
बस्ती के वाल्टरगंज थाने में इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का आयोजन नहीं होगा। थाने में तैनात इंस्पेक्टर सूर्य प्रकाश सिंह ने 30 अगस्त को आत्महत्या कर ली थी। उनकी मौत की गुत्थी सुलझाने में पुलिस टीम जुटी हुई है। हालांकि, उनके पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था और परिजनों की ओर से भी किसी व्यक्ति पर आरोप नहीं लगाया गया है। ऐसे में उन्होंने यह कदम क्यों उठाया, इसकी जांच अभी जारी है। धूमधाम से जन्माष्टमी मनाने की थी तैयारी गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे वाल्टरगंज थाने पहुंची दैनिक भास्कर की टीम ने वहां मौजूद पुलिसकर्मियों से बातचीत की। पुलिसकर्मियों ने बताया कि सूर्य प्रकाश सिंह का व्यवहार सभी के प्रति अच्छा था। थाने में उनकी कमी हर कर्मचारी को महसूस हो रही है। पुलिसकर्मियों के मुताबिक, इंस्पेक्टर सूर्य प्रकाश सिंह इस बार थाने में धूमधाम से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाने की तैयारी कर रहे थे। आयोजन के लिए कार्ड भी छपवाए गए थे और कुछ कार्ड लोगों को वितरित भी किए जा चुके थे। एक निमंत्रण कार्ड पर प्रेषक के रूप में थानाध्यक्ष वाल्टरगंज सूर्य प्रकाश सिंह का नाम दर्ज था। कार्यक्रम में शाम करीब 7:30 बजे से भंडारा और प्रसाद वितरण प्रस्तावित था। हालांकि, अब उनके निधन के बाद इस बार थाने में जन्माष्टमी का आयोजन नहीं किया जाएगा। जिस कमरे में परिवार के साथ रहते थे, वह सील थाना परिसर में जिस कमरे में सूर्य प्रकाश सिंह परिवार के साथ रहते थे, उसे बाहर से सील कर दिया गया है। इसके अलावा शहर स्थित वह सरकारी क्वार्टर भी सील है, जहां उन्होंने आत्महत्या की थी। पुलिस दोनों स्थानों को जांच के लिहाज से सुरक्षित रखे हुए है। 15 दिन पहले नाई ने काटे थे बाल थाने में पड़ताल के बाद टीम उस नाई के पास भी पहुंची, जो सूर्य प्रकाश सिंह के बाल काटता था। नाई ने बताया कि इंस्पेक्टर आमतौर पर अपनी दाढ़ी खुद ही बनाते थे और करीब 15 से 20 दिन में बाल कटवाने के लिए उसे बुलाते थे। नाई के मुताबिक, उसने करीब 15 दिन पहले ही सूर्य प्रकाश सिंह के बाल काटे थे। उसने बताया कि जब वह बाल काटने उनके पास जाता था तो इंस्पेक्टर उसे सम्मान देते थे और चाय-पानी जरूर पूछते थे। नाई ने बताया कि वह अक्सर चप्पल बाहर उतारकर अंदर जाता था, लेकिन सूर्य प्रकाश सिंह उसे ऐसा करने से मना करते थे। वह कहते थे कि चप्पल क्यों उतार रहे हो, पहनकर ही अंदर आओ। जन्माष्टमी में आने का दिया था निमंत्रण वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के एक स्थानीय निवासी ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि 30 अगस्त की दोपहर इंस्पेक्टर सूर्य प्रकाश सिंह सरकारी वाहन से कहीं जा रहे थे। विकास भवन के पास उनकी मुलाकात इंस्पेक्टर से हुई थी। स्थानीय व्यक्ति के मुताबिक, उस समय सूर्य प्रकाश सिंह सामान्य नजर आ रहे थे और चेहरे से किसी तरह के तनाव में नहीं लग रहे थे। उन्होंने बातचीत के दौरान उसे इस बार जन्माष्टमी के कार्यक्रम में आने के लिए भी कहा था। स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि उस समय उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही समय बाद इंस्पेक्टर इतना बड़ा कदम उठा लेंगे। वहीं पुलिस अब उनकी मौत के कारणों की पड़ताल कर रही है। पोस्टमार्टम, घटनास्थल और अन्य पहलुओं की जांच के साथ पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि आखिर किन परिस्थितियों में इंस्पेक्टर ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया।
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