पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष की अनोखी पहल बनी चर्चा का विषय, पारंपरिक खेती से हटकर नई पहचान बनाने की तैयारी
रिपोर्ट: सुशील शर्मा (जिला ब्यूरो चीफ बस्ती
रुधौली (बस्ती)। अगर कुछ नया करने का जुनून हो तो शौक भी बदलाव की बड़ी वजह बन सकता है। इसी सोच को जमीन पर उतारते हुए बस्ती जिले के महुवर निवासी पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष अभिष पांडे ‘सोनू’ ने खेती के क्षेत्र में एक अनोखी पहल की है। उन्होंने करीब 60 बीघा जमीन पर काला नमक धान की खेती कर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। बड़े पैमाने पर की जा रही इस खेती ने किसानों से लेकर आम लोगों तक का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

काला नमक धान अपनी विशिष्ट खुशबू, स्वाद और पारंपरिक पहचान के लिए जाना जाता है। आमतौर पर किसान जहां प्रचलित धान की किस्मों को प्राथमिकता देते हैं, वहीं अभिष पांडे ‘सोनू’ ने एक अलग रास्ता चुनते हुए काला नमक धान की खेती को बड़े स्तर पर अपनाया है। उनकी इस पहल की आसपास के गांवों में भी खूब चर्चा हो रही है।
शौक से शुरू हुआ सफर, अब व्यवसाय की तैयारी
अभिष पांडे ‘सोनू’ ने बातचीत में बताया कि उन्हें काला नमक चावल बेहद पसंद है। इसी पसंद ने उन्हें इस विशेष धान की खेती करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने शौक को केवल व्यक्तिगत पसंद तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे खेती से जोड़कर बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।
उनका सपना है कि काला नमक धान की खेती के साथ–साथ भविष्य में इसके उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को भी व्यवसाय का रूप दिया जाए। इसके माध्यम से इस खास किस्म के चावल को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा सके।
किसानों के लिए बन सकती है नई राह
60 बीघा में काला नमक धान की खेती का यह प्रयास इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि बदलते समय में खेती को केवल परंपरागत तरीके से नहीं, बल्कि बाजार की संभावनाओं और व्यावसायिक दृष्टिकोण से भी देखने की जरूरत है। यदि अभिष पांडे ‘सोनू’ का यह प्रयोग सफल होता है तो इससे क्षेत्र के दूसरे किसानों को भी नई फसलों और बेहतर बाजार संभावनाओं की ओर कदम बढ़ाने की प्रेरणा मिल सकती है।

खेती में नया प्रयोग, सोच में बड़ा बदलाव
अभिष पांडे ‘सोनू’ की यह पहल बताती है कि खेती अब सिर्फ परंपरा निभाने का माध्यम नहीं, बल्कि नई सोच, पसंद और उद्यमिता के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी है। 60 बीघा में काला नमक धान की खेती कर उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि यदि किसान नई संभावनाओं को अपनाएं तो खेती में भी नए रास्ते खुल सकते हैं।
फिलहाल रुधौली क्षेत्र में उनकी इस पहल को लेकर चर्चाएं तेज हैं। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उनका यह अनोखा कृषि प्रयोग भविष्य में किस तरह व्यवसायिक सफलता की नई कहानी लिखता है।
