जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। नीट-यूजी को लेकर शिक्षा मंत्रालय से जुड़ी संसदीय समिति ने एक बार फिर दोहराया है कि इस परीक्षा को भी जेईई मेन, यूजीसी नेट व सीयूईटी की तरह पेन-पेपर की जगह कंप्यूटर के जरिए कराया जाए। समिति ने एनटीए से इस बदलाव को अपनाने के लिए युद्ध स्तर पर काम करने की सिफारिश की है।
साथ ही कहा है कि नीट-यूजी परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों के प्रयासों व उम्र की सीमा को को स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर निर्धारित किया जाए।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक की अगुवाई में वाली संसदीय समिति ने इसके साथ ही एनटीए से एक हजार सरकारी और सुरक्षित परीक्षा केंद्र बनाने के लिए भी कहा है। इसमें प्रत्येक जिले में कम से कम एक परीक्षा केंद्र बनाने का सुझाव दिया है।
एनटीए ने नीट परीक्षा को कंप्यूटर के जरिए कराने के साथ ही इनमें दूरस्थ क्षेत्रों व वंचित छात्रों के हितों का भी ख्याल रखने का सुझाव दिया है। जिसमें जब इस क्षेत्रों में कंप्यूटर के जरिए परीक्षा कराने का मजबूत ढांचा और छात्रों को तैयार नहीं कर लिया जाता है,तब तक इन क्षेत्रों में परीक्षा को हाइब्रिड मोड में कराने का सुझाव दिया है।
साथ ही इसके कुछ तैयारियां भी करने को कहा है। जिसमें परीक्षा केंद्रों पर ही प्रश्न-पत्रों की छपाई की व्यवस्था आदि करने जैसे सुझाव दिए है। अभी नीट- यूजी परीक्षा में प्रयासों व उम्र की कोई सीमा तय नहीं है।
समिति ने एनटीए के काम-काज को लेकर दी गई अपनी रिपोर्ट में नीट-यूजी परीक्षा को पूरे देश भर में कराने के लिए टियर-2 व टियर -3 शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी नियंत्रण वाली परीक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को खड़ा करने के लिए पर्याप्त निवेश करने का भी सुझाव दिया है।
वहीं नीट-यूजी को कंप्यूटर के जरिए कराने का अंतिम निर्णय लेने से पहले स्वास्थ्य मंत्रालय, छात्रों व उनके परिवारों के साथ परामर्श करने को भी कहा है। गौरतलब है कि समिति ने यह सुझाव नीट-यूजी के पेपर लीक के बाद के दिया है। हालांकि इस लीक के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी अगले साल से नीट-यूजी को सीबीटी मोड में कराने का ऐलान किया था।
यह भी दिए अहम सुझाव
समिति ने इस दौरान परीक्षा के पैटर्न को वास्तविक समझ के बजाय कोचिंग उद्योग के अनुरूप बनाए जाने को लेकर भी सवाल खड़े किए और कहा कि इनमें बदलाव किया जाना जारिए, ताकि कोई भी पैटर्न को समझकर या रट्टा मारकर आगे न आ सके। मौजूदा पैटर्न से स्कूली पाठ्यक्रम से अधिक मायने कोचिंगों द्वारा तैयार किया गया पाठ्यक्रम बन गया है। जिसके चलते छात्र उस ओर आकर्षित हो रहे है। इसका खामियाजा सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों को उठाना पड़ता है।
समिति ने एनटीए के भीतर कर्मचारियों की कमी को भी उजागर किया है। रिपोर्ट में कहा है कि एनटीए के कुल 39 पद स्वीकृत है, जबकि इनमें से सिर्फ 23 पद ही भरे हुए है। इसके साथ ही समिति ने एनटीए में तैयार होने वाले अधिकारियों- कर्मचारियों व विशेषज्ञों की विशेष पड़ताल करने का कहा है।
प्रश्न पत्र और अनुवाद के लिए सरकारी संस्थानों के शिक्षकों को ही विशेषज्ञ बनाने की सलाह दी है। साथ ही कहा कि प्रश्न पत्र को परीक्षा के कुछ दिन पहले अंतिम रूप दिया जाए, साथ ही इनमें शामिल विशेषज्ञों को परीक्षा होने तक एकांत में रखा जाना चाहिए।
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— Mnt News Bharat (@mntnewsbharat) October 5, 2026






















