Wheat Variety: कम पानी में बंपर पैदावार देने वाली गेहूं की वेरायटी, किसानों के लिए है वरदान, खास बातें – “karan Manjari” Wheat Variety: A Boon For Farmers, Promises Yield Up To 56.5 Quintals Per Hectare

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गेहूं की खेती

गेहूं की खेती
– फोटो : AI

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रबी सीजन की तैयारी कर रहे किसानों के लिए एक खुशखबरी है। भारत के कृषि वैज्ञानिकों ने गेहूं की एक नई किस्म तैयार की है, जो किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है। यह किस्म है ‘करण मंजरी’ (DDW-55), जो कम पानी और सीमित संसाधनों में भी 56.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देने की क्षमता रखती है। खास बात यह है कि यह किस्म रोगों के प्रति भी काफी प्रतिरोधक है और किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली साबित हो रही है।किन राज्यों के लिए सबसे उपयुक्त

‘करण मंजरी’ किस्म विशेष रूप से मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान (कोटा और उदयपुर डिवीजन), छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के झांसी क्षेत्र के लिए उपयुक्त मानी गई है। इन इलाकों में जल की कमी को देखते हुए यह वैरायटी किसानों के लिए एक बड़ा राहत विकल्प बनकर आई है।

किसने तैयार की यह वैरायटी?

इस गेहूं की किस्म को भारतीय कृषि वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। सामान्य परिस्थितियों में इसकी पैदावार 35-36 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक रहती है, जबकि अनुकूल परिस्थितियों में यह 56.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देने में सक्षम है। यह किस्म न केवल पानी की बचत करती है बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी लंबे समय तक बनाए रखती है।

बुवाई का सही समय और तरीका

  • बुवाई का समय: 20 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच
  • बीज की मात्रा: प्रति हेक्टेयर 100 किलोग्राम
  • बीज उपचार: बुवाई से पहले बीजों को टेबुकोनाजोल 2% DS @ 1 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज से उपचारित करें, ताकि फफूंद और अन्य बीमारियों से सुरक्षा मिल सके।
  • दूरी: पौधों की कतारों में उचित दूरी रखें ताकि हवा और धूप का संतुलन बना रहे।

खाद और सिंचाई प्रबंधन

  • खाद की मात्रा: 90:60:40 किलोग्राम NPK/हेक्टेयर
  • पहली किस्त: बुवाई के समय आधी नाइट्रोजन, पूरी फास्फोरस और पोटाश डालें।
  • दूसरी किस्त: बची हुई नाइट्रोजन 45-50 दिन बाद डालें।
  • सिंचाई की जरूरत: इस किस्म को केवल दो बार सिंचाई की आवश्यकता होती है- 

1. पहली बार बुवाई से पहले
2. दूसरी बार 45-50 दिन बादइस तरह यह किस्म कम पानी में अधिक उत्पादन देने की क्षमता रखती है।

रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता

‘करण मंजरी’ गेहूं की किस्म में रस्ट (पीली रतुआ), तीलिया और कंडुआ जैसे प्रमुख रोगों के प्रति मजबूत प्रतिरोधकता देखी गई है।

  • रस्ट पीली रतुआ: केवल 7% तक प्रभाव
  • तीलिया: 3%
  • कंडुआ: 11%

इससे यह साबित होता है कि यह वैरायटी रोगों के प्रति काफी सुरक्षित और टिकाऊ है।

पोषक तत्व और गुणवत्ता

‘करण मंजरी’ गेहूं में प्रोटीन की उच्च मात्रा होती है। इसके 1000 दानों का औसत वजन 52 ग्राम है, जो इसे ग्रेडिंग और मार्केटिंग दोनों के लिहाज से बेहतर बनाता है। यह गेहूं बेकिंग और प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के लिए भी उपयुक्त है क्योंकि इसका दाना मोटा, चमकीला और समान आकार का होता है।

कम लागत, ज्यादा मुनाफा

‘करण मंजरी’ गेहूं की खासियत यह है कि यह कम पानी, कम खाद और कम कीटनाशक में भी अधिक उपज देती है। किसानों के लिए यह किस्म एक “कम लागत, ज्यादा मुनाफा” वाली फसल साबित हो रही है। यह पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प है क्योंकि इससे पानी और रासायनिक उर्वरकों की खपत कम होती है।