डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आरक्षण से होने वाले चयन को लेकर एक और मामला सामने आया है। जहां एक वक्त शख्स आरक्षण का लाभ लेता है और परीक्षा में शामिल हो जाता है। वहीं परीक्षा के बाद आरक्षण की वजह से ही उसका सेलेक्शन रुक जाता है।
त्रिपुरा के एक OBC उम्मीदवार ने, जिसने आरक्षण के तहत भर्ती परीक्षा में शामिल होने के लिए ‘उम्र में छूट’ का लाभ उठाया था। लेकिन चयन के वक्त सामान्य कैटेगरी वाले अभ्यर्थी से ज्यादा अंक लाने के बाद भी उसका सेलेक्शन नहीं हो सका।
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में बताई सेलेक्शन न होने की वजह
त्रिपुरा के OBC उम्मीदवार जयंत देबनाथ की उम्र जनरल कैटेगरी के लोगों के लिए तय उम्र लिमिट की तुलना में ज्यादा थी। वहीं OBC कैटेगरी के लोगों के लिए उम्र की सीमा ज्यादा थी, इसलिए उसने आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को मिलने वाली ‘उम्र में छूट’ (age-relaxation) का लाभ उठाया।
OBC आरक्षण की वजह से उम्र की सीमा बढ़ने के साथ ही वह CAPFs, NIA, सचिवालय सुरक्षा बल और असम राइफल्स में कांस्टेबल/राइफलमैन की भर्ती परीक्षा देने के योग्य हो गया।
जयंत देबनाथ के लिए परीक्षा देने तक सबकुछ सही था, लेकिन जब परीक्षा का परिणाम आया, तब उनके अंक सामान्य श्रेणी के एक चयनित उम्मीदवार की तुलना में ज्यादा आए, लेकिन फिर भी उनका सेलेक्शन नहीं हुआ।
आखिर क्यों नहीं हुआ सेलेक्शन?
OBC उम्मीदवारों के लिए कट-ऑफ अंक 60 थे, जो सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के कट-ऑफ से अधिक थे। केंद्र सरकार का कहना है कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि OBC श्रेणी में रिक्तियों (vacancies) की संख्या सीमित थी।
केंद्र ने यह भी कहा कि एक बार जब कोई OBC उम्मीदवार उम्र में छूट का लाभ लेकर परीक्षा के योग्य बनता है, तो वह आरक्षित श्रेणी से सामान्य श्रेणी में नहीं जा सकता।
इसका नतीजा यह हुआ कि 2018 की भर्ती परीक्षा में 55.1 अंक लाने के बावजूद OBC उम्मीदवार जयंत देबनाथ का चयन नहीं हुआ, जबकि सामान्य श्रेणी के कैंडिडेट सागर देबनाथ का 46.26 अंकों के साथ चयन हो गया।
हाई कोर्ट के फैसले पर केंद्र सरकार की अपील
त्रिपुरा हाई कोर्ट की सिंगल-जज बेंच और डिवीजन बेंच, दोनों ने ही यह फैसला सुनाया कि जयंत देबनाथ को कांस्टेबल के पद पर चयन के लिए विचार किया जाना चाहिए।
केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट के इन फैसलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। केंद्र की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की बेंच CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा जस्टिस वी. मोहना के सामने अपनी बात रखी।
सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सुप्रीम कोर्ट की बेंच को बताया कि भर्ती नियमों में स्पष्ट रूप से लिखा है कि यदि कोई उम्मीदवार आरक्षित श्रेणी का होने के नाते उम्र में छूट का लाभ लेता है, तो उसे आरक्षित श्रेणी से सामान्य श्रेणी में जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
