Tuesday, March 3, 2026
Home Blog Page 5

त्योहार सुरक्षित बनाने को सीएम योगी की सख्ती, पूरे प्रदेश में चलेगा चेकिंग अभियान

0
उत्तर प्रदेश में आगामी त्योहारों को देखते हुए कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों (डीएम), पुलिस अधीक्षकों (एसपी) और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि त्योहारों के दौरान फील्ड में सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था या दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न न हो।

डीएम और पुलिस अफसरों को दिए निर्देश 

मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि त्योहारों के दौरान भीड़भाड़, बाजारों और धार्मिक स्थलों पर विशेष सतर्कता बरती जाए। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमें लगातार पेट्रोलिंग करें और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी रखी जाए। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

यातायात व्यवस्था को लेकर भी सीएम योगी ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नियमित वाहन चेकिंग अभियान चलाया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि बिना सीट बेल्ट और हेलमेट के कोई भी वाहन चालक सड़क पर न चले। इसके साथ ही शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहार खुशियों और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक होते हैं, इसलिए प्रशासन का दायित्व है कि आमजन सुरक्षित वातावरण में उत्सव मना सकें। इसके लिए ट्रैफिक प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, आपातकालीन सेवाओं और पुलिस रिस्पॉन्स सिस्टम को पूरी तरह अलर्ट मोड में रखा जाए।

राज्य सरकार ने दिए निर्देश 

राज्य सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी घटना या समस्या की सूचना पर तुरंत कार्रवाई की जाए और जनता को अनावश्यक परेशानी न होने दी जाए। शासन स्तर से लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे प्रदेश में त्योहार शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न हो सकें।

आगरा में खत्म हुआ ‘कल्लू’ का खेल: STF की गोली से 50 हजार का इनामी ढेर

0
 

 

पश्चिमी यूपी में रंगदारी और हत्या के मामलों से दहशत फैलाने वाला पवन उर्फ कल्लू आखिरकार आगरा में पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। शुक्रवार रात ताजगंज इलाके में यूपी एसटीएफ नोएडा यूनिट और आगरा पुलिस की संयुक्त टीम ने उसे घेर लिया।

बताया जा रहा है कि घेराबंदी के दौरान कल्लू ने पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग की और बाइक से भागने की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में लगी गोली से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तत्काल एसएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।

गैंग से लेकर जेल तक का सफर

कल्लू, रणदीप भाटी और अमित कसाना गैंग का शूटर था। वर्ष 2021 में हत्या के एक मामले में उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित हुआ था। बाद में दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

जेल के दौरान उसका संपर्क हरियाणा के कुख्यात हिमांशु भाऊ गैंग से हुआ। वर्ष 2025 में जेल से बाहर आने के बाद उसने बड़े स्तर पर रंगदारी का नेटवर्क फिर से सक्रिय कर दिया।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कल्लू दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ी आपराधिक वारदात की योजना बना रहा था। एसटीएफ को इनपुट मिला कि वह आगरा के एकता क्षेत्र में मौजूद है। इसके बाद घेराबंदी की गई और मुठभेड़ हुई।

18 से ज्यादा केस, 4 हत्या शामिल

कल्लू के खिलाफ हत्या, रंगदारी, लूट समेत 18 से अधिक मुकदमे दर्ज थे। उसके पास से 9 एमएम की पिस्टल बरामद हुई, जिसे उसने वर्ष 2016 में एक सिपाही से लूटा था।

UP Police SI Exam 2025: 15.75 लाख अभ्यर्थियों के लिए 1090 केंद्र, निष्पक्षता और सुरक्षा पर सरकार का सख्त फोकस

0
UP Police Exam 2025: कुछ अभ्यर्थियों की फोटो में गड़बड़ी, परीक्षा के दिन साथ लानी होंगी दो रंगीन फोटो, बोर्ड ने दी बड़ी अपडेट
उत्तर प्रदेश में पुलिस उप निरीक्षक और समकक्ष पदों की भर्ती परीक्षा को लेकर सरकार ने इस बार बेहद सख्त रुख अपनाया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सभी जिलाधिकारियों, पुलिस आयुक्तों और वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि परीक्षा प्रक्रिया के हर चरण पर कड़ी निगरानी रखी जाए।

 14–15 मार्च को दो पालियों में परीक्षा

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित यह भर्ती परीक्षा 14 और 15 मार्च को आयोजित होगी। परीक्षा दो पालियों में होगी—

* पहली पाली: सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक

* दूसरी पाली: दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक

इस भर्ती के माध्यम से कुल 4543 पद भरे जाएंगे। राज्यभर में 1090 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं और लगभग 15,75,760 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे। बड़ी संख्या को देखते हुए सुरक्षा इंतजामों को विशेष रूप से मजबूत किया गया है।

 परीक्षा केंद्रों पर सख्त एंट्री नियम

मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्रों पर केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को प्रवेश मिलेगा जिनके पास—

* वैध प्रवेश पत्र

* मान्य फोटो पहचान पत्र

* काले या नीले रंग का पेन

बिना इन दस्तावेजों के किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जाएगा। केंद्रों पर पुलिस बल की पर्याप्त तैनाती रहेगी और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

 गोपनीय सामग्री की कड़ी निगरानी

परीक्षा की गोपनीय सामग्री को कोषागार में सुरक्षित रखने के लिए विशेष कक्ष निर्धारित किए गए हैं। इन कक्षों में—

* केवल एक प्रवेश द्वार

* अंदर और बाहर सीसीटीवी कैमरे

* पर्याप्त रोशनी

* निर्बाध इंटरनेट सुविधा

* कम से कम दो सुरक्षाकर्मी

की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी नोडल अधिकारी (प्रशासन) को सौंपी गई है। परीक्षा सामग्री को केंद्रों तक पहुंचाने के लिए सुरक्षित और कम दूरी वाले मार्ग का चयन कर विस्तृत रूट मैप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्य सचिव एसपी गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। अधिकारियों को चेताया गया कि किसी एक स्थान पर भी लापरवाही पूरे परीक्षा तंत्र को प्रभावित कर सकती है, इसलिए हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाए।

 डायल-112 और पुलिस निगरानी

परीक्षा केंद्रों के आसपास डायल-112 की गाड़ियों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा ने सभी अधिकारियों को बोर्ड द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं।

 

चने की फसल पर रोगों का साया : उकठा और जड़ सड़न से फसल बचाने के लिए विशेषज्ञों ने जारी किए जरूरी सुझाव

0

चना की फसल में कई रोगों के प्रकोप का खतरा। – फोटो : AI Image

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश की प्रमुख दलहनी फसल चने की खेती करने वाले किसानों के लिए यह समय बहुत सावधानी बरतने का है। विशेषज्ञों के अनुसार, चने की फसल में कई तरह के रोगों के संक्रमण का खतरा बना रहता है, जो पूरी मेहनत पर पानी फेर सकता है। चने की फसल में मिट्टी जनित रोगों के फैलने का सबसे बड़ा कारण फसल चक्र की अनदेखी करना है। अक्सर देखा गया है कि किसान एक ही खेत में लगातार चने की फसल लेते हैं, जिससे मिट्टी में मौजूद रोगों का प्रभाव बढ़ जाता है। इससे बचने के लिए खेती के जानकारों ने कुछ विशेष प्रबंधन और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की सलाह दी है।

फसल चक्र और गहरी जुताई से मिटेंगे रोगों के बीजाणु
मिट्टी जनित रोगों से निपटने के लिए सबसे कारगर तरीका खेत की तैयारी के समय ही शुरू हो जाता है। जानकारों का कहना है कि किसानों को गर्मियों के दौरान खेत की गहरी जुताई जरूर करनी चाहिए। ऐसा करने से पुरानी फसल के अवशेषों में छिपे कीट और फफूंद के बीजाणु सीधे सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आकर नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही फसल को रोगों से बचाने के लिए फसल चक्र अपनाना बेहद जरूरी है। यदि किसान हर दूसरे साल चने की जगह अलग-अलग रबी फसलों की बुवाई करें, तो मिट्टी जनित रोगों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

उकठा रोग के लिए ट्राइकोडर्मा और बीज उपचार का नुस्खा
चने की फसल में उकठा रोग का संक्रमण काफी घातक होता है। इसकी रोकथाम के लिए विशेषज्ञों ने जैविक और रासायनिक दोनों तरीकों के मेल का सुझाव दिया है। किसान सिंचाई से पहले 100 किलो सड़ी हुई गोबर की खाद में 10 किलो ट्राइकोडर्मा मिलाकर एक हेक्टेयर खेत में समान रूप से फैला सकते हैं। इसके अलावा बीज उपचार को सुरक्षा कवच की तरह अपनाना चाहिए। बीजों को कार्बेन्डाजिम की 2 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करने पर मिट्टी जनित रोगों से सुरक्षा मिलती है। विशेषज्ञों ने ‘पूसा चना मानव’ जैसी प्रतिरोधी किस्में अपनाने पर जोर दिया है, जिसकी औसत उपज 2.5 टन प्रति हेक्टेयर तक होती है।

जड़ और तना गलन से बचाव के लिए प्रबंधन है जरूरी
चने में जड़ सड़न और तना गलन जैसे रोग भी पौधों को काफी नुकसान पहुंचाते हैं। इन रोगों में पौधों की जड़ें गलने लगती हैं और पौधा सूख जाता है। जानकारों के अनुसार, तना गलन का खतरा अधिक नमी और ऊंचे तापमान में बढ़ जाता है। इससे बचाव के लिए खेत में फसल के अवशेष बिल्कुल न छोड़ें और संक्रमित पौधों को तुरंत उखाड़कर खेत से बाहर जला दें। रासायनिक उपचार के तौर पर कार्बेन्डाजिम का 0.2% घोल बनाकर पौधों की जड़ों के पास छिड़काव करना प्रभावी रहता है। वहीं तना गलन के मामले में बुवाई के 50-60 दिन बाद कार्बेन्डाजिम और मैन्कोजेब का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

अंगमारी रोग और जल निकासी पर ध्यान दें
ठंडे इलाकों में अक्सर चने की फसल में अंगमारी रोग देखा जाता है, जो फफूंद के कारण फैलता है। इससे बचने के लिए किसान ‘पूसा 3022’ जैसी उन्नत प्रतिरोधी किस्मों का चुनाव कर सकते हैं। बुवाई से पहले कार्बेन्डाजिम और मैन्कोजेब से बीज उपचारित करना और संक्रमण दिखने पर कार्बेन्डाजिम के घोल का छिड़काव करना फायदेमंद रहता है। अंत में, विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि खेती के दौरान मिट्टी में जल निकासी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए, क्योंकि खेत में जरूरत से ज्यादा नमी रोगों को न्योता देती है। इन सावधानियों को अपनाकर किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं।

यूपी पुलिस से छुट्टियां रद्द: यूपी में 7 मार्च तक सभी पुलिसकर्मी रहेंगे ड्यूटी पर

0
लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस के सभी कर्मियों की 1 से 7 मार्च तक छुट्टियां निरस्त कर दी गई हैं। यह आदेश राजीव कृष्ण ने जारी किया है। होली के त्योहार को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है।

डीजीपी ने दिए निर्देश 

डीजीपी मुख्यालय से जारी निर्देश में प्रदेश के सभी डीजी, एडीजी, आईजी, डीआईजी, एसएसपी समेत अन्य अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि निर्धारित अवधि के दौरान किसी भी स्तर पर अवकाश स्वीकृत न किया जाए। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने-अपने तैनाती स्थल पर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।

पुलिस मुख्यालय का कहना है कि होली के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में आयोजन होते हैं। ऐसे में शांति व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है। संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश भी दिए गए हैं।

इसके अलावा सभी जिलों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, गश्त बढ़ाने और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के भी निर्देश जारी किए गए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों को स्वयं फील्ड में रहकर स्थिति पर नजर रखने को कहा गया है।

लापरवाही बर्दाश्त नहीं

डीजीपी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रदेश में शांतिपूर्ण और सुरक्षित होली सुनिश्चित करना पुलिस की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।

 

 

फरवरी की खेती : सही फसल, सही समय और बेहतर मुनाफे का महीना, जानें; किन फसलों की करें बुवाई

0
फरवरी की खेती

फरवरी की खेती
– फोटो : गांव जंक्शन

विस्तार


जनवरी की ठिठुरन के बाद फरवरी खेतों में नई शुरुआत का संकेत लेकर आता है। न मौसम की सख्ती रहती है और न ही तेज गर्मी का दबाव, ऐसे में यह महीना किसानों के लिए योजना, श्रम और मुनाफे तीनों के लिहाज से बेहद अहम हो जाता है। इसी दौर में की गई सही बुवाई और रोपाई न सिर्फ बेहतर पैदावार का रास्ता खोलती है, बल्कि साल भर की आय की नींव भी मजबूत करती है।बसंतकालीन गन्ना : 15 फरवरी के बाद करें बुवाई
फरवरी के मध्य यानी 15 फरवरी के बाद बसंतकालीन गन्ने की बुवाई के लिए आदर्श समय माना जाता है। उन्नत और रोगमुक्त बीज का उपयोग करने से उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। बुवाई से पहले बीज को फफूंदीनाशक दवा से उपचारित करना जरूरी है। जिन किसानों के खेत में पहले से गन्ने की पेड़ी मौजूद है, उन्हें कटाई जमीन से सटाकर करनी चाहिए, ताकि नई फसल मजबूत और स्वस्थ विकसित हो सके।

भिंडी : जल्दी बाजार, बेहतर दाम
फरवरी में भिंडी की जायद फसल लगाने से किसान जल्दी सब्जी बाजार में उतार सकते हैं, जिससे उन्हें अच्छा भाव मिलता है। बुवाई के समय कतार से कतार की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर रखना जरूरी है। इससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और फलन अधिक होता है। समय पर सिंचाई और संतुलित खाद देने से भिंडी की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होता है।

सूरजमुखी : कम समय, ज्यादा संभावना
तेल वाली फसलों में सूरजमुखी तेजी से किसानों की पसंद बन रही है। इसकी बुवाई 15 से 29 फरवरी के बीच करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। किसान मिट्टी और जलवायु के अनुसार सही किस्म का चयन करें। बीज को कार्बंडाजिम या थीरम से उपचारित करने से रोगों का खतरा कम हो जाता है। कम समय में तैयार होने और अच्छी बाजार मांग के कारण सूरजमुखी मुनाफे का अच्छा विकल्प है।

टमाटर : गर्मियों की कमाई का आधार
फरवरी में टमाटर की रोपाई करने से गर्मियों में अच्छी पैदावार मिलती है। पौधों को 45×60 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाना बेहतर रहता है। रोपाई हमेशा शाम के समय करें, ताकि पौधे तेज धूप से बच सकें। अनुभवी किसानों का कहना है कि टमाटर की बढ़वार के लिए समय-समय पर यूरिया के माध्यम से नाइट्रोजन देना जरूरी है।

उत्तर प्रदेश में बसंत की प्रमुख तैयारियां
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए फरवरी का महीना बसंत गन्ने और प्याज की रोपाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। सही समय पर रोपाई करने से फसल मजबूत होती है और उत्पादन बेहतर मिलता है। खेत की अच्छी जुताई, नमी बनाए रखना, संतुलित खाद और नियमित सिंचाई पर ध्यान देना जरूरी है।

सही योजना से सालभर की आमदनी
अगर किसान मौसम और फसल चक्र को ध्यान में रखकर खेती करते हैं, तो लागत कम और पैदावार अधिक मिल सकती है। अलग-अलग मौसम में अलग फसलें लगाने से जमीन की उर्वरता बनी रहती है और सालभर आमदनी के अवसर मिलते हैं। सही जानकारी और समय पर खेती अपनाकर किसान नुकसान के जोखिम को भी काफी हद तक कम कर सकते हैं।

फरवरी की खेती : सही फसल, सही समय और बेहतर मुनाफे का महीना, जानें; किन फसलों की करें बुवाई

0
फरवरी की खेती

फरवरी की खेती
– फोटो : गांव जंक्शन

विस्तार


जनवरी की ठिठुरन के बाद फरवरी खेतों में नई शुरुआत का संकेत लेकर आता है। न मौसम की सख्ती रहती है और न ही तेज गर्मी का दबाव, ऐसे में यह महीना किसानों के लिए योजना, श्रम और मुनाफे तीनों के लिहाज से बेहद अहम हो जाता है। इसी दौर में की गई सही बुवाई और रोपाई न सिर्फ बेहतर पैदावार का रास्ता खोलती है, बल्कि साल भर की आय की नींव भी मजबूत करती है।बसंतकालीन गन्ना : 15 फरवरी के बाद करें बुवाई
फरवरी के मध्य यानी 15 फरवरी के बाद बसंतकालीन गन्ने की बुवाई के लिए आदर्श समय माना जाता है। उन्नत और रोगमुक्त बीज का उपयोग करने से उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। बुवाई से पहले बीज को फफूंदीनाशक दवा से उपचारित करना जरूरी है। जिन किसानों के खेत में पहले से गन्ने की पेड़ी मौजूद है, उन्हें कटाई जमीन से सटाकर करनी चाहिए, ताकि नई फसल मजबूत और स्वस्थ विकसित हो सके।

भिंडी : जल्दी बाजार, बेहतर दाम
फरवरी में भिंडी की जायद फसल लगाने से किसान जल्दी सब्जी बाजार में उतार सकते हैं, जिससे उन्हें अच्छा भाव मिलता है। बुवाई के समय कतार से कतार की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर रखना जरूरी है। इससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और फलन अधिक होता है। समय पर सिंचाई और संतुलित खाद देने से भिंडी की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होता है।

सूरजमुखी : कम समय, ज्यादा संभावना
तेल वाली फसलों में सूरजमुखी तेजी से किसानों की पसंद बन रही है। इसकी बुवाई 15 से 29 फरवरी के बीच करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। किसान मिट्टी और जलवायु के अनुसार सही किस्म का चयन करें। बीज को कार्बंडाजिम या थीरम से उपचारित करने से रोगों का खतरा कम हो जाता है। कम समय में तैयार होने और अच्छी बाजार मांग के कारण सूरजमुखी मुनाफे का अच्छा विकल्प है।

टमाटर : गर्मियों की कमाई का आधार
फरवरी में टमाटर की रोपाई करने से गर्मियों में अच्छी पैदावार मिलती है। पौधों को 45×60 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाना बेहतर रहता है। रोपाई हमेशा शाम के समय करें, ताकि पौधे तेज धूप से बच सकें। अनुभवी किसानों का कहना है कि टमाटर की बढ़वार के लिए समय-समय पर यूरिया के माध्यम से नाइट्रोजन देना जरूरी है।

उत्तर प्रदेश में बसंत की प्रमुख तैयारियां
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए फरवरी का महीना बसंत गन्ने और प्याज की रोपाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। सही समय पर रोपाई करने से फसल मजबूत होती है और उत्पादन बेहतर मिलता है। खेत की अच्छी जुताई, नमी बनाए रखना, संतुलित खाद और नियमित सिंचाई पर ध्यान देना जरूरी है।

सही योजना से सालभर की आमदनी
अगर किसान मौसम और फसल चक्र को ध्यान में रखकर खेती करते हैं, तो लागत कम और पैदावार अधिक मिल सकती है। अलग-अलग मौसम में अलग फसलें लगाने से जमीन की उर्वरता बनी रहती है और सालभर आमदनी के अवसर मिलते हैं। सही जानकारी और समय पर खेती अपनाकर किसान नुकसान के जोखिम को भी काफी हद तक कम कर सकते हैं।

फरवरी की खेती : सही फसल, सही समय और बेहतर मुनाफे का महीना, जानें; किन फसलों की करें बुवाई

0
फरवरी की खेती

फरवरी की खेती
– फोटो : गांव जंक्शन

विस्तार


जनवरी की ठिठुरन के बाद फरवरी खेतों में नई शुरुआत का संकेत लेकर आता है। न मौसम की सख्ती रहती है और न ही तेज गर्मी का दबाव, ऐसे में यह महीना किसानों के लिए योजना, श्रम और मुनाफे तीनों के लिहाज से बेहद अहम हो जाता है। इसी दौर में की गई सही बुवाई और रोपाई न सिर्फ बेहतर पैदावार का रास्ता खोलती है, बल्कि साल भर की आय की नींव भी मजबूत करती है।बसंतकालीन गन्ना : 15 फरवरी के बाद करें बुवाई
फरवरी के मध्य यानी 15 फरवरी के बाद बसंतकालीन गन्ने की बुवाई के लिए आदर्श समय माना जाता है। उन्नत और रोगमुक्त बीज का उपयोग करने से उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। बुवाई से पहले बीज को फफूंदीनाशक दवा से उपचारित करना जरूरी है। जिन किसानों के खेत में पहले से गन्ने की पेड़ी मौजूद है, उन्हें कटाई जमीन से सटाकर करनी चाहिए, ताकि नई फसल मजबूत और स्वस्थ विकसित हो सके।

भिंडी : जल्दी बाजार, बेहतर दाम
फरवरी में भिंडी की जायद फसल लगाने से किसान जल्दी सब्जी बाजार में उतार सकते हैं, जिससे उन्हें अच्छा भाव मिलता है। बुवाई के समय कतार से कतार की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर रखना जरूरी है। इससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और फलन अधिक होता है। समय पर सिंचाई और संतुलित खाद देने से भिंडी की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होता है।

सूरजमुखी : कम समय, ज्यादा संभावना
तेल वाली फसलों में सूरजमुखी तेजी से किसानों की पसंद बन रही है। इसकी बुवाई 15 से 29 फरवरी के बीच करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। किसान मिट्टी और जलवायु के अनुसार सही किस्म का चयन करें। बीज को कार्बंडाजिम या थीरम से उपचारित करने से रोगों का खतरा कम हो जाता है। कम समय में तैयार होने और अच्छी बाजार मांग के कारण सूरजमुखी मुनाफे का अच्छा विकल्प है।

टमाटर : गर्मियों की कमाई का आधार
फरवरी में टमाटर की रोपाई करने से गर्मियों में अच्छी पैदावार मिलती है। पौधों को 45×60 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाना बेहतर रहता है। रोपाई हमेशा शाम के समय करें, ताकि पौधे तेज धूप से बच सकें। अनुभवी किसानों का कहना है कि टमाटर की बढ़वार के लिए समय-समय पर यूरिया के माध्यम से नाइट्रोजन देना जरूरी है।

उत्तर प्रदेश में बसंत की प्रमुख तैयारियां
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए फरवरी का महीना बसंत गन्ने और प्याज की रोपाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। सही समय पर रोपाई करने से फसल मजबूत होती है और उत्पादन बेहतर मिलता है। खेत की अच्छी जुताई, नमी बनाए रखना, संतुलित खाद और नियमित सिंचाई पर ध्यान देना जरूरी है।

सही योजना से सालभर की आमदनी
अगर किसान मौसम और फसल चक्र को ध्यान में रखकर खेती करते हैं, तो लागत कम और पैदावार अधिक मिल सकती है। अलग-अलग मौसम में अलग फसलें लगाने से जमीन की उर्वरता बनी रहती है और सालभर आमदनी के अवसर मिलते हैं। सही जानकारी और समय पर खेती अपनाकर किसान नुकसान के जोखिम को भी काफी हद तक कम कर सकते हैं।

नोएडा में होली पर सुरक्षा कड़ी, 3500 पुलिसकर्मी तैनात

0
 

 

नोएडा में होली और होलिका दहन को लेकर पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। इस बार 1150 स्थानों पर होलिका दहन होगा और लगभग 3500 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। पुलिस ने हुड़दंग मचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान किया है।

फ्लैग मार्च होगा

पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में सभी थाना क्षेत्रों में ड्यूटी लगाई गई है। डीसीपी, एडीसीपी और सहायक पुलिस आयुक्त के नेतृत्व में हर दिन फ्लैग मार्च किया जा रहा है।

अपर पुलिस आयुक्त राजीव नारायण मिश्रा ने केंद्रीय शांति समिति के साथ बैठक कर जनता से अपील की कि वे त्योहार को भाईचारा और सौहार्द के साथ मनाएं।

 सोशल मीडिया पर निगरानी

डीसीपी शक्तिमोहन अवस्थी ने कहा कि सोशल मीडिया पर भी पुलिस पैनी नजर रखे हुए है। किसी भी हाल में ऐसी गतिविधियों का हिस्सा न बनें जिससे किसी की धार्मिक या सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुंचे।

 

 

फरवरी की खेती : सही फसल, सही समय और बेहतर मुनाफे का महीना, जानें; किन फसलों की करें बुवाई

0
फरवरी की खेती

फरवरी की खेती
– फोटो : गांव जंक्शन

विस्तार


जनवरी की ठिठुरन के बाद फरवरी खेतों में नई शुरुआत का संकेत लेकर आता है। न मौसम की सख्ती रहती है और न ही तेज गर्मी का दबाव, ऐसे में यह महीना किसानों के लिए योजना, श्रम और मुनाफे तीनों के लिहाज से बेहद अहम हो जाता है। इसी दौर में की गई सही बुवाई और रोपाई न सिर्फ बेहतर पैदावार का रास्ता खोलती है, बल्कि साल भर की आय की नींव भी मजबूत करती है।बसंतकालीन गन्ना : 15 फरवरी के बाद करें बुवाई
फरवरी के मध्य यानी 15 फरवरी के बाद बसंतकालीन गन्ने की बुवाई के लिए आदर्श समय माना जाता है। उन्नत और रोगमुक्त बीज का उपयोग करने से उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। बुवाई से पहले बीज को फफूंदीनाशक दवा से उपचारित करना जरूरी है। जिन किसानों के खेत में पहले से गन्ने की पेड़ी मौजूद है, उन्हें कटाई जमीन से सटाकर करनी चाहिए, ताकि नई फसल मजबूत और स्वस्थ विकसित हो सके।

भिंडी : जल्दी बाजार, बेहतर दाम
फरवरी में भिंडी की जायद फसल लगाने से किसान जल्दी सब्जी बाजार में उतार सकते हैं, जिससे उन्हें अच्छा भाव मिलता है। बुवाई के समय कतार से कतार की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर रखना जरूरी है। इससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और फलन अधिक होता है। समय पर सिंचाई और संतुलित खाद देने से भिंडी की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होता है।

सूरजमुखी : कम समय, ज्यादा संभावना
तेल वाली फसलों में सूरजमुखी तेजी से किसानों की पसंद बन रही है। इसकी बुवाई 15 से 29 फरवरी के बीच करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। किसान मिट्टी और जलवायु के अनुसार सही किस्म का चयन करें। बीज को कार्बंडाजिम या थीरम से उपचारित करने से रोगों का खतरा कम हो जाता है। कम समय में तैयार होने और अच्छी बाजार मांग के कारण सूरजमुखी मुनाफे का अच्छा विकल्प है।

टमाटर : गर्मियों की कमाई का आधार
फरवरी में टमाटर की रोपाई करने से गर्मियों में अच्छी पैदावार मिलती है। पौधों को 45×60 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाना बेहतर रहता है। रोपाई हमेशा शाम के समय करें, ताकि पौधे तेज धूप से बच सकें। अनुभवी किसानों का कहना है कि टमाटर की बढ़वार के लिए समय-समय पर यूरिया के माध्यम से नाइट्रोजन देना जरूरी है।

उत्तर प्रदेश में बसंत की प्रमुख तैयारियां
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए फरवरी का महीना बसंत गन्ने और प्याज की रोपाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। सही समय पर रोपाई करने से फसल मजबूत होती है और उत्पादन बेहतर मिलता है। खेत की अच्छी जुताई, नमी बनाए रखना, संतुलित खाद और नियमित सिंचाई पर ध्यान देना जरूरी है।

सही योजना से सालभर की आमदनी
अगर किसान मौसम और फसल चक्र को ध्यान में रखकर खेती करते हैं, तो लागत कम और पैदावार अधिक मिल सकती है। अलग-अलग मौसम में अलग फसलें लगाने से जमीन की उर्वरता बनी रहती है और सालभर आमदनी के अवसर मिलते हैं। सही जानकारी और समय पर खेती अपनाकर किसान नुकसान के जोखिम को भी काफी हद तक कम कर सकते हैं।