संकट में हिमाचल की खेती: सूखे जैसे हालात से 3,087 हेक्टेयर में गेहूं की फसल बर्बाद, आंकड़े परेशान करने वाले

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गेहूं की खेती

गेहूं की खेती
– फोटो : AI

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हिमाचल प्रदेश में रबी सीजन के दौरान बने सूखे जैसे हालात ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य कृषि निदेशालय को फील्ड से मिली ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे प्रदेश में 9,359 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की फसल प्रभावित हुई है, जबकि 3,087 हेक्टेयर में फसल पूरी तरह खराब हो चुकी है।कम बारिश और नमी की कमी के चलते प्रदेश में लगभग 10 प्रतिशत क्षेत्र में गेहूं की बुआई ही नहीं हो पाई, जबकि शेष 90 प्रतिशत क्षेत्र में हुई बुआई भी अब खतरे में है। कृषि विभाग के अनुसार, दिसंबर तक प्रदेश में कुल 3,55,347 हेक्टेयर भूमि पर रबी फसलों की बुआई संभव नहीं हो सकी। इनमें से 2,90,713 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुआई की गई थी, लेकिन अब मौसम की स्थिति को देखते हुए दोबारा बुआई की कोई संभावना नहीं है।

इन जिलों में सबसे ज्यादा असर
सूखे जैसे हालात का सबसे ज्यादा असर कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर, ऊना, बिलासपुर, सोलन और सिरमौर जिलों में देखने को मिला है। इसके अलावा शिमला, चंबा और कुल्लू के निचले इलाकों में भी गेहूं की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। गेहूं हिमाचल की प्रमुख रबी फसल है और बड़ी संख्या में किसान इसी पर निर्भर हैं।

नमी की कमी से फसल की बढ़वार प्रभावित
कृषि निदेशक डॉ. रविंद्र सिंह जसरोटिया और संयुक्त निदेशक डॉ. रविंद्र चौहान ने बताया कि बारिश की कमी और मिट्टी में पर्याप्त नमी न होने के कारण फसल की बढ़वार प्रभावित हुई है। कई क्षेत्रों में अंकुरण सही तरीके से नहीं हो पाया, जबकि कुछ इलाकों में पौधों की बढ़वार रुक गई है और बालियां भी ठीक से विकसित नहीं हो पाईं। उन्होंने बताया कि सीमित सिंचाई सुविधाओं के चलते कई किसान फसल को बचाने में असमर्थ रहे। लंबे समय तक वर्षा न होने से मिट्टी पूरी तरह सूख गई, जिसका सीधा असर गेहूं की शुरुआती अवस्था और उत्पादन क्षमता पर पड़ा है।

नुकसान का आकलन जारी
कृषि निदेशक डॉ. जसरोटिया ने बताया कि यह रिपोर्ट ताजा है और अगर आने वाले दिनों में बारिश होती है तो कुछ हद तक नुकसान की भरपाई संभव हो सकती है। राजस्व विभाग के तय मानकों के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत नुकसान आकलन किया जा रहा है और इसकी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी जाएगी। विभाग समय-समय पर फील्ड से अपडेटेड रिपोर्ट मंगवा रहा है।

पिछले वर्षों में गेहूं उत्पादन का रुझान
प्रदेश में गेहूं उत्पादन में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उतार-चढ़ाव देखा गया है-

  • 2020-21: 5.73 लाख मीट्रिक टन
  • 2021-22: 6.47 लाख मीट्रिक टन
  • 2022-23: 6.12 लाख मीट्रिक टन
  • 2023-24: 7.80 लाख मीट्रिक टन
  • 2024-25: 6.28 लाख मीट्रिक टन

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा सूखे जैसे हालात लंबे समय तक बने रहे, तो आने वाले सीजन में गेहूं उत्पादन पर और गंभीर असर पड़ सकता है।