‘फाइल फेंकने और दबाने वाले, ऑफिस में लेट आने वाले…’; कैबिनेट सचिव ने गिनाए 12 तरह के ब्यूरोक्रेट्स

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने मंगलवार को परफॉरमेंस रिव्यू (कामकाज की समीक्षा) बैठक में एक ऐसी प्रेजेंटेशन दी, जिससे वरिष्ठ नौकरशाह () भी हक्के-भक्के रह गए।

टी.वी. सोमनाथन ने इस बैठक में ऐसे नौकरशाहों पर तंज कसा, जिससे ये अनुमान लगाया जा सकता है कि कई अधिकारी असहज हो गए होंगे।

कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने 12 तरह के नौकरशाहों पर एक प्रेजेंटेशन दिया। सोमनाथन की सूची में ऐसे अधिकारी शामिल थे जो महिला सहकर्मियों को कोई दस्तावेज दिखाने के लिए बहुत करीब आने को कहते हैं।

सोमनाथन ने उन अधिकारियों पर भी तंज कसा, जो फाइलें फेंकते हैं और बदतमीजी से बात करते हैं। इसके अलावा वो भी जो शनिवार को स्टाफ को तो बुलाते हैं, लेकिन खुद देर से आते हैं।

अन्य श्रेणियों में ऐसे अधिकारी भी शामिल थे जो शाम 7 बजे के बाद बैठकें बुलाते हैं, फाइलों को दबाकर (बिना आगे बढ़ाए) रखते हैं, या ऐसे फैसले मंत्रियों को भेज देते हैं जिन्हें वे खुद ले सकते थे।

टी.वी. सोमनाथन ने इन 12 तरह के नौकरशाहों पर प्रेजेंटेशन देने के लिए हर श्रेणी के साथ एक कार्टून भी दिखाया। बताया जा रहा है कि इनमें से कई कार्टून मशहूर कार्टूनिस्ट आर.के. लक्ष्मण के बनाए हुए थे।

‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पर जोर

अधिकारियों के अनुसार, कैबिनेट सचिव का मुख्य संदेश यह था कि बैठकों को बेहतर तरीके से कैसे चलाया जाए और कार्यस्थल (वर्कप्लेस) को ऐसा कैसे बनाया जाए जहां काम आसानी से और अच्छे से हो सके।

टी.वी. सोमनाथन ने अधिकारियों को केंद्र सरकार की सुधारों की अगली कड़ी, ‘डिरैग्युलेशन 3.0’ (Deregulation 3.0) के बारे में भी बताया, जो जनवरी से शुरू होने वाली है।

इसका मकसद लालफीताशाही (red tape) को कम करना, नियमों का पालन आसान बनाना और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (कारोबार करने में आसानी) को बेहतर बनाना है।

1 से 10 नंबर के बीच में सही रैंकिंग

वरिष्ठ नौकरशाहों की बैठक में टी.वी. सोमनाथन ने मंत्रालयों के बीच आपसी बातचीत में तेजी लाने पर जोर दिया। सोमनाथन ने कहा कि केंद्रीय वित्त और वाणिज्य मंत्रालयों को अपने विचार तुरंत भेजने चाहिए ताकि किसी तरह की देरी न हो।

कैबिनेट सचिव ने यह भी गौर किया कि अधिकारियों के परफॉरमेंस स्कोर अक्सर 1 से 10 के पैमाने पर 10 के बहुत करीब होते हैं। इससे रैंकिंग सिस्टम में ऐसे अधिकारियों को अलग करना मुश्किल हो जाता है जो वास्तव में बेहतरीन हैं, और उन अधिकारियों को अलग करना मुश्किल हो जाता है जिनका काम बस ‘संतोषजनक’ है।

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