Mumbai Hostage: ‘ऑडिशन देने गई होती तो शायद जिंदा नहीं होती’, मराठी अभिनेत्री ने सुनाई रोहित आर्य एनकाउंटर के बाद अपनी आपबीती – mumbai children hostage case marathi actress recounted her ordeal after rohit arya encounter

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Mumbai Hostage: 'ऑडिशन देने गई होती तो शायद जिंदा नहीं होती', मराठी अभिनेत्री ने सुनाई रोहित आर्य एनकाउंटर के बाद अपनी आपबीती - mumbai children hostage case marathi actress recounted her ordeal after rohit arya encounter

रोहित आर्य एनकाउंटर की घटना सामने आने के बाद मराठी अभिनेत्री रुचिता विजय जाधव ने सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि 4 अक्टूबर को रोहित आर्य नामक व्यक्ति, जो खुद को डायरेक्टर बताता था, ने उनसे एक फिल्म प्रोजेक्ट के सिलसिले में संपर्क किया था।

मुंबई: रोहित आर्य एनकाउंटर की घटना सामने आने के बाद मराठी अभिनेत्री रुचिता विजय जाधव ने सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि 4 अक्टूबर को रोहित आर्य नामक व्यक्ति, जो खुद को डायरेक्टर बताता था, ने उनसे एक फिल्म प्रोजेक्ट के सिलसिले में संपर्क किया था। प्रोजेक्ट का विषय ‘होस्टेज सिचुएशन’ पर आधारित बताया गया था। दोनों के बीच बातचीत हुई।

हालांकि, रोहित ने उनसे 27, 28 या 29 अक्टूबर को मिलने के लिए कहा था जिसके बाद रोहित आर्य से मिलने के लिए उन्होंने 28 अक्टूबर की तारीख तय की थी। लेकिन, पारिवारिक कारणों से उन्होंने वह मीटिंग रद्द कर दी। रुचिता के अनुसार, जब उन्होंने 31 अक्टूबर को उसी व्यक्ति यानी रोहित आर्य द्वारा 17 बच्चे को बंधक बनाए जाने और रोहित की एनकाउंटर में मारे जाने से संबंधित घटना वाली खबर देखी, तो उनके रोंगटे खड़े हो गए।

उन्होंने कहा कि मुझे अब अहसास हुआ कि भगवान और मेरा परिवार मेरी रक्षा कर रहे थे। उन्हें उन बच्चों और उनके परिजन के साथ सहानुभूति है। लेकिन, ऊपर वाले के शुक्रिया अदा कर रही हूं जिनकी बदौलत मैं वहां ऑडिशन देने नहीं गई और आज जीवित हूं। अभिनेत्री ने लोगों को सतर्क किया है कि काम के सिलसिले में नए लोगों से मिलते समय बेहद सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि हर चीज़ वैसी नहीं होती जैसी दिखती है।

बता दें कि रुचिता ने ‘आरे बाबा पुरे, फेकम फाक, भूताचा हनीमून, वात्सल्य , चिंतामणी, मनातल्या मनात और माणूस एक माती जैसे मराठी फिल्मों में काम कर चुकी हैं।

लेखक के बारे मेंमनीष झानवभारत टाइम्स, मुंबई (टाइम्स ऑफ इंडिया समूह) में 13 वर्षों से अधिक समय तक काम करने के दौरान, शिक्षा, स्वास्थ्य, यातायात, अपराध और सामाजिक-शैक्षणिक मुद्दों से लेकर भ्रष्टाचार व साइबर अपराध तक, कई क्षेत्रों को कवर किया। जनहित से जुड़ी ज़मीनी स्तर की खोजी कहानियां देना पेशा ही नहीं शौक रहा है, ताकि मेरा काम जन-केंद्रित मुद्दों को मुख्यधारा की चर्चा में ला सके। मुंबई के प्रतिष्ठित चर्चगेट स्थित केसी कॉलेज से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर कर 2009 में करियर की शुरुआत मेट्रो मुंबई टीवी चैनल से होते हुए एबीपी (स्टार न्यूज) और आईबीएन-7 तक पहुंची, और फिर 2011 में प्रतिष्ठित नवभारत टाइम्स (NBT) का अभिन्न अंग बन गया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और फील्ड इन्वेस्टिगेशन, सामान्य अपराध और साइबर अपराध, शिक्षा और स्वास्थ्य, नागरिक मुद्दे और जन जागरूकता अभियान, फीचर लेखन और मानव-हित की खबरें लिखना, विशेषता रही। लक्ष्य है-प्रभावशाली खबरों के माध्यम से समाज के अनछुए मुद्दों को सामने लाना और जन को जागरूक करना। सोशल मीडिया के क्रिएटर्स और उनकी क्रिएटीविटी आकर्षित करता है। इसलिए यूट्यूब, इंस्टा और एक्स आदि पर विडियोज देखना पसंद है।… और पढ़ें