भोपाल। प्रदेश में सरकारी स्कूलों की घटती संख्या और बच्चों के पढ़ाई से दूर होने के गंभीर मुद्दे पर मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा है। कांग्रेस नेता ने इस पत्र को केवल सामान्य पत्र न बताकर ‘प्रश्न-पत्र’ करार दिया है और राज्य की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार से कई तीखे सवालों के जवाब मांगे हैं।
‘बच्चे स्कूल क्यों नहीं पहुँच पा रहे?’ – जीतू पटवारी ने उठाए नीतिगत सवाल
जीतू पटवारी ने कहा कि सवाल केवल यह नहीं है कि कितने बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चे स्कूल तक पहुँच क्यों नहीं पा रहे हैं और सरकारी स्कूल उनके घरों से दूर क्यों होते जा रहे हैं। उन्होंने सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने और उन्हें दूसरे स्कूलों में विलय (मर्ज) करने की नीति पर कड़ा ऐतराज जताया है।
एक साल में 2,426 स्कूल कम होने पर सरकार से मांगा जवाब
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आँकड़ों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री के समक्ष कई प्रशासनिक सवाल रखे हैं।
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स्कूलों की संख्या में गिरावट: 2024-25 में प्रदेश में 1,22,120 सरकारी स्कूल थे, जो 2025-26 में घटकर 1,19,694 रह गए। जीतू पटवारी ने पूछा कि एक साल में कम हुए 2,426 स्कूलों में से कितने बंद हुए और कितनों का विलय किया गया, इसका जिला और विकासखंड वार ब्योरा सार्वजनिक किया जाए।
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बच्चों की दूरी पर असर: जिन स्कूलों को दूसरे स्कूलों में मिलाया गया है, वहाँ पढ़ने वाले गरीब और ग्रामीण बच्चों को अब पहले की तुलना में कितनी अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, सरकार इसका जवाब दे।
ग्रामीण बच्चों और ड्रॉपआउट आँकड़ों पर गहरी चिंता
जीतू पटवारी ने कहा कि स्कूलों के बंद होने का सबसे ज्यादा सामाजिक और आर्थिक असर ग्रामीण तथा सुदूर क्षेत्रों के बच्चों पर पड़ा है, जहाँ सरकारी स्कूल ही पढ़ाई का एकमात्र जरिया हैं।
उन्होंने पूछा कि विलय किए गए स्कूलों के बच्चों के लिए बस, साइकिल या सुरक्षित परिवहन की क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। साथ ही यूडीआईएसई+ (UDISE+) के आँकड़ों का उल्लेख करते हुए सरकार से सवाल किया कि 15 लाख बच्चों के पढ़ाई से दूर होने के दावों की वास्तविक स्थिति क्या है और माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट रोकने के लिए सरकार के पास क्या प्रशासनिक रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।
स्कूल कम फिर भी बढ़े 10 हजार शिक्षक, संसाधनों पर माँगा हिसाब
शिक्षकों की तैनाती में अंतर को रेखांकित करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि 2024-25 में शिक्षकों की संख्या 6,82,492 थी, जो 2025-26 में बढ़कर 6,92,820 हो गई।
जब 2,426 स्कूल कम हो गए तो इन 10 हजार से अधिक बढ़े हुए शिक्षकों को कहाँ और किस आधार पर पदस्थ किया गया, सरकार इस पर स्थिति स्पष्ट करे। इसके अलावा बंद किए गए स्कूलों की इमारतों, जमीनों, लैब्स और फर्नीचर के उपयोग तथा इस पूरी प्रक्रिया से सरकार को हुई वास्तविक बचत का ब्योरा माँगा गया है।
अगले तीन साल स्कूल बंद न करने की मांग और सोशल ऑडिट की अपील
पत्र के अंत में जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि अगले तीन वर्षों तक ऐसा कोई भी स्कूल बंद या मर्ज न किया जाए जिससे बच्चों की दूरी बढ़े। उन्होंने हर बंद किए गए स्कूल का सार्वजनिक रूप से 'सोशल ऑडिट' कराने की मांग की ताकि यह पता चल सके कि स्कूल बंद होने के बाद बच्चों का भविष्य किस स्थिति में है।
































