Tuesday, March 3, 2026
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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: पशु आहार पर सीमित छूट, सोयाबीन तेल पर उद्योग की नजर

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भारत-अमेरिका डील में सूखा अनाज आधारित पशु आहार पर सिर्फ 5 लाख टन का कोटा दिया गया है। – फोटो : सोशल मीडिया

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के पहले चरण में कृषि और खाद्य तेल क्षेत्र से जुड़े प्रावधानों को लेकर तस्वीर धीरे-धीरे साफ हो रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका को सूखा अनाज आधारित पशु आहार (DDGS) पर दी गई रियायत बेहद सीमित है और इससे घरेलू किसानों या बाजार पर बड़े असर की आशंका नहीं है। हालांकि, सोयाबीन तेल और अन्य कृषि उत्पादों पर संभावित टैरिफ कटौती को लेकर उद्योग जगत अब भी विस्तृत दिशा-निर्देश का इंतजार कर रहा है।

पशु आहार पर सिर्फ 5 लाख टन का कोटा
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक भारत ने अमेरिका को DDGS यानी सूखा अनाज आधारित पशु आहार पर अधिकतम 5 लाख टन का ही कोटा दिया है। यह देश की कुल पशु आहार खपत का करीब एक फीसदी है। भारत में पशु चारे की सालाना खपत लगभग 500 लाख टन आंकी जाती है। सरकार का कहना है कि यह सीमित आयात घरेलू आपूर्ति में कमी की भरपाई करेगा, न कि बाजार में असंतुलन पैदा करेगा।

उद्योग जगत ने समझौते पर नजरें लगा रखी हैं। – फोटो : गांव जंक्शन

चारे की लागत और खाद्य महंगाई पर नियंत्रण की कोशिश
सरकार का तर्क है कि सीमित मात्रा में DDGS आयात से मक्का और सोयाबीन जैसे कच्चे माल पर दबाव घटेगा। इससे इंसानों के उपभोग योग्य अनाज को पशु चारे में इस्तेमाल करने की मजबूरी कम होगी। पोल्ट्री, डेयरी, एक्वाकल्चर और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में लागत स्थिर रहने की उम्मीद जताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, इसका असर खाद्य मुद्रास्फीति को काबू में रखने में भी सहायक हो सकता है।
 

अमेरिका को सूखे पशु चारे (डीडीजीएस) पर सिर्फ 5 लाख टन कोटा। – फोटो : गांव जंक्शन

बढ़ती मांग ने पहले भी बढ़ाया आयात
पिछले कुछ वर्षों में पशु आहार की मांग तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2021 में घरेलू कीमतों में उछाल के कारण भारत को करीब 15 लाख टन सोयाबीन मील का आयात करना पड़ा था। इसके अलावा 6 लाख टन से अधिक पशु आहार श्रीलंका, चीन, अमेरिका, थाईलैंड और नेपाल जैसे देशों से मंगाया गया। म्यांमार, यूक्रेन, सिंगापुर और यूएई से मक्का, जबकि कुछ अफ्रीकी देशों से सोयाबीन का भी आयात हुआ है।

पशु चारे की मांग बढ़ने के कारण जरूरी हो जाता है आयात। – फोटो : गांव जंक्शन

सोयाबीन तेल पर उद्योग की नजर, लेकिन सतर्कता बरकरार
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मसौदे को खाद्य तेल और सोयाबीन प्रसंस्करण उद्योग ने सतर्क आशावाद के साथ देखा है। प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत है। इसके बदले भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं, सोयाबीन तेल, पशु आहार, अखरोट और कुछ फलों पर शुल्क घटाने या हटाने पर विचार कर रहा है।

कीमत, कोटा और जीएम उत्पादों पर सवाल
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि भारत पहले से ही सोयाबीन तेल के आयात पर काफी निर्भर है, ऐसे में यह समझौता अवसर भी बन सकता है। फिलहाल अमेरिका से आने वाला सोयाबीन तेल ऊंचे शुल्क के कारण महंगा पड़ता है और अर्जेंटीना की तुलना में 30-40 डॉलर प्रति टन ज्यादा कीमत पर आता है। हालांकि, उद्योग संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जेनेटिकली मोडिफाइड (GM) और नॉन-GM उत्पादों को लेकर सरकार का रुख अभी साफ नहीं है। टैरिफ कटौती, कोटा व्यवस्था और गुणवत्ता मानकों पर अंतिम दिशा-निर्देश सामने आने के बाद ही उद्योग कोई ठोस निष्कर्ष निकाल पाएगा।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: पशु आहार पर सीमित छूट, सोयाबीन तेल पर उद्योग की नजर

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भारत-अमेरिका डील में सूखा अनाज आधारित पशु आहार पर सिर्फ 5 लाख टन का कोटा दिया गया है। – फोटो : सोशल मीडिया

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के पहले चरण में कृषि और खाद्य तेल क्षेत्र से जुड़े प्रावधानों को लेकर तस्वीर धीरे-धीरे साफ हो रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका को सूखा अनाज आधारित पशु आहार (DDGS) पर दी गई रियायत बेहद सीमित है और इससे घरेलू किसानों या बाजार पर बड़े असर की आशंका नहीं है। हालांकि, सोयाबीन तेल और अन्य कृषि उत्पादों पर संभावित टैरिफ कटौती को लेकर उद्योग जगत अब भी विस्तृत दिशा-निर्देश का इंतजार कर रहा है।

पशु आहार पर सिर्फ 5 लाख टन का कोटा
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक भारत ने अमेरिका को DDGS यानी सूखा अनाज आधारित पशु आहार पर अधिकतम 5 लाख टन का ही कोटा दिया है। यह देश की कुल पशु आहार खपत का करीब एक फीसदी है। भारत में पशु चारे की सालाना खपत लगभग 500 लाख टन आंकी जाती है। सरकार का कहना है कि यह सीमित आयात घरेलू आपूर्ति में कमी की भरपाई करेगा, न कि बाजार में असंतुलन पैदा करेगा।

उद्योग जगत ने समझौते पर नजरें लगा रखी हैं। – फोटो : गांव जंक्शन

चारे की लागत और खाद्य महंगाई पर नियंत्रण की कोशिश
सरकार का तर्क है कि सीमित मात्रा में DDGS आयात से मक्का और सोयाबीन जैसे कच्चे माल पर दबाव घटेगा। इससे इंसानों के उपभोग योग्य अनाज को पशु चारे में इस्तेमाल करने की मजबूरी कम होगी। पोल्ट्री, डेयरी, एक्वाकल्चर और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में लागत स्थिर रहने की उम्मीद जताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, इसका असर खाद्य मुद्रास्फीति को काबू में रखने में भी सहायक हो सकता है।
 

अमेरिका को सूखे पशु चारे (डीडीजीएस) पर सिर्फ 5 लाख टन कोटा। – फोटो : गांव जंक्शन

बढ़ती मांग ने पहले भी बढ़ाया आयात
पिछले कुछ वर्षों में पशु आहार की मांग तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2021 में घरेलू कीमतों में उछाल के कारण भारत को करीब 15 लाख टन सोयाबीन मील का आयात करना पड़ा था। इसके अलावा 6 लाख टन से अधिक पशु आहार श्रीलंका, चीन, अमेरिका, थाईलैंड और नेपाल जैसे देशों से मंगाया गया। म्यांमार, यूक्रेन, सिंगापुर और यूएई से मक्का, जबकि कुछ अफ्रीकी देशों से सोयाबीन का भी आयात हुआ है।

पशु चारे की मांग बढ़ने के कारण जरूरी हो जाता है आयात। – फोटो : गांव जंक्शन

सोयाबीन तेल पर उद्योग की नजर, लेकिन सतर्कता बरकरार
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मसौदे को खाद्य तेल और सोयाबीन प्रसंस्करण उद्योग ने सतर्क आशावाद के साथ देखा है। प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत है। इसके बदले भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं, सोयाबीन तेल, पशु आहार, अखरोट और कुछ फलों पर शुल्क घटाने या हटाने पर विचार कर रहा है।

कीमत, कोटा और जीएम उत्पादों पर सवाल
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि भारत पहले से ही सोयाबीन तेल के आयात पर काफी निर्भर है, ऐसे में यह समझौता अवसर भी बन सकता है। फिलहाल अमेरिका से आने वाला सोयाबीन तेल ऊंचे शुल्क के कारण महंगा पड़ता है और अर्जेंटीना की तुलना में 30-40 डॉलर प्रति टन ज्यादा कीमत पर आता है। हालांकि, उद्योग संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जेनेटिकली मोडिफाइड (GM) और नॉन-GM उत्पादों को लेकर सरकार का रुख अभी साफ नहीं है। टैरिफ कटौती, कोटा व्यवस्था और गुणवत्ता मानकों पर अंतिम दिशा-निर्देश सामने आने के बाद ही उद्योग कोई ठोस निष्कर्ष निकाल पाएगा।

चंदौली में शुरू हुआ ‘ऑपरेशन ट्रैवल सेफ’, जागरूकता से बदलेगा ट्रैफिक व्यवहार

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चंदौली। सड़क हादसों पर प्रभावी रोक लगाने और लोगों में यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से चंदौली पुलिस ने एक नई पहल की शुरुआत की है। जिले में ‘ऑपरेशन ट्रैवल सेफ’ नामक अभियान चलाया जा रहा है, जिसका मकसद सख्ती से ज्यादा समझाइश के जरिए जनजीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

रसोई ने चलाया अभियान

पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे और अपर पुलिस अधीक्षक (सदर) अनन्त चन्द्रशेखर के मार्गदर्शन में यह अभियान पूरे जिले में लागू किया गया है। अधिकारियों का स्पष्ट संदेश है कि केवल चालान काटना ही समाधान नहीं है, बल्कि लोगों की सोच में बदलाव लाकर स्थायी सुधार लाना ज्यादा जरूरी है।

‘ऑपरेशन ट्रैवल सेफ’ के तहत दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है। पुलिस टीम विभिन्न चौराहों और प्रमुख मार्गों पर अभियान चलाकर नियमों की जानकारी दे रही है। साथ ही यह भी समझाया जा रहा है कि हेलमेट पहनना केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि जीवन सुरक्षा का सबसे सरल और प्रभावी उपाय है।

निशुल्क बांटे गए हेलमेट

अभियान के दौरान ‘हेलमेट बैंक’ जैसी पहल भी की जा रही है, जिसके माध्यम से जरूरतमंद चालकों को निःशुल्क हेलमेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस कदम को आम जनता से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।

पुलिस प्रशासन का मानना है कि यदि लोग स्वेच्छा से नियमों का पालन करें तो सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। ‘ऑपरेशन ट्रैवल सेफ’ इसी सोच के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि जनपद में सुरक्षित यातायात व्यवस्था स्थापित की जा सके।

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के पहले चरण में कृषि और खाद्य तेल क्षेत्र से जुड़े प्रावधानों को लेकर तस्वीर धीरे-धीरे साफ हो रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका को सूखा अनाज आधारित पशु आहार (DDGS) पर दी गई रियायत बेहद सीमित है और इससे घरेलू किसानों या बाजार पर बड़े असर की आशंका नहीं है। हालांकि, सोयाबीन तेल और अन्य कृषि उत्पादों पर संभावित टैरिफ कटौती को लेकर उद्योग जगत अब भी विस्तृत दिशा-निर्देश का इंतजार कर रहा है।

पशु आहार पर सिर्फ 5 लाख टन का कोटा
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक भारत ने अमेरिका को DDGS यानी सूखा अनाज आधारित पशु आहार पर अधिकतम 5 लाख टन का ही कोटा दिया है। यह देश की कुल पशु आहार खपत का करीब एक फीसदी है। भारत में पशु चारे की सालाना खपत लगभग 500 लाख टन आंकी जाती है। सरकार का कहना है कि यह सीमित आयात घरेलू आपूर्ति में कमी की भरपाई करेगा, न कि बाजार में असंतुलन पैदा करेगा।

उद्योग जगत ने समझौते पर नजरें लगा रखी हैं। – फोटो : गांव जंक्शन

चारे की लागत और खाद्य महंगाई पर नियंत्रण की कोशिश
सरकार का तर्क है कि सीमित मात्रा में DDGS आयात से मक्का और सोयाबीन जैसे कच्चे माल पर दबाव घटेगा। इससे इंसानों के उपभोग योग्य अनाज को पशु चारे में इस्तेमाल करने की मजबूरी कम होगी। पोल्ट्री, डेयरी, एक्वाकल्चर और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में लागत स्थिर रहने की उम्मीद जताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, इसका असर खाद्य मुद्रास्फीति को काबू में रखने में भी सहायक हो सकता है।
 

अमेरिका को सूखे पशु चारे (डीडीजीएस) पर सिर्फ 5 लाख टन कोटा। – फोटो : गांव जंक्शन

बढ़ती मांग ने पहले भी बढ़ाया आयात
पिछले कुछ वर्षों में पशु आहार की मांग तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2021 में घरेलू कीमतों में उछाल के कारण भारत को करीब 15 लाख टन सोयाबीन मील का आयात करना पड़ा था। इसके अलावा 6 लाख टन से अधिक पशु आहार श्रीलंका, चीन, अमेरिका, थाईलैंड और नेपाल जैसे देशों से मंगाया गया। म्यांमार, यूक्रेन, सिंगापुर और यूएई से मक्का, जबकि कुछ अफ्रीकी देशों से सोयाबीन का भी आयात हुआ है।

पशु चारे की मांग बढ़ने के कारण जरूरी हो जाता है आयात। – फोटो : गांव जंक्शन

सोयाबीन तेल पर उद्योग की नजर, लेकिन सतर्कता बरकरार
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मसौदे को खाद्य तेल और सोयाबीन प्रसंस्करण उद्योग ने सतर्क आशावाद के साथ देखा है। प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत है। इसके बदले भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं, सोयाबीन तेल, पशु आहार, अखरोट और कुछ फलों पर शुल्क घटाने या हटाने पर विचार कर रहा है।

कीमत, कोटा और जीएम उत्पादों पर सवाल
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि भारत पहले से ही सोयाबीन तेल के आयात पर काफी निर्भर है, ऐसे में यह समझौता अवसर भी बन सकता है। फिलहाल अमेरिका से आने वाला सोयाबीन तेल ऊंचे शुल्क के कारण महंगा पड़ता है और अर्जेंटीना की तुलना में 30-40 डॉलर प्रति टन ज्यादा कीमत पर आता है। हालांकि, उद्योग संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जेनेटिकली मोडिफाइड (GM) और नॉन-GM उत्पादों को लेकर सरकार का रुख अभी साफ नहीं है। टैरिफ कटौती, कोटा व्यवस्था और गुणवत्ता मानकों पर अंतिम दिशा-निर्देश सामने आने के बाद ही उद्योग कोई ठोस निष्कर्ष निकाल पाएगा।

Agra पुलिस कमिश्नर ने नागरिकों से की सहयोग की अपील, कहा- नियमों का पालन करें वरना पुलिस लेगी एक्शन

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आगरा के पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार IPS ने समस्त जनपदवासियों को होली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए इस अवसर पर सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी की अपील की है। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि होली केवल रंगों और खुशियों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह प्रेम, सौहार्द और सामाजिक समरसता का प्रतीक भी है। उन्होंने सभी नागरिकों से अनुरोध किया कि इस पर्व को एक सम्मानजनक और सुरक्षित तरीके से मनाया जाए।

पुलिस कमिश्नर ने कहा ये

पुलिस कमिश्नर ने विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि किसी पर जबरन रंग डालना या किसी को असहज करना पूरी तरह से अनुचित है। इसके अलावा, नशे की अवस्था में वाहन संचालन करने से बचने की चेतावनी दी गई, ताकि सड़क दुर्घटनाओं और अन्य अप्रिय घटनाओं को रोका जा सके।

डीजे संचालकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित मानकों का पालन करते हुए ही ध्वनि और संगीत का संचालन करें। उन्होंने साफ-साफ कहा कि अश्लील या विवादित गीत नहीं बजाने चाहिए और सार्वजनिक मार्गों को अवरुद्ध नहीं करना चाहिए। इससे पर्व का आनंद सभी नागरिक सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से ले सकेंगे।

आपातकालीन स्थिति में डायल करें 112

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी आपात स्थिति या समस्या के समय तुरंत 112 डायल कर सूचना दी जाए। पुलिस प्रशासन त्वरित और आवश्यक वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित करेगा। आगरा पुलिस का यह संदेश सुरक्षा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य न केवल त्योहार को खुशहाल और रंगीन बनाना है, बल्कि समाज में सुरक्षा, सहिष्णुता और सम्मान की भावना को भी बनाए रखना है। इस तरह, पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने नागरिकों से सहयोग और जागरूकता की अपील करते हुए होली के उत्सव को सुरक्षित और आनंदमय बनाने का संदेश दिया है।

1 अप्रैल से लागू होगी शगुन योजना, पुलिसकर्मियों की बेटियों की शादी पर मिलेंगे 2.5 लाख

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हरियाणा पुलिस जल्द ही अपनी नई कल्याण योजना “शगुन योजना” लागू करने जा रही है। इस योजना के तहत पुलिसकर्मियों की बेटियों की शादी के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके लिए महानिदेशक ने पुलिस परिवारों से संवाद करने और उनकी जरूरतों को समझने के लिए रोहतक जिले का दौरा किया।

डीजीपी ने कहा ये

हरियाणा पुलिस के महानिदेशक अजय सिंघल ने शनिवार को पंचकूला में बी-लेवल कल्याण बैठक में बताया कि शगुन योजना के अंतर्गत पुलिसकर्मियों की बेटियों की शादी के लिए 2.5 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। भविष्य में इस राशि को 5 लाख रुपये तक बढ़ाने की योजना है। यह योजना 1 अप्रैल से लागू की जाएगी।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा हॉस्टल गिफ्ट योजना, पुलिस लाइनों में बैंक्वेट और सामुदायिक केंद्र की सुविधा, तथा आवास संबंधित योजनाओं पर भी कार्य आरंभ कर दिया गया है। बैठक में हाल ही में शहीद हुए दो पुलिसकर्मियों, निरीक्षक जगदीश प्रसाद और पीएसआई रवि को श्रद्धांजलि दी गई।

इसलिए किया गया विचार

महानिदेशक ने स्पष्ट किया कि पुलिस मुख्यालय केवल कल्याण की सोच नहीं रखता, बल्कि ठोस योजनाओं को लागू करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इस उद्देश्य से उन्होंने रोहतक जिले का दौरा कर पुलिस परिवारों से संवाद किया और भविष्य में सभी पुलिस लाइनों का दौरा करने का आश्वासन दिया।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: पशु आहार पर सीमित छूट, सोयाबीन तेल पर उद्योग की नजर

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भारत-अमेरिका डील में सूखा अनाज आधारित पशु आहार पर सिर्फ 5 लाख टन का कोटा दिया गया है। – फोटो : सोशल मीडिया

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के पहले चरण में कृषि और खाद्य तेल क्षेत्र से जुड़े प्रावधानों को लेकर तस्वीर धीरे-धीरे साफ हो रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका को सूखा अनाज आधारित पशु आहार (DDGS) पर दी गई रियायत बेहद सीमित है और इससे घरेलू किसानों या बाजार पर बड़े असर की आशंका नहीं है। हालांकि, सोयाबीन तेल और अन्य कृषि उत्पादों पर संभावित टैरिफ कटौती को लेकर उद्योग जगत अब भी विस्तृत दिशा-निर्देश का इंतजार कर रहा है।

पशु आहार पर सिर्फ 5 लाख टन का कोटा
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक भारत ने अमेरिका को DDGS यानी सूखा अनाज आधारित पशु आहार पर अधिकतम 5 लाख टन का ही कोटा दिया है। यह देश की कुल पशु आहार खपत का करीब एक फीसदी है। भारत में पशु चारे की सालाना खपत लगभग 500 लाख टन आंकी जाती है। सरकार का कहना है कि यह सीमित आयात घरेलू आपूर्ति में कमी की भरपाई करेगा, न कि बाजार में असंतुलन पैदा करेगा।

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चारे की लागत और खाद्य महंगाई पर नियंत्रण की कोशिश
सरकार का तर्क है कि सीमित मात्रा में DDGS आयात से मक्का और सोयाबीन जैसे कच्चे माल पर दबाव घटेगा। इससे इंसानों के उपभोग योग्य अनाज को पशु चारे में इस्तेमाल करने की मजबूरी कम होगी। पोल्ट्री, डेयरी, एक्वाकल्चर और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में लागत स्थिर रहने की उम्मीद जताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, इसका असर खाद्य मुद्रास्फीति को काबू में रखने में भी सहायक हो सकता है।
 

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बढ़ती मांग ने पहले भी बढ़ाया आयात
पिछले कुछ वर्षों में पशु आहार की मांग तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2021 में घरेलू कीमतों में उछाल के कारण भारत को करीब 15 लाख टन सोयाबीन मील का आयात करना पड़ा था। इसके अलावा 6 लाख टन से अधिक पशु आहार श्रीलंका, चीन, अमेरिका, थाईलैंड और नेपाल जैसे देशों से मंगाया गया। म्यांमार, यूक्रेन, सिंगापुर और यूएई से मक्का, जबकि कुछ अफ्रीकी देशों से सोयाबीन का भी आयात हुआ है।

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सोयाबीन तेल पर उद्योग की नजर, लेकिन सतर्कता बरकरार
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मसौदे को खाद्य तेल और सोयाबीन प्रसंस्करण उद्योग ने सतर्क आशावाद के साथ देखा है। प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत है। इसके बदले भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं, सोयाबीन तेल, पशु आहार, अखरोट और कुछ फलों पर शुल्क घटाने या हटाने पर विचार कर रहा है।

कीमत, कोटा और जीएम उत्पादों पर सवाल
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि भारत पहले से ही सोयाबीन तेल के आयात पर काफी निर्भर है, ऐसे में यह समझौता अवसर भी बन सकता है। फिलहाल अमेरिका से आने वाला सोयाबीन तेल ऊंचे शुल्क के कारण महंगा पड़ता है और अर्जेंटीना की तुलना में 30-40 डॉलर प्रति टन ज्यादा कीमत पर आता है। हालांकि, उद्योग संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जेनेटिकली मोडिफाइड (GM) और नॉन-GM उत्पादों को लेकर सरकार का रुख अभी साफ नहीं है। टैरिफ कटौती, कोटा व्यवस्था और गुणवत्ता मानकों पर अंतिम दिशा-निर्देश सामने आने के बाद ही उद्योग कोई ठोस निष्कर्ष निकाल पाएगा।

ईरान-इस्राइल तनाव का असर: UP में संवेदनशील जिलों में बढ़ाई गई सुरक्षा, अतिरिक्त पुलिस तैनात

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इस्राइल द्वारा ईरान पर हमले और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने युद्ध जैसे हालात और खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रदेश सरकार ने सभी जिलों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं।

सीएम ने कहा ये

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार सुबह उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी संभावित अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखने को कहा। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को दोबारा अलर्ट जारी किया गया।

एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश ने बताया कि संवेदनशील और शिया बाहुल्य इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जा रही है। धार्मिक स्थलों, प्रमुख चौराहों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। त्योहारों का समय होने के कारण प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है, ताकि कोई अराजक तत्व माहौल खराब न कर सके। हिंसक प्रदर्शन या अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

रविवार सुबह राजधानी लखनऊ में शिया समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए। छोटे इमामबाड़े के पास बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और खामेनेई की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए नारेबाजी की। कई महिलाएं और पुरुष रोते-बिलखते दिखाई दिए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल मौके पर तैनात रहा और स्थिति पर नजर रखी गई।

लोगों से की अपील

इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एवं इमाम ईदगाह मौलाना खालिद रशीद ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि एक स्वतंत्र देश पर हमला किया गया और निर्दोष लोगों को निशाना बनाया गया। वहीं शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने कहा कि खामेनेई को दुनिया भर के मुसलमानों का मार्गदर्शक नेता माना जाता था और उनकी मौत से गहरा दुख पहुंचा है।

प्रदेश सरकार का कहना है कि शांति और सौहार्द बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलिस प्रशासन सोशल मीडिया पर भी नजर रख रहा है, ताकि किसी भी तरह की अफवाह या भड़काऊ सामग्री को तुरंत रोका जा सके। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें और किसी भी अपुष्ट सूचना पर ध्यान न दें।

नागपुर : एसबीएल एनर्जी प्लांट में जबर्दस्त धमाके से मची चीख-पुकार, 15 की मौत, 18 गंभीर

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नागपुर. महाराष्ट्र के नागपुर जिले में रविवार 1 मार्च की सुबह दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है. काटोल तहसील के राउलगांव में स्थित एसबीएल कंपनी में सुबह करीब 7 बजे जोरदार विस्फोट हो गया. यह कंपनी बारूद और डेटोनेटर सहित अन्य विस्फोटक सामग्री तैयार करती है.

पुलिस के अनुसार इस भीषण धमाके में 15 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 18 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं. घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, हालांकि विस्फोट के सटीक कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है.

मची अफरा-तफरी

विस्फोट इतना जबरदस्त था कि आसपास के गांवों तक उसकी आवाज सुनाई दी. धमाके के बाद फैक्ट्री परिसर में आग लग गई, जिससे हालात और बिगड़ गए. सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया. नागपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक हर्ष पोद्दार ने आधिकारिक तौर पर 15 मौतों और 18 घायलों की पुष्टि की है. प्रारंभिक तौर पर कंपनी प्रबंधन पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप लगाये जा रहे हैं. हालांकि इस संबंध में विस्तृत जांच जारी है.

फिलहाल प्रशासन ने पूरे परिसर को सील कर दिया है और फॉरेंसिक टीमों को बुलाया गया है. जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या यह कोई तकनीकी खराबी थी या मानवीय लापरवाही. शुरुआती जांच में बारूद और डेटोनेटर निर्माण प्रक्रिया के दौरान किसी तकनीकी चूक की आशंका जताई जा रही है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है.

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: पशु आहार पर सीमित छूट, सोयाबीन तेल पर उद्योग की नजर

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भारत-अमेरिका डील में सूखा अनाज आधारित पशु आहार पर सिर्फ 5 लाख टन का कोटा दिया गया है। – फोटो : सोशल मीडिया

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के पहले चरण में कृषि और खाद्य तेल क्षेत्र से जुड़े प्रावधानों को लेकर तस्वीर धीरे-धीरे साफ हो रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका को सूखा अनाज आधारित पशु आहार (DDGS) पर दी गई रियायत बेहद सीमित है और इससे घरेलू किसानों या बाजार पर बड़े असर की आशंका नहीं है। हालांकि, सोयाबीन तेल और अन्य कृषि उत्पादों पर संभावित टैरिफ कटौती को लेकर उद्योग जगत अब भी विस्तृत दिशा-निर्देश का इंतजार कर रहा है।

पशु आहार पर सिर्फ 5 लाख टन का कोटा
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक भारत ने अमेरिका को DDGS यानी सूखा अनाज आधारित पशु आहार पर अधिकतम 5 लाख टन का ही कोटा दिया है। यह देश की कुल पशु आहार खपत का करीब एक फीसदी है। भारत में पशु चारे की सालाना खपत लगभग 500 लाख टन आंकी जाती है। सरकार का कहना है कि यह सीमित आयात घरेलू आपूर्ति में कमी की भरपाई करेगा, न कि बाजार में असंतुलन पैदा करेगा।

उद्योग जगत ने समझौते पर नजरें लगा रखी हैं। – फोटो : गांव जंक्शन

चारे की लागत और खाद्य महंगाई पर नियंत्रण की कोशिश
सरकार का तर्क है कि सीमित मात्रा में DDGS आयात से मक्का और सोयाबीन जैसे कच्चे माल पर दबाव घटेगा। इससे इंसानों के उपभोग योग्य अनाज को पशु चारे में इस्तेमाल करने की मजबूरी कम होगी। पोल्ट्री, डेयरी, एक्वाकल्चर और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में लागत स्थिर रहने की उम्मीद जताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, इसका असर खाद्य मुद्रास्फीति को काबू में रखने में भी सहायक हो सकता है।
 

अमेरिका को सूखे पशु चारे (डीडीजीएस) पर सिर्फ 5 लाख टन कोटा। – फोटो : गांव जंक्शन

बढ़ती मांग ने पहले भी बढ़ाया आयात
पिछले कुछ वर्षों में पशु आहार की मांग तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2021 में घरेलू कीमतों में उछाल के कारण भारत को करीब 15 लाख टन सोयाबीन मील का आयात करना पड़ा था। इसके अलावा 6 लाख टन से अधिक पशु आहार श्रीलंका, चीन, अमेरिका, थाईलैंड और नेपाल जैसे देशों से मंगाया गया। म्यांमार, यूक्रेन, सिंगापुर और यूएई से मक्का, जबकि कुछ अफ्रीकी देशों से सोयाबीन का भी आयात हुआ है।

पशु चारे की मांग बढ़ने के कारण जरूरी हो जाता है आयात। – फोटो : गांव जंक्शन

सोयाबीन तेल पर उद्योग की नजर, लेकिन सतर्कता बरकरार
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मसौदे को खाद्य तेल और सोयाबीन प्रसंस्करण उद्योग ने सतर्क आशावाद के साथ देखा है। प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत है। इसके बदले भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं, सोयाबीन तेल, पशु आहार, अखरोट और कुछ फलों पर शुल्क घटाने या हटाने पर विचार कर रहा है।

कीमत, कोटा और जीएम उत्पादों पर सवाल
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि भारत पहले से ही सोयाबीन तेल के आयात पर काफी निर्भर है, ऐसे में यह समझौता अवसर भी बन सकता है। फिलहाल अमेरिका से आने वाला सोयाबीन तेल ऊंचे शुल्क के कारण महंगा पड़ता है और अर्जेंटीना की तुलना में 30-40 डॉलर प्रति टन ज्यादा कीमत पर आता है। हालांकि, उद्योग संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जेनेटिकली मोडिफाइड (GM) और नॉन-GM उत्पादों को लेकर सरकार का रुख अभी साफ नहीं है। टैरिफ कटौती, कोटा व्यवस्था और गुणवत्ता मानकों पर अंतिम दिशा-निर्देश सामने आने के बाद ही उद्योग कोई ठोस निष्कर्ष निकाल पाएगा।