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कॉलोनाइजरों की मुश्किलें बढ़ीं, EWS-LIG जमीन से जुड़े 5 मामलों में प्रशासन का नोटिस

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रायगढ़| रायगढ़ शहर तथा इसके समीपवर्ती क्षेत्रों में विकसित की जा रही कॉलोनियों में नियमानुसार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) एवं निम्न आय वर्ग (LIG) के लिए भूमि व भूखंड सुरक्षित रखे जाने के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए विस्तृत जांच प्रारंभ कर दी है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देशानुसार उपविभागीय अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय ने खैरपुर, पंडरीपानी पूर्व, बड़े अतरमुड़ा तथा जोरापाली क्षेत्र की कॉलोनियों से संबद्ध पांच प्रकरणों में नोटिस जारी किए हैं। प्रशासन ने संबंधित कॉलोनाइजरों को आगामी 22 सितंबर को पूर्ण अभिलेखों के साथ एसडीएम कार्यालय में उपस्थित होने का कड़ा निर्देश दिया है।

आरक्षित भूखंडों की भौतिक स्थिति का होगा सत्यापन

जांच प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कॉलोनी विकास के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग हेतु निर्धारित 15 प्रतिशत भूमि तथा निम्न आय वर्ग हेतु न्यूनतम 10 प्रतिशत भूखंडों का नियमपूर्वक आवंटन किया गया है अथवा नहीं। प्रशासन इस बार केवल स्वीकृत मानचित्रों व लाइसेंसों तक ही जांच सीमित नहीं रखेगा, बल्कि धरातल पर उपलब्ध आरक्षित भूमि और निर्मित भूखंडों की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन भी करेगा।

5 प्रमुख आवासीय परियोजनाओं के मांगे गए दस्तावेज

अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) महेश शर्मा ने बताया कि जिलाधीश कार्यालय से प्राप्त निर्देशों के अनुपालन में यह कार्रवाई संचालित की जा रही है। जांच के अंतर्गत निम्नलिखित भू-खंडों पर विकसित कॉलोनियों के रिकॉर्ड तलब किए गए हैं:

  • खैरपुर: 7.259 हेक्टेयर भूमि

  • पंडरीपानी पूर्व: 2.848 हेक्टेयर भूमि

  • बड़े अतरमुड़ा: 19,240 वर्गमीटर एवं 84,038 वर्गमीटर भूमि

  • जोरापाली: 2.238 हेक्टेयर भूमि

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 22 सितंबर को तय समय पर यदि संबंधित कॉलोनाइजर रिकॉर्ड प्रस्तुत करने में विफल रहते हैं, तो उनके विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

सलमान का बल्ला गरजा, टेस्ट टीम से बाहर किए जाने के बाद घरेलू मुकाबले में ठोकी शानदार ट्रिपल सेंचुरी

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पाकिस्तान की राष्ट्रीय टेस्ट टीम से निष्कासित किए जाने के मात्र दो सप्ताह के भीतर ऑलराउंडर सलमान अली आगा ने घरेलू क्रिकेट में ऐतिहासिक पारी खेलकर वापसी का सशक्त दावा पेश किया है। प्रेसिडेंट्स ट्रॉफी के प्रथम दौर में किंग्समेन एकेडमी की ओर से खेलते हुए उन्होंने मार्कहोर आईटी सॉल्यूशंस के विरुद्ध नाबाद 300 रनों की मैराथन पारी खेली। 336 गेंदों का सामना करते हुए अपनी टीम को 7 विकेट पर 565 रन के विशाल स्कोर तक पहुंचाने में उन्होंने केंद्रीय भूमिका निभाई। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में यह उनका अब तक का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर है; इससे पूर्व उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 169 रन था।

तकनीक में सूक्ष्म बदलाव का मिला लाभ

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड द्वारा जारी एक आधिकारिक वक्तव्य में सलमान अली आगा ने अपनी फॉर्म और रणनीति में किए गए परिवर्तनों पर खुलकर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि हालिया अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उनका प्रदर्शन मानक के अनुरूप नहीं था। उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ असफलताओं के उपरांत मैंने अपनी बल्लेबाजी तकनीक में कुछ सूक्ष्म सुधार किए, जो अत्यंत लाभप्रद सिद्ध हुए। जीवन में इस प्रकार के कीर्तिमान स्थापित करने के अवसर विरले ही प्राप्त होते हैं।"

इंग्लैंड के विरुद्ध टेस्ट शृंखला के दौरान हेडिंग्ले टेस्ट में नियमित कप्तान की अनुपस्थिति में उन्हें नेतृत्व का अवसर मिला था, किंतु अगले ही मैच में उन्हें अंतिम एकादश से बाहर कर दिया गया। तत्पश्चात शृंखला के अंतिम मुकाबले से पूर्व उन्हें स्वदेश वापस भेज दिया गया था।

घरेलू क्रिकेट में सहभागिता अनिवार्य करने की नीति

विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) की अंक तालिका में अंतिम पायदान पर मौजूद पाकिस्तान क्रिकेट में निरंतर गिरते स्तर को सुधारने हेतु कठोर कदम उठाए गए हैं। बोर्ड के नवीन केंद्रीय अनुबंध के अंतर्गत ए और बी श्रेणी के अनुबंधित खिलाड़ियों हेतु प्रतिवर्ष न्यूनतम 4 से 6 प्रथम श्रेणी मैच खेलना अनिवार्य कर दिया गया है। विगत तीन वर्षों में मात्र तीन प्रथम श्रेणी मैच खेलने वाले सलमान अली आगा के लिए यह तिहरा शतक बोर्ड की नई नीति की सार्थकता को भी रेखांकित करता है।

सलमान ने कहा, "किसी भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के लिए अपनी जड़ों यानी घरेलू क्रिकेट की ओर लौटना अत्यंत आवश्यक है। लगभग एक दशक तक घरेलू मैचों में पसीना बहाने के उपरांत ही मुझे राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला था।"

संकट के क्षणों में निभाई संकटमोचक की भूमिका

किंग्समेन एकेडमी ने एक समय मात्र 72 रन के कुल योग पर अपने 3 शीर्ष बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिए थे। ऐसी विषम परिस्थितियों में क्रीज पर उतरे सलमान ने मोहम्मद सुलेमान के साथ चतुर्थ विकेट हेतु 274 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी निभाकर मैच का पासा पलट दिया। सुलेमान ने भी शानदार शतकीय पारी खेली।

चुनौतीपूर्ण समय में परिवार को समर्पित की उपलब्धि

इस ऐतिहासिक तिहरे शतक को अपने परिवार को समर्पित करते हुए सलमान ने कहा कि पिछला कुछ समय उनके खेल जीवन का अत्यंत कठिन दौर था, जिसमें परिजनों का सहयोग अतुलनीय रहा। अब उनके समक्ष मुख्य चुनौती इस निरंतरता को बनाए रखते हुए पुनः राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह पक्की करने की होगी।

TMC के नाम-चुनाव चिन्ह पर नहीं हुआ फैसला, उपचुनाव नामांकन की डेडलाइन नजदीक

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नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिन्ह पर अधिकार को लेकर पार्टी के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच चल रहे विवाद पर चुनाव आयोग अभी तक किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाया है। आयोग द्वारा दोनों पक्षों के साथ मैराथन बैठकें की जा चुकी हैं, लेकिन नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 16 सितंबर नजदीक होने के बावजूद स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है कि आयोग इससे पहले कोई फैसला सुना पाएगा या नहीं।

दोनों गुटों के बीच दस्तावेजों का आदान-प्रदान

  • ऋतब्रत बनर्जी गुट का पक्ष: शुक्रवार को चुनाव आयोग ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की दलीलें सुनी थीं। इसके बाद, आयोग के निर्देश पर इस गुट ने शनिवार शाम तक अपने दावों के समर्थन में आवश्यक अतिरिक्त स्पष्टीकरण और दस्तावेज आधिकारिक रूप से जमा करा दिए।

  • ममता बनर्जी गुट को नोटिस: बागी गुट द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों की प्रारंभिक समीक्षा के बाद, चुनाव आयोग ने शनिवार रात ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को एक पत्र भेजकर उस पर उनकी आधिकारिक राय और जवाब तलब किया है।

  • दूसरी ओर, ममता बनर्जी गुट ने भी आयोग से संपर्क कर विरोधी गुट द्वारा जमा कराए गए दस्तावेजों की प्रतियां और विवरण उपलब्ध कराने की मांग की है।

16 सितंबर नामांकन की अंतिम तिथि और असमंजस

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन ताजा घटनाक्रमों और कानूनी प्रक्रियाओं के चलते आगामी उपचुनावों से पहले आयोग का कोई बड़ा फैसला आना बेहद मुश्किल है। नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर है, और इतने कम समय में पार्टी के नाम और 'जोड़े फूल' जैसे चुनाव चिन्ह पर अंतिम फैसला लेना आयोग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

क्या होगा यदि समय पर फैसला नहीं आया?

यदि चुनाव आयोग समय रहते इस विवाद पर कोई अंतिम निर्णय नहीं ले पाता है, तो ऐसी स्थिति में दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को उपचुनाव के दौरान तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक चुनाव चिन्ह के बिना ही मैदान में उतरना पड़ सकता है। ऐसे में आयोग दोनों गुटों को 'फ्री सिंबल' (मुफ्त चुनाव चिन्ह) या अपनी ओर से कोई अन्य वैकल्पिक चिन्ह आवंटित कर सकता है, जिससे वे अपने उम्मीदवार चुनाव में उतार सकें।

तेल सप्लाई पर मंडराया बड़ा संकट, होर्मुज और लाल सागर के हमलों ने बढ़ाई चिंता

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रियाद। पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच भू-राजनीतिक और सामरिक हालात एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गए हैं। ओमान और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर होने वाली महत्वपूर्ण समझौते की बैठक टल गई है। वहीं दूसरी ओर, खाड़ी क्षेत्र में रणनीतिक जहाजों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हुए ताबड़तोड़ हमलों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार की नींद उड़ा दी है।

सऊदी अरब की मुख्य तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमला

संघर्ष के इस दौर में सऊदी अरब की रीढ़ मानी जाने वाली लगभग 1200 किलोमीटर लंबी पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन को ड्रोन हमले में निशाना बनाया गया, जिससे उसे गंभीर क्षति पहुंची है। सुरक्षा और एहतियात के तौर पर इस अहम पाइपलाइन को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है।

  • रणनीतिक महत्व: यह पाइपलाइन बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके माध्यम से सऊदी अरब संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करके सीधे लाल सागर के रास्ते से अपने तेल का निर्यात करता है।

  • वैश्विक असर: लाल सागर के यानबू बंदरगाह पर मौजूद मौजूदा तेल भंडार के सहारे सऊदी अरब अगले 5 से 7 दिनों तक तो निर्यात संभाल सकता है, लेकिन यदि यह रुकावट लंबी चली तो दुनियाभर की लगभग 4 फीसदी तेल सप्लाई सीधे तौर पर खतरे में पड़ जाएगी।

महत्वपूर्ण जलमार्गों पर मंडराया संकट

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के दो सबसे अहम मार्ग—स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब अल-मंदेब—इस समय संघर्ष के मुख्य केंद्र बन चुके हैं:

  • समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक कमर्शियल जहाज पर हमला हुआ, जिससे उसमें भीषण आग लग गई और चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित रेस्क्यू करना पड़ा।

  • इसके साथ ही, ईरान ने अपने तट के करीब एक ईरानी व्यावसायिक जहाज पर भी हमले की पुष्टि की है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत और चार लोग घायल हो गए हैं।

  • यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के दक्षिणी जाजान प्रांत में सैन्य ठिकानों और नागरिक बस्तियों पर हमले तेज कर दिए हैं। हूतियों ने लाल सागर की शिपिंग के लिए सबसे संवेदनशील माने जाने वाले बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पेरिम द्वीप पर भी कब्जा करने का दावा किया है।

कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल की आशंका

इन हमलों के कारण होर्मुज और बाब अल-मंदेब दोनों प्रमुख व्यापारिक मार्ग गंभीर रूप से प्रभावित होने की आशंका है। ऊर्जा बाजारों के जानकारों का मानना है कि इस स्थिति के बाद बाजार खुलने पर कच्चे तेल के दामों में जबरदस्त तेजी आ सकती है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ही कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर चुकी हैं, जबकि अमेरिका में डीजल के दाम भी रिकॉर्ड 6.20 डॉलर प्रति गैलन के स्तर से ऊपर बने हुए हैं। यदि पश्चिम एशिया का यह संकट जल्द नहीं थमा, तो वैश्विक स्तर पर गंभीर ऊर्जा संकट और महंगाई का खतरा और गहरा सकता है।

ज्योति खंडेलवाल को भाजपा ने दी मात, अब तक के चुनावी नतीजों में किसका पलड़ा भारी?

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जयपुर| जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों के संग्राम का निर्णय सामने आ चुका है। सीकर रोड स्थित श्री भवानी निकेतन कॉलेज में बने केंद्र पर वोटों की गिनती संपन्न हुई। 11 सितंबर 2026 को हुए मतदान में 63.55% मतदान दर्ज किया गया था, जिसमें 723 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला हुआ।

भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही मुख्य दलों ने पूर्ण बहुमत का दावा पेश किया था। जिला निर्वाचन आयोग ने 15 कंट्रोल रूम और 150 से अधिक टेबलों के जरिए चरणबद्ध तरीके से नतीजे घोषित किए हैं।

पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल की हार

जयपुर नगर निगम चुनाव के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी की सबसे प्रमुख चेहरों में से एक और पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को पराजय का सामना करना पड़ा। कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुईं ज्योति खंडेलवाल को मेयर पद की सबसे मजबूत और संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा था।

पार्टी आलाकमान से लेकर स्थानीय स्तर तक यह माना जा रहा था कि जीत दर्ज करने के बाद वे फिर से मेयर पद की मुख्य दावेदार होंगी, लेकिन इस परिणाम ने भाजपा के पूरे सियासी गणित को प्रभावित किया है।

ज्योति खंडेलवाल की इस हार को नगर निगम चुनावों का बड़ा उलटफेर माना जा रहा है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने के बाद से ही उनके टिकट और उम्मीदवारी को लेकर अंदरूनी खींचतान की बातें सामने आ रही थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर मौजूद असंतोष, स्थानीय स्तर पर हुए भीतरघात और कांग्रेस की घेराबंदी के चलते उन्हें इस परिणाम का सामना करना पड़ा।

7 वार्डों के नतीजे होल्ड पर

जयपुर नगर निगम के कुछ वार्डों पर परिणाम होल्ड किए गए हैं, जहां EVM में तकनीकी खराबी पाई गई। यदि EVM सही नहीं होती हैं और वोट रिकवर नहीं होते हैं तो वहां पुनर्मतदान करवाया जा सकता है। हालांकि पुनर्मतदान की स्थिति तभी आएगी जब वहां जीतने वाले प्रत्याशी के वोटों का अंतर EVM में दर्ज वोटों से अधिक नहीं होगा। यदि जीत के निकट वाले प्रत्याशी के वोट का अंतर अधिक हुआ तो पुनर्मतदान नहीं होगा।

नगर निगम चुनाव: वार्डवार परिणाम विवरण

पार्टी जीते हुए वार्ड
Congress 49
BJP 69
Independent 14
कुल दर्ज जीत 132

वार्ड अनुसार चुनाव परिणाम:

  • वार्ड 1: नवरतन शर्मा (Congress) – हार | श्रवण बोहरा (BJP) – हार | मोहन लाल कुमावत (Rest) – जीत

  • वार्ड 2: मणिराज सिंह (Congress) – जीत | हनुमान प्रसाद सैनी (BJP) – हार

  • वार्ड 3: छगन लाल (Congress) – हार | भवानी शंकर शर्मा (BJP) – जीत

  • वार्ड 4: कविता (Congress) – हार | पिंकी देवी शर्मा (BJP) – जीत

  • वार्ड 5: सुमित शर्मा (Congress) – हार | नरेन्द्र सिंह शेखावत (BJP) – हार | देवेंद्र निठारवाल (Rest) – जीत

  • वार्ड 6: मधुबाला शर्मा (Congress) – हार | स्नेह लता साबू (BJP) – जीत

  • वार्ड 7: पुनम शर्मा (Congress) – जीत | पूजा (BJP) – हार

  • वार्ड 8: रूचिका सोनी (Congress) – हार | सुमन अग्रवाल (BJP) – हार | मंजू शर्मा कांवट (Rest) – जीत

  • वार्ड 9: परिणाम अनिर्णीत/उपलब्ध नहीं

  • वार्ड 10: वंदना (Congress) – हार | पलक (BJP) – जीत

  • वार्ड 11: प्रेम सिंह (Congress) – हार | शैलेन्द्र शर्मा (BJP) – जीत

  • वार्ड 12: पंकज कुमार सैनी (Congress) – हार | राजेन्द्र सैनी (BJP) – जीत

  • वार्ड 13: धनराज सैनी (Congress) – हार | दीपक शर्मा (BJP) – हार | रणवीर राजावत (Rest) – जीत

  • वार्ड 14: हाकिम सिंह (Congress) – हार | दिग्विजय सिंह (BJP) – जीत

  • वार्ड 15: बद्री नारायण कुमावत (Congress) – हार | विक्रम सिंह शेखावत (BJP) – जीत

  • वार्ड 16: राजेश अत्री (Congress) – हार | महेश कुमार (BJP) – जीत

  • वार्ड 17: भूपेन्द्र सिंह (Congress) – हार | सुमेर सिंह जोधा (BJP) – जीत

  • वार्ड 18: परिणाम अनिर्णीत/उपलब्ध नहीं

  • वार्ड 19: मो. फारूख (Congress) – जीत | शाहनवाज (BJP) – हार

  • वार्ड 20: परिणाम अनिर्णीत/उपलब्ध नहीं

  • वार्ड 21: राकेश लाटा (Congress) – जीत | अजय सिंह चौहान (BJP) – हार

  • वार्ड 22: करणवीर सिंह शेखावत (Congress) – हार | वीरेंद्र सिंह शेखावत (BJP) – जीत

  • वार्ड 23: अजीत सिंह (Congress) – हार | विकास बारेठ (BJP) – जीत

  • वार्ड 24: सुरेन्द्र कुमार शर्मा (Congress) – हार | आनंद सिंह खेड़ी (BJP) – जीत

  • वार्ड 25: परिणाम अनिर्णीत/उपलब्ध नहीं

  • वार्ड 26: अनिता देवी (Congress) – हार | श्रवणी देवी (BJP) – हार | सुशीला (Rest) – जीत

  • वार्ड 27: कालु राम यादव (Congress) – हार | शंकर लाल यादव (BJP) – जीत

  • वार्ड 28: रविंद्र सिंह शेखावत (Congress) – जीत | शक्ति सिंह मानपुरा (BJP) – हार

  • वार्ड 29: सत्यनारायण शर्मा (Congress) – हार | महादेव प्रसाद शर्मा (BJP) – हार | विक्रम सिंह (Rest) – जीत

  • वार्ड 30: रविन बुडानिया (Congress) – हार | युवराज सिंह राठौड़ (BJP) – जीत

  • वार्ड 31: जय कुमार जैन (Congress) – हार | विजय अग्रवाल (BJP) – जीत

  • वार्ड 32: सीमा शर्मा (Congress) – जीत | स्वेता सुरोलिया (BJP) – हार

  • वार्ड 33: प्रियंका यादव (Congress) – हार | सीमा यादव (BJP) – जीत

  • वार्ड 34: परिणाम अनिर्णीत/उपलब्ध नहीं

  • वार्ड 35: अनिल माथुर (Congress) – हार | विमल कटियार (BJP) – हार | अमरचंद कुमावत (Rest) – जीत

  • वार्ड 36: रतन चौपड़ा (Congress) – हार | गजेंद्र सिंह चिराना (BJP) – जीत

  • वार्ड 37: देवीलाल कसौटिया (Congress) – जीत | कमल किशोर काला (BJP) – हार

  • वार्ड 38: रामसिंह (Congress) – हार | गणेश नारायण जाट (BJP) – जीत

  • वार्ड 39: अजय सैनी (Congress) – जीत | भंवर लाल लील (BJP) – हार

  • वार्ड 40: मनीष कुमार शर्मा (Congress) – स्थिति स्पष्ट नहीं | नीरज कुमार गर्ग (BJP) – जीत

  • वार्ड 41: पंकज वर्मा (Congress) – हार | दया सिंह (BJP) – जीत

  • वार्ड 42: चंद्रवीर सिंह (Congress) – हार | अशोक रावतानी (BJP) – जीत

  • वार्ड 43: आशीष शर्मा (Congress) – हार | शैलेंद्र भार्गव (BJP) – जीत

  • वार्ड 44: विनय प्रताप सिंह भोपर (Congress) – हार | नवीन कुमार भंडारी (BJP) – जीत

  • वार्ड 45: सुभाष चन्द्र नोनिहाल (Congress) – जीत | जसवंत बैरवा (BJP) – हार

  • वार्ड 46: हर्षिता जैन (Congress) – हार | शिव कान्ता पाण्डेय (BJP) – जीत

  • वार्ड 47: निर्मला बैरवा (Congress) – हार | प्रहलाद चावला (BJP) – जीत

  • वार्ड 48: बाबूलाल सैनी (Congress) – हार | सिद्धार्थ तोंदवाल (BJP) – जीत

  • वार्ड 49: धर्मसिंह सिंघानिया (Congress) – जीत | मुकेश (BJP) – हार

  • वार्ड 50: निर्मला बैरवा (Congress) – हार | प्रहलाद चावला (BJP) – जीत

  • वार्ड 51: मनमोहन गुर्जर (Congress) – जीत | महेंद्र कुमार छीपा (BJP) – हार

  • वार्ड 52: हनुमान सैनी (Congress) – जीत | पूरण चन्द (BJP) – हार

  • वार्ड 53: राजीव चौधरी (Congress) – हार | सतीश कुमार शर्मा (BJP) – जीत

  • वार्ड 54: प्रियंका वेद (Congress) – हार | कमल किशोर शर्मा (BJP) – जीत

  • वार्ड 55: संजय कुमार बैरवा (Congress) – हार | रिंकूम उमरवाल (BJP) – जीत

  • वार्ड 56: शारदा चौधरी (Congress) – जीत | रेखा सैनी (BJP) – हार

  • वार्ड 57: अमित सैनी (Congress) – हार | गिर्राज शर्मा (BJP) – जीत

  • वार्ड 58: रामप्यारी (Congress) – हार | सरोज वर्मा (BJP) – जीत

  • वार्ड 59: दुर्गादेवी (Congress) – जीत | बबली वर्मा (BJP) – हार

  • वार्ड 60: रामफूल मीणा (Congress) – जीत | गिर्राज मीणा (BJP) – हार

  • वार्ड 61: सुरेश मीणा (Congress) – जीत | रामलाल मीणा (BJP) – हार

  • वार्ड 62: हजारी (Congress) – हार | रामअवतार शर्मा (BJP) – जीत

  • वार्ड 63: प्रभुदयाल (Congress) – जीत | अजय टेपन (BJP) – हार

  • वार्ड 64: कैलाश मीणा (Congress) – हार | सुरेश मीणा (BJP) – जीत

  • वार्ड 65: मुकेश कुमार (Congress) – जीत | मुकेश कुमार राणा (BJP) – हार

  • वार्ड 66: महेश चंद कराडिया (Congress) – हार | नारायण लाल कुमावत (BJP) – जीत

  • वार्ड 67: योगिता शर्मा (Congress) – हार | अरुण शर्मा (BJP) – जीत

  • वार्ड 68: अमित सैनी (Congress) – हार | मौसमी मीणा (BJP) – जीत

  • वार्ड 69: बीना देवी (Congress) – जीत | पूनम सोयल (BJP) – हार

  • वार्ड 70: उर्मिला कौर (Congress) – हार | सुशीला (BJP) – जीत

  • वार्ड 71: फाईज हसन (Congress) – जीत | निशा गौड़ (BJP) – हार

  • वार्ड 72: जयश्री गर्ग (BJP) – जीत

  • वार्ड 73: तपस्वी सोनी (Congress) – हार | जयश्री अग्रवाल (BJP) – जीत

  • वार्ड 74: विचार व्यास (Congress) – हार | रामपाल जैन (BJP) – जीत

  • वार्ड 75: सुनिता आडवानी (Congress) – हार | पूजा सनमुखानी (BJP) – जीत

  • वार्ड 76: प्रदीप जैन (Congress) – हार | पुनीत कर्णावत (BJP) – जीत

  • वार्ड 77: प्रेम कुमार जैन (BJP) – जीत

  • वार्ड 78: अभिषेक सैनी (Congress) – हार | श्याम सुंदर शर्मा (BJP) – जीत

  • वार्ड 79: प्रवीन कुमार (Congress) – जीत

  • वार्ड 80: दलजीत कौर (BJP) – हार | रेणु चौधरी (Rest) – जीत

  • वार्ड 81: राहुल तंवर (Congress) – हार | ब्रह्माकुमार सैनी (BJP) – जीत

  • वार्ड 82: महेश यादव (Congress) – जीत | ममता यादव (BJP) – हार

  • वार्ड 83: चन्‍द्र प्रकाश कुमावत (Congress) – जीत | नटवर लाल कुमावत (BJP) – हार

  • वार्ड 84: भरत कुमार (Congress) – जीत | हेमराज (BJP) – हार

  • वार्ड 85: महेन्‍द्र पाल सिंह (Congress) – हार | प्रेमचंद (BJP) – जीत

  • वार्ड 86: तारादेवी बेनीवाल (Congress) – जीत | उषा टाटिवाल (BJP) – हार

  • वार्ड 87: अर्चना शर्मा (Congress) – हार | प्रतिभा शर्मा (BJP) – जीत

  • वार्ड 88: श्रुति शर्मा (Congress) – हार | शशि कुमारी मिश्र (BJP) – जीत

  • वार्ड 89: प्रकाश शर्मा (Congress) – हार | भवानी सिंह राजावत (BJP) – जीत

  • वार्ड 90: ममता (Congress) – हार | सरोज कंवर (BJP) – जीत

  • वार्ड 91: सीताराम मेहरा (Congress) – जीत | विनोद कुमार (BJP) – हार

  • वार्ड 92: उषा (Congress) – हार | शीला शर्मा (BJP) – जीत

  • वार्ड 93: जितेंद्र शर्मा (Congress) – जीत | मुकेश कुमार जैमन (BJP) – हार

  • वार्ड 94: सन्तोष सूद (Congress) – जीत | सुनीता मेहरा (BJP) – हार

  • वार्ड 95: मानवेंद्र सिंह शेखावत (Congress) – जीत | अमित कुमार चौधरी (BJP) – हार

  • वार्ड 96: वसीम चौहान (Congress) – जीत | अमित सारवान (BJP) – हार

  • वार्ड 97: महेंद्र सिंह (Congress) – हार | शशि प्रकाश (BJP) – जीत

  • वार्ड 98: राजकुमार शर्मा (Congress) – हार | सुभाष चन्द्र सिंगी (BJP) – जीत

  • वार्ड 99: परिणाम अनिर्णीत/उपलब्ध नहीं

  • वार्ड 100: परिणाम अनिर्णीत/उपलब्ध नहीं

  • वार्ड 101: दुर्गेश शर्मा (Congress) – हार | रवि शंकर (BJP) – जीत

  • वार्ड 102: शीला गुर्जर (Congress) – जीत | आरती गुर्जर (BJP) – हार

  • वार्ड 103: मोहम्मद हनिफ (Congress) – जीत | मनोज चावरिया (BJP) – हार

  • वार्ड 104: अब्दुल लतीफ़ कुरैशी (Congress) – हार | ज्ञानचंद खंडेलवाल (BJP) – जीत

  • वार्ड 105: महेश तम्बोली (Congress) – जीत | हंसराज चौहान (BJP) – हार

  • वार्ड 106: चंद्रप्रकाश नामा (BJP) – जीत

  • वार्ड 107: खुशबू शर्मा (Congress) – हार | अनुराधा माहेश्वरी (BJP) – जीत

  • वार्ड 108: मेहरुन्निसा (Congress) – हार | मिनाक्षी (BJP) – हार | संगीता शर्मा (Rest) – जीत

  • वार्ड 109: रईस खान (Rest) – जीत

  • वार्ड 110: सुनीता मेठी (Congress) – जीत | ज्योति खण्डेलवाल (BJP) – हार

  • वार्ड 111: संजय जायसवाल (BJP) – जीत

  • वार्ड 112: आशीष (Congress) – हार | सुनील कोठारी (BJP) – जीत

  • वार्ड 113: गजनफर अली (Congress) – जीत | फरीदूददीन (BJP) – हार

  • वार्ड 114: मोहम्मद जकरिया (Congress) – जीत | नवीन शर्मा (BJP) – हार

  • वार्ड 115: सुरेश बिवाल (Congress) – हार | सूरज गोडीवाल (BJP) – जीत

  • वार्ड 116: संजीदा उमर दराज (Congress) – जीत | लक्ष्मी देवी (BJP) – हार

  • वार्ड 117: परिणाम अनिर्णीत/उपलब्ध नहीं

  • वार्ड 118: सुनीता महावार (Congress) – जीत | विकास कोठारी (BJP) – हार

  • वार्ड 119: इरफान कुरैशी (Congress) – जीत | यश राणावत (BJP) – हार

  • वार्ड 120: परिणाम अनिर्णीत/उपलब्ध नहीं

  • वार्ड 121: मुकेश विजय (Congress) – हार | नीरज अग्रवाल (BJP) – जीत

  • वार्ड 122: राजकुमार संगतानी (Congress) – हार | घनश्याम चंदलानी (BJP) – जीत

  • वार्ड 123: अंजू जायसवाल (Congress) – हार | पूनम मेहता (BJP) – जीत

  • वार्ड 124: कांता (Congress) – जीत | मनभरी (BJP) – हार

  • वार्ड 125: मन्जो बानो (Congress) – जीत | लक्ष्मी देवी (BJP) – हार

  • वार्ड 126: सोफिया बानो (Congress) – जीत | रीना उमरवाल (BJP) – हार

  • वार्ड 127: बादल शर्मा (Congress) – जीत | आलोक खंडेलवाल (BJP) – हार

  • वार्ड 128: मोहम्मद सोहेल मंसूरी (Congress) – हार | माजिद खान (BJP) – हार | इरशक मंसूरी (Rest) – जीत

  • वार्ड 129: महेश सामरिया (Congress) – जीत | निखिल बसवाल (BJP) – हार

  • वार्ड 130: आदित्य कौशिक (Congress) – स्थिति स्पष्ट नहीं | सूरज कुमार शर्मा (BJP) – स्थिति स्पष्ट नहीं

  • वार्ड 131: पुष्पेन्द्र मीना (Congress) – हार | कैलाश चंद मीणा (BJP) – जीत

  • वार्ड 132: दशरथ अटल (Congress) – जीत | इन्द्रराज नेनिवाल (BJP) – हार

  • वार्ड 133: सीमा पारीक (BJP) – जीत

  • वार्ड 134: प्रकाश सैनी (BJP) – जीत

  • वार्ड 135: परिणाम अनिर्णीत/उपलब्ध नहीं

  • वार्ड 136: परिणाम अनिर्णीत/उपलब्ध नहीं

  • वार्ड 137: सलमान मंसूरी (Congress) – जीत

  • वार्ड 138: दीपिका शर्मा (Congress) – जीत | ममता (BJP) – हार

  • वार्ड 139: परिणाम अनिर्णीत/उपलब्ध नहीं

  • वार्ड 140: परिणाम अनिर्णीत/उपलब्ध नहीं

  • वार्ड 141: उषा (Congress) – हार | सतीश शर्मा (BJP) – जीत

  • वार्ड 142: मीना (Congress) – हार | भगवती (BJP) – जीत

  • वार्ड 143: जायदा बानो चिराणिया (Congress) – जीत | निधि सैन (BJP) – हार

  • वार्ड 144: उत्तम चन्द (Congress) – हार | आशीष साहू (BJP) – जीत

  • वार्ड 145: अर्चना चतुर्वेदी (Congress) – हार | वंदना (BJP) – जीत

  • वार्ड 146: फिरोजा बानो (AIMIM) – जीत

  • वार्ड 147: परिणाम अनिर्णीत/उपलब्ध नहीं

  • वार्ड 148: आशा सैनी (Congress) – हार | मीनू सैनी (BJP) – हार | बरखा सैनी (Rest) – जीत

  • वार्ड 149: सीमू पारीक (BJP) – जीत

  • वार्ड 150: हीरादेवी (Congress) – जीत

राष्ट्रपति मुर्मू के साथ नजर आने वालीं मेजर नव्या शेखावत कौन हैं? पढ़ें पूरी कहानी

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नई दिल्ली| भारतीय सेना की मेजर नव्या शेखावत को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की एडीसी (ऑपरेटर-डे-कैंप या Aide-de-Camp) नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति के पश्चात वे मीडिया व जनसामान्य की चर्चाओं के केंद्र में आ गई हैं। हर किसी के मन में यह उत्सुकता है कि आखिर राष्ट्रपति की एडीसी मेजर नव्या शेखावत कौन हैं और इस पद का क्या महत्व व कार्य होता है।

मेजर नव्या शेखावत का सफर और उपलब्धियां

मेजर नव्या शेखावत राष्ट्रपति की एडीसी बनने वाली देश की दूसरी महिला अधिकारी तथा भारतीय सेना की प्रथम महिला अधिकारी हैं, जिन्होंने यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली है। नव्या ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) की परीक्षा उत्तीर्ण की थी।

इसके पश्चात उन्होंने ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA), चेन्नई में अपना सैन्य प्रशिक्षण पूर्ण किया। प्रशिक्षण के उपरांत नव्या को आर्मी सर्विस कॉर्प्स (ASC) में कमीशन प्रदान किया गया।

सेना में त्वरित सफलता और एडीसी का दायित्व

भारतीय सेना में अधिकारी बनने के मात्र 5 वर्षों के भीतर नव्या ने अपनी कार्यकुशलता के बल पर 'मेजर' का पद प्राप्त किया। अब उन्हें भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद (राष्ट्रपति) के एडीसी के रूप में सेवा देने का अवसर मिला है। इस दायित्व के अंतर्गत वे राष्ट्रपति के साथ साए की तरह उपस्थित रहकर सभी व्यवस्थाएं संभालेंगी।

राष्ट्रपति के एडीसी का क्या कार्य होता है?

संवैधानिक नियमों एवं सैन्य प्रोटोकॉल के अनुसार, भारत के राष्ट्रपति के साथ कुल 5 एडीसी नियुक्त किए जाते हैं। ये अधिकारी न केवल आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के साथ उपस्थित रहते हैं, बल्कि विभिन्न कार्यक्रमों के समन्वय, उच्चस्तरीय संचार और सैन्य तथा नागरिक प्रोटोकॉल से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यों के निष्पादन का दायित्व भी संभालते हैं।

इन 5 एडीसी अधिकारियों में से 3 अधिकारी भारतीय थल सेना से तथा एक-एक अधिकारी भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना से चयन कर नियुक्त किए जाते हैं।

मुजफ्फरपुर में STF ने कसा शिकंजा, रौशन सिंह समेत तीन अपराधी हथियारों के साथ दबोचे

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मुजफ्फरपुर। जिला पुलिस और बिहार एसटीएफ के संयुक्त अभियान के तहत वाहन चेकिंग के दौरान हथियारों और कारतूसों के साथ तीन शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई में पुलिस के हाथ एक कुख्यात अपराधी भी लगा है जिस पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

स्कॉर्पियो वाहन से हथियार और कारतूस बरामद

बोचहा थाना क्षेत्र के मुरादपुर के पास पुलिस विशेष वाहन जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान संदेह के आधार पर एक स्कॉर्पियो को रोककर उसकी तलाशी ली गई, जिसमें से अवैध हथियार और कारतूस बरामद हुए। वाहन में सवार तीनों संदिग्धों को तुरंत हिरासत में ले लिया गया। पकड़े गए बदमाशों की पहचान रौशन सिंह (साहेबगंज थाना क्षेत्र), मुकुंद प्रियम (काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र) और श्रीराम कुमार (रामपुर हरि थाना क्षेत्र) के रूप में हुई है।

कुख्यात रौशन सिंह पर तीन जिलों में दर्ज हैं कई मामले

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ग्रामीण एसपी राजेश सिंह प्रभाकर ने जानकारी दी कि गिरफ्तार आरोपियों में रौशन सिंह एक कुख्यात अपराधी है। उसके खिलाफ पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर और सारण जिलों में डकैती, आर्म्स एक्ट, दंगा, हत्या के प्रयास और लूटपाट जैसे सात से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं। वह पूर्वी चंपारण के केसरिया और सारण के सोनपुर थाने में भी वांछित रहा है।

किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की थी फिराक में

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये बदमाश किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। एसटीएफ और जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने समय रहते घेराबंदी कर इनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। पुलिस ने इनके पास से हथियार, कारतूस, मोबाइल फोन और घटना में प्रयुक्त स्कॉर्पियो जब्त कर ली है। अन्य आरोपियों के आपराधिक इतिहास का भी सत्यापन किया जा रहा है और उनके गिरोह के नेटवर्क को खंगाला जा रहा है।

उपचुनाव से पहले भाजपा का बड़ा फैसला, पार्टी में लौटे पुराने नेता; जानें क्या मिली जिम्मेदारी

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कोलकाता| पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी 6 अक्तूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनावों और तत्पश्चात प्रस्तावित नगर निकाय चुनावों के दृष्टिगत अपनी मीडिया एवं प्रचार टीम का पुनर्गठन किया है। पार्टी ने पूर्व प्रदेश महासचिव सायंतन बोस तथा वरिष्ठ नेता प्रणय रॉय को पुनः आधिकारिक प्रवक्ता का दायित्व सौंपा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के दो दिवसीय पश्चिम बंगाल प्रवास से ठीक पूर्व किया गया यह संगठनात्मक परिवर्तन चुनावी समर में पार्टी के वैचारिक व राजनीतिक रुख को अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति का अंग है।

नवीन मीडिया टीम की संरचना और प्रमुख दायित्व

प्रदेश भाजपा द्वारा घोषित नवीन सांगठनिक संरचना के अंतर्गत विभिन्न मोर्चों पर जिम्मेदारियां तय की गई हैं:

  • मुख्य प्रवक्ता: अधिवक्ता डेबजीत सरकार को प्रदेश इकाई का मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किया गया है।

  • संयोजक व सह-संयोजक: अनुपम घोष को मीडिया विभाग का संयोजक बनाया गया है, जबकि पार्थ सारथी चौधरी एवं चंद्रशेखर बसुतिया को संयुक्त संयोजक का दायित्व सौंपा गया है।

  • प्रवक्ता मंडल: रितेश तिवारी, सायंतन बोस, केया घोष, प्रणय रॉय, डॉ. तन्मय मुखोपाध्याय, सप्तर्षि चौधरी (प्रकाशन दायित्व सहित), ओफेलिया सिंह, अंकन दत्ता, मेघा सेन रॉय, डॉ. निखिल प्रसून सिंह, शमिक दासगुप्ता, सुदीप्ता गुहा और सेवानिवृत्त मेजर ऋत्विक पाल को प्रवक्ता मंडल में सम्मिलित किया गया है।

डिजिटल एवं सोशल मीडिया विंग का पुनर्गठन

पारंपरिक मीडिया के साथ-साथ डिजिटल मोर्चे पर भी नवीन नियुक्तियां की गई हैं। जॉय मलिक को सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेल का प्रमुख नियुक्त किया गया है, जबकि उपमन्यु भट्टाचार्य को सोशल मीडिया विभाग की कमान सौंपी गई है। सांगठनिक संदेशों के तीव्र एवं सटीक संप्रेषण हेतु मीडिया, आईटी और सोशल मीडिया विभागों का पृथक प्रभार तय किया गया है।

नितिन नबीन के प्रवास और प्रादेशिक नेतृत्व की भूमिका

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन 15 सितंबर से राज्य के दो दिवसीय प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद सामिक भट्टाचार्य के नेतृत्व में जारी सांगठनिक तैयारियों तथा चुनावी रणनीतियों की विस्तृत समीक्षा करेंगे। सामिक भट्टाचार्य के प्रदेश नेतृत्व संभालने के उपरांत प्रादेशिक संगठन की यह प्रथम बड़ी समीक्षा बैठक होगी। इससे पूर्व पिछले सप्ताह प्रदेश कार्यकारिणी का विस्तार कर वरिष्ठ नेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं।

आगामी चुनावी चुनौतियां

पश्चिम बंगाल में 6 अक्तूबर को नंदीग्राम एवं रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं, जिसके उपरांत नगर निकाय चुनाव आयोजित किए जाएंगे। मई में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में मिली सफलता के उपरांत पार्टी के समक्ष अपनी राजनीतिक बढ़त को बनाए रखने तथा उसे जमीनी धरातल पर सुदृढ़ करने की चुनौती है। अनुभवी नेताओं को मीडिया अग्रिम पंक्ति में लाने तथा डिजिटल तंत्र को सशक्त करने के इस कदम को चुनावी तैयारियों के महत्वपूर्ण चरण के रूप में देखा जा रहा है।