रिपोर्ट:व्यूरो कार्यालय
महराजगंज: निचलौल थाना क्षेत्र के पचमा गांव में एक ही परिवार के तीन मासूमों की असमय मौत ने पूरे जनपद को झकझोर कर रख दिया है। इस ह्रदयविदारक घटना से जहां आम जनमानस स्तब्ध है, वहीं राजनीतिक हलकों में संवेदनहीनता को लेकर चर्चाएं गर्म हैं। हादसे के तुरंत बाद कांग्रेस नेता राजू गुप्ता ने पीड़ित परिवार से मिलकर ढांढस बंधाया, तो सपा के पूर्व नेता सुशील टेबड़ेवाल ने समर्थकों के संग अंतिम संस्कार में शामिल होकर आर्थिक सहायता का हाथ बढ़ाया। लेकिन क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का रुख इस दुख की घड़ी में सवालों के घेरे में है।

खुद को ‘गरीब का बेटा’ कहने वाले और सोशल मीडिया पर शोषितों-वंचितों के मसीहा के रूप में पहचान बनाने वाले सिसवा विधानसभा के भाजपा विधायक प्रेम सागर पटेल का इस त्रासदी पर दूर तक कोई पता नहीं है। अधिकारियों को डांटने-फटकारने और क्षेत्र में अपनी धाक जमाने के लिए मशहूर विधायक जी को घटना के दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार से मिलने का समय नहीं मिला।चर्चा है कि विधायक जी इन दिनों विधानसभा क्षेत्र से बाहर हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि विधायक जी की अनुपस्थिति में उनकी ‘विरासत’ संभालने वाले उनके सुपुत्र धीरज पटेल आखिर कहां हैं? जो साहबज़ादे अक्सर पिता के स्थान पर कार्यक्रमों में मंच साझा करते, विधायक लिखी गाड़ी और हूटर की धमक के साथ महराजगंज से निचलौल का सफर तय करते नजर आते हैं, उनसे मुख्य मार्ग से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित इस पीड़ित परिवार का गम देखा नहीं गया। हैरानी की बात यह भी है कि पीड़ित निषाद समाज से ताल्लुक रखता है—वही समाज जिसका नेतृत्व करने वाले संजय निषाद प्रदेश सरकार में हिस्सेदार हैं। इसके बावजूद सत्ता पक्ष का कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि इस परिवार के आंसू पोंछने नहीं पहुंचा। जनता अब तीखे लहजे में तंज कस रही है कि विधायक जी शायद लखनऊ से सांत्वना का कोई ‘स्पेशल चेक’ बनवाने गए हैं, जो बनकर आएगा तभी वे पीड़ित परिवार के द्वार पर कदम रखेंगे। इस तरह के बड़े हादसों को नजरअंदाज कर जनता के सुख-दुख से दूरी बनाना जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर गहरा सवाल खड़ा करता है।



























