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दौसा निकाय चुनाव: 26 उम्मीदवार मैदान में, लवाण में सिंबल विवाद ने बदला गणित

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दौसा। दौसा जिले के 11 नगरीय निकायों में अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। दाखिल किए गए 27 नामांकन पत्रों की जांच के बाद 26 वैध पाए गए हैं, जबकि लवाण नगर पालिका में सिंबल के दस्तावेज न होने के कारण एक नामांकन खारिज कर दिया गया है।

प्रमुख निकायों में प्रत्याशियों की स्थिति और मुकाबले

  • लवाण नगर पालिका: भाजपा प्रत्याशी के रूप में उतरीं गुदना देवी के पास अधिकृत 'एबी फॉर्म' (पार्टी सिंबल से जुड़ा दस्तावेज) नहीं होने के कारण उनका पर्चा खारिज हो गया है। इसके चलते अब यहाँ कांग्रेस की कैलाशी और भाजपा की हीरा देवी के बीच सीधा मुकाबला तय माना जा रहा है।

  • दौसा नगर परिषद: जिले की सबसे बड़ी इस निकाय में तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। यहाँ भाजपा की कविता और कांग्रेस की रेखा कुमारी गुर्जर के अलावा पूर्व सभापति राजकुमार जायसवाल की पत्नी राधा जायसवाल के निर्दलीय उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।

  • बांदीकुई और बसवा: बांदीकुई में भाजपा की राजन्ती देवी सैनी और कांग्रेस की विनोद देवी के बीच सीधी टक्कर है। वहीं बसवा में कांग्रेस के छोटेलाल गुर्जर और भाजपा के मुकेश कुमार सैनी आमने-सामने हैं।

  • भांडारेज और लालसोट: भांडारेज में तीन प्रत्याशी (निर्दलीय पूनम चौहान खटीक, कांग्रेस की राधा महावर और भाजपा की सीमा) होने से मुकाबला रोचक हो गया है, जबकि लालसोट में कांग्रेस के कपिल और भाजपा की पिंकी चतुर्वेदी के बीच सीधा मुकाबला है।

  • मंडावर नगर पालिका: यहाँ सबसे अधिक पाँच प्रत्याशी (कांग्रेस की अनीता देवी, भाजपा के अशोक मीणा और तीन निर्दलीय – आशा देवी, गुड्डी देवी व रामकली) मैदान में होने के कारण मुकाबला बहुकोणीय बन गया है।

  • मंडावरी, रामगढ़ पचवारा और सिकराय: मंडावरी में जन्तु देवी मीणा (भाजपा) और रामकेश मीणा (कांग्रेस), रामगढ़ पचवारा में राधेश्याम मीणा (भाजपा) और रामफूल मीणा (कांग्रेस) के बीच सीधी टक्कर है। वहीं सिकराय में दिलचस्प स्थिति यह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशियों का नाम 'कैलाश' ही है।

नाम वापसी और आगे की प्रक्रिया

निर्वाचन विभाग द्वारा नाम वापसी की अंतिम समय सीमा शुक्रवार दोपहर 3 बजे तक तय की गई थी। इसके बाद प्रत्याशियों को अंतिम चुनाव चिह्न आवंटित किए जाने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है, जिसके बाद स्पष्ट हो जाएगा कि किस निकाय में अंतिम तौर पर कितने उम्मीदवार चुनावी मैदान में डटे हैं।