बंपर पैदावार की उम्मीद पर बारिश ने फेरा पानी : फसल की गुणवत्ता हुई खराब, कम दाम पर उपज बेचने को मजबूर किसान – Rain Dashes Hopes Of A Bumper Harvest: Crop Quality Suffers, Forcing Farmers To Sell Their Produce At Low Pric

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बेमौसम बारिश ने बंपर उपज की उम्मीद पर फेरा पानी।

बेमौसम बारिश ने बंपर उपज की उम्मीद पर फेरा पानी।
– फोटो : सोशल मीडिया

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इस साल अच्छी मानसूनी बारिश के बाद बंपर फसल की उम्मीद लगाए बैठे किसानों के सपनों पर कटाई से ठीक पहले हुई मूसलाधार बारिश ने पानी फेर दिया है। देश के कई हिस्सों में बेमौसम बरसात ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है।

पैदावार में भारी गिरावट की आशंका

सोयाबीन और कपास जैसी फसलों को हुए नुकसान से कृषि विकास दर धीमी होने, किसानों पर ऋण का बोझ बढ़ने और ग्रामीण खपत में कमी आने की आशंका है। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र के धाराशिव जिले के एक किसान किशोर हंगरगेकर कहते हैं कि हमें प्रति एकड़ 10 से 12 क्विंटल सोयाबीन की उम्मीद थी, लेकिन अब 2 से 3 क्विंटल मिल जाए तो भी गनीमत होगी और उसके लिए भी अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। उनकी फसल दो दिनों पड़ी लगातार बारिश में डूब गई, जबकि कुछ समय पहले तक वह कटाई के लिए लगभग तैयार थी।

कम दाम पर फसल बेचने को मजबूर किसान

बारिश के कारण फसलों की गुणवत्ता खराब हो गई है, जिसके चलते किसानों को सरकार द्वारा तय एमएसपी से बहुत कम दाम मिल रहे हैं। एक दूसरे किसान सचिन ननावरे कहते हैं कि व्यापारी खराब हुई फसल को कौड़ियों के दाम खरीद रहे हैं, और हमारे पास बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने अपनी सोयाबीन 3,200 रुपये प्रति 100 किलोग्राम में बेची, जबकि सरकार द्वारा तय दर 5,328 रुपये है। ननावरे ने कहा कि उन्होंने एक मोटरसाइकिल और टेलीविजन खरीदने की योजना बनाई थी, लेकिन अब उन्हें बैंक का कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है।

आर्थिक विकास पर पड़ेगा असर

मुंबई स्थित एलारा सिक्योरिटीज की अर्थशास्त्री गरिमा कपूर के अनुसार, मूसलाधार बारिश से उपज में कमी के कारण दिसंबर तिमाही में कृषि विकास दर घटकर 3% से 3.5% तक रह सकती है, जो एक साल पहले 6.6% थी। सितंबर महीने में औसत से 15% अधिक बारिश हुई, और कुछ क्षेत्रों में तो यह सामान्य से 115% तक ज्यादा थी। भले ही भारत की लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान केवल 18% है, लेकिन देश की 1.4 अरब की आबादी में से लगभग आधी अपनी आजीविका के लिए खेती पर ही निर्भर है।

रबी बुवाई पर भी संकट के बादल

अब किसान अगली सर्दियों की बुवाई से पहले अपनी गर्मियों की फसल को बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं, लेकिन मौसम विभाग ने इस सप्ताह और बारिश का अनुमान जताया है, जिससे बुवाई में देरी हो सकती है। हालांकि बारिश ने सर्दियों में बोई जाने वाली गेहूं, सरसों और चने जैसी फसलों के लिए मिट्टी में नमी बढ़ा दी है, लेकिन कई किसानों का कहना है कि उनके पास बीज और खाद खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। किसान छाया जावले ने कहा, “हमें बीज और खाद खरीदने और जमीन तैयार करने के लिए पैसे चाहिए। इसलिए, हमारे पास अपने सोने के गहने गिरवी रखने के अलावा कोई चारा नहीं है।”