ये है मामला
यह घटना बुधवार देर रात की है, जब न्यू ईयर सेलिब्रेशन को लेकर हजरतगंज इलाके में भारी भीड़ जुटी हुई थी। कानून व्यवस्था और ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने इलाके में बैरिकेडिंग और डायवर्जन लागू कर रखा था। इसी दौरान बाराबंकी पुलिस लाइन में तैनात दारोगा सौम्य जायसवाल नशे की हालत में अटल चौक पहुंच गया। मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने जब उसे ट्रैफिक नियमों के तहत अपनी कार साइड में लगाने को कहा तो वह उनसे उलझ गया।
बताया जा रहा है कि बहस धीरे-धीरे बढ़ती गई और आरोपी दारोगा ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। आरोप है कि उसने एक दारोगा को धक्का दिया और कार के शीशे चढ़ाकर वहां से भागने की कोशिश की। इस दौरान उसने पुलिसकर्मियों पर गाड़ी चढ़ाने की भी कोशिश की, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, वहां मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए उसे घेरकर पकड़ लिया।
घटना के दौरान आरोपी दारोगा ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से भी अभद्रता की। आरोप है कि उसने डीजीपी ट्रैफिक कमलेश दीक्षित को भी धमकी दी और वर्दी उतरवाने जैसी आपत्तिजनक बातें कहीं। इसके बाद हजरतगंज पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी।
जांच में सामने आया है कि आरोपी दारोगा सौम्य जायसवाल बाराबंकी पुलिस लाइन में तैनात था और वर्तमान में लाइन हाजिर चल रहा था। हजरतगंज पुलिस की ओर से पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट बाराबंकी पुलिस को भेजी गई। रिपोर्ट के आधार पर बाराबंकी पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय ने आरोपी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए।
इस प्रकरण की जांच एएसपी दक्षिण को सौंपी गई है। पुलिस विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि आरोपी दारोगा दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कांग्रेस ने साधा निशाना
वहीं, इस घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। यूपी कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घटना का वीडियो साझा करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली और सरकार के जीरो टॉलरेंस के दावों पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जब पुलिसकर्मी ही नशे में कानून तोड़ते नजर आएंगे और अपने ही वरिष्ठ अधिकारियों को धमकाएंगे, तो आम जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।
फिलहाल दारोगा सौम्य जायसवाल निलंबन की कार्रवाई के बाद विभागीय जांच का सामना कर रहा है। पुलिस विभाग का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।











