दिवाली पर कुम्हार गांवों में घर-घर और चौराहों पर मिट्टी के दीये, घंटियां और खिलौने बेचते दिखे। लोग भी इन्हें खरीदते नजर आए। कुम्हारों का पुश्तैनी काम मिट्टी के बर्तन और खिलौने बनाना है। पहले चाइनीज झालरों का इस्तेमाल, बर्तन पकाने के महंगे ईंधन और प्रशासन की उदासीनता के कारण यह काम कम हो रहा था। खबर के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान से कुम्हारों को फिर रोजगार मिला है। चाय की दुकानों पर कुल्हड़ में चाय मिलना भी आम हो गया है।
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