डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ईडी ने उनके खिलाफ मनी लॉड्रिंग का मामला दर्ज किया है। यह मामला कथित लोन धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसके कारण लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (एलआइसीएचएफएल) को 1322 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई सीबीआई की एफआईआर का संज्ञान लेते हुए प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत की गई है। सुभाष चंद्रा पर आरोप है कि उन्होंने एलआइसीएचएफएल से कुल 980 करोड़ रुपये के दो लोन की मंजूरी लेने और उन्हें हासिल करने के लिए अपनी कुल संपत्ति को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया तथा झूठे नेटवर्थ सर्टिफिकेट जमा किए।
अगस्त में दर्ज शिकायत के अनुसार, इन लोन पर डिफॉल्ट होने के कारण 1322 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। एलआइसीएचएफएल की शिकायत पर सीबीआई ने पहले ही मामला दर्ज किया था, जिसके आधार पर ईडी ने अब यह कदम उठाया है।
दूसरी ओर, ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेस लिमिटेड’ के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि ईडी द्वारा दर्ज किया गया यह मामला सुभाष चंद्रा के खिलाफ उनकी व्यक्तिगत क्षमता में है और इसका कंपनी या उसके कामकाज से कोई लेना-देना नहीं है।
शिकायत के अनुसार, सुभाष चंद्रा ने वसंत सागर प्रापर्टीज और डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट को मिले कुल 980 करोड़ रुपये के दो लोन (500 करोड़ और 480 करोड़) को सुरक्षित करने के लिए झूठे और बढ़े हुए नेटवर्थ सर्टिफिकेट जमा किए थे।
एलआईसीएचएफएल का आरोप है कि डीजेएम एंड कंपनी और एमपीजे एंड कंपनी के जरिये उनकी नेटवर्थ 40 हजार करोड़ से 59 हजार करोड़ रुपये तक दिखाई गई थी।
हालांकि, बाद में दिवाला और दिवालियापन संहिता की कार्यवाही के दौरान सुभाष चंद्रा ने खुद के इस नेटवर्थ से इन्कार किया और 2024 में अपनी संपत्ति महज 31.79 करोड़ रुपये बताई।
एलआइसीएचएफएल ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) का भी रुख किया है, क्योंकि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की हालिया ऋण चुकौती योजना के तहत उन्हें सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत संपत्तियों से 22006 करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले केवल 6.5 करोड़ रुपये मिलने का प्रविधान किया गया है, जिसका ऋणदाताओं ने कड़ा विरोध किया है।
