
Vanilla
– फोटो : सोशल मीडिया AI
विस्तार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में वनीला की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति बढ़ने और मांग स्थिर रहने के कारण कीमतें लगभग 90 प्रतिशत तक नीचे आ गई हैं। कभी 2016 से 2021 के बीच 600 डॉलर प्रति किलोग्राम तक पहुंचने वाली वैनीला अब 60-70 डॉलर प्रति किलो के दायरे में सिमट गई है। भारत में भी यही रुझान देखा जा रहा है। यहां वनीला की कीमतें ₹600-700 प्रति किलो तक गिर गई हैं, जबकि कुछ वर्ष पहले यही कीमत ₹5,000 प्रति किलो थी।मेडागास्कर से बढ़ी आपूर्ति ने तोड़ा बाजार का संतुलन
इडुक्की (केरल) स्थित वनीला प्रोसेसिंग कंपनी इकोस्पाइस (EcoSpice) के प्रबंध निदेशक जोसेफ सेबेस्टियन ने बताया कि दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक मेडागास्कर में उत्पादन ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। इसके चलते हरी वनीला (Green Vanilla) की कीमतें भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई हैं। उन्होंने कहा कि “राजनीतिक अस्थिरता के चलते मेडागास्कर में निर्यात प्रवाह प्रभावित हुआ है, जिससे बाजार की सामान्य गतिविधियां भी धीमी पड़ गई हैं।”
मांग स्थिर, बाजार खरीदारों के पक्ष में
वनीला की कीमतों में गिरावट के बावजूद वैश्विक मांग में कोई खास वृद्धि नहीं हुई है। सेबेस्टियन ने बताया कि “वर्तमान में उत्पादन इतना अधिक है कि मांग उसका समर्थन नहीं कर पा रही। इससे कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है और बाजार पूरी तरह ‘खरीदार-प्रधान चक्र’ (buyer-driven cycle) में फंसा हुआ है।” उन्होंने कहा कि कई देशों में किसान कठिन दौर से गुजर रहे हैं क्योंकि अधिक आपूर्ति और कमजोर मांग से उनकी आय पर बुरा असर पड़ रहा है।
इंडोनेशिया और युगांडा में अलग हालात
रिपोर्ट के अनुसार, इंडोनेशिया अब भी वैश्विक आपूर्ति- मांग संतुलन के अनुरूप नहीं चल रहा है और लगातार स्टॉक जमा कर रहा है, जिससे पहले से ही संतृप्त बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। वहीं युगांडा अपेक्षाकृत संतुलित रुख रखता है और अपने इन्वेंट्री स्तर को कम बनाए हुए है। हालांकि कमजोर फॉर्म-गेट कीमतों के कारण वहां के किसान अब कॉफी और कोको जैसी अधिक लाभदायक फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे भविष्य में युगांडा की वैनीला आपूर्ति घट सकती है।
भारत की भूमिका सीमित, घरेलू मांग तक सिमटा उत्पादन
भारत अब भी वैश्विक वनीला बाजार में छोटी भूमिका निभा रहा है। सेबेस्टियन के मुताबिक, भारत में हर साल लगभग 15-20 टन वैनीला का उत्पादन होता है, जो मुख्यतः घरेलू उपभोग के लिए प्रयुक्त होती है। उन्होंने बताया कि अधिकांश कन्फेक्शनरी कंपनियों के पास पहले से पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, क्योंकि उन्होंने कम कीमतों पर बड़ी मात्रा में वनीला खरीदी हुई है।
बाजार का दृष्टिकोण: निकट भविष्य में सुधार की संभावना कम
सेबेस्टियन ने कहा कि फिलहाल बाजार की स्थिति बेयरिश (Bearish) बनी हुई है। आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन के कारण निकट और मध्यम अवधि में सुधार की संभावना बहुत कम है। वनीला की खेती करने वाले किसानों के लिए यह दौर चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उच्च उत्पादन के बावजूद उन्हें लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।




