आलू – फोटो : PTI
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केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI) शिमला की विकसित की गई एयरोपोनिक्स तकनीक ने भारत में आलू उत्पादन के क्षेत्र में नई क्रांति ला दी है। इस तकनीक से तैयार आलू के बीज ने देशभर में प्रति हेक्टेयर उत्पादन में औसतन दो टन की बढ़ोतरी की है। पहले जहां किसान प्रति हेक्टेयर लगभग 23 टन उत्पादन करते थे, वहीं अब यह आंकड़ा 25 टन तक पहुंच गया है।हवा में उगता है आलू का बीज, बढ़ी गुणवत्ता और उत्पादन
एयरोपोनिक्स तकनीक में आलू के बीज को मिट्टी के बजाय हवा में उगाया जाता है। इससे पौधे की जड़ों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व समान रूप से पहुंचते हैं, जिससे बीज स्वच्छ, रोगमुक्त और उच्च गुणवत्ता वाला बनता है। खुले और नियंत्रित वातावरण में तैयार होने से इसकी देखरेख भी बेहतर ढंग से की जा सकती है। यही वजह है कि किसानों को अधिक उपज के साथ बेहतर गुणवत्ता का लाभ मिल रहा है।
सात राज्यों ने अपनाई तकनीक, 40 से अधिक कंपनियों को मिला लाइसेंस
सीपीआरआई की यह तकनीक अब देशभर में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मिजोरम, ओडिशा, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे सात राज्यों ने संस्थान से यह तकनीक खरीदी है। इसके अलावा, 40 से अधिक निजी कंपनियों को सीपीआरआई ने एयरोपोनिक्स तकनीक के लाइसेंस जारी किए हैं। वर्तमान में संस्थान देश के कुल आलू बीज उत्पादन का 22 से 23 प्रतिशत हिस्सा इसी विधि से तैयार कर रहा है।
ब्रीडर सीड से तैयार होते हैं प्रमाणित बीज
सीपीआरआई हर साल लगभग 3,000 ब्रीडर सीड्स तैयार करता है, जिन्हें कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को दिया जाता है। मंत्रालय इन बीजों को विभिन्न राज्य सरकारों और एजेंसियों को आवंटित करता है। राज्य सरकारें इन्हें अपने कृषि फार्मों में तीन वर्षों तक गुणन प्रक्रिया से गुजारकर प्रमाणित बीज तैयार करती हैं, जिन्हें आगे किसानों को आलू उत्पादन के लिए उपलब्ध कराया जाता है।
देश के 95 फीसदी क्षेत्र में सीपीआरआई के बीज से तैयार होता है आलू
सीपीआरआई के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह के अनुसार, भारत में उगाए जाने वाले 95 प्रतिशत आलू सीपीआरआई द्वारा विकसित बीजों से ही तैयार होते हैं। 1949 में संस्थान की स्थापना के बाद से अब तक 76 किस्मों के आलू बीज विकसित किए जा चुके हैं, जिनमें से करीब 30 किस्में आज भी किसानों द्वारा व्यापक रूप से उगाई जा रही हैं।
भारत आलू उत्पादन में दूसरे स्थान पर
सीपीआरआई की उन्नत तकनीक और बीजों की मदद से भारत में वर्तमान में 23 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती की जा रही है। इससे हर वर्ष लगभग 600 लाख टन (60 मिलियन मीट्रिक टन) उत्पादन होता है। आलू उत्पादन में भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा देश है, जबकि पहले स्थान पर चीन है, जो करीब 900 लाख टन आलू का उत्पादन करता है।





