RTO ऑफिस में भ्रष्टाचार, बिना दलाल और बिना रिश्वत दिए नहीं कोई काम होना नामुमकिन

श्रावस्ती के RTO ऑफिस में भ्रष्टाचार का ऐसा जाल फैला है कि बिना दलाल और बिना रिश्वत दिए कोई काम होना नामुमकिन है। ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर अन्य सभी कामों तक दलाली का खुला खेल चल रहा है। हमारी ये पड़ताल बताती है कि वर्षों से एक ही कुर्सी पर बैठे अफसर और कर्मचारी इस गोरखधंधे को लगातार बढ़ावा दे रहे हैं।

 

सुबह होते ही RTO ऑफिस के बाहर दलालों की भीड़ जुट जाती है। लाइसेंस बनवाने से लेकर टेस्ट पास कराने तक हर काम के लिए मोटी रकम वसूली जाती है। आरोप है कि बिना दलालों के कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती।

लाइसेंस टेस्ट के नाम पर वसूली का खेल भी यहां खुलेआम चलता है, जबकि टेस्ट के लिए कोई आधिकारिक सूचकांक तक मौजूद नहीं है। आवेदकों का कहना है कि सालों से एक ही कुर्सी पर बैठे RTO अधिकारी और कर्मचारी भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। बार-बार शिकायतें होने के बावजूद अब तक किसी भी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं की गई है।

यह और भी हैरान करने वाला है कि जिले में ARTO और RI के कई महिने से दूसरे जनपद में अटैच्ड हैं। जांच और सत्यापन के बावजूद लाइसेंस कैसे जारी हो जाते हैं? जवाब साफ है — खाली कुर्सियों की आड़ में दलाल और माफिया नेटवर्क सक्रिय हो गया है। वे गैर-आधिकारिक मार्गों से फाइलें आगे बढ़ाते, टेस्ट पास कराते और दस्तावेज़ मोड़ लेते हैं। जनता का कहना है — जब विभागीय अधिकारी मौजूद नहीं हैं तो सिस्टम किन लोगों के भरोसे चल रहा है? सवाल उठता है कि क्या यह ख़ाली कुर्सियाँ जानबूझकर रखी जा रही हैं ताकि दलालों को गुंजाइश मिलती रहे?

भ्रष्टाचार के इस खेल से परेशान लोग लगातार आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या जिले का ARTO विभाग इस पूरे खेल में मिलीभगत से काम कर रहा है? या फिर ARTO के ग़ैर मौजूदगी का फायदा उठाकर भ्रष्ट गिरोहों ने सिस्टम हथिया लिया है?

* एक स्वतंत्र जांच/वेरिफिकेशन टीम गठित की जाए ताकि दलालों के नेटवर्क का भंडाफोड़ हो सके।

* आवेदकों को निर्देशित किया जाए कि वे किसी भी तरह की वसूली की सूचना सीधे जिला कलेक्टर अथवा पुलिस कंट्रोल रूम में दें।