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बीएलए का दावा, बलूचिस्तान में 21 अभियानों में 16 पाक सैनिक मारे

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क्वेटा। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने गुरुवार को दावा किया कि उसके लड़ाकों ने 23 से 29 सितंबर के बीच बलूचिस्तान में 21 सशस्त्र अभियान चलाए, जिनमें पाकिस्तानी सेना के 16 जवान मारे गए।

संगठन ने पाकिस्तानी सेना के उस दावे को भी खारिज किया है, जिसमें हालिया अभियानों के दौरान 71 से अधिक लड़ाकों के मारे जाने की बात कही गई थी।

बीएलए के प्रवक्ता जीयांद बलूच ने पाकिस्तानी सेना के आंकड़ों को “पूरी तरह मनगढ़ंत और जमीन की वास्तविकता के विपरीत” बताया।

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उन्होंने आरोप लगाया कि सेना अपने ठिकानों पर हुए हमलों में हुए नुकसान को छिपाने के लिए ऐसे आंकड़े जारी कर रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

बीएलए ने अपने संगठन को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अन्य सशस्त्र समूहों से जोड़ने के आरोपों को भी खारिज किया।

संगठन ने कहा कि बलूच राजी आजोई संगर (बीआरएएस) को छोड़कर उसका किसी अन्य संगठन या समूह के साथ कोई संगठनात्मक, वैचारिक या परिचालन संबंध नहीं है।

बीएलए ने खुद को स्वतंत्र संगठन बताते हुए कहा कि उसका उद्देश्य बलूचिस्तान के संसाधनों की रक्षा करना और एक स्वतंत्र, धर्मनिरपेक्ष तथा संप्रभु बलूचिस्तान की स्थापना करना है।

बीएलए के अनुसार, 25 सितंबर को क्वेटा के डघारी इलाके के टस बुट में एक सैन्य शिविर पर हमला किया गया। संगठन ने दावा किया कि इस हमले में नौ सैनिक मारे गए और सात से अधिक घायल हुए। बीएलए ने यह भी स्वीकार किया कि इस कार्रवाई में उसका एक लड़ाका गुलाम नबी बलोच उर्फ बोलानी मारा गया।

वहीं, संगठन ने दावा किया कि अगले दिन इलाके में आगे बढ़ रहे पाकिस्तानी सैनिकों पर घात लगाकर हमला किया गया और दो वाहनों को निशाना बनाया गया।

इसके अलावा, 25 सितंबर को मस्तुंग के स्पलिंजी स्थित सैन्य शिविर पर रॉकेट दागने, 26 सितंबर को वाध में आरसीडी हाईवे पर सैन्य काफिले पर हमला करने और सुराब के गिदार में एक सैन्य शिविर में दो जवानों को मारने का भी दावा किया गया।

इसके अलावा 28 सितंबर को मंगुचार के सोरो में बम निरोधक दस्ते को निशाना बनाकर किए गए विस्फोट में दो जवानों के मारे जाने और एक पुल के नष्ट होने का दावा भी किया।

संगठन ने अपनी कार्रवाइयों में कई राजमार्गों और पुलों को निशाना बनाने की बात कही। बीएलए के मुताबिक, 26 सितंबर को क्वेटा-खारन हाईवे पर सोटगाकन में एक पुल को नष्ट किया गया।

इसी मार्ग पर एक अन्य पुल और कली करीम बख्श में पाकिस्तानी सेना के इस्तेमाल वाली एक पोस्ट को भी नुकसान पहुंचाने का दावा किया गया।

बीएलए ने कहा कि तेजाबान और होशब के बीच सीपीईसी मार्ग को भी अवरुद्ध किया गया और कई घंटों तक वाहनों की तलाशी ली गई। 29 सितंबर को खारन-क्वेटा मार्ग पर डाली और ग्वारगन में भी नाकेबंदी किए जाने का दावा किया गया।

संगठन ने इन कार्रवाइयों को अपनी कथित “आर्थिक नाकेबंदी” का हिस्सा बताया। 27 सितंबर को चगाई के नोकचाह में एक व्यापारिक वाहन को कब्जे में लेने और अगले दिन खनिज ले जा रहे एक वाहन पर गोलीबारी कर उसे आग के हवाले करने का भी दावा किया गया।

बीएलए ने अलग-अलग घटनाओं में चार लोगों की हत्या की जिम्मेदारी भी ली। संगठन ने 23 सितंबर को पास्नी के शादीकौर में अहसान नामक व्यक्ति की हत्या का दावा किया और उसे पाकिस्तानी सैन्य खुफिया एजेंसी (एमआई) का कथित ऑपरेटिव बताया।

25 सितंबर को तर्बत के दश्त इलाके में अब्दुल वहाब की हत्या का भी दावा किया गया। बीएलए ने आरोप लगाया कि वह पाकिस्तानी सेना के लिए काम करता था और स्थानीय स्तर पर उसके लिए नेटवर्क संचालित करता था।

वहीं, 28 सितंबर को खारन के बरशोंकी में सुदैस और जुनैद की हत्या का दावा किया गया। बीएलए ने आरोप लगाया कि दोनों पाकिस्तानी सैन्य खुफिया से जुड़े कथित “डेथ स्क्वाड” के सदस्य थे और बलूच सशस्त्र संगठनों के खिलाफ निगरानी तथा घुसपैठ की गतिविधियों में शामिल थे।

बीएलए ने दावा किया कि दोनों को पहले हिरासत में लिया गया था और बाद में रिहा कर दिया गया, जिसके बाद वे कथित तौर पर फिर से सैन्य खुफिया से जुड़े लोगों के संपर्क में आ गए।

 

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