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शुक्र और चंद्रमा का शुभ संयोग, मेष से मीन चमकेंगे सितारे, पढ़ें राशिफल


आज मंगलवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास है। चंद्रमा आज वृषभ राशि में विराजमान हैं, जो हमें धैर्य और मानसिक शांति की ओर ले जाएंगे। साथ ही आज का मूलांक 6 है, जिसके स्वामी ‘शुक्र’ हैं। शुक्र को ऐश्वर्य, कला और प्रेम का कारक माना जाता है, इसलिए आज का दिन रचनात्मक कार्यों और रिश्तों को सुधारने के लिए सबसे उत्तम है।

 

विशेषज्ञों के अनुसार, आज मंगल और शुक्र की ऊर्जा का जो तालमेल बन रहा है, वह वित्तीय फैसलों के लिए बहुत भाग्यशाली साबित हो सकता है। अगर आप सकारात्मक रहकर सही दिशा में छोटे प्रयास भी करते हैं, तो आपको इसके बड़े और दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

 

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राशियां क्या करें और क्या न करें?

मेष राशि 

आज का दिन नई ऊर्जा लेकर आया है। नए प्रोजेक्ट्स की शुरुआत के लिए समय अनुकूल है।

क्या करें: करियर में नई पहल करें। परिवार के साथ समय बिताएं।

क्या न करें: जल्दबाजी में पैसा निवेश न करें। गुस्से पर काबू रखें।

वृषभ राशि

चंद्रमा आपकी ही राशि में हैं, जिससे सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी।

क्या करें: भविष्य की आर्थिक योजनाएं बनाएं। पार्टनर के साथ रिश्ते सुधारें।

क्या न करें: स्वभाव में जिद्दीपन न लाएं। फालतू के खर्चों से बचें।

मिथुन राशि

आपकी बुद्धि और बातचीत के तरीके से आज रुके हुए काम बनेंगे।

क्या करें: लोगों से मेल-जोल बढ़ाएं और अधूरे कागजी काम पूरे करें।

क्या न करें: सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा न करें और किए गए वादे न तोड़ें।

कर्क राशि

मानसिक शांति और घरेलू खुशियों का दिन है।

क्या करें: घर की सजावट पर ध्यान दें। माता-पिता का आशीर्वाद लें।

क्या न करें: खुद को अकेला महसूस न होने दें। सेहत को नजरअंदाज न करें।

सिंह राशि

आपका आत्मविश्वास आज सातवें आसमान पर रहेगा। नेतृत्व करने का मौका मिलेगा।

क्या करें: बड़े और कड़े फैसले लें। रचनात्मक कार्यों में रुचि दिखाएं।

क्या न करें: बातचीत में अहंकार न लाएं। फालतू बहस से दूर रहें।

कन्या राशि

आज अनुशासन और स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है।

क्या करें: अपने कार्यों की लिस्ट बनाएं। खान-पान में सावधानी बरतें।

क्या न करें: हर काम में कमियां न निकालें। दूसरों की बुराई से बचें।

तुला राशि

शुक्र की कृपा से आज आपके व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ेगा।

क्या करें: कला या फैशन के क्षेत्र से जुड़े काम करें। जीवनसाथी को समय दें।

क्या न करें: कोई भी फैसला लेने में देरी न करें। किसी को झूठी उम्मीद न दें।

 

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वृश्चिक राशि

आज आपकी आंतरिक शक्ति आपको लाभ दिलाएगी।

क्या करें: पुराने निवेश की जांच करें। मानसिक शांति के लिए योग करें।

क्या न करें: मन में कड़वाहट न रखें। कोई बड़ा रिस्क लेने से बचें।

धनु राशि

ज्ञान और यात्रा के योग बन रहे हैं। भाग्य आपका साथ देगा।

क्या करें: पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान दें। किसी धार्मिक यात्रा की योजना बनाएं।

क्या न करें: अपनी सोच को संकुचित न रखें। विवादों में न पड़ें।

मकर राशि

मेहनत का मीठा फल मिलने का समय आ गया है।

क्या करें: ऑफिस के काम समय पर निपटाएं। बचत करने की आदत डालें।

क्या न करें: काम के बोझ से खुद को थकाएं नहीं। नियमों का उल्लंघन न करें।

कुंभ राशि

दोस्तों और सहयोगियों के साथ आज दिन अच्छा बीतेगा।

क्या करें: नई टेक्नोलॉजी को अपनाएं। टीम के साथ मिलकर काम करें।

क्या न करें: अकेले जरूरी निर्णय न लें। पुरानी गलतियों से सीखें।

मीन राशि

भावनात्मक रूप से आज आप काफी मजबूत महसूस करेंगे।

क्या करें: जरूरतमंदों की मदद करें। संगीत या कला में मन लगाएं।

क्या न करें: किसी भी बात को लेकर भ्रम में न रहें। आलस्य का त्याग करें।


डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जानकारी के लिए ज्योतिषि से संपर्क करें।

पाकिस्तान की अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक, 400 की मौत; 250 घायल


पाकिस्तान की वायु सेना ने सोमवार रात को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर एयरस्ट्राइक करके जोरदार हमला कर दिया। तालिबान सरकार ने आरोप लगाते हुए कहा है कि पाकिस्तान ने उस अस्पताल को निशाना बनाया, जहां नशे के आदी लोगों का इलाज किया जाता है। इस हमले में 400 से ज्यादा लोग मारे गए हैं।

 

अफगानिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता शराफत जमान ने भी मरने वालों की संख्या 400 बताई है। उन्होंने कहा कि नशे के आदी लोगों के लिए बनाया गया हॉस्पिटल पूरी तरह से तबाह हो गया। उन्होंने कहा कि मरने वालों की संख्या 400 है और 250 लोग घायल हैं।

 

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पाकिस्तान का गोलमोल जवाब

बताया गया है कि यह हमला रात करीब 9 बजे अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में जोरदार धमाके हुए। हमले का केंद्र काबुल का शहर-ए-नौ और वजीर अकबर खान इलाके थे। हालांकि, पाकिस्तान ने इस आरोप से इनकार करते हुए कहा है कि उसके हमले मिलिट्री और आतंकवादी ठिकानों को टारगेट करके किए गए हैं।

 

 

 

पहले सीमा पर हुी गोलीबारी

इस हमले से कुछ घंटे पहले अफगानिस्तान पाकिस्तान सीमा पर दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी हुई, जिसमें अफगानिस्तान में चार लोग मारे गए। इस गोलीबारी के बाद पाकिस्तान ने बड़ी एयरस्ट्राइक कर दी। 

 

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अफगानिस्तान सरकार ने क्या कहा?

अफगानिस्तान के सरकारी प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने ‘एक्स’ पर हमले की निंदा करते हुए कहा कि यह अफगानिस्तान की सीमा का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि मारे गए और घायल हुए लोगों में से अधिकतर वे थे जिनका नशे की लत छुड़ाने का इलाज किया जा रहा था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रवक्ता मोशर्रफ जैदी ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि काबुल में किसी भी अस्पताल को निशाना नहीं बनाया गया।

कौन होगा बिहार का अगला CM? नीतीश कुमार ने कंधे पर हाथ रखकर कर दिया इशारा


बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को जमुई पहुंचे। यहां उन्होंने 602 करोड़ की लागत से तैयार 102 योजनाओं का उद्घाटन किया। सीएम नीतीश कुमार ने साल 2005 से अब तक की अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। वहीं बिना नाम लिए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछले सरकार में लोग शाम के बाद घर से बाहर निकलने से डरते थे। अब हमारी सरकार में सब लोग घर से बाहर रहते थे। कानून व्यवस्था बेहतर है।  

 

नीतीश कुमार ने केंद्र की मोदी सरकार की जमकर तारीफ की और कहा कि केंद्र सरकार देशभर में बहुत काम कर रही है। बिहार को भी बहुत सहयोग दे रही है। नीतीश कुमार ने कहा कि अगले पांच वर्षों में विकास के कार्य को तेज किया जाएगा। 

 

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मंच से नीतीश का बड़ा इशारा

इस बीच नीतीश कुमार ने मंच से बड़ा इशारा किया। उन्होंने मंच पर मौजूद नेताओं की तरफ इशारा करके जमुई की जनता से कहा कि इन लोगों की वजह से आपका भी काम बढ़िया हो रहा है। आगे भी बढ़िया होगा। वह सभी लोगों से हाथ उठाने को कहते हैं। इसके बाद नीतीश कुमार सम्राट चौधरी के पास जाते हैं और कंधे पर हाथ रखकर लोगों से उनका समर्थन करने की बात करते हैं।  

पिछली सरकार में प्रदेश का बुरा हाल था: नीतीश

‘समृद्धि यात्रा’ के क्रम में नीतीश कुमार ने जमुई में कहा कि 24 नवंबर 2005 को पहली बार एनडीए सरकार बनी थी। तब से बिहार में कानून का राज्य है। हम लगातार विकास के कार्य में लगे हुए हैं, लेकिन जब हमारी सरकार बनी और उसके पहले वाली जो सरकार थी, उस वक्त बहुत बुरा हाल था। लोग शाम के बाद घर से बाहर नहीं निकलते थे। यही हाल था। मगर आज कल क्या ऐसा होता है? कोई घर में नहीं रहता है। उस समय हम केंद्र में थे। जब अपने इलाके में जाते थे तो सभी के घर बंद मिलते थे। पहले ऐसा हाल था।

 

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‘बिहार में शांति और भाईचारा का माहौल’

नीतीश कुमार ने आरोप लगाया कि पहले की सरकार में हिंदू-मुस्लिम विवाद होता था। पढ़ाई भी बहुत कम होती थी। बहुत कम बच्चे पढ़ते थे। पहले इलाज का पूरा इंतजाम नहीं था। सड़कों का बुरा हाल था। बिजली बहुत कम जगह थी। 2005 में हमारी सरकार बनने के बाद सभी के हित में काम किया गया। अब किसी प्रकार का डर और भय का वातावरण नहीं। राज्य में प्रेम, भाईचारा और शांति का माहौल है।

 

नीतीश कुमार ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने मुस्लिम के लिए कुछ नहीं किया। हमारी सरकार ने कब्रिस्तान में चहारदीवारी बनवाई। हिंदू मंदिरों की घेराबंदी की। इससे चोरी आदि की घटनाओं पर रोक लगी। शुरु में हम लोगों ने मुस्लिमों का काम किया और बाद में जब हिंदुओं का पता चला तो उनका भी काम किया। हमारी सरकार ने बड़ी संख्या में स्कूल खोले और नियोजित शिक्षकों की भर्ती की। लड़के-लड़कियों के लिए पोशाक और साइकिल योजना चलाई।

 

घंटों रील्स देखने की आदत दिमाग के लिए खतरनाक, फोकस में कमी, स्टडी में दावा


आज के समय में ज्यादातर लोग अपने फोन पर रील्स और शार्ट वीडियो देखना पसंद करते हैं। ज्यादातर लोग अपना ज्यादातर समय रील्स देखने में बिता देते हैं। 5 मिनट के लिए फोन पर स्क्रॉलिंग शुरू करते हैं और कब घंटे बीत जाते हैं पता नहीं चलता है। लोग रात को सोने से पहले घंटों रील स्क्रॉल करते हैं। इसे माइंडलेस स्क्रोलिंग कहा जाता है। नई रिसर्च बताती है कि यह आदत हमारे दिमाग के लिए नुकसानदायक हो सकती है।


हाल ही में एक स्टडी हुई है जिसका विषय है कि मोबाइल फोन पर शार्ट वीडियो देखने से ध्यान में कमी आती है। यह स्टडी Frontiers in Human Neuroscience में पब्लिश हुई है।

 

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स्टडी में क्या पाया गया?

यह रिसर्च Zhejiang University (चीन) के वैज्ञानिकों ने किया है। उन्होंने स्टडी में 48 स्वस्थ लोगों को प्रयोग शामिल हो गया है और उनके दिमाग की गतिविधि को ईसीजी टेस्ट से मापा गया। स्टडी में पाया गया कि जो लोग ज्यादा शॉर्ट वीडियो देखते हैं उनमें ध्यान लगाने, योजना बनाने की क्षमता कम पाई गई है। ज्यादा वीडियो देखने वालों में आत्म नियंत्रण कम पाया गया। 

 

इसके अलावा जो लोग बहुत अधिक रील्स देखते हैं वे लंबे समय तक फोक्स नहीं कर पाते हैं। आपका ध्यान जल्दी भटक सकता है। मनोवैज्ञानिक इस स्थिति को ‘पॉपकॉर्न ब्रेन’ बता रहे हैं। इसमें दिमाग तेज, मजेदार और लगातार बदलने वाले कॉन्टेंट का आदी हो जाता है। जैसे ही कुछ स्लो या बोरिंग होता है तो दिमाग उसे पसंद नहीं करता है। इसकी वजह से ध्यान देने की क्षमता कम हो जाती है। पढ़ाई या काम में मन नहीं लगता। बार-बार मोबाइल चेक करने की आदत बढ़ जाती है।

 

अधिक तनाव और कम आत्म नियंत्रण– 98000 से ज्यादा लोगों तो स्टडी में शामिल किया गया जिसमें पाया गया कि ज्यादा स्क्रॉल करने की वजह से फोकस कम होता है और तनाव बढ़ता है।  

 

नींद पर पड़ता है प्रभाव- देर रात तक फोन चलाने से दिमाग को लगता है कि अभी दिन का समय है जिससे नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इससे आपकी नींद बाधित होती है।

 

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कैसे बढ़ाएं अपना ध्यान?

  • अपने स्क्रीन टाइम को सेट करें।
  • शार्ट वीडियो को कम से कम देखें।
  • रात को सोने से पहले रील देखने से बचना चाहिए।
  • रात को सोने से पहले अगले दिन का प्लान तैयार कर लें।

बिहार के ताराचंडी धाम और कामाख्या में क्या रिश्ता है?


बिहार के सासाराम के रोहतास जिले में कैमूर की पहाड़ियों के बीच एक ऐसा अनोखा मंदिर है जिसकी महिमा की चर्चा देश के कोने-कोने में होती है। हम बात कर रहे हैं मां ताराचंडी धाम की जिसे सती के 51 शक्तिपीठों में से एक होने का गौरव मिला हुआ है। मान्यता है कि जब भगवान विष्णु ने अपने चक्र से माता सती के पार्थिव शरीर के हिस्से किए थे, तब यहां उनकी दाहिनी आंख यानी ‘तारा’ गिरी थी, जिससे इस स्थान को इसका पावन नाम मिला।

 

यह धाम केवल आम श्रद्धालुओं के लिए ही नहीं बल्कि तंत्र साधना करने वालों के लिए भी बहुत खास माना जाता है। इसका सीधा संबंध असम के मशहूर कामाख्या मंदिर से जोड़ा जाता है। जानकारों का कहना है कि पूरे भारत में जो चार ‘मुद्रा पीठ’ हैं, उनमें कामाख्या और ताराचंडी का स्थान सबसे ऊपर आता है। जहां कामाख्या में महामुद्रा की पूजा होती है, वहीं यहां माता के नेत्र रूप की प्रधानता है, जो इसे एक शक्तिशाली आध्यात्मिक केंद्र बनाता है।

 

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मंदिर की खासियत

दिव्य दृष्टि का केंद्र: यहां माता की पूजा ‘कुमारी’ और ‘चंडी’ दोनों रूपों में की जाती है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि यहां मत्था टेकने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन में एक नई और दिव्य दृष्टि का संचार होता है।

 

प्रकृति और आस्था का संगम: इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां कोई बनावटी मूर्ति नहीं है। एक विशाल शिलाखंड (पत्थर) पर उभरी प्राकृतिक आकृति की ही पूजा की जाती है। मंदिर के अंदर जल रही अखंड ज्योति को भक्त साक्षात मां का रूप मानते हैं।

 

साधना का केंद्र: नवरात्रि के दौरान यहां का माहौल बिल्कुल कामाख्या जैसा ही नजर आता है। यहां देश भर से साधक तांत्रिक सिद्धियों के लिए जुटते हैं। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, कामाख्या और ताराचंडी के बीच एक गहरा ऊर्जा चक्र काम करता है, जो इसे तंत्र साधना के लिए सबसे उपयुक्त स्थान बनाता है।

 

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पर्यटकों की पहली पसंद: सासाराम का यह इलाका पहाड़ियों और झरनों से घिरा हुआ है, जो इसे धार्मिक यात्रा के साथ-साथ पर्यटन के लिए भी खास बनाता है। खासकर सावन के महीने में यहां लगने वाले ‘सावणी मेले’ में लाखों की भीड़ उमड़ती है।

 

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

हफ्ते में 4 दिन काम, बुधवार को भी छुट्टी, श्रीलंका में दिख रहा गैस की कमी का असर


अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर पूरी दुनिया में दिखाई दे रहा है। युद्ध के कारण पूरी दुनिया की तेल सप्लाई पर असर पड़ रहा है, जिसके चलते तेज की कीमतों में उछाल और कई जगहों पर भारी कमी भी देखने को मिल रही है।  इस बीच सोमवार को श्रीलंका ने बुधवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया और अब हफ्ते में सिर्फ चार दिन ही काम होगा। यह फैसला मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण पैदा हुए तेल संकट से निपटने के लिए लिया गया है। अभी तक श्रीलंका में 5 दिन वर्किंग होते थे लेकिन अब सिर्फ 4 दिन काम करना पड़ेगा। 

 

श्रीलंका सरकार के एक सीनियर अधिकारी प्रभात चंद्रकीर्ति ने कहा कि 18 मार्च से हर बुधवार को सार्वजनिक छुट्टी घोषित करने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि यह नियम स्कूलों, यूनिवर्सिटी और न्यायपालिका पर लागू होगा। हालांकि, हेल्थ केयर, पोर्ट्स,वाटर सप्लाई और सीमा शुल्क विभागों पर यह नियम लागू नहीं होगा। श्रीलंका सरकार आने वाले दिनों में इस तरह के अन्य कदम भी उठा सकती है। 

 

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तेल की खपत कम करने की अपील

 

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण पूरी दुनिया में तेल संकट आ गया है। सरकार ने कहा कि परिवहन में इस्तेमाल होने वाले तेल की खपत कम करने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया है। इसके साथ ही सरकार ने लोगों से अपील की है कि  पेट्रोल-डीजल का इस्‍तेमाल संभल कर करें।

प्राइवेट सेक्टर में भी लागू होगा फैसला?

तेल की कमी के कारण सरकार ने चार दिन वर्किंग को सिर्फ सराकरी सेक्टर तक ही सीमित नहीं रखा है। सरकार ने प्राइवेट कंपनियों से भी अपील की है  कि वे ऊर्जा बचाने के लिए अपने वर्किंग डेज कम करने या वर्क फ्रॉम होम जैसे विकल्पों पर विचार करें। हालांकि, देश की व्यवस्था न ठप हो, इसके लिए कुछ विभागों जैसे स्वास्थ्य सेवाएं, बंदरगाह, जल आपूर्ति और सीमा शुल्क को इस कटौती से बाहर रखा गया है।  

 

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QR कोड से मिलेगा तेल

श्रीलंका में तेल की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकात है कि सरकार अब तेल की सप्लाई पर निगरानी रखने लगी है। सरकार ने तेल के वितरण पर कड़ा पहरा लगा दिया है। तेल की निगरानी बढ़ाते हुए डिजिटल राशनिंग सिस्टम लागू कर दिया गया है। हर एक गाड़ी के लिए एक हफ्ते का कोटा तय कर दिया गया है। उपभोक्ताओं को पेट्रोल पंप पर QR कोड दिखाना होगा। यह फैसला कालाबाजारी को रोकने के लिए और सीमित स्टॉक में ज्यादा लोगों को सुविधा देने के लिए लिया गया है। 

‘टपोरी की तरह आते हैं’, कंगना रनौत ने राहुल गांधी पर यह क्या कह दिया?


हाल ही में 84 पूर्व नौकरशाहों और 116 पूर्व सैनिकों के साथ चार वकीलों ने एक खुला पत्र लिखा। इसमें संसद के मकर द्वार पर राहुल गांधी के चाय और बिस्किट खाने की आलोचना की गई। पूर्व अधिकारियों ने राहुल गांधी से माफी मांगने की भी अपील की। अब हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। कंगना ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के व्यवहार को ‘टपोरी जैसा’ बताया। उनका आरोप है कि राहुल गांधी के आने से महिलाएं असहज महसूस करती हैं। 

 

कगंना रनौत ने कहा, ‘हम महिलाओं को उनको देखकर बहुत असहज महसूस होता है, क्योंकि वे एकदम टपोरी की तरह आते हैं। किसी से भी ये-तू कहकर तू-तड़ाक करते हैं। जिस तरह से वह पेश आते हैं, वह बहुत ही असहज करने वाला है। अगर कोई इंटरव्यू दे रहा होता है तो वह हूटिंग कॉल करते हैं। उन्हें अपनी बहन का आचरण और व्यवहार देखना चाहिए। उनका व्यवहार बहुत अच्छा है, लेकिन राहुल गांधी खुद ही एक शर्मिंदगी का कारण है।’

 

 

 

 

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राहुल गांधी के बारे में ऐसा बोलना गलत: प्रियंका चतुर्वेदी

शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी से जब कंगना रनौत के बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘निजी या सियासी असहमतियां हो सकती हैं, लेकिन इस तरह से राहुल जी के बारे में बोलना, मैं मानती हूं कि गलत है। मैंने राहुल गांधी जी के साथ 10 साल काम किया है। हो सकता है कि मेरी राह अलग हो गई। मगर मैंने महिलाओं के प्रति उनके सम्मान और प्रतिबद्धता को देखा है। ऐसे व्यक्ति पर इस तरह के आरोप लगाना थोड़ा हास्यास्पद है। वे ऐसे परिवार से आते हैं, जहां महिलाएं नेता रही हैं। खुद इंदिरा गांधी जी हो, सोनिया गांधी जी हो या प्रियंका गांधी वाड्रा। उन पर इस तरह से आरोप लगाना हास्यापद है। आप सियासी असहमतियां करें। कड़ी से कड़ी निंदा कीजिए, लेकिन यह आरोप लगाना बिल्कुल गलत है।’

 

 

 

 

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क्या है मामला?

12 मार्च को राहुल गांधी ने संसद के मकर द्वार की सीढ़ियों पर अपने साथी सांसदों के साथ चाय और बिस्किट आते दिखे थे। इस पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद समेत 84 पूर्व नौकरशाह, 116 पूर्व सैनिक और चार वकीलों ने एक खुला पत्र लिखा था। इसमें राहुल गांधी के व्यवहार को बेहद चिंताजनक बताया गया और कहा गया कि यह संसदीय अधिकार की जानबूझकर अवहेलना को दिखाता है। एसपी वैद का कहना है कि राहुल गांधी का व्यवहार विपक्ष के नेता के तौर पर उचित नहीं है। उनका यह व्यवहार विशेषाधिकार और अहंकार की भावना को दिखाता है। उन्होंने राहुल गांधी से माफी मांगने का अनुरोध भी किया। 

होली पर रंग खरीदने से पहले ऐसे करें असली और नकली की पहचान


होली को रंगों का त्योहार कहा जाता है। इस दिन लोग अपने दोस्तों और परिजनों के साथ होली खेलते हैं। घर पर तरह-तरह के स्वादिष्ट पकवान बनते हैं। इस बार होली 3 मार्च को मनाई जाएगी। होली के समय में बाजार में विभिन्न प्रकार के रंग और गुलाल मिलने लगते हैं। इन गुलाल और रंगों में हानिकारक केमिकल मिलाया जाता है जो आंखों और त्वचा के लिए नुकसानदायक होता है।

 

इन रंगों में सिंथेटिक रंग के साथ लीड, मरकरी, क्रोमियम के छोटे कण मिलाया जाते हैं। इन केमिकल वाले रंगों को लगाने से लोगों को त्वचा में खुजली, चकते और आंखों में जलन की समस्या होती है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि असली और नकली रंगों की पहचान कैसे करें?

 

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ऐसे करें असली और नकली रंग की पहचान?

रंग की चमक और बनावट- बहुत ज्यादा चमकने वाले गुलाल में अक्सर केमिकल मिलाया जाता है जिसका टेक्सचर थोड़ा खुरदरा होता है। वहीं, प्राकृतिक गुलाल में हल्का मैट फिनिश होता है। ये रंग छूने में बहुत मुलायम होते हैं।

 

खुशबू से समझें सच्चाई- अगर रंग में पेट्रोल, केरोसिन की गंध आ रही है तो उसमें केमिकल मिलाया गया है। जबकि प्राकृतिक गुलाल में हल्की हल्की खुशबू होती है और उसमें किसी तरह की कोई गंध नहीं होती है।

 

पानी में घोलकर देखें- घर लाने के बाद रंग को थोड़ा सा पानी में डालकर घोलकर देखें। अच्छा रंग आसानी से घुल जाता है जबकि घटिया क्वॉलिटी का रंग ऊपर या फिर नीचे बैठ जाता है।

 

रंग को रगड़कर देखें- गुलाल और रंग को अपनी हथेलियों के बीच रगड़ें। केमिकल वाला रंग हाथों में खुरदरा लगता है। जबकि प्राकृतिक रंग या गुलाल बहुत मुलायम लगेगा।

 

लेबल चेक करें- रंग या गुलाल के पैकेट को खरीदने से पहले उस पर 100% नेचुरल, ऑर्गेनिक और इको-फ्रेंडली लिखा होना चाहिए। आप हल्दी, मेहंदी और फूलों के रंगों वाले प्रॉकृतिक तत्वों का इस्तेमाल होना चाहिए।

 

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होली खेलने से पहले अपनाएं ये टिप्स

  • तेल लगाएं- होली लगाने से पहले त्वचा और बालों पर नारियल और सरसों का तेल लगाएं। तेल लगाने के बाद रंग ज्यादातर देर तक नहीं टिकता है।
  • कॉन्टैक्ट लेंस न पहनें- होली खेलते समय कॉन्टैक्ट लेंस बिल्कुल न पहनें। धूप से बचने के लिए चश्मा लगाएं। चश्मा आंखों को धूप से बचाएं।
  • फुल स्लीव्स कपड़े पहनें- होली खेलते समय शरीर को पूरा ढककर रखें। फुल स्लीव्स शर्ट और लंबी पैंट पहनें।

जिस मठ के शंकराचार्य हैं अविमुक्तेश्वरानंद, वहां होता क्या है?


उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मास यानी जनवरी के महीने में मौनी अमावस्या के दिन त्रिवेणी संगम में स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। इसी दौरान कुंभ मेले का आयोजन भी होता है। सनातन धर्म में मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन संगम में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

 

 इसी मौनी अमावस्या के दिन ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती भी त्रिवेणी संगम में स्नान के लिए पहुंचे थे। इस दौरान उनके समर्थकों और पुलिस के बीच किसी बात को लेकर झड़प हो गई। इस घटना से नाराज होकर शंकराचार्य बिना गंगा स्नान किए ही मठ लौट गए। इसी घटना के बाद ज्योतिर्मठ देशभर में चर्चा का विषय बन गया। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि ज्योतिर्मठ आखिर है क्या, इसकी शुरुआत कब हुई और मठ के संस्थापक कौन है। आइए जानते हैं पूरी कहानी।

 

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कौन हैं शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद?

 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती वर्तमान में ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य हैं। वे उत्तराखंड में स्थित ज्योतिर्मठ के प्रमुख आचार्य हैं। उनका जन्म 15 अगस्त 1969 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के ब्राह्मणपुर गांव में हुआ था। संन्यास लेने से पहले उनका नाम उमाशंकर उपाध्याय था। उन्होंने वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री और आचार्य की शिक्षा प्राप्त की। 15 अप्रैल 2003 को उन्होंने दंड संन्यास की दीक्षा ली। उनके गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने उन्हें नया नाम अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रदान किया।

 

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ज्योतिर्मठ की स्थापना और इतिहास

 

ज्योतिर्मठ की स्थापना आदि शंकराचार्य ने लगभग 8वीं शताब्दी में की थी। यह मठ उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। ज्योतिर्मठ के पहले आचार्य आदि शंकराचार्य के शिष्य तोटकाचार्य थे। आदि शंकराचार्य ने भारत के चारों कोनों में चार मठों की स्थापना की थी जैसे ज्योतिर्मठ (उत्तर) ,श्रृंगेरी मठ (दक्षिण) ,द्वारका मठ (पश्चिम),और गोवर्धन मठ (पूर्व) में स्थापना की गई । इन सभी मठों में मुख्य रूप से अद्वैत वेदांत दर्शन का प्रचार-प्रसार किया जाता है।

 

कुछ समय तक ज्योतिर्मठ व्यवस्थित रूप से चलता रहा, लेकिन बाद में यह लगभग निष्क्रिय हो गया। वर्ष 1941 में स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती ने ज्योतिर्मठ का पुनः पुनर्गठन किया। उनके निधन के बाद 1953 में उत्तराधिकार को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो आज तक चला आ रहा है। कथित वसीयत के आधार पर कृष्ण बोधाश्रम को गद्दी सौंपी गई। वर्तमान में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ज्योतिर्मठ के आचार्य हैं।

कौन थे आदि शंकराचार्य?

आदि शंकराचार्य का जीवन अद्भुत और अलौकिक घटनाओं से भरा हुआ था। उनका जन्म लगभग 2500 वर्ष पूर्व केरल के कालड़ी गांव में हुआ था। उनके पिता शिवगुरु और माता आर्याम्बा थे। संतान प्राप्ति के लिए माता-पिता ने भगवान शिव की आराधना की, जिसके फलस्वरूप शंकराचार्य का जन्म हुआ।बचपन से ही वे असाधारण प्रतिभा के धनी थे। कहा जाता है कि बहुत कम उम्र में ही वे अपनी मातृभाषा में दक्ष हो गए थे और शास्त्रों का गहन अध्ययन करने लगे थे। आठ साल की उम्र में उन्होंने वेदों का ज्ञान प्राप्त कर लिया था और बारह साल तक सभी प्रमुख शास्त्रों में निपुण हो गए थे।

 

उन्होंने नर्मदा तट पर गोविंदपादाचार्य से दीक्षा ली और ‘शंकर भगवत्पाद’ कहलाए। महज 16 साल की उम्र में उन्होंने प्रसिद्ध शांकर भाष्य की रचना की, जिसे आज भी विद्वान अत्यंत श्रेष्ठ ग्रंथ मानते हैं। आदि शंकराचार्य ने पूरे भारत की चार बार पदयात्रा कर अद्वैत वेदांत दर्शन का प्रचार किया और बौद्ध मत सहित अन्य विरोधी विचारधाराओं का तर्क के माध्यम से खंडन किया। उन्होंने उपनिषदों, भगवद्गीता और ब्रह्मसूत्र पर महत्वपूर्ण भाष्य लिखे और सनातन धर्म को फिर से प्रतिष्ठित किया।

 

ज्योतिर्मठ की साधना और परंपरा

 

ज्योतिर्मठ में संत मुख्य रूप से अद्वैत वेदांत दर्शन का अध्ययन और प्रचार करते हैं। यहां गुरु-शिष्य परंपरा का पालन किया जाता है। वरिष्ठ संत नए संन्यासियों को दीक्षा देते हैं, जो दशनामी संप्रदाय से संबंधित होते हैं। दशनामी संप्रदाय के संत भगवा वस्त्र धारण करते हैं, शरीर पर भस्म लगाते हैं और 54 या 108 रुद्राक्ष की माला पहनते हैं। इनमें से कुछ संत नागा साधु होते हैं, जो निर्वस्त्र रहते हैं और कुंभ मेले में विशेष आकर्षण का केंद्र बनते हैं।ज्योतिर्मठ में तप, साधना और ज्ञान के माध्यम से सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार किया जाता है।

ईरान के सिक्योरिटी चीफ को ही मार गिराया? इजरायल के दावे से मची खलबली


इज़रायली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रात को किए गए हमले में ईरान के सिक्योरिटी चीफ़ अली लारीजानी के भी निशाने पर आने की खबर है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि लारीजानी की जान चली गई है या कि वह सिर्फ घायल हुए हैं। रात में ईरान पर इज़रायल ने हमले किए गए थे।

 

इज़राइल के डिफ़ेंस मिनिस्टर, इज़राइल काट्ज़ ने भी दावा किया है कि लारीजानी मारे गए हैं लेकिन ईरान ने अभी तक इन रिपोर्ट्स पर कोई कमेंट नहीं किया है। लारीजानी, एक पूर्व न्यूक्लियर नेगोशिएटर है जो ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी के तौर पर काम करते हैं। उन्हें ईरान के पावर स्ट्रक्चर में सबसे असरदार लोगों में से एक माना जाता है।

 

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खामेनेई के करीबी साथी

अगर उनकी मौत कन्फ़र्म हो जाती है, तो लारीजानी सुप्रीम लीडर, आयतुल्ला अली खामेनेई के बाद मारे जाने वाले सबसे सीनियर ईरानी अफ़सर होंगे, जिनकी मौत युद्ध के पहले दिन हुई थी। लारीजानी अली खामेनेई के करीबी साथी थे।

खबर है कि उन्हें आखिरी बार शुक्रवार को तेहरान में कुद्स डे की रैलियों के दौरान पब्लिक में देखा गया था। उस दिन बाद में, US ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े 10 लोगों की लिस्ट में शामिल लारीजानी समेत सीनियर ईरानी मिलिट्री और इंटेलिजेंस अधिकारियों की जानकारी देने पर $10 मिलियन तक का इनाम देने की पेशकश की।


कई इज़रायली मीडिया आउटलेट्स ने यह भी कहा कि हमलों में बासिज रेजिस्टेंस फोर्स के हेड घोलमरेज़ा सुलेमानी और बासिज के दूसरे सीनियर लोगों को टारगेट किया गया था और हमलों के नतीजे का अभी भी पता लगाया जा रहा है। हालांकि, ईरान ने मिलिशिया लीडर की मौत को तुरंत नहीं माना।

लारीजानी ने जारी किया बयान

इस बीच, ईरान के सरकारी मीडिया, प्रेस टीवी ने मंगलवार को लारीजानी के नाम से एक बयान जारी किया, जिसमें ईरान के सिक्योरिटी चीफ ने US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की। बयान में कहा गया, ’47 साल पहले, ईरान की इस्लामिक क्रांति में लोगों की जीत से एक दिन पहले, पहलवी शासन के प्रधानमंत्री ने दावा किया था कि सड़कों पर नारे लगा रही भारी भीड़ की आवाज़ असली नहीं थी, बल्कि एक टेप रिकॉर्डिंग की आवाज़ थी! अब ट्रंप ईरानी शहरों में लाखों लोगों की एंटी-अमेरिकन और एंटी-इज़राइल सभाओं के बारे में कहते हैं कि ये तस्वीरें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हैं।’

 

इसमें आगे कहा गया, ‘एपस्टीन आइलैंड के बचे हुए हिस्सों पर ईरानी लोगों की ऐतिहासिक जीत करीब है।’

 

ये रिपोर्ट ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी के मुस्लिम दुनिया को एक संदेश जारी करने के एक दिन बाद आईं, जिसमें कहा गया था कि तेहरान US और इज़रायल के खिलाफ अपनी लड़ाई में ‘दृढ़’ है।

 

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इसके अलावा यह भी दावा किया जा रहा है कि उन्होंने एक पोस्ट भी किया है। इजरायली मिलिट्री के मुताबिक जो स्ट्राइक किए गए उसका मुख्य टारगेट लारीजानी ही थे। जब ईरान पर हमला हुआ, तो लारीजानी ने मुस्लिम-बहुल देशों से समर्थन की कमी पर निराशा जताई।