Tuesday, March 3, 2026
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मुंबई- अजित पवार के प्लेन क्रैश की SIT जांच के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में अर्जी

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बॉम्बे हाई कोर्ट में एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) फाइल की गई है, जिसमें प्लेन क्रैश की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से जांच की मांग की गई है, जिसमें कथित तौर पर अजित पवार की मौत हुई थी। यह पिटीशन RTI एक्टिविस्ट केतन तिरोडकर ने फाइल की है, जिन्होंने इस घटना से जुड़ी संभावित गड़बड़ियों और बिना जवाब वाले सवालों पर चिंता जताई है।(Mumbai SIT Investigation Sought in Bombay High Court Over Ajit Pawar‘s Plane Crash)

एविएशन सेफ्टी नॉर्म्स को लेकर सवाल 

पिटीशन में सवाल उठाया गया है कि क्या सही एविएशन सेफ्टी नॉर्म्स का पालन किया गया था और क्या क्रैश से पहले कोई टेक्निकल या ऑपरेशनल चूक हुई थी। इसमें एयरक्राफ्ट के उड़ने लायक होने की स्थिति और पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के बीच बातचीत पर भी सफाई मांगी गई है।

रिटायर्ड जजों की अगुवाई में एक कमेटी बनाने का निर्देश देने की मांग 

पिटीशन में राज्य सरकार, मुख्यमंत्री ऑफिस, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA), राज्य CID और MLA रोहित पवार को रेस्पोंडेंट बनाया गया है।पिटीशनर ने कोर्ट से CID की देखरेख में एक SIT बनाने और एक इंडिपेंडेंट और ट्रांसपेरेंट जांच सुनिश्चित करने के लिए एविएशन एक्सपर्ट्स के साथ रिटायर्ड जजों की अगुवाई में एक कमेटी बनाने का निर्देश देने की मांग की है।

PIL में आगे रिक्वेस्ट की गई है कि सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स की जांच की जाए और एक तय समय सीमा के अंदर फाइनल रिपोर्ट जमा की जाए।

यह भी पढ़ें- BMC अपना बचत जमा तोड़ेगा

मुंबई एयर पॉल्यूशन- CM देवेंद्र फडणवीस ने BMC को AI और IoT-बेस्ड रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने का आदेश दिया

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मुंबई में धूल और एयर पॉल्यूशन को कंट्रोल करने के लिए पानी के टैंकर हायर

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को लेजिस्लेटिव काउंसिल को बताया कि मुंबई में एयर पॉल्यूशन के सोर्स को ट्रैक करने के लिए म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) को इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बेस्ड डायनामिक मॉनिटरिंग सिस्टम डेवलप करने का निर्देश दिया गया है।(Mumbai Air Pollution CM Devendra Fadnavis Orders BMC To Implement AI And IoT-Based Real-Time Monitoring System)

IoT और AI पर बेस्ड पूरी तरह से कैपेबल सिस्टम के बिना एयर क्वालिटी की इफेक्टिव मॉनिटरिंग मुमकिन नहीं

उन्होंने कहा कि IoT और AI पर बेस्ड पूरी तरह से कैपेबल सिस्टम के बिना एयर क्वालिटी की इफेक्टिव मॉनिटरिंग मुमकिन नहीं है। ऐसे सिस्टम से रियल टाइम में पॉल्यूशन सोर्स की पहचान हो सकेगी और तुरंत करेक्टिव एक्शन लिया जा सकेगा।सभी कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स पर IoT और AI बेस्ड मॉनिटरिंग सिस्टम को लागू करने का काम जल्द ही पूरा हो जाएगा।

बढ़ते पॉल्यूशन पर चिंता

प्रश्नकाल के दौरान, अनिल परब (शिवसेना-UBT) ने बांद्रा के खेरवाड़ी इलाके में बढ़ते एयर पॉल्यूशन पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पॉल्यूशन की मुख्य वजह हैं। कई सदस्यों ने राज्य के दूसरे हिस्सों में बढ़ते पॉल्यूशन पर भी चिंता जताई। मंत्री की सफाई

चर्चा का जवाब देते हुए, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे ने कहा कि कुछ मोबाइल ऐप्स पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) डेटा में अंतर हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे केवल महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।

उन्होंने कहा कि सर्दियों के मौसम और नमी के कारण मुंबई में सुबह के समय स्मॉग होता है।उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि परब की शिकायत पर ध्यान दिया गया है और पर्यावरण के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

32 मॉनिटरिंग सेंटर, वार्ड लेवल पर कार्रवाई

राज्य में एक बड़ा प्रदूषण मॉनिटरिंग सिस्टम पहले से ही चालू है, और मुंबई में 32 जगहों पर AQI डेटा इकट्ठा किया जा रहा है। साथ ही, BMC अलग-अलग जगहों पर डिवाइस लगा रही है, जिसके ज़रिए रियल-टाइम डेटा संबंधित वार्ड ऑफिस को भेजा जाएगा।

इस डेटा को नगर निगम के डैशबोर्ड पर जोड़ने का लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और बाकी प्रोसेस जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। इससे वार्ड लेवल पर प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान करके टारगेटेड कार्रवाई की जा सकेगी।

मंत्री मुंडे ने यह भी बताया कि अगर AI-बेस्ड टेक्नोलॉजी को शामिल किया जाए तो AQI ट्रैकिंग की एफिशिएंसी और एक्यूरेसी काफी बढ़ जाएगी।चर्चा के दौरान दखल देते हुए, मुख्यमंत्री फडणवीस ने दोहराया कि BMC को एक पूरी तरह से डायनामिक सिस्टम बनाने का निर्देश दिया गया है जो सरकारी और प्राइवेट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स सहित सभी प्रदूषण सोर्स को ट्रैक करे।

यह भी पढ़ें- मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का मिसिंग लिंक मई तक खुल जाएगा

फरवरी की खेती : सही फसल, सही समय और बेहतर मुनाफे का महीना, जानें; किन फसलों की करें बुवाई

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फरवरी की खेती

फरवरी की खेती
– फोटो : गांव जंक्शन

विस्तार


जनवरी की ठिठुरन के बाद फरवरी खेतों में नई शुरुआत का संकेत लेकर आता है। न मौसम की सख्ती रहती है और न ही तेज गर्मी का दबाव, ऐसे में यह महीना किसानों के लिए योजना, श्रम और मुनाफे तीनों के लिहाज से बेहद अहम हो जाता है। इसी दौर में की गई सही बुवाई और रोपाई न सिर्फ बेहतर पैदावार का रास्ता खोलती है, बल्कि साल भर की आय की नींव भी मजबूत करती है।बसंतकालीन गन्ना : 15 फरवरी के बाद करें बुवाई
फरवरी के मध्य यानी 15 फरवरी के बाद बसंतकालीन गन्ने की बुवाई के लिए आदर्श समय माना जाता है। उन्नत और रोगमुक्त बीज का उपयोग करने से उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। बुवाई से पहले बीज को फफूंदीनाशक दवा से उपचारित करना जरूरी है। जिन किसानों के खेत में पहले से गन्ने की पेड़ी मौजूद है, उन्हें कटाई जमीन से सटाकर करनी चाहिए, ताकि नई फसल मजबूत और स्वस्थ विकसित हो सके।

भिंडी : जल्दी बाजार, बेहतर दाम
फरवरी में भिंडी की जायद फसल लगाने से किसान जल्दी सब्जी बाजार में उतार सकते हैं, जिससे उन्हें अच्छा भाव मिलता है। बुवाई के समय कतार से कतार की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर रखना जरूरी है। इससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और फलन अधिक होता है। समय पर सिंचाई और संतुलित खाद देने से भिंडी की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होता है।

सूरजमुखी : कम समय, ज्यादा संभावना
तेल वाली फसलों में सूरजमुखी तेजी से किसानों की पसंद बन रही है। इसकी बुवाई 15 से 29 फरवरी के बीच करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। किसान मिट्टी और जलवायु के अनुसार सही किस्म का चयन करें। बीज को कार्बंडाजिम या थीरम से उपचारित करने से रोगों का खतरा कम हो जाता है। कम समय में तैयार होने और अच्छी बाजार मांग के कारण सूरजमुखी मुनाफे का अच्छा विकल्प है।

टमाटर : गर्मियों की कमाई का आधार
फरवरी में टमाटर की रोपाई करने से गर्मियों में अच्छी पैदावार मिलती है। पौधों को 45×60 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाना बेहतर रहता है। रोपाई हमेशा शाम के समय करें, ताकि पौधे तेज धूप से बच सकें। अनुभवी किसानों का कहना है कि टमाटर की बढ़वार के लिए समय-समय पर यूरिया के माध्यम से नाइट्रोजन देना जरूरी है।

उत्तर प्रदेश में बसंत की प्रमुख तैयारियां
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए फरवरी का महीना बसंत गन्ने और प्याज की रोपाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। सही समय पर रोपाई करने से फसल मजबूत होती है और उत्पादन बेहतर मिलता है। खेत की अच्छी जुताई, नमी बनाए रखना, संतुलित खाद और नियमित सिंचाई पर ध्यान देना जरूरी है।

सही योजना से सालभर की आमदनी
अगर किसान मौसम और फसल चक्र को ध्यान में रखकर खेती करते हैं, तो लागत कम और पैदावार अधिक मिल सकती है। अलग-अलग मौसम में अलग फसलें लगाने से जमीन की उर्वरता बनी रहती है और सालभर आमदनी के अवसर मिलते हैं। सही जानकारी और समय पर खेती अपनाकर किसान नुकसान के जोखिम को भी काफी हद तक कम कर सकते हैं।

फरवरी की खेती : सही फसल, सही समय और बेहतर मुनाफे का महीना, जानें; किन फसलों की करें बुवाई

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फरवरी की खेती

फरवरी की खेती
– फोटो : गांव जंक्शन

विस्तार


जनवरी की ठिठुरन के बाद फरवरी खेतों में नई शुरुआत का संकेत लेकर आता है। न मौसम की सख्ती रहती है और न ही तेज गर्मी का दबाव, ऐसे में यह महीना किसानों के लिए योजना, श्रम और मुनाफे तीनों के लिहाज से बेहद अहम हो जाता है। इसी दौर में की गई सही बुवाई और रोपाई न सिर्फ बेहतर पैदावार का रास्ता खोलती है, बल्कि साल भर की आय की नींव भी मजबूत करती है।बसंतकालीन गन्ना : 15 फरवरी के बाद करें बुवाई
फरवरी के मध्य यानी 15 फरवरी के बाद बसंतकालीन गन्ने की बुवाई के लिए आदर्श समय माना जाता है। उन्नत और रोगमुक्त बीज का उपयोग करने से उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। बुवाई से पहले बीज को फफूंदीनाशक दवा से उपचारित करना जरूरी है। जिन किसानों के खेत में पहले से गन्ने की पेड़ी मौजूद है, उन्हें कटाई जमीन से सटाकर करनी चाहिए, ताकि नई फसल मजबूत और स्वस्थ विकसित हो सके।

भिंडी : जल्दी बाजार, बेहतर दाम
फरवरी में भिंडी की जायद फसल लगाने से किसान जल्दी सब्जी बाजार में उतार सकते हैं, जिससे उन्हें अच्छा भाव मिलता है। बुवाई के समय कतार से कतार की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर रखना जरूरी है। इससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और फलन अधिक होता है। समय पर सिंचाई और संतुलित खाद देने से भिंडी की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होता है।

सूरजमुखी : कम समय, ज्यादा संभावना
तेल वाली फसलों में सूरजमुखी तेजी से किसानों की पसंद बन रही है। इसकी बुवाई 15 से 29 फरवरी के बीच करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। किसान मिट्टी और जलवायु के अनुसार सही किस्म का चयन करें। बीज को कार्बंडाजिम या थीरम से उपचारित करने से रोगों का खतरा कम हो जाता है। कम समय में तैयार होने और अच्छी बाजार मांग के कारण सूरजमुखी मुनाफे का अच्छा विकल्प है।

टमाटर : गर्मियों की कमाई का आधार
फरवरी में टमाटर की रोपाई करने से गर्मियों में अच्छी पैदावार मिलती है। पौधों को 45×60 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाना बेहतर रहता है। रोपाई हमेशा शाम के समय करें, ताकि पौधे तेज धूप से बच सकें। अनुभवी किसानों का कहना है कि टमाटर की बढ़वार के लिए समय-समय पर यूरिया के माध्यम से नाइट्रोजन देना जरूरी है।

उत्तर प्रदेश में बसंत की प्रमुख तैयारियां
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए फरवरी का महीना बसंत गन्ने और प्याज की रोपाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। सही समय पर रोपाई करने से फसल मजबूत होती है और उत्पादन बेहतर मिलता है। खेत की अच्छी जुताई, नमी बनाए रखना, संतुलित खाद और नियमित सिंचाई पर ध्यान देना जरूरी है।

सही योजना से सालभर की आमदनी
अगर किसान मौसम और फसल चक्र को ध्यान में रखकर खेती करते हैं, तो लागत कम और पैदावार अधिक मिल सकती है। अलग-अलग मौसम में अलग फसलें लगाने से जमीन की उर्वरता बनी रहती है और सालभर आमदनी के अवसर मिलते हैं। सही जानकारी और समय पर खेती अपनाकर किसान नुकसान के जोखिम को भी काफी हद तक कम कर सकते हैं।

मुरादाबाद पुलिस का एआई वार: ‘यक्ष’ एप से अपराधियों पर डिजिटल शिकंजा

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मुरादाबाद में पुलिस व्यवस्था अब तकनीक के सहारे नई दिशा में कदम बढ़ा रही है। पारंपरिक जांच पद्धतियों से आगे बढ़ते हुए विभाग ने अपराध नियंत्रण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एक स्मार्ट एप तैयार किया है। “यक्ष” नाम का यह डिजिटल प्लेटफॉर्म सिपाही से लेकर आईपीएस स्तर के अधिकारियों तक के मोबाइल में इंस्टॉल कराया गया है, ताकि हर स्तर पर सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान हो सके।

सिपाहियों को मिली जिम्मेदारी

इस एप के माध्यम से बीट पुलिसकर्मियों को अपने क्षेत्र के अपराधियों, गैंगस्टरों, हिस्ट्रीशीटरों, किरायेदारों और संदिग्ध व्यक्तियों का विस्तृत डाटा अपलोड करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें नाम, पता, फोटो, मोबाइल नंबर, वाहन संबंधी जानकारी, आपराधिक इतिहास और गैंग से जुड़े संबंध जैसी जानकारियां दर्ज की जा रही हैं। एआई तकनीक की मदद से किसी भी संदिग्ध व्यक्ति का रिकॉर्ड कुछ ही सेकेंड में स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाता है, जिससे जांच प्रक्रिया पहले से अधिक तेज और सटीक बन रही है।

इस पहल का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब एक जिले में अपराध कर दूसरे जिले में छिपने वाले अपराधियों की पहचान आसान हो जाएगी। यदि किसी संदिग्ध का नाम या फोटो दूसरे जिले के डाटा से मेल खाता है तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा। इससे जिलों के बीच समन्वय मजबूत होगा और अपराधियों की धरपकड़ में तेजी आएगी।

अफसरों ने कहा ये 

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि बदलते समय में तकनीक का उपयोग अनिवार्य हो गया है। एआई आधारित यह एप न केवल अपराधियों की निगरानी को प्रभावी बनाएगा, बल्कि हिस्ट्रीशीटरों और सक्रिय गैंग की गतिविधियों पर भी लगातार नजर रखने में सहायक सिद्ध होगा। कुल मिलाकर, यह पहल कानून व्यवस्था को अधिक चुस्त और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

फरवरी की खेती : सही फसल, सही समय और बेहतर मुनाफे का महीना, जानें; किन फसलों की करें बुवाई

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फरवरी की खेती

फरवरी की खेती
– फोटो : गांव जंक्शन

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जनवरी की ठिठुरन के बाद फरवरी खेतों में नई शुरुआत का संकेत लेकर आता है। न मौसम की सख्ती रहती है और न ही तेज गर्मी का दबाव, ऐसे में यह महीना किसानों के लिए योजना, श्रम और मुनाफे तीनों के लिहाज से बेहद अहम हो जाता है। इसी दौर में की गई सही बुवाई और रोपाई न सिर्फ बेहतर पैदावार का रास्ता खोलती है, बल्कि साल भर की आय की नींव भी मजबूत करती है।बसंतकालीन गन्ना : 15 फरवरी के बाद करें बुवाई
फरवरी के मध्य यानी 15 फरवरी के बाद बसंतकालीन गन्ने की बुवाई के लिए आदर्श समय माना जाता है। उन्नत और रोगमुक्त बीज का उपयोग करने से उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। बुवाई से पहले बीज को फफूंदीनाशक दवा से उपचारित करना जरूरी है। जिन किसानों के खेत में पहले से गन्ने की पेड़ी मौजूद है, उन्हें कटाई जमीन से सटाकर करनी चाहिए, ताकि नई फसल मजबूत और स्वस्थ विकसित हो सके।

भिंडी : जल्दी बाजार, बेहतर दाम
फरवरी में भिंडी की जायद फसल लगाने से किसान जल्दी सब्जी बाजार में उतार सकते हैं, जिससे उन्हें अच्छा भाव मिलता है। बुवाई के समय कतार से कतार की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर रखना जरूरी है। इससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और फलन अधिक होता है। समय पर सिंचाई और संतुलित खाद देने से भिंडी की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होता है।

सूरजमुखी : कम समय, ज्यादा संभावना
तेल वाली फसलों में सूरजमुखी तेजी से किसानों की पसंद बन रही है। इसकी बुवाई 15 से 29 फरवरी के बीच करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। किसान मिट्टी और जलवायु के अनुसार सही किस्म का चयन करें। बीज को कार्बंडाजिम या थीरम से उपचारित करने से रोगों का खतरा कम हो जाता है। कम समय में तैयार होने और अच्छी बाजार मांग के कारण सूरजमुखी मुनाफे का अच्छा विकल्प है।

टमाटर : गर्मियों की कमाई का आधार
फरवरी में टमाटर की रोपाई करने से गर्मियों में अच्छी पैदावार मिलती है। पौधों को 45×60 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाना बेहतर रहता है। रोपाई हमेशा शाम के समय करें, ताकि पौधे तेज धूप से बच सकें। अनुभवी किसानों का कहना है कि टमाटर की बढ़वार के लिए समय-समय पर यूरिया के माध्यम से नाइट्रोजन देना जरूरी है।

उत्तर प्रदेश में बसंत की प्रमुख तैयारियां
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए फरवरी का महीना बसंत गन्ने और प्याज की रोपाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। सही समय पर रोपाई करने से फसल मजबूत होती है और उत्पादन बेहतर मिलता है। खेत की अच्छी जुताई, नमी बनाए रखना, संतुलित खाद और नियमित सिंचाई पर ध्यान देना जरूरी है।

सही योजना से सालभर की आमदनी
अगर किसान मौसम और फसल चक्र को ध्यान में रखकर खेती करते हैं, तो लागत कम और पैदावार अधिक मिल सकती है। अलग-अलग मौसम में अलग फसलें लगाने से जमीन की उर्वरता बनी रहती है और सालभर आमदनी के अवसर मिलते हैं। सही जानकारी और समय पर खेती अपनाकर किसान नुकसान के जोखिम को भी काफी हद तक कम कर सकते हैं।

जुमे की नमाज से पहले संभल में एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने की पैदल गश्त

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संभल। जुमे की नमाज को लेकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए आज पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई खुद सड़कों पर उतरे और शहर के विभिन्न इलाकों में पैदल गश्त की।

एसपी ने कहा ये

एसपी ने मुख्य बाजारों, प्रमुख मस्जिदों, संवेदनशील चौराहों और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों का निरीक्षण कर सुरक्षा इंतजामों की हकीकत परखी। इस दौरान उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को सतर्कता बरतने और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने के निर्देश दिए।

गश्त के दौरान एसपी ने स्थानीय व्यापारियों, धर्मगुरुओं और आम नागरिकों से संवाद कर उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि जुमे की नमाज शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराना पुलिस की प्राथमिकता है।

की जाएगी निगरानी

संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की व्यवस्था की गई है। साथ ही सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है, ताकि अफवाह फैलाने वालों पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।

एसपी ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने की कोशिश करने वाले असामाजिक तत्वों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

AI Impact Summit में DIG आशीष तिवारी का ‘Agentic AI’ विजन चर्चा में

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नई दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit में उत्तर प्रदेश पुलिस ने आधुनिक तकनीक आधारित पुलिसिंग का मजबूत प्रस्तुतीकरण करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस प्रतिष्ठित मंच पर उत्तर प्रदेश पुलिस का प्रतिनिधित्व डीआईजी तकनीकी सेवाएं Ashish Tiwari ने किया, जहां उन्होंने “Agentic AI in Policing” विषय पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

डीआईजी ने कहा ये

अपने संबोधन में डीआईजी आशीष तिवारी ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल डेटा विश्लेषण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ‘एजेंटिक एआई’ के माध्यम से पुलिसिंग की कार्यप्रणाली को अधिक सक्रिय, निर्णयक्षम और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा विकसित तकनीकी पहलों को साझा करते हुए बताया कि कैसे अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म कानून व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

इन बातों पर दिया जोर

प्रस्तुति के दौरान UP112 और YAKSH App सहित विभिन्न एआई आधारित परियोजनाओं का प्रदर्शन किया गया। इन तकनीकों के जरिए जांच प्रक्रिया को तेज करने, अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था को सशक्त बनाने, मानव संसाधन प्रबंधन को बेहतर करने, आपातकालीन प्रतिक्रिया समय घटाने और नागरिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

उन्होंने कहा कि भविष्य की पुलिसिंग डेटा-ड्रिवन और प्रेडिक्टिव होगी, जहां तकनीक पुलिसकर्मियों का विकल्प नहीं बल्कि सहयोगी बनेगी। उत्तर प्रदेश पुलिस का लक्ष्य तकनीक और मानवीय संवेदनशीलता के बीच संतुलन स्थापित करना है, ताकि अंतिम पंक्ति में तैनात बीट कांस्टेबल तक स्मार्ट टूल्स की पहुंच सुनिश्चित हो सके।

 

 

फरवरी की खेती : सही फसल, सही समय और बेहतर मुनाफे का महीना, जानें; किन फसलों की करें बुवाई

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फरवरी की खेती

फरवरी की खेती
– फोटो : गांव जंक्शन

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जनवरी की ठिठुरन के बाद फरवरी खेतों में नई शुरुआत का संकेत लेकर आता है। न मौसम की सख्ती रहती है और न ही तेज गर्मी का दबाव, ऐसे में यह महीना किसानों के लिए योजना, श्रम और मुनाफे तीनों के लिहाज से बेहद अहम हो जाता है। इसी दौर में की गई सही बुवाई और रोपाई न सिर्फ बेहतर पैदावार का रास्ता खोलती है, बल्कि साल भर की आय की नींव भी मजबूत करती है।बसंतकालीन गन्ना : 15 फरवरी के बाद करें बुवाई
फरवरी के मध्य यानी 15 फरवरी के बाद बसंतकालीन गन्ने की बुवाई के लिए आदर्श समय माना जाता है। उन्नत और रोगमुक्त बीज का उपयोग करने से उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। बुवाई से पहले बीज को फफूंदीनाशक दवा से उपचारित करना जरूरी है। जिन किसानों के खेत में पहले से गन्ने की पेड़ी मौजूद है, उन्हें कटाई जमीन से सटाकर करनी चाहिए, ताकि नई फसल मजबूत और स्वस्थ विकसित हो सके।

भिंडी : जल्दी बाजार, बेहतर दाम
फरवरी में भिंडी की जायद फसल लगाने से किसान जल्दी सब्जी बाजार में उतार सकते हैं, जिससे उन्हें अच्छा भाव मिलता है। बुवाई के समय कतार से कतार की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर रखना जरूरी है। इससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और फलन अधिक होता है। समय पर सिंचाई और संतुलित खाद देने से भिंडी की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होता है।

सूरजमुखी : कम समय, ज्यादा संभावना
तेल वाली फसलों में सूरजमुखी तेजी से किसानों की पसंद बन रही है। इसकी बुवाई 15 से 29 फरवरी के बीच करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। किसान मिट्टी और जलवायु के अनुसार सही किस्म का चयन करें। बीज को कार्बंडाजिम या थीरम से उपचारित करने से रोगों का खतरा कम हो जाता है। कम समय में तैयार होने और अच्छी बाजार मांग के कारण सूरजमुखी मुनाफे का अच्छा विकल्प है।

टमाटर : गर्मियों की कमाई का आधार
फरवरी में टमाटर की रोपाई करने से गर्मियों में अच्छी पैदावार मिलती है। पौधों को 45×60 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाना बेहतर रहता है। रोपाई हमेशा शाम के समय करें, ताकि पौधे तेज धूप से बच सकें। अनुभवी किसानों का कहना है कि टमाटर की बढ़वार के लिए समय-समय पर यूरिया के माध्यम से नाइट्रोजन देना जरूरी है।

उत्तर प्रदेश में बसंत की प्रमुख तैयारियां
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए फरवरी का महीना बसंत गन्ने और प्याज की रोपाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। सही समय पर रोपाई करने से फसल मजबूत होती है और उत्पादन बेहतर मिलता है। खेत की अच्छी जुताई, नमी बनाए रखना, संतुलित खाद और नियमित सिंचाई पर ध्यान देना जरूरी है।

सही योजना से सालभर की आमदनी
अगर किसान मौसम और फसल चक्र को ध्यान में रखकर खेती करते हैं, तो लागत कम और पैदावार अधिक मिल सकती है। अलग-अलग मौसम में अलग फसलें लगाने से जमीन की उर्वरता बनी रहती है और सालभर आमदनी के अवसर मिलते हैं। सही जानकारी और समय पर खेती अपनाकर किसान नुकसान के जोखिम को भी काफी हद तक कम कर सकते हैं।

होली और रमजान में पुलिस रहे सतर्क, DGP ने जारी किए निर्देश

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उत्तर प्रदेश में होली और रमजान को लेकर प्रशासन ने पहले से ही सख्त रणनीति तैयार कर ली है। राजधानी लखनऊ से इसकी शुरुआत करते हुए पुलिस अधिकारियों ने जमीनी स्तर पर हालात का आकलन किया।

डीजीपी ने दिया संदेश

उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय की ओर से प्रदेश के सभी जिलों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि त्योहारों के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतने और हर गतिविधि पर नजर रखने के निर्देश जारी किए गए हैं।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। बाजारों, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों और प्रमुख स्थलों पर लगातार गश्त की व्यवस्था की जा रही है। जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष टीमें भी तैयार रखी गई हैं।

लखनऊ में अधिकारियों ने पैदल निरीक्षण कर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की। इस दौरान स्थानीय थानों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए और कमियों को तुरंत दूर करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने साफ किया कि त्योहारों के दौरान शांति और सौहार्द बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

निगरानी करेगी यूपी पुलिस

प्रदेश स्तर पर निगरानी तंत्र को सक्रिय कर दिया गया है, ताकि किसी भी अफवाह या विवाद की स्थिति को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। प्रशासन का लक्ष्य है कि दोनों पर्व आपसी भाईचारे और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हों।