
नेफेड के सहयोग से एमपी की चंबल फेड शहद उत्पादक सहकारी समिति शहद के संगठित उत्पादन का सफल मॉडल बनकर उभरी है। – फोटो : AI
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भारत में सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में नेफेड (NAFED) मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन में भी अहम भूमिका निभा रहा है। नेफेड के सहयोग से मध्य प्रदेश में स्थापित चंबल फेड शहद उत्पादक सहकारी समिति (Chambal Fed Shahad Utpadak Sahakari Samiti) उच्च गुणवत्ता और शुद्ध शहद के संगठित उत्पादन का उदाहरण बन रही है। यह पहल राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन और केंद्र सरकार की ‘10,000 किसान उत्पादक संगठन (FPO) गठन एवं संवर्धन योजना’ के तहत संचालित हो रही है।देश की पहली शहद आधारित सहकारी FPO
चंबल फेड शहद FPO का पंजीकरण नवंबर 2020 में मध्य प्रदेश में हुआ था। यह अपने प्रकार की देश की पहली सहकारी संस्था मानी जाती है, जिसने जमीनी स्तर पर संगठित मधुमक्खी पालन को नई पहचान दी। नाफेड के संस्थागत समर्थन से छोटे और सीमांत मधुमक्खी पालकों को एक साझा मंच मिला, जहां वे अपने उत्पाद को एकत्र कर बेहतर प्रसंस्करण और विपणन की सुविधा हासिल कर सके।
प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच
नेफेड के सहयोग से सहकारी समिति ने कच्चे शहद की सामूहिक खरीद, बेहतर पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन, आधुनिक प्रसंस्करण और पैकेजिंग की व्यवस्था विकसित की। इससे ऐसे बाजारों तक पहुंच संभव हुई, जो पहले व्यक्तिगत मधुमक्खी पालकों की पहुंच से बाहर थे। सहकारी ब्रांड के तहत बाजार में उतारे गए उत्पादों ने गुणवत्ता और शुद्धता के मानकों पर खरा उतरते हुए उपभोक्ताओं का भरोसा भी जीता।
उत्पादकों को बेहतर दाम, उपभोक्ताओं को भरोसा
इस मॉडल से मधुमक्खी पालकों को बेहतर मूल्य प्राप्ति सुनिश्चित हुई है। ‘चमत्स्य शहद’ (Chamtshya Honey) जैसे उत्पाद सहकारी स्वामित्व, ट्रेसबिलिटी और शुद्धता पर जोर को दर्शाते हैं। इससे न केवल किसानों की आय में इजाफा हुआ, बल्कि सहकारी ब्रांड के प्रति उपभोक्ता विश्वास भी मजबूत हुआ है।
‘स्वीट रिवोल्यूशन’ के लक्ष्यों से जुड़ी पहल
यह पहल भारत की ‘स्वीट रिवोल्यूशन’ की व्यापक सोच के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देना, परागण सेवाओं को मजबूत करना, शहद उत्पादन और निर्यात बढ़ाना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ आजीविका के अवसर पैदा करना है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों और क्षमता निर्माण से जुड़े प्रयासों ने सदस्य किसानों को आधुनिक मधुमक्खी पालन तकनीकों से जोड़ा और फसल आधारित आय पर निर्भरता कम करने में मदद की।
नेफेड की व्यापक भूमिका
शहद के अलावा नाफेड कृषि विपणन के अन्य क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। राष्ट्रीय स्तर की सहकारी विपणन एजेंसी के रूप में यह मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत दालों और तिलहनों की खरीद में अहम भूमिका निभाता है, जिससे किसानों को मूल्य अस्थिरता से सुरक्षा मिलती है। नाफेड अपने ब्रांड के तहत दालें, चावल, खाद्य तेल, मसाले और मिलेट्स जैसे उत्पादों का विपणन भी कर रहा है।
डिजिटल और मूल्यवर्धन की दिशा में कदम
नाफेड ‘एक जिला एक उत्पाद’ जैसी पहलों के तहत मूल्यवर्धित कृषि उत्पादों को बढ़ावा दे रहा है और मिलेट्स को जलवायु-अनुकूल फसल के रूप में आगे बढ़ा रहा है। इसके साथ ही पारदर्शी ई-नीलामी जैसी डिजिटल प्रणालियों की शुरुआत सहकारी विपणन को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
सहकारिता से खुली समावेशी विकास की राह
चंबल फेड जैसे उदाहरण दिखाते हैं कि जब किसान समूहों को बाजार, तकनीक और ब्रांडिंग से जोड़ा जाता है, तो सहकारी संस्थाएं समावेशी विकास की मजबूत आधारशिला बन सकती हैं। नाफेड की भूमिका यह दर्शाती है कि संगठित सहकारिता ग्रामीण आय बढ़ाने, भरोसेमंद कृषि मूल्य श्रृंखलाएं बनाने और टिकाऊ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में निर्णायक साबित हो सकती है।




