खरीफ सीजन में यूरिया की भरपूर आपूर्ति। – फोटो : सोशल मीडिया
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रासायनिक और उर्वरक मंत्रालय ने कहा है कि खरीफ 2025 के दौरान पूरे देश में किसानों के लिए यूरिया की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की गई। विभाग के अनुसार, जहां कृषि विभाग ने यूरिया की मांग 185.39 लाख मीट्रिक टन आंकी थी, वहीं उर्वरक विभाग ने 230.53 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया – जो जरूरत से काफी अधिक था। देशभर में यूरिया बिक्री 193.20 लाख मीट्रिक टन रही, जिससे स्पष्ट होता है कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया मिला और किसी भी राज्य में कमी नहीं रही।अच्छी बारिश से बढ़ी यूरिया की खपत
रिपोर्ट में बताया गया कि खरीफ 2025 में यूरिया की खपत पिछले साल की तुलना में लगभग 4.08 लाख मीट्रिक टन ज्यादा रही। इसका कारण अच्छी बारिश और अधिक क्षेत्र में खेती को बताया जा रहा है।
यूरिया आयात बढ़ाकर पूरा किया गया अंतर
देश में यूरिया के उत्पादन और खपत के बीच की खाई को पाटने के लिए सरकार ने यूरिया आयात में भी बढ़ोतरी की। अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच 58.62 लाख मीट्रिक टन यूरिया आयात किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 24.76 लाख मीट्रिक टन था। इससे खरीफ सीजन की मांग पूरी होने के साथ-साथ रबी सीजन के लिए 20.21 लाख मीट्रिक टन का अतिरिक्त भंडार तैयार किया गया।
घरेलू उत्पादन में भी सुधार
देश के भीतर यूरिया उत्पादन में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। अक्टूबर 2025 में उत्पादन 26.88 लाख मीट्रिक टन रहा, जो पिछले साल की तुलना में 1.05 लाख मीट्रिक टन अधिक है। अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच औसतन 25 लाख मीट्रिक टन प्रति माह उत्पादन दर्ज हुआ। सरकार ने नवंबर और दिसंबर के लिए 17.5 लाख मीट्रिक टन यूरिया आयात की भी अग्रिम व्यवस्था की है।
आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम – बन रहे नए यूरिया प्लांट
सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए दो नए यूरिया प्लांट बनाने की दिशा में तेजी दिखाई है। एक यूरिया प्लांट नामरूप (असम) और दूसरा तलचेर (ओडिशा) में बन रहा है। दोनों प्लांट्स की संयुक्त उत्पादन क्षमता 12.7 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष होगी। इनसे भारत की आयात निर्भरता घटेगी और “आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
निगरानी और वितरण व्यवस्था सख्त
कृषि मंत्रालय और राज्य सरकारों के सहयोग से यूरिया वितरण प्रणाली को और पारदर्शी बनाया गया है। राज्यों को होर्डिंग, कालाबाजारी और तस्करी रोकने के निर्देश दिए गए हैं। कई राज्यों ने ट्रैकिंग और डिजिटल निगरानी उपकरण अपनाए हैं ताकि सब्सिडी वाले यूरिया का सही उपयोग हो सके।
सरकार का लक्ष्य – हर किसान को समय पर खाद मिले
केंद्र सरकार का कहना है कि योजनाबद्ध आपूर्ति, कुशल लॉजिस्टिक्स और सभी विभागों के समन्वय से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर किसान को समय पर यूरिया मिले, ताकि देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि विकास दोनों मजबूत रहें।





