
आलू की खेती – फोटो : सोशल मीडिया
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रबी सीजन में आलू की खेती किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। कई किसान आलू की हार्वेस्टिंग के तुरंत बाद उपज बाजार में बेच देते हैं। इस समय बाजार में आवक अधिक होने के कारण दाम कम रहते हैं, जिससे किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। वहीं, कुछ किसान बेहतर भाव की उम्मीद में आलू को लंबे समय तक भंडारण करते हैं और आमतौर पर बारिश के मौसम तक, यानी 5 से 6 महीने बाद, दाम बढ़ जाने पर उन्हें अच्छा मुनाफा होता है।कृषि विशेषज्ञ कहते हैं कि आलू को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए खेत स्तर से ही सही तैयारी करना जरूरी है। फसल के दौरान पोटाश की संतुलित मात्रा का प्रयोग करना चाहिए। पोटाश डालने से आलू की स्टोरेज क्षमता बढ़ती है और कंदों को सड़न और अन्य बीमारियों से बचाने में मदद मिलती है। इससे आलू लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं और गुणवत्ता बनी रहती है।
खुदाई से करीब 20–25 दिन पहले आलू के पौधों को जमीन की सतह के बराबर काट देना चाहिए और सिंचाई बंद कर देनी चाहिए। इससे आलू पूरी तरह पक जाते हैं, उनका छिलका मजबूत होता है और चमक बनी रहती है। ऐसे आलू लंबे समय तक भंडारण और बीज के लिए अधिक उपयुक्त होते हैं।
खुदाई के समय ध्यान रखें कि आलू को किसी तरह की चोट न लगे, क्योंकि चोटिल आलू जल्दी खराब हो जाते हैं। खुदाई के बाद आलू को थोड़ी देर धूप में फैलाकर सुखाएं, ताकि उनकी ऊपरी नमी खत्म हो जाए। आलू को ऐसी जगह रखें जहां उनका छिलका सुरक्षित रहे। सही तरीके से भंडारण करने पर किसान बेहतर दाम मिलने पर आलू बेचकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।




