Rice: चावल निर्यात बढ़ाने के लिए 26 देशों पर फोकस, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 25,000 करोड़ के समझौते संभावित – India To Target 26 Countries To Boost Rice Exports; Mous Worth ₹25,000 Crore Likely At International Rice Con

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भारत अब अपने चावल निर्यात (Rice Export) को नए बाजारों में विस्तार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। अगले सप्ताह दिल्ली में होने वाले ‘भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस (BRIC) 2025’ में भारत 26 देशों को नए संभावित निर्यात बाजार के रूप में पेश करेगा, जिनमें इंडोनेशिया, फिलीपींस, वियतनाम और अमेरिका जैसे देश शामिल हैं। इन देशों से भारत को 1.8 लाख करोड़ रुपये तक के निर्यात ऑर्डर मिलने की संभावना जताई जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि भारत न केवल बासमती और नॉन-बासमती चावल के क्षेत्र में अग्रणी स्थान बनाए रखे, बल्कि पाकिस्तान, थाईलैंड और आयरलैंड जैसे प्रतिस्पर्धी देशों से बाजार हिस्सेदारी भी बढ़ाए।

26 देशों में नए अवसर, ₹1.8 लाख करोड़ का बाजार लक्ष्य

इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) के उपाध्यक्ष देव गर्ग ने मीडिया से बातचीत में बताया कि भारत ने 26 देशों को ऐसे संभावित बाजारों के रूप में चिन्हित किया है, “ये देश अन्य देशों से लगभग ₹1.8 लाख करोड़ मूल्य का चावल आयात करते हैं। भारत की विभिन्न किस्में जीआई (GI), बासमती और नॉन-बासमती इस आयात को प्रतिस्थापित करने की पूरी क्षमता रखती हैं।”

सरकारी अनुमान के मुताबिक, सम्मेलन के दौरान ₹25,000 करोड़ मूल्य के निर्यात समझौते (MoUs) पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। इन समझौतों से चावल निर्यातक कंपनियों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) दोनों को लाभ मिलेगा।

भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस (BRIC) 2025

यह दो दिवसीय सम्मेलन 30–31 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित होगा। इसका उद्देश्य वैश्विक चावल व्यापार में पारदर्शिता, दक्षता और स्थिरता को बढ़ावा देना है। इस सम्मेलन में शामिल होंगे —

  • 3,000 किसान और किसान उत्पादक संगठन (FPOs)
  • 80 से अधिक देशों से आए 1,000 विदेशी खरीदार
  • 2,500 निर्यातक, मिलर और संबंधित उद्योग प्रतिनिधि

सम्मेलन में सतत कृषि (Sustainability), नवाचार (Innovation) और नियम आधारित व्यापार प्रणाली (Rules-based commerce) जैसे विषयों पर विशेष सत्र होंगे।

भारत का वैश्विक चावल उत्पादन और निर्यात परिदृश्य

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2024–25 में लगभग 150 मिलियन टन चावल का उत्पादन किया, जो 47 मिलियन हेक्टेयर में फैले खेतों से हुआ है। भारत विश्व के कुल चावल उत्पादन का करीब 28 प्रतिशत योगदान देता है। चावल की उत्पादकता (Yield) में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है —

  • 2014–15 में औसत उत्पादकता: 2.72 टन प्रति हेक्टेयर
  • 2024–25 में बढ़कर हुई: 3.2 टन प्रति हेक्टेयर

इस सुधार का श्रेय सरकार द्वारा अपनाई गई बेहतर बीज किस्मों, उन्नत कृषि तकनीक और सिंचाई विस्तार को दिया जा रहा है।

भारत का निर्यात प्रदर्शन

भारत ने वित्त वर्ष 2024–25 में —

  • 20.1 मिलियन मीट्रिक टन चावल का निर्यात किया,
  • जिसकी कुल कीमत लगभग $12.95 बिलियन (₹1.08 लाख करोड़) रही।
  • यह निर्यात 172 देशों को किया गया।
  • भारत अब एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बाद लैटिन अमेरिका और उत्तरी अमेरिका के बाजारों में भी विस्तार की तैयारी कर रहा है।

भारत की रणनीति: प्रतिस्पर्धियों से आगे निकलने का लक्ष्य

देव गर्ग के अनुसार, भारत का लक्ष्य केवल निर्यात बढ़ाना नहीं, बल्कि पाकिस्तान और थाईलैंड जैसे प्रतिस्पर्धियों की हिस्सेदारी को भी चुनौती देना है। उन्होंने कहा, “भारत के पास जीआई टैग वाले बासमती चावल, नॉन-बासमती वैरायटी और पारंपरिक किस्मों की ऐसी विविधता है जो किसी भी अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग पूरी कर सकती है।” सरकार चाहती है कि इन नए बाजारों में भारत विश्वसनीय सप्लायर के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करे।

वैश्विक चावल व्यापार में भारत की भूमिका

भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है और वैश्विक व्यापार में 40% हिस्सेदारी रखता है। सरकार का मानना है कि BRIC 2025 के बाद निर्यातकों और विदेशी खरीदारों के बीच सीधे समझौते होने से भारतीय चावल की मांग और बढ़ेगी। इससे देश के किसानों की आय में सीधा इज़ाफा होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।