Chickpea Farming Tips: चने की फसल में उग्रा रोग से कैसे करें बचाव? जानें; स्वस्थ फसल के लिए जरूरी उपाय

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चने की खेती – फोटो : सोशल मीडिया

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रबी सीजन में चना (Chickpea) की खेती किसानों के लिए लाभकारी विकल्प होती है। यह फसल कम पानी में उगती है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी मदद करती है। लेकिन बुवाई के कुछ हफ्तों बाद कई बार फसल में कीट और रोगों का प्रकोप देखने को मिलता है, जिसमें उग्रा रोग सबसे गंभीर होता है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, उग्रा रोग एक फंगल रोग है जो चने की जड़ों और तने को अंदर से कमजोर कर देता है। इसके कारण पहले एक-दो पौधे सूख जाते हैं और यदि समय पर नियंत्रण न किया गया तो पूरा खेत प्रभावित हो सकता है।

70-75 दिन बाद दिखता है रोग
उग्रा रोग का असर बुवाई के 70-75 दिन बाद अधिक दिखाई देता है। शुरुआती लक्षणों में पौधों की पत्तियों का पीला पड़ना, तने का कमजोर होना और पौधे का धीरे-धीरे मुरझाना शामिल है। यदि किसान ने इन संकेतों को नजरअंदाज किया तो फसल की उपज में भारी कमी हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि खड़ी फसल में यूरिया की टॉप ड्रेसिंग न करें, क्योंकि इससे रोग और फैल सकता है।

ऐसे करें नियंत्रण
नियंत्रण के लिए प्रभावी उपायों में मेटालेक्जिल (Metalaxyl) और मैनकोजेब (Mancozeb) दवा का छिड़काव शामिल है। प्रत्येक पंप में 30 ग्राम की दर से दवा मिलाकर फसल पर छिड़काव करना चाहिए। इसके अलावा, बीज को बोने से पहले रोगनाशक दवा से उपचार करना फायदेमंद होता है। खेत की सफाई, बीज के चयन में सतर्कता और उचित सिंचाई भी रोग नियंत्रण में मदद करती है।

समय-समय पर निरीक्षण जरूरी 
किसान Chickpea Farming के दौरान समय-समय पर फसल का निरीक्षण करें और उग्रा रोग के शुरुआती लक्षण दिखते ही कदम उठाएं। यह न केवल फसल की सुरक्षा करेगा, बल्कि चने की उपज और गुणवत्ता भी सुनिश्चित करेगा। स्वस्थ पौधों के लिए सही खेती पद्धति, रोग प्रबंधन और जैविक/रासायनिक उपायों का संतुलित उपयोग आवश्यक है।