
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
– फोटो : गांव जंक्शन
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तमिलनाडु के कोयम्बटूर में आयोजित तीन दिवसीय साउथ इंडिया नेचुरल फार्मिंग सम्मेलन 2025 में कई राज्यों के 50,000 से अधिक किसान, विशेषज्ञ और कृषि हितधारक शामिल हुए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर प्राकृतिक खेती पर बड़ा बयान दिया है। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने किसानों से “एक एकड़, एक सीजन” मॉडल के तहत प्राकृतिक खेती अपनाने का आग्रह किया और कृषि संस्थानों से इसे “पूर्ण रूप से विज्ञान आधारित आंदोलन” बनाने का आह्वान किया। उन्होंने तमिलनाडू की परंपराओं जैसे पंचगव्य, जीवामृत, मुल्चिंग और बाजरा खेती का उदाहरण देते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती भारत की स्वदेशी अवधारणा है। उन्होंने दक्षिण भारत को “कृषि का जीवंत विश्वविद्यालय” बताते हुए कहा कि यहां की प्राचीन जल व्यवस्थाओं और वेस्टर्न घाट्स में बहु-स्तरीय खेती इसे कृषि नवाचार का केंद्र बनाती है।
प्राकृतिक खेती (Natural Farming) के बारे में जान लीजिए
कृषि मंत्रालय के अनुसार प्राकृतिक खेती एक रासायनिक-मुक्त प्रणाली है, जिसमें केवल पशु और पौधों से उत्पन्न संसाधनों का उपयोग किया जाता है। नवंबर 2024 में केंद्र सरकार ने नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (NMNF) की शुरुआत की थी, जिसके लिए 2,481 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।
इसका उद्देश्य देश भर में प्राकृतिक खेती को मिशन मोड में बढ़ावा देना है। NMNF, भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (BPKP) का सुधार है। अगले दो वर्षों में 1 करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती में प्रशिक्षित किया जाएगा, साथ ही 10,000 जैविक इनपुट रिसोर्स सेंटर स्थापित किए जाएंगे। प्राकृतिक खेती में जैविक और पारिस्थितिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है, जैसे विविध फसल प्रणाली, प्राकृतिक पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण और स्थानीय संसाधनों का उपयोग।
शून्य बजट प्राकृतिक खेती (ZBNF)
विशेषज्ञ सुभाष पालेकर ने शून्य बजट प्राकृतिक खेती चार स्तंभों पर आधारित है। इसमें जैवामृत, बीजामृत, मुल्चिंग और वाफासा शामिल है। यह प्रणाली मिट्टी के जीवाणुओं के माध्यम से फसल को पोषण देती है, साथ ही वर्षा, सूर्य और हवा से आवश्यक संसाधन स्वतः मिलते हैं। कीट प्रबंधन के लिए अग्नास्त्र, ब्रह्मास्त्र और नीमास्त्र जैसे प्राकृतिक मिश्रणों का उपयोग किया जाता है।
पीएम किसान के बारे में भी खुलकर बोले
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम किसान की 21वीं किस्त के रूप में 18,000 करोड़ रुपये जारी किए। यह योजना दिसंबर 2018 से लागू है और किसानों को वार्षिक 6,000 रुपये तीन किस्तों में देती है। योजना का लाभ एक परिवार (पति, पत्नी और नाबालिग बच्चे) को दिया जाता है, और केवल एक सदस्य ही लाभ प्राप्त कर सकता है। पीएम मोदी ने कहा कि अब तक इस योजना के तहत 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक छोटे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक खेती और PM-KISAN के माध्यम से किसानों को आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों लाभ सुनिश्चित करने की दिशा में भारत के कृषि परिदृश्य में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया।




