बरेली के हाफिजगंज थाने में तैनात महिला दरोगा पायल रानी का नाम इन दिनों चर्चा में है, लेकिन वजह उनकी वर्दी नहीं बल्कि वह संघर्ष है, जिसे उन्होंने सार्वजनिक तौर पर सामने रखा है। दहेज उत्पीड़न के मामले में अपने पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद दरोगा पायल रानी ने साफ शब्दों में कहा है कि उन्होंने यह मुकाम किसी के सहारे नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और योग्यता से हासिल किया है।
ये है मामला
पायल रानी के अनुसार, उनका जीवन शुरू से संघर्षों से भरा रहा है। मजदूरी करने वाले माता-पिता ने कठिन परिस्थितियों में भी बच्चों की पढ़ाई से समझौता नहीं किया। पांच भाई-बहनों वाले परिवार में शिक्षा को प्राथमिकता दी गई, जिसका नतीजा यह है कि आज परिवार की बेटियां शिक्षक और पुलिसकर्मी जैसी जिम्मेदार सेवाओं में हैं। पायल खुद कई बड़ी प्रतियोगी परीक्षाएं पास कर चुकी हैं और दिल्ली पुलिस में चयन के बाद यूपी पुलिस में दरोगा बनीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि शादी के बाद नौकरी लगते ही ससुराल वालों की अपेक्षाएं बढ़ गईं। कार और 10 लाख रुपये की मांग को लेकर उन पर लगातार दबाव बनाया गया। ट्रेनिंग पर जाने के बाद यह दबाव और बढ़ा, जिससे मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न शुरू हो गया। पायल का कहना है कि उन्होंने अपनी नौकरी से मिलने वाला वेतन भी हर महीने पति के खाते में ट्रांसफर किया, जिसके रिकॉर्ड उनके पास मौजूद हैं।
पति पर किया पलटवार
दरोगा पायल रानी ने पति द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर पुराने फोटो और वीडियो फैलाकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी व्यक्तिगत अहं की नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और सच के साथ खड़े रहने की है।
उनका कहना है कि वर्दी पहनने का मतलब अन्याय सहना नहीं होता। कानून की जानकारी रखने के बावजूद यदि वह चुप रहतीं, तो यह कई अन्य महिलाओं के लिए गलत संदेश होता। पायल रानी का विश्वास है कि निष्पक्ष जांच में सच्चाई सामने आएगी और उन्हें न्याय मिलेगा।











