गन्ने की खेती में अधिक उत्पादन हासिल करने के लिए खेत की मिट्टी को भुरभुरी बनाना और जड़ों के विकास के लिए पर्याप्त जगह देना बेहद जरूरी है। लगातार एक ही गहराई पर जुताई करने से खेत में 6 से 8 इंच नीचे कठोर परत (हार्ड पैन) बन जाती है। इससे पानी, हवा और गन्ने की जड़ों का नीचे तक पहुंचना बाधित होता है। इस समस्या से बचने के लिए किसानों को समय-समय पर गहरी जुताई करनी चाहिए।
सिसवा आईपीएल चीनी मिल के गन्ना विभागाध्यक्ष धीरज सिंह के अनुसार, किसानों को प्रत्येक तीन साल में कम से कम एक बार गहरी जुताई अवश्य करनी चाहिए। इसके लिए मिट्टी पलटने वाले हल, सब-सॉयलर या उपयुक्त कृषि यंत्र का इस्तेमाल किया जा सकता है। सही तरीके से जुताई करने के लिए पहले खेत में पलेवा करें। इसके बाद मिट्टी पलटने वाले हल से आड़ी और तिरछी दिशा में गहरी जुताई करें। इससे मिट्टी की कठोर परत टूटती है और जमीन भुरभुरी हो जाती है।
उन्होंने बताया कि गहरी जुताई से गन्ने की जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है। मिट्टी में हवा का संचार बेहतर होता है और लाभकारी सूक्ष्मजीव सक्रिय रहते हैं। साथ ही कीटों एवं खरपतवारों के अवशेष मिट्टी की सतह पर आ जाते हैं, जिससे उनके नियंत्रण में मदद मिलती है। खेत में पानी का अवशोषण बढ़ने से नमी लंबे समय तक बनी रहती है।
धीरज सिंह ने किसानों को सलाह दी कि गहरी जुताई को खेती की नियमित तकनीक का हिस्सा बनाएं। इससे फसल की बढ़वार, मोटाई और लंबाई बेहतर होने के साथ उत्पादन एवं मुनाफा बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। मजबूत मिट्टी, स्वस्थ जड़ें और बेहतर पैदावार के लिए समय पर गहरी जुताई जरूरी है।
सिसवा चीनी मिल का उपज बढ़ाने वाला मास्टर टिप्स:गन्ने की खेती में यह चूक पड़ सकती है भारी, गहरी जुताई से बढ़ेगी पैदावार और किसानों की कमाई
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