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श्रीलंका के 40 बौद्ध अनुयायियों ने की फूल पूजा:श्रावस्ती के विपश्यना केंद्र में 100 बौद्ध भिक्षु संघ में हुए शामिल, शांति और एकाग्रता पर जोर

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बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में मंगलवार को श्रीलंका के बौद्ध अनुयायियों ने अपनी रीति-रिवाज के अनुसार गंध कुटी पर श्रद्धापूर्वक फूल पूजा की। कार्यक्रम बौद्ध भिक्षु दीपालोक महाथेरे की अध्यक्षता में हुआ। अनुयायियों ने पूजा-अर्चना के बाद भगवान बुद्ध के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में श्रीलंका से आए बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायी शामिल हुए। बौद्ध भिक्षु दीपालोक महाथेरे ने कहा कि बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा गौतम बुद्ध के विचार आज भी दुनिया भर के लोगों को जीवन में आगे बढ़ने और सफलता हासिल करने की प्रेरणा देते हैं। बुद्ध के जीवन और शिक्षाओं से जुड़ी घटनाएं कठिन परिस्थितियों में सही रास्ता चुनने की सीख देती हैं। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए निरंतर प्रयास, धैर्य और सही दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है। गंध कुटी पर श्रद्धा के साथ फूल पूजा श्रीलंका के बौद्ध अनुयायियों ने गंध कुटी पर अपनी परंपरा के अनुसार फूल पूजा की। पूजा-अर्चना के दौरान भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को स्मरण किया गया। अनुयायियों ने उनके बताए मार्ग पर चलने और जीवन में उनकी शिक्षाओं को अपनाने का संकल्प लिया। विपश्यना केंद्र में सत्यनारायण गोयनका की पुण्यतिथि पर संघदान श्रावस्ती विपश्यना ध्यान केंद्र में सत्यनारायण गोयनका की पुण्यतिथि पर आचार्य गोपाल शरण सिंह की अध्यक्षता में संघदान कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान 100 बौद्ध भिक्षुओं को संघ में सम्मिलित किया गया। श्रद्धालुओं ने भिक्षुओं के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए संघदान में सहभागिता की। आचार्य गोपाल शरण सिंह ने बताया कि सत्यनारायण गोयनका द्वारा पूरे भारत में कई विपश्यना केंद्र संचालित किए गए, जो आज भी लोगों को ध्यान और आत्मनिरीक्षण के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपश्यना का अर्थ वस्तु को जैसी वह है, उसे उसी रूप में देखना है। यह ऐसी ध्यान पद्धति है, जिसे मन और शरीर दोनों के लिए उपयोगी माना जाता है। विपश्यना से मन की शांति और एकाग्रता पर जोर आचार्य गोपाल शरण सिंह ने कहा कि विपश्यना के अभ्यास से मन को शांत रखने और तनाव कम करने में मदद मिलती है। इससे धैर्य और आत्मविश्वास बढ़ाने में भी सहायता मिलती है। अभ्यास से उतावलापन कम होता है और व्यक्ति अपने मन को समझने तथा नियंत्रित करने का प्रयास करता है। उन्होंने बताया कि बच्चों और युवाओं में एकाग्रता बढ़ाने के लिए भी विपश्यना का अभ्यास उपयोगी बताया गया है। आठ से 12 वर्ष तक के बच्चों के लिए विशेष रूप से कम अवधि के विपश्यना पाठ्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। कार्यक्रम के दौरान बौद्ध भिक्षुओं, अनुयायियों और श्रद्धालुओं ने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने और उनके बताए मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

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