Loading...
LIVE
⚡ FLASH NEWS
BREAKING NEWS
खबरें लोड हो रही हैं...
Home क्राइम शारदीय नवरात्रि: पूरी दुर्गा सप्तशती पढ़ने का समय नहीं? अष्टमी-नवमी पर करें...

शारदीय नवरात्रि: पूरी दुर्गा सप्तशती पढ़ने का समय नहीं? अष्टमी-नवमी पर करें सिर्फ इन 3 स्तोत्रों का पाठ, मिलेगा संपूर्ण फल

शारदीय नवरात्रि के महापर्व पर देवी दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की आराधना पूरे विधि-विधान से करने का समय चल रहा है. देवी मां को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने के लिए साधक व्रत, पूजन और कई धार्मिक अनुष्ठान करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शारदीय नवरात्रि में मार्कंडेय पुराण से ली गई 700 श्लोकों वाली दुर्गा सप्तशती का पाठ सबसे अधिक कल्याणकारी माना जाता है. हालांकि यदि किसी साधक या श्रद्धालु के पास संपूर्ण दुर्गा सप्तशती के पाठ का समय न हो तो एक छोटा सा उपाय करके देवी का संपूर्ण आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है.

अष्टमी और नवमी पर तीन पाठ का पुण्य
शारदीय नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर केवल शुरुआती तीन पाठ करने से भी संपूर्ण दुर्गा सप्तशती का पुण्य प्राप्त होता है. चलिए विस्तार से जानते हैं. हरिद्वार के धर्मज्ञाता पंडित योगेश पंत बताते हैं कि समय की कमी होने पर दुर्गा सप्तशती के शुरुआती तीन स्तोत्र पूरे ग्रंथ का सार माने जाते हैं.
देवी कवच, अर्गला और कीलक स्तोत्र का प्रभाव
दुर्गा सप्तशती में सबसे पहले देवी कवच का पाठ किया जाता है. देवी कवच का पाठ करने से साधक के चारों ओर सुरक्षा का एक अभेद्य सुरक्षा कवच बन जाता है जिससे सभी दिशाओं से आने वाली नकारात्मक ऊर्जाएं और समस्याएं खत्म हो जाती हैं. इसके बाद अर्गला स्तोत्र का पाठ करने से साधक के जीवन में विजय, यश और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. पंडित योगेश पंत बताते हैं कि तीसरा कीलक स्तोत्र का पाठ करने से सभी मंत्र सिद्ध हो जाते हैं जिससे सभी मंत्रों और स्तोत्रों का संपूर्ण लाभ मिलता है.

त्रिवेणी पाठ का समय और पूर्ण फल
सच्चे भाव से किया गया यह त्रिवेणी पाठ व्यक्ति को हर समस्या से मुक्ति दिलाता है. पंडित योगेश पंत के अनुसार शारदीय नवरात्रि के दिनों में सुबह पूजा के समय और शाम को देवी की पूजा करते समय इन तीनों स्तोत्रों का पाठ करना विशेष फलदायी होता है. साधक जब नवरात्रि के व्रत खोलते हैं, अष्टमी या नवमी में समापन के दिन इस त्रिवेणी पाठ को करने से संपूर्ण नवरात्रि का फल प्राप्त हो जाता है. वह आगे बताते हैं कि देवी भगवती अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा और भाव को देखती हैं. जो भक्त संपूर्ण निष्ठा से इन तीन स्तोत्रों को जीवन में उतारते हैं उन्हें बिना किसी बाधा के देवी का अखंड आशीर्वाद और मनोवांछित फल प्राप्त होता है.

 

Follow @mntnewsbharat