीआईआई के कार्यक्रम में गडकरी ने आशंका जताई कि एनएसवी को भी मैनेज करने की कोशिश हो सकती है, इसलिए उन्होंने एक हाईवे की निगरानी तीन एनएसवी से कराने के लिए कहा है। तीनों बार रिपोर्ट तैयार होगी।

पुल के बीयरिंग और एक्सपेंशन ज्वॉइंट बनाने वाली सभी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने का दावा करते हुए बताया कि इसे लेकर नए नियम बनाए जा रहे हैं।

अच्छी सड़कों से नौ प्रतिशत पर आ गई लॉजिस्टिक दर

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने अच्छी सड़कों के महत्व को रेखांकित करते हुए दावा किया कि चीन में आठ, यूरोप और अमेरिका में 12 प्रतिशत लॉजिस्टिक दर है।

दो साल पहले भारत की दर 16 प्रतिशत थी, जो कि अब नौ प्रतिशत पर आ गई है। अच्छी सड़कों को अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी बताते हुए कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर पर सौ रुपये खर्च करने पर अर्थव्यवस्था पर 325 रुपये का सकारात्मक असर पड़ता है और जीडीपी बढ़ती है।

कई परियोजनाओं से उद्योग, कारोबार व आमजन को मिली सुविधा और प्रगति का दावा करते हुए उन्होंने बताया कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे शुरू होने से चारधाम यात्रियों की संख्या तीन गुणा बढ़ गई। अब अगले दो माह में दिल्ली-हरिद्वार एक्सप्रेसवे शुरू कर दिया जाएगा, जिसके बाद यह दूरी मात्र डेढ़ घंटे में तय की जा सकेगी।

रूबियो के भारत दौरे के बाद अब विदेश मंत्री जयशंकर जाएंगे अमेरिका; अटलांटा में G-20 बैठक में लेंगे हिस्सा

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के हालिया भारत दौरे के कुछ ही दिनों बाद भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस सप्ताहांत अमेरिका रवाना हो रहे हैं। जयशंकर 30-31 अक्टूबर को जॉर्जिया के अटलांटा में आयोजित जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे।

इस बैठक की मेजबानी स्वयं रुबियो करेंगे। बैठक का मुख्य एजेंडा आर्थिक सहयोग, साझा सुरक्षा चुनौतियां, नेविगेशन की स्वतंत्रता, ऊर्जा व खाद्य सुरक्षा तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना है। जी-20 शिखर सम्मेलन दिसंबर में मियामी में होने वाला है।

अमेरिका 2026 में जी-20 की अध्यक्षता संभाल रहा है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दिसंबर 14-15 को मियामी के ट्रंप नेशनल डोरल में लीडर्स समिट की मेजबानी करेंगे। अटलांटा बैठक को इस शिखर सम्मेलन से पहले महत्वपूर्ण मंत्रिस्तरीय स्तर की तैयारी माना जा रहा है।

जयशंकर की भागीदारी के दौरान भारत-अमेरिका द्विपक्षीय मुद्दों पर भी चर्चा होनी तय है। बैठक के साइडलाइन में क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) के विदेश मंत्रियों की बैठक भी हो सकती है। यह क्वाड विदेश मंत्रियों की इस वर्ष दूसरी बैठक होगी।

रुबियो कुछ दिन पहले भारत आए थे और मुंबई में जयशंकर से मुलाकात की थी। बैठक को दोनों देशों के मौजूदा असहज रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। दोनों मंत्रियों ने व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की।

व्यापार समझौते को लेकर दोनों पक्षों ने प्रगति का जिक्र किया था। रुबियो के दौरे के दौरान ऊर्जा सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया गया था। अब अटलांटा में जयशंकर की यात्रा उस चर्चा को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगी।

इस बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि आने वाले हफ्तों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की दो महत्वपूर्ण मुलाकातें संभावित हैं। नवंबर में फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान शिखर सम्मेलन (16-18 नवंबर) आयोजित हो रहा है। इस दौरान क्वाड लीडर्स समिट भी साइडलाइन में होने की पुष्टि रुबियो ने की है।

ट्रंप की आसियान समिट में भागीदारी की पुष्टि हो चुकी है और मोदी के भी मनीला जाने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात का मौका बन सकता है। इसके बाद दिसंबर में मियामी में जी-20 लीडर्स समिट के दौरान मोदी और ट्रंप की द्विपक्षीय बैठक की संभावना है।

अमेरिकी पक्ष ने पहले भी मोदी को आमंत्रित किया है। व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने, ऊर्जा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने जैसे मुद्दे इन बैठकों में प्रमुख रह सकते हैं।

 

यूपी-पंजाब समेत 5 राज्यों में चुनाव से पहले चलेगी तबादला एक्स्प्रेस, बड़े अधिकारियों का होगा ट्रांसफर

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व पंजाब सहित पांच राज्यों में 2027 के शुरूआत में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए चुनाव आयोग ने चुनाव कार्य से जुड़े ऐसे सभी अधिकारियों के तबादले के निर्देश दिए है, जो गृह जिले में पदस्थ है या फिर एक ही जिले में पिछले चार सालों में तीन सालों से पदस्थ है।

इस अवधि की गणना उत्तराखंड,पंजाब, गोवा और मणिपुर में 31 मार्च 2027 से होगी, जबकि उत्तर प्रदेश में 31 मई 2027 से इसकी गणना करने के निर्देश दिए गए है। आयोग ने इसके साथ ही पांचों चुनावी राज्यों के मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक से 30 नवंबर तक इसकी अमल रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है।

चुनाव आयोग की यह कवायद वैसे तो चुनाव से पहले अपनायी जाने वाली एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन इस बार आयोग ने अपनी तबादला नीति में एक अहम बदलाव भी किया है, जिसमें चुनाव प्रक्रिया से जुड़े ऐसे अधिकारियों व कर्मचारियों को भी हटाने के निर्देश दिए है, जो पिछले विधानसभा या उपचुनाव के दौरान उसी जिले में या फिर निर्वाचन क्षेत्र में पदस्थ थे।

आयोग के इस आदेश के दायरे में जिला चुनाव अधिकारी (डीईओ), रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ), अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, बीडीओ, संभागीय और नगर आयुक्त जैसे जिला स्तरीय अधिकारी आएंगे। इसके अतिरिक्त उपनिरीक्षक से लेकर आइजी व एडीजी स्तर के अधिकारी तथा आबकारी व परिवहन विभाग के उप निरीक्षक या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे।

आयोग ने राज्य मुख्यालयों में तैनात अधिकारियों को इस आदेश से छूट दी है। साथ ही चुनाव कार्य से न जुड़े कर्मचारियों, जैसे डाक्टर, इंजीनियर व शिक्षकों को भी इससे बाहर रखा है। साथ ही इन राज्यों में चल रहे मतदाता सूची के पुनरीक्षण को देखते हुए इसमें लगे अमले को फिलहाल अंतिम मतदाता सूची आने तक तबादले से दूर रखने के निर्देश दिए हैं।

आयोग ने जिन पांच राज्यों को लेकर यह आदेश दिया है, उनमें से उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को, उत्तराखंड विधानसभा का 28 मार्च 2027, पंजाब विधानसभा का 16 मार्च 2027, गोवा विधानसभा का 14 मार्च 2027 व मणिपुर विधानसभा का 13 मार्च 2027 को समाप्त हो रहा है।

वैसे तो विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही सभी राज्यों में चुनाव करा लिए जाते है, लेकिन जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत चुनाव आयोग इसे छह महीने पहले भी करा सकता है।