मुंबई. आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े की मौजूदगी में महायुति गठबंधन का चुनावी घोषणा पत्र जारी करते हुए मुंबई को लेकर बड़े और आक्रामक वादों का ऐलान किया. फडणवीस ने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य मुंबई को अवैध बांग्लादेशियों से मुक्त करना है और इसके लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा. उन्होंने दावा किया कि अब तक सबसे ज्यादा अवैध बांग्लादेशियों को निर्वासित करने का रिकॉर्ड मौजूदा सरकार के नाम है.
घोषणा पत्र जारी करने के बाद अपने संबोधन में फडणवीस ने कहा कि आने वाले छह महीनों में एक विशेष आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रणाली तैयार की जाएगी, जिसकी मदद से अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें शत-प्रतिशत निर्वासित किया जाएगा. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि मुंबई को इस समस्या से मुक्त किया जाएगा और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी. फडणवीस ने पूर्ववर्ती नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने इन मुद्दों पर वर्षों तक कुछ नहीं किया, उनकी चिंता करने की जरूरत नहीं है.
मुख्यमंत्री ने मुंबई की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर भी बड़ा वादा किया. उन्होंने कहा कि शहर की सड़कों पर जल्द ही 10 हजार नई बेस्ट बसें उतारी जाएंगी, जिससे यात्रियों को राहत मिलेगी और भीड़भाड़ की समस्या कम होगी. फडणवीस ने कहा कि मुंबई जैसे महानगर को विश्वस्तरीय परिवहन सुविधा मिलनी चाहिए और इसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है. उन्होंने संकेत दिया कि बेस्ट बसों की संख्या बढ़ने से न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि प्रदूषण और निजी वाहनों पर निर्भरता भी कम होगी.
इस बीच महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग ने राज्य की 29 नगर निगमों के चुनावों की घोषणा कर दी है. इनमें मुंबई की बृहन्मुंबई महानगरपालिका के अलावा पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम भी शामिल हैं. आयोग के अनुसार मतदान 15 जनवरी को होगा, जबकि मतगणना 16 जनवरी को की जाएगी. बीएमसी चुनाव को राज्य की राजनीति का सेमीफाइनल माना जा रहा है, ऐसे में सभी दल पूरी ताकत झोंकते नजर आ रहे हैं.
घोषणा पत्र जारी होने के साथ ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है. खासकर अंबरनाथ नगर परिषद में भाजपा की रणनीति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. हाल ही में कांग्रेस के 12 निलंबित नगरसेवक भाजपा में शामिल हो गए, जिसके बाद भाजपा ने कांग्रेस और अजित पवार की एनसीपी के साथ मिलकर परिषद में सत्ता हासिल की. यह कदम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि अंबरनाथ में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत से कुछ सीटें पीछे रह गई थी.
अंबरनाथ नगर परिषद में कुल 60 सदस्य हैं, जिनमें शिवसेना को 27, भाजपा को 14, कांग्रेस को 12 और अजित पवार की एनसीपी को 4 सीटें मिली थीं, जबकि दो सीटें निर्दलीयों के खाते में गई थीं. बहुमत का आंकड़ा पार करने के लिए भाजपा ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ हाथ मिला लिया. भाजपा ने इससे पहले अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में भी एआईएमआईएम और अन्य दलों के साथ मिलकर सत्ता गठबंधन बनाया था.
इन गठबंधनों को लेकर शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के सांसद संजय राउत ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है. राउत ने कहा कि एक तरफ भाजपा ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का नारा देती है और दूसरी तरफ सत्ता के लिए कांग्रेस से हाथ मिलाती है. उन्होंने इसे भाजपा का दोहरा चरित्र करार दिया. राउत ने अजित पवार की एनसीपी के साथ भाजपा की साझेदारी पर भी सवाल उठाए और कहा कि अजित पवार वीर सावरकर की विचारधारा में विश्वास नहीं रखते, फिर भी भाजपा उनके साथ गठबंधन कर रही है.
बीएमसी चुनावों से पहले महायुति का घोषणा पत्र और फडणवीस के बयान यह संकेत दे रहे हैं कि चुनावी मुकाबला तेज और मुद्दा-केंद्रित होने वाला है. अवैध प्रवासियों का मुद्दा, शहरी परिवहन, तकनीक आधारित प्रशासन और गठबंधन राजनीति आने वाले दिनों में चुनावी बहस के केंद्र में रहेंगे. मुंबई की सत्ता पर काबिज होने की इस लड़ाई में मतदाता किसे तरजीह देते हैं, इसका फैसला अब मतदान के दिन होगा.
















