
सनातन धर्म में उत्तर प्रदेश के काशी नगर को मोक्ष का नगर माना जाता है। माना जाता है कि मृत्यु के बाद इसी काशी में किसी भी व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साल के अधिकमास महीने में काशी में पंचकोशी तीर्थ यात्रा शुरू होती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक पंचकोशी यात्रा करने से भक्तों को मोक्ष मिलता है। इस साल यह यात्रा 17 मई से शुरू हो चुकी है, जो 15 जून महीने में खत्म होगी।
पंचकोशी यात्रा काशी के मणिकर्णिका घाट से शुरू होती है। उसके बाद भक्तगण पांच धर्म स्थलों के दर्शन करते हैं। ये स्थल कर्दमेश्वर, भीमचंडी, रामेश्वर, शिवपुर और कपिलधारा मंदिर हैं, जहां कई लोग पदयात्रा कर दर्शन करते हैं। यह पांचों पड़ाव लगभग 84 किलोमीटर लंबे मार्ग में स्थित हैं। अब सवाल उठता है कि इस यात्रा से जुड़ी पौराणिक कथा क्या है, साथ ही यह भी कि तीर्थयात्रा में हर पड़ाव का क्या महत्व है।
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क्या हैं पांच पड़ाव?
काशी की पंचकोशी यात्रा में सबसे पहले भक्त मणिकर्णिका घाट जाते हैं। उसके बाद पांच अलग-अलग मंदिरों के दर्शन किए जाते हैं। यह यात्रा पांच दिनों की होती है, जिसमें कई भक्त 84 किलोमीटर पैदल चलते हैं। हालांकि जिन लोगों को पैदल चलने में परेशानी हो, वे गाड़ी से भी यह यात्रा कर सकते हैं।
इस यात्रा में भक्त सबसे पहले कर्दमेश्वर मंदिर जाते हैं, जो यात्रा का प्रवेश द्वार माना जाता है। इस मंदिर में लोग महादेव के दर्शन करते हैं। उसके बाद दूसरा मंदिर भीमचंडी है। इस मंदिर में मां भीमचंडी विराजमान हैं, जहां जाकर लोग श्रद्धा भाव से पूजा करते हैं।
इसके बाद यात्रा का तीसरा पड़ाव रामेश्वर मंदिर है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां भगवान राम आए थे और शिवलिंग की स्थापना की थी। यात्रा का चौथा पड़ाव शिवपुर है। इस जगह को लेकर मान्यता है कि पांच पांडवों ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। इसी शिवलिंग के दर्शन के लिए भक्त यहां आते हैं। इस यात्रा का आखिरी पड़ाव कपिलधारा है, जो वरुणा नदी के पास स्थित है।
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यात्रा से जुड़ी पौराणिक मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार एक बार राजा दशरथ जंगल में शिकार करने गए थे। जंगल में राजा दशरथ के वार से श्रवण कुमार की मृत्यु हो गई, जिसके बाद श्रवण कुमार के माता-पिता ने उन्हें श्राप दिया। राजा दशरथ के बड़े पुत्र राम को जब इस श्राप के बारे में पता चला, तब उन्होंने पंचकोशी यात्रा की थी, ताकि राजा दशरथ को श्राप से मुक्ति मिल सके।
नोट- यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी की हम पुष्टि नहीं करते