पीटीआई, मुंबई। बांबे हाई कोर्ट ने बुधवार को कहा कि महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षा में कथित गड़बड़ियों का विरोध कर रहे छात्र असामाजिक तत्व नहीं हैं। सरकारी भर्ती परीक्षाओं का निष्पक्ष आयोजन राज्य सरकार जिम्मेदारी है।
मुख्य न्यायाधीश महेशचंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की पीठ ने कहा कि सरकार को यह भरोसा उत्पन्न करना होगा कि परीक्षाओं का आयोजन ‘निष्पक्ष, पारदर्शी और किसी तरह की गड़बड़ी से मुक्त’ तरीके से किया जाएगा।
अदालत पुणे के निवासियों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर शहर में छात्रों और अन्य लोगों के प्रदर्शनों के खिलाफ दायर की गई थी।
पीठ ने कहा कि सरकार को परीक्षाओं में लोगों, खासकर छात्रों का भरोसा बहाल करने के लिए ईमानदार कोशिश करनी होगी। परेशान छात्रों को आंदोलन करने का अधिकार है।
पुणे निवासी अमित सुपेकर और सौरभ वीरकर की ओर से दायर याचिका में राज्य सरकार के साथ-साथ विरोध प्रदर्शन के आयोजकों- प्रमोद पाटिल, नितिन अंधाले और चेतन वागज को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
एक आयोजक ने कहा कि वह अपना आंदोलन वापस ले लेंगे, जबकि बाकी दो ने अदालत से कहा कि वे पुणे प्रशासन द्वारा दी गई किसी भी जगह पर अपना आंदोलन ले जाने के लिए तैयार हैं।
राज्य सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने कहा कि अधिकारियों ने उचित संयम दिखाया है। उन्होंने किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की है।
प्रदर्शनकारियों की अधिकतर मांगें मान ली गई हैं। उनकी मांगों में से एक एमपीएससी अध्यक्ष का इस्तीफा था। प्रक्रिया के अनुसार राज्यपाल को सिफारिश भेज दी गई है और आगे की कार्रवाई का इंतजार है।
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— Mnt News Bharat (@mntnewsbharat) October 5, 2026




















