बस्ती के खलवा निवासी आनंद सिंह दोनों पैरों से दिव्यांग हैं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी है। वह कबाड़ खरीदने का काम करते हैं।
इस काम से वह अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। आनंद सिंह ने अपनी शारीरिक चुनौतियों को कमजोरी नहीं बनने दिया।
वह अपनी मेहनत के दम पर आजीविका चला रहे हैं। उनका संघर्ष बताता है कि मुश्किल हालात में भी हिम्मत से आगे बढ़ा जा सकता है।
आनंद सिंह का उदाहरण दिखाता है कि पहचान शारीरिक सीमाओं से नहीं, बल्कि हौसले और मेहनत से बनती है।
ऐसे मेहनती लोगों को सरकारी योजनाओं का सहयोग मिलना चाहिए, ताकि वे सम्मान से जीवन जी सकें।
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