Tuesday, March 3, 2026
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COP11 से पहले बड़ा विवाद : विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तंबाकू किसानों के लिए दरवाजे बंद किए, संघ ने किया विरोध

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तंबाकू की खेती

तंबाकू की खेती
– फोटो : सोशल मीडिया

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तंबाकू किसान संघ – फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशन (FAIFA) ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक बड़े सम्मेलन से बाहर किए जाने पर अपना विरोध जताया है। संघ का कहना है कि यह निर्णय उन लाखों किसानों की आवाज को दबाना है जिनकी आजीविका सीधे तौर पर प्रभावित होती है।सम्मेलन में शामिल होने का अनुरोध ठुकराया
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशन (FAIFA) ने बयान में कहा कि उन्हें 17 नवंबर को होने वाले 11वें COP में भाग लेने की अनुमति नहीं दी। संघ के अध्यक्ष पीएस मुरली बाबू ने कहा कि किसान समस्या नहीं हैं बल्कि वे उन नीतिगत फैसलों के शिकार हैं जो उनकी भागीदारी के बिना लिए जाते हैं। उन्होंने इस बात पर गहरी निराशा जताई कि COP11 ने एक बार फिर किसान समुदाय के लिए अपने दरवाजे बंद कर दिए हैं।

लाखों लोगों की आजीविका दांव पर
संघ के अनुसार उनकी भागीदारी के अनुरोध को यह कहकर अस्वीकार कर दिया कि किसानों के हित सम्मेलन के उद्देश्यों के अनुरूप नहीं हैं। समूह ने इस तर्क को बेतुका बताया है। FAIFA ने FCTC के अनुच्छेद 17 और 18 का हवाला दिया जो तंबाकू किसानों की आजीविका की रक्षा और व्यवहार्य विकल्पों को बढ़ावा देना अनिवार्य बनाते हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े तंबाकू उत्पादक और निर्यातक देशों में से एक है। FAIFA ने कहा कि आंध्र प्रदेश कर्नाटक और तेलंगाना जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में 3 करोड़ 60 लाख से अधिक लोग तंबाकू की खेती व्यापार और संबंधित क्षेत्रों पर निर्भर हैं।

सरकार करे हस्तक्षेप
किसान संघ ने COP11 में शामिल होने वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल से किसानों की आजीविका की रक्षा करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि हितधारकों की भागीदारी के बिना एकतरफा फैसले नहीं लिए जाने चाहिए। बयान में कहा गया है कि FCTC की मूल भावना सहयोग और आजीविका की सुरक्षा में निहित है न कि जबरदस्ती और बहिष्कार में।

पुणे के नवले ब्रिज के पास दो कंटेनर आपस में टकराए, आग लगने से भीषण हादसा अब तक 7 की मौत, कई घायल

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पुणे।पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर गुरुवार शाम नवले ब्रिज के पास एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ, जिसमें अब तक कम से कम सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि करीब 15 लोग घायल बताए जा रहे हैं। हादसा उस समय हुआ जब दो कंटेनर ट्रक आपस में भिड़ गए और टक्कर के बाद दोनों वाहनों में भीषण आग लग गई। टकराव के बाद एक कंटेनर ने तेज रफ्तार में कई वाहनों को भी टक्कर मार दी, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के तुरंत बाद एक कार दोनों ट्रकों के बीच फंस गई, जिसमें मौजूद एक ही परिवार के सभी सदस्य की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वाहनों में सवार यात्री आग की लपटों में घिर गए और कई लोग बाहर नहीं निकल सके। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और सड़क पर लंबा जाम लग गया।

सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां और पुलिस दल मौके पर पहुंच गए। आग पर काफी मशक्कत के बाद काबू पाया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी है, और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

हादसे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें लपटों में घिरे ट्रक और सड़क पर फैली अफरातफरी साफ देखी जा सकती है। घटना के बाद पुलिस ने ट्रक चालक को हिरासत में ले लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि हादसा ब्रेक फेल या तेज रफ्तार के कारण हुआ होगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नवले ब्रिज का यह इलाका पहले भी कई बार हादसों का गवाह रह चुका है। महज दो सप्ताह पहले इसी स्थान पर टाइल्स से भरे एक ट्रक ने नियंत्रण खो दिया था और तीन वाहनों से टकरा गया था, जिसमें दो ड्राइवर घायल हुए थे।

नवले ब्रिज से गुजरने वाला यह हाईवे बेहद व्यस्त रहता है, जहां भारी वाहनों की लगातार आवाजाही होती है। ट्रैफिक पुलिस ने कहा है कि इस क्षेत्र में सुरक्षा उपायों को बढ़ाने और हादसों की रोकथाम के लिए स्पीड मॉनिटरिंग कैमरेसड़क संकेतक, और अतिरिक्त पेट्रोलिंग की व्यवस्था की जाएगी।

घटना ने एक बार फिर शहर की सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि नवले ब्रिज के आसपास वाहनों की गति नियंत्रित करने और नियमित ट्रैफिक जांच की सख्त व्यवस्था की जाए।

फिलहाल पुलिस ने घटनास्थल को सील कर दिया है और क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाने का कार्य देर रात तक जारी है। दुर्घटना में मारे गए लोगों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है, जबकि मृतकों की पहचान की प्रक्रिया चल रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद हादसे के लिए जिम्मेदार चालक और ट्रांसपोर्ट कंपनी पर लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया जाएगा।

इस भीषण सड़क दुर्घटना ने पुणे सहित पूरे महाराष्ट्र को झकझोर दिया है। प्रशासन ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता देने का आश्वासन दिया है।

यह हादसा न केवल यातायात व्यवस्था की लापरवाहियों की ओर संकेत करता है बल्कि यह भी दिखाता है कि शहरों के हाईवे पर सुरक्षा उपायों की सख्त ज़रूरत है। पुणे पुलिस और ट्रैफिक विभाग ने कहा है कि इस घटना की विस्तृत जांच रिपोर्ट जल्द सार्वजनिक की जाएगी।

COP11 से पहले बड़ा विवाद : विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तंबाकू किसानों के लिए दरवाजे बंद किए, संघ ने किया विरोध

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तंबाकू की खेती – फोटो : सोशल मीडिया

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तंबाकू किसान संघ – फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशन (FAIFA) ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक बड़े सम्मेलन से बाहर किए जाने पर अपना विरोध जताया है। संघ का कहना है कि यह निर्णय उन लाखों किसानों की आवाज को दबाना है जिनकी आजीविका सीधे तौर पर प्रभावित होती है।

सम्मेलन में शामिल होने का अनुरोध ठुकराया
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशन (FAIFA) ने बयान में कहा कि उन्हें 17 नवंबर को होने वाले 11वें COP में भाग लेने की अनुमति नहीं दी। संघ के अध्यक्ष पीएस मुरली बाबू ने कहा कि किसान समस्या नहीं हैं बल्कि वे उन नीतिगत फैसलों के शिकार हैं जो उनकी भागीदारी के बिना लिए जाते हैं। उन्होंने इस बात पर गहरी निराशा जताई कि COP11 ने एक बार फिर किसान समुदाय के लिए अपने दरवाजे बंद कर दिए हैं।

लाखों लोगों की आजीविका दांव पर
संघ के अनुसार उनकी भागीदारी के अनुरोध को यह कहकर अस्वीकार कर दिया कि किसानों के हित सम्मेलन के उद्देश्यों के अनुरूप नहीं हैं। समूह ने इस तर्क को बेतुका बताया है। FAIFA ने FCTC के अनुच्छेद 17 और 18 का हवाला दिया जो तंबाकू किसानों की आजीविका की रक्षा और व्यवहार्य विकल्पों को बढ़ावा देना अनिवार्य बनाते हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े तंबाकू उत्पादक और निर्यातक देशों में से एक है। FAIFA ने कहा कि आंध्र प्रदेश कर्नाटक और तेलंगाना जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में 3 करोड़ 60 लाख से अधिक लोग तंबाकू की खेती व्यापार और संबंधित क्षेत्रों पर निर्भर हैं।

सरकार करे हस्तक्षेप
किसान संघ ने COP11 में शामिल होने वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल से किसानों की आजीविका की रक्षा करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि हितधारकों की भागीदारी के बिना एकतरफा फैसले नहीं लिए जाने चाहिए। बयान में कहा गया है कि FCTC की मूल भावना सहयोग और आजीविका की सुरक्षा में निहित है न कि जबरदस्ती और बहिष्कार में।

ठाणे – शहर में आवारा कुत्तों का आतंक

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BMC ने आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होने बनाने की योजना बनाई

चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि जनवरी से अक्टूबर 2025 तक दस महीने की अवधि के दौरान ठाणे नगर निगम क्षेत्र में आवारा कुत्तों ने 12,465 नागरिकों को काटा है। ठाणे नगर निगम स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि इन सभी घायल नागरिकों का इलाज कलवा स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज अस्पताल और नगर निगम के 33 स्वास्थ्य केंद्रों में किया गया है।

आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ा

ठाणे शहर में पिछले कुछ महीनों से आवारा कुत्तों की समस्या काफी बढ़ गई है। ये कुत्ते बच्चों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को अपना निशाना बना रहे हैं। नगर निगम स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, प्रतिदिन औसतन 50 से 60 नागरिकों को आवारा कुत्ते काटते हैं।

संख्या ज्यादा होने की संभावना 

हालांकि, वास्तव में यह संख्या इससे ज़्यादा होने की संभावना है। क्योंकि निजी अस्पतालों और डॉक्टरों से इलाज कराने वालों का आँकड़ा नगर निगम के पास उपलब्ध नहीं है।नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग का अनुमान है कि लगभग 26 लाख की आबादी वाले ठाणे शहर में लगभग 2 से 3 प्रतिशत आवारा कुत्ते हैं। यानी शहर में 50,000 से 70,000 आवारा कुत्ते हो सकते हैं।

आवारा कुत्तों की बढ़ रही संख्या 

कुत्तों की प्रजनन क्षमता को देखते हुए, उनकी संख्या तेज़ी से बढ़ रही है क्योंकि हर महीने लगभग 250 से 300 नए पिल्ले पैदा होते हैं। नगर निगम ने नागरिकों से अपील की है कि वे सड़क पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाते समय सावधानी बरतें और अगर आवारा कुत्ते उन्हें काट लें, तो तुरंत स्वास्थ्य केंद्र जाकर इलाज करवाएँ।

किसी भी नागरिक को मौत नहीं

प्रशासन ने बताया है कि ठाणे नगर निगम के कलवा स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज अस्पताल और सभी 33 स्वास्थ्य केंद्रों में रेबीज का टीका नियमित रूप से उपलब्ध है।शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि इस साल आवारा कुत्तों के काटने से किसी भी नागरिक की मौत नहीं हुई है।

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जानें धान का मंडी भाव। – फोटो : गांव जंक्शन

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गौतम बुद्ध नगर मंडी (Gautam Buddha Nagar Mandi) में 10 Nov को खाद्यान्नों के थोक एवं फुटकर भाव और आवक
क्रम संख्याकृषि पदार्थो का नामथोक भाव (/कुंतल)फुटकर भाव(/किलो)आवक (कुंतल में)
1चावल बासमती8480.0095.002000.00
2चावल कॉमन3370.0040.002100.00
3गेहूँ (दड़ा)2585.0030.00400.00

लखनऊ मंडी (Lucknow Mandi) में 10 Nov को खाद्यान्नों के थोक एवं फुटकर भाव और आवक

क्रम संख्याकृषि पदार्थो का नामथोक भाव (/कुंतल)फुटकर भाव(/किलो)आवक (कुंतल में)
1धान कॉमन2369.00 60.00
2चावल कॉमन3400.0040.003460.00
3मक्का पीली2300.0028.00160.00
4गेहूँ (दड़ा)2590.0030.003600.00

कानपुर नगर मंडी (Kanpur Nagar Mandi) में 10 Nov को खाद्यान्नों के थोक एवं फुटकर भाव और आवक

क्रम संख्याकृषि पदार्थो का नामथोक भाव (/कुंतल)फुटकर भाव(/किलो)आवक (कुंतल में)
1धान कॉमन2369.00 15000.00
2चावल बासमती8560.0095.00650.00
3चावल कॉमन3260.0040.005100.00
4ज्वार सफेद3699.0050.00710.00
5बाजरा संकर2775.0030.00450.00
6मक्का पीली2400.0026.003100.00
7गेहूँ (दड़ा)2490.0028.0018000.00
8जौ (दड़ा)2340.0027.00700.00

मथुरा (Mathura) में 10 Nov को खाद्यान्नों के थोक एवं फुटकर भाव और आवक

क्रम संख्याकृषि पदार्थो का नामथोक भाव (/कुंतल)फुटकर भाव(/किलो)आवक (कुंतल में)
1धान बासमती2900.00 55000.00
2चावल कॉमन3400.0042.00600.00
3बाजरा संकर2775.0030.009800.00
4गेहूँ (दड़ा)2575.0029.002250.00
5जौ (दड़ा)2390.0027.00100.00

बरेली (Bareilly) में 10 Nov को खाद्यान्नों के थोक एवं फुटकर भाव और आवक

क्रम संख्याकृषि पदार्थो का नामथोक भाव (/कुंतल)फुटकर भाव(/किलो)आवक (कुंतल में)
1धान बासमती2750.00 1800.00
2धान फाइन (नॉन बासमती)2100.00 4000.00
3धान कॉमन1860.00 24090.00
4चावल कॉमन3300.0038.00600.00
5बाजरा संकर2420.0027.00420.00
6गेहूँ (दड़ा)2615.0029.00941.00

10 Nov को यूपी की विभिन्न मंडियों में खाद्यान्नों का अधिकतम एवं न्यूनतम थोक भाव (प्रति कुंतल)

    धान काॅमन का अधिकतम भाव     धान काॅमन का न्यूनतम भाव
  • फर्रूखाबाद 2370
  • मिर्जापुर 2370
  • मोहम्मदाबाद 2370
  • रायबरेली 2369
  • रामपुर 2369
  • खागा 1700
  • कौशाम्बी 1765
  • फतेहपुर 1770
  • मोहम्मदी 1775
  • बिन्दकी 1780
    बासमती चावल का अधिकतम भाव   बासमती चावल का न्यूनतम भाव
  • भरथना 8650
  • कानपुर नगर 8560
  • इटावा 8550
  • फतेहपुर 8540
  • अलीगढ़ 8530
  • सहारनपुर 8450
  • शामली 8450
  • नोएडा, गौतमबुद्ध नगर 8480
  • वाराणसी 8500
  • आगरा 8500
     धान बासमती अधिकतम भाव   धान बासमती न्यूनतम भाव
  • बुलन्दशहर 2951
  • जहांगीराबाद 2951
  • खुर्जा 2951
  • मथुरा 2900
  • अलीगढ़ 2800
 
  • भरथना 2400
  • इटावा 2400
  • घिरोर 2400
  • मैनपुरी 2420
  • अछनेरा 2500
      बाजरा संकर का अधिकतम भाव   बाजरा संकर का का न्यूनतम भाव
  • अछल्दा 2775
  • अछनेरा 2775
  • आगरा 2775
  • औरैया 2775
  • बलिया 2775
 
  • बिल्सी 2200
  • बदायॅूं 2200
  • उझानी 2225
  • अलीगढ़ 2400
  • बरेली 2420
   चावल काॅमन अधिकतम भावचावल फाइन (नॉन बासमती) न्यूनतम भाव
  • ललितपुर 3475
  • अलीगढ़ 3460
  • सहारनपुर 3450
  • शामली 3450
  • बाराबंकी 3445
  • बिन्दकी 2890
  • अजुहा 3000
  • झांसी 3000
  • अछल्दा 3020
  • औरैया 3020

2005 दादर भीड़ हिंसा मामला- सांसद रवींद्र वायकर और अन्य बरी

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राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते 2005 में दादर में एक हिंसक घटना घटी थी। इस मामले में एक विशेष अदालत ने सांसद रवींद्र वायकर और तत्कालीन अविभाजित शिवसेना के 28 कार्यकर्ताओं को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है।(2005 Dadar mob violence case MP Ravindra Waikar and others acquitted)

वाहनों और बेस्ट की बसों पर पथराव 

बाल ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना से निष्कासित होने के बाद, तत्कालीन सांसद नारायण राणे ने उस समय कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा की थी। इसके बाद 24 जुलाई, 2005 को दादर के जाखा देवी चौक पर विरोध प्रदर्शन के लिए भीड़ जमा हो गई। कुछ देर बाद, भीड़ हिंसक हो गई और पुलिस, उनके वाहनों और बेस्ट की बसों पर पथराव किया। परिणामस्वरूप, इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई। इस मामले में वायकर और अन्य आरोपियों के खिलाफ दंगा करने का मामला दर्ज किया गया था।

महेश सावंत और विशाखा राउत को भी राहत

सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों की सुनवाई करने वाले अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सत्यनारायण नवंदर ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए वायकर और अन्य आरोपियों को दंगा करने, अवैध रूप से इकट्ठा होने और अन्य आरोपों से बरी कर दिया। वायकर के अलावा, अन्य आरोपियों में शिवसेना नेता महेश सावंत और विशाखा राउत शामिल हैं। अदालत ने आरोपियों को बरी करते हुए अपने फैसले में कहा कि यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि आरोपी दंगा करने वाली गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा थे या नहीं।

सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान 

घटना वाले दिन दो राजनीतिक समूहों के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण पूरा शहर खतरे में था। पुलिस बलों की भारी तैनाती के बावजूद, कई लोग घायल हुए और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचा। हालाँकि, अदालत ने यह भी कहा कि आरोपियों की संलिप्तता की पहचान नहीं हो पाई है। इसलिए, उन्हें रिहा किया जा रहा है।

सत्तारूढ़ दल के अनुसार, निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद, 100 से 150 शिवसेना कार्यकर्ताओं की भीड़ दादर के जाखा देवी चौक इलाके में सड़क जाम करने और विरोध प्रदर्शन करने के लिए इकट्ठा हुई। भीड़ हिंसक हो गई और पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। इस घटना में बेस्ट की बसें क्षतिग्रस्त हो गईं।

यह भी पढ़ेंCSMT स्टेशन पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज

मेलघाट में जून से अगस्त तक 65 बच्चों की मौत चौंकाने वाली, हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार

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उच्च न्यायालय ने बुधवार को मेलघाट में जून और अगस्त के बीच कुपोषण के कारण शून्य से छह साल की उम्र के 65 बच्चों की मौत की खबरों को गंभीरता से लिया और स्थिति को चौंकाने वाला बताया। न्यायालय ने कहा कि 2006 से लगातार निर्देशों के बावजूद, महाराष्ट्र में कुपोषण की समस्या में कोई वास्तविक सुधार नहीं हुआ है और इस गंभीर जन स्वास्थ्य समस्या के प्रति राज्य सरकार के लापरवाह रवैये की आलोचना की।

कोर्ट ने जताई नाराजगी

न्यायमूर्ति रेवती मोहिते-डेरे और न्यायमूर्ति संदेश पाटिल की पीठ ने कहा कि यह दुखद है कि सरकार इस मामले को इतने हल्के में ले रही है। जब सरकारी वकीलों ने तर्क दिया कि बच्चों की मौत कुपोषण से नहीं, बल्कि निमोनिया से हुई है, तो न्यायाधीशों ने नाराज़गी जताई। न्यायालय ने तीखे स्वर में पूछा, “आखिर इन बच्चों को निमोनिया क्यों हुआ?”

सरकार को बताया विफल

पीठ ने कहा कि सरकार कागज़ों पर तो दावा करती है कि सब कुछ ठीक है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। पीठ ने निमोनिया से इतने सारे बच्चों की मौत को चिंताजनक और कुपोषण से गंभीरता से निपटने में सरकार की विफलता का स्पष्ट संकेत बताया।

न्यायालय ने लोक स्वास्थ्य, आदिवासी विकास, महिला एवं बाल विकास तथा वित्त विभागों के प्रमुख सचिवों को निर्देश दिया कि वे हलफनामा दाखिल कर बताएं कि ऐसी मौतों को रोकने और कुपोषित क्षेत्रों में स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। उन्हें अगली सुनवाई में उपस्थित होने का भी आदेश दिया गया।

खराब सड़कों और अपर्याप्त स्वास्थ्य केंद्रों के कारण गर्भवती महिलाओं की लगातार हो रही मौतों का भी उल्लेख

न्यायालय ने पाया कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं की मृत्यु होती रहती है। न्यायालय ने मेलघाट में खराब सड़कों और अपर्याप्त स्वास्थ्य केंद्रों के कारण गर्भवती महिलाओं की लगातार हो रही मौतों का भी उल्लेख किया। ऐसे कार्यक्रमों के लिए आवंटित केंद्र और राज्य निधि का केवल 30 प्रतिशत ही वास्तव में उपयोग किया जाता है। न्यायालय ने यह भी कहा कि पिछले पाँच वर्षों में किसी भी गर्भवती महिला को मातृत्व स्वास्थ्य कोष से सहायता नहीं मिली है।

‘हर घर नल से जल’ योजना के तहत, 370 गाँवों में से 70 में अभी भी पानी की पहुँच नहीं है, और 160 गाँवों में काम चल रहा है। न्यायालय ने यह भी सवाल उठाया कि दूषित पानी से मरने वाले 12 लोगों में से केवल तीन परिवारों को ही मुआवजा क्यों दिया गया। न्यायालय ने पूछा कि क्या 65 कुपोषण पीड़ितों के परिवारों को भी मुआवजा मिलेगा, और अधिकारियों से स्पष्ट स्पष्टीकरण माँगा। 

सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कुपोषण से लड़ने के लिए आवंटित धनराशि राज्य की प्रमुख ‘लड़की बहन’ योजना में डाल दी गई। उन्होंने सरकार पर अदालत को गुमराह करने का आरोप लगाया और दावा किया कि वास्तविक स्थिति चिंताजनक है, खासकर मेलघाट में, जहाँ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली, डॉक्टर, विशेषज्ञ, उपकरण और कर्मचारियों की कमी है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, धरनी में, स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र मध्य प्रदेश से बिजली खरीदता है, लेकिन बकाया राशि का भुगतान न होने के कारण, यह महीनों से बिना बिजली के चल रहा है।

अदालत ने 2017 की राज्य पोषण आहार योजना के तहत अल्प दैनिक पोषण भत्ते पर भी आश्चर्य व्यक्त किया – प्रति बच्चा (6 से 17 महीने की आयु) केवल 8-12 रुपये और प्रति गर्भवती महिला 9.50 रुपये। न्यायाधीशों ने सवाल किया कि इतनी कम दरों पर पौष्टिक भोजन कैसे उपलब्ध कराया जा सकता है और पिछले 25 वर्षों में बढ़ती मुद्रास्फीति के बावजूद राशि में संशोधन क्यों नहीं किया गया। इस प्रावधान को “जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा” बताते हुए, अदालत ने केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने का आदेश दिया।

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CSMT स्टेशन पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज

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मुंब्रा दुर्घटना के लिए ज़िम्मेदार दो इंजीनियरों के ख़िलाफ़ दर्ज मामला वापस लेने की मांग को लेकर सेंट्रल रेलवे मज़दूर संघ के कार्यकर्ताओं ने पिछले हफ़्ते छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पर विरोध प्रदर्शन किया।(Case registered against protesters at CSMT station)

एक घंटे तक लोकल रेल सेवा बाधित रही

इससे एक घंटे तक लोकल सेवा बाधित रही। इस मामले में सीएसएमटी पुलिस ने रात में प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया।जून में मुंब्रा में हुई इस दुर्घटना में पाँच यात्रियों की मौत हो गई थी। इस मामले में ठाणे रेलवे पुलिस ने सेंट्रल रेलवे के वरिष्ठ मंडल इंजीनियर समर यादव और सहायक मंडल इंजीनियर विशाल डोलास के ख़िलाफ़ मामला (FIR) दर्ज किया है।

डीआरएम कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन करने को दी गई थी अनुमति

इन मामलों को वापस लेने की मांग को लेकर सेंट्रल रेलवे मज़दूर संघ ने गुरुवार को सीएसएमटी स्टेशन पर विरोध प्रदर्शन किया। इसके चलते लगभग एक घंटे तक लोकल सेवा बाधित रही। जबकि संगठन को डीआरएम कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति दी गई थी, सीआरएमएस के पदाधिकारी और सदस्य मिलन हॉल में एकत्र हुए।

कानूनी कार्रवाई के विरोध में नारे 

इस भीड़ में सीआरएमएस प्रमुख प्रवीण वाजपेयी और 100 से 200 अन्य प्रदर्शनकारी शामिल थे।  प्रदर्शनकारियों ने डीआरएम कार्यालय के सामने जाकर रेलवे पुलिस स्टेशन और मुंबई रेलवे द्वारा की गई कानूनी कार्रवाई के विरोध में नारे लगाए।

प्रदर्शन समाप्त होने के बाद, सीआरएमएस सदस्य एस. के. दुबे और विवेक सिसोदिया और उनके साथ 30-40 अन्य प्रदर्शनकारी सीएसएमटी लोकल लाइन जनरल हॉल स्थित मोटरमैन लॉबी में पहुँचे।

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Wheat Farming: गेहूं की खेती में आई नई तकनीक, बदल जाएगी किसानों की किस्मत, बढ़ेगी पैदावार और घटेगी लागत

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गेहूं की खेती

गेहूं की खेती
– फोटो : AI

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गेहूं की खेती कर रहे किसानों के लिए ये काम की खबर है। किसानों की मेहनत को आसान और उनकी आय को दोगुना करने की दिशा में कृषि विभाग ने गेहूं की खेती में नई तकनीक का आगाज़ किया है। यह तकनीक न केवल किसानों की लागत और श्रम को घटाएगी, बल्कि पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण की समस्या से भी राहत दिलाएगी। दरअसल, ये तकनीक ‘सीधी बुवाई’ की है। यूपी के कई किसानों द्वारा इस वर्ष गेहूं की ‘सीधी बुवाई’ (लाइन सोइंग) तकनीक अपनाई जा रही है। इस पहल के तहत सरकार किसानों को ‘सुपर सीडर’ और ‘हैप्पी सीडर’ जैसी अत्याधुनिक मशीनों पर भारी सब्सिडी प्रदान कर रही है।‘सुपर सीडर’ तकनीक क्या है?
‘सुपर सीडर’ एक ऐसी आधुनिक मशीन है जिसे ट्रैक्टर से चलाया जाता है। यह मशीन एक ही बार में तीन बड़े कार्य करती है—

  • खेत की जुताई,
  • धान की पराली को काटकर मिट्टी में मिलाना,
  • और साथ ही गेहूं के बीज की बुवाई।

इस प्रक्रिया से खेत तुरंत अगली फसल के लिए तैयार हो जाता है और पराली जलाने की जरूरत समाप्त हो जाती है। किसानों को होंगे ये प्रमुख लाभ….

1. समय और मेहनत की बचत
किसानों को खेत की बार-बार जुताई नहीं करनी पड़ेगी। एक ही बार में बीज बोने और पराली नष्ट करने से श्रम और समय दोनों की बचत होगी।

2. कम लागत, अधिक मुनाफा
इस तकनीक से बीज, खाद और पानी की खपत घट जाती है, जिससे खेती की लागत में करीब 50% तक की कमी आती है।

3. मिट्टी की उर्वरता में सुधार
धान की पराली मिट्टी में दबकर प्राकृतिक खाद का काम करती है। इससे मिट्टी की नमी बनी रहती है और उसकी सेहत बेहतर होती है।

4. प्रदूषण पर नियंत्रण
पराली जलाने की जरूरत खत्म होने से वायु प्रदूषण में भारी कमी आएगी। यह पहल दिल्ली-NCR और पूर्वी उत्तर प्रदेश में वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

बंपर उपज की उम्मीद
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सीधी बुवाई तकनीक से गेहूं की पैदावार में 5% तक की बढ़ोतरी संभव है। वहीं बुवाई की लागत करीब आधी रह जाती है। इससे किसानों को शुद्ध मुनाफा बढ़ाने में मदद मिलेगी और वे कम संसाधनों में अधिक उत्पादन कर सकेंगे।

गोरखपुर में प्रयोग, पूरे यूपी में होगा विस्तार
कृषि विभाग ने फिलहाल 800 हेक्टेयर भूमि पर इस तकनीक का प्रदर्शन (डेमो प्लॉट) शुरू किया है, जबकि 11 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सीधी बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रयोग सफल रहा तो अगले सीजन में इसे पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश में विस्तार दिया जाएगा।

कृषि और पर्यावरण, दोनों को फायदा
कृषि विभाग का यह प्रयास किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी तो है ही, साथ ही पर्यावरण के लिए भी बेहद उपयोगी साबित होगा। पराली जलाने पर नियंत्रण के साथ यह तकनीक मिट्टी की नमी, जैविक संरचना और जल संरक्षण में भी मददगार है।

कसारा, कर्जत तक 15 कोच वाली लोकल ट्रेन चलेगी

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कर्जत-कसारा रूट पर यात्रियों को जल्द ही राहत मिलने की संभावना है। कर्जत और कसारा स्टेशनों के बीच 15 कोच वाली लोकल ट्रेनें चलाने के लिए 27 रेलवे स्टेशनों का विस्तार किया जा रहा है।(Relief for passengers on Karjat-Kasara route soon)

दिसंबर 2025 तक काम पूरा करने का लक्ष्य 

मध्य रेलवे प्रशासन ने इन कार्यों को दिसंबर 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में, सीएसएमटी और डोंबिवली व कल्याण के बीच 15 कोच वाली लोकल ट्रेनें चलती हैं।कुछ लोकल ट्रेनें 12 कोच वाली होती हैं। ये लोकल ट्रेनें भीड़भाड़ वाली होती हैं। जैसे-जैसे यात्रियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है, लोकल सेवा पर भारी दबाव बढ़ रहा है।

फिलहाल चलती है 22 ट्रेन

इसलिए, इस रूट पर 15 कोच वाली लोकल ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की मांग कई दिनों से की जा रही थी।वर्तमान में, सीएसएमटी और कल्याण के बीच लगभग 22  15 कोच वाली लोकल ट्रेनें चलती हैं। कल्याण-कसारा और कल्याण-खोपोली के बीच स्टेशनों पर प्लेटफार्मों की कम लंबाई 15 कोच वाली लोकल ट्रेनों के संचालन में बाधा डाल रही है।

सबसे ज़्यादा स्टेशन कल्याण-कर्जत-खोपोली और कल्याण-कसारा रूट पर

मध्य रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, मुंबई महानगर क्षेत्र में 34 स्टेशनों का विस्तार कार्य चल रहा है। इनमें से 27 स्टेशनों का विस्तार दिसंबर के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। जानकारी के अनुसार, 27 में से सबसे ज़्यादा स्टेशन कल्याण-कर्जत-खोपोली और कल्याण-कसारा रूट पर हैं।

शुरुआत में, वर्तमान में चल रही 12 कोच वाली कुछ लोकल ट्रेनों को 15 कोच वाली ट्रेनों में बदला जाएगा और बाद में चरणों में इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी।

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