Cotton Import: कपास पर 11% आयात शुल्क हटाने की मांग, टेक्सटाइल उद्योग पर संकट

0
1
कपास

कपास
– फोटो : AI

विस्तार

वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें


देश की कपास एवं वस्त्र उद्योग बेहद चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है। घरेलू उत्पादन में गिरावट, उच्च न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) ने सरकार से कच्ची कपास पर लगने वाली 11 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी हटाने की मांग की है। फिलहाल सरकार ने 31 दिसंबर 2025 तक आयातित कपास को शुल्कमुक्त रखा है, लेकिन एसोसिएशन का कहना है कि इसे स्थायी रूप से खत्म करना जरूरी है, ताकि उद्योग को राहत मिल सके और उत्पादन लागत कम हो।उद्योग संकट के दौर में
CAI के अध्यक्ष विनय एन. कोटक ने कहा कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ, यूरोप में मंदी की स्थिति और घरेलू उत्पादन में नुकसान के चलते भारतीय कपड़ा उद्योग दबाव में है। कोटक के अनुसार उच्च MSP ने घरेलू कपास को वैश्विक बाजार की तुलना में महंगा बना दिया है, वहीं कम उपज ने स्थिति को और खराब किया है।

कोटक ने कहा, “11 प्रतिशत आयात शुल्क से कीमतें विकृत होती हैं और हमारे मिलों के लिए प्रतिस्पर्धी कच्चा माल उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाता है। किसानों को MSP से सुरक्षा मिली हुई है, लेकिन संकट से जूझ रहे उद्योग के लिए तत्काल राहत जरूरी है। यदि यह समर्थन नहीं मिला तो बड़े पैमाने पर बेरोजगारी, ऋण डिफॉल्ट और पूरी वैल्यू चेन में खराब ऋण की स्थिति बन सकती है।”

निर्यात लक्ष्य पर भी असर
CAI का मानना है कि शुल्क हटाने से भारतीय वस्त्र उद्योग वैश्विक व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है और 2030 तक 100 अरब डॉलर निर्यात का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी। एसोसिएशन का यह भी कहना है कि इस सीजन में अनियमित वर्षा से फसल की गुणवत्ता को बड़ा नुकसान हुआ है। इसके चलते गुणवत्ता के अनुरूप कपास की आपूर्ति केवल आयात से ही संभव है। कोटक ने चेतावनी दी कि यदि आयात शुल्क नहीं हटा तो अंतरराष्ट्रीय खरीदार ऑर्डर को वियतनाम, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अन्य देशों में स्थानांतरित कर देंगे। इससे भारत की कपड़ा उद्योग को लंबे समय में बाजार हिस्सेदारी का नुकसान होगा।

कोरोना काल में लगा था शुल्क
CAI ने स्पष्ट किया कि 11 प्रतिशत आयात शुल्क कोविड-19 की परिस्थितियों में विशेष उपाय के रूप में लगाया गया था। इससे पहले कपास पर कोई शुल्क नहीं था और इस स्थिति का किसानों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा था।

घरेलू मांग और आयात
CAI के नवीनतम आपूर्ति-मांग अनुमान के अनुसार 2025-26 सीजन में भारत के कपास आयात रिकॉर्ड स्तर 50 लाख गांठ (170 किलोग्राम प्रति गांठ) तक पहुंच सकते हैं, जो पिछले वर्ष 41 लाख गांठ थे। इस सीजन में उत्पादन 309.50 लाख गांठ और घरेलू खपत 295 लाख गांठ रहने का अनुमान है।

CAI ने सरकार से आग्रह किया है कि उद्योग को राहत देने के लिए आयात शुल्क हटाया जाए, जिससे पूरी वैल्यू चेन-कपास, धागा, फैब्रिक और तैयार वस्त्र को संतुलन मिल सके और रोजगार से जुड़ी चुनौतियों से बचा जा सके।