डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय रेलवे में इन दिनों बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। नई और आधुनिक ट्रेनें पटरी पर दौड़ रही हैं, स्टेशनों का रीडेवलपमेंट हो रहा है। बुनियादी ढांचे को लगातार सुधारा जा रहा है। इन सबसे रेलवे की बाहरी तस्वीर तो तेजी से बदल रही है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या आम यात्रियों का सफर भी उसी रफ्तार से बेहतर हुआ है?
रोजाना सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए आधुनिकीकरण की असली परीक्षा सिर्फ स्टेशन की नई इमारत या ट्रेन के आकर्षक डिजाइन तक सीमित नहीं है।
यात्रियों के लिए सबसे अहम यह है कि प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित व्यवस्था हो, शौचालय साफ हों, पीने का साफ पानी मिले, डिब्बे ठीक-ठाक हों और ट्रेनें समय पर आएं। भारी निवेश के बावजूद सरकारी ऑडिट रिपोर्टों में आज भी बुनियादी सुविधाओं, साफ-सफाई और रखरखाव में बड़ी कमियां सामने आ रही हैं।
स्टेशनों का बड़े पैमाने पर मेकओवर
रेलवे के आधुनिकीकरण में सबसे प्रमुख अमृत भारत स्टेशन योजना है। रेल मंत्रालय के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत 1337 स्टेशनों की पहचान की गई थी, जिनमें से 155 स्टेशनों पर काम पूरा हो चुका था।
इस योजना का उद्देश्य स्टेशन भवनों, वेटिंग हॉल, शौचालय, बैठने की व्यवस्था, पीने के पानी, फुट ओवरब्रिज, लिफ्ट, एस्केलेटर और यात्री सूचना प्रणाली को बेहतर बनाना है।
इसके साथ ही दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष सुविधाएं, स्थानीय उत्पादों के लिए वन स्टेशन वन प्रोडक्ट स्टॉल और स्टेशनों को शहर के अन्य सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
हालांकि, चलती ट्रेनों और यात्रियों की आवाजाही के बीच निर्माण कार्य पूरा करना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि जब तक निर्माण कार्य चल रहा है, तब तक मौजूदा सुविधाओं की देखरेख कितनी जिम्मेदारी से हो रही है।
नई ट्रेनों से यात्रियों की उम्मीदें
वंदे भारत एक्सप्रेस आधुनिक रेल सेवा का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरी है। बेहतरीन डिब्बे, आरामदायक सीटें और तेज गति के कारण यात्रियों में इसका आकर्षण तेजी से बढ़ा है।
रेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में 2.97 करोड़ यात्रियों की तुलना में वर्ष 2025-26 में लगभग 3.98 करोड़ लोगों ने वंदे भारत से यात्रा की, जो कि करीब 34% की बढ़ोतरी है।
जनवरी 2026 में शुरू हुई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने अपने शुरुआती तीन महीनों में ही 1.21 लाख यात्रियों को सफर कराया, जिसमें सीटों की बुकिंग 100% से अधिक रही।
रेल अधिकारी के अनुसार, वंदे भारत और अमृत भारत जैसी पुश-पुल तकनीक वाली ट्रेनें यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं देने के मकसद से चलाई जा रही हैं। लेकिन जानकारों का मानना है कि केवल प्रीमियम ट्रेनों की सफलता को ही पूरी रेलवे की तरक्की का पैमाना नहीं माना जा सकता।
स्लीपर या जनरल कोच में सफर करने वाले आम यात्रियों के लिए समय पर पानी मिलना, साफ शौचालय और प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित जगह मिलना आज भी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
कैग रिपोर्ट में क्या हुए खुलासे?
संसद में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट बुनियादी सुविधाओं की जमीनी हकीकत बयां करती है। नॉन-सबअर्बन 512 स्टेशनों की जांच में से 458 स्टेशनों पर बुनियादी यात्री सुविधाओं में कमियां पाई गईं। इन कमियों में मुख्य रूप से शौचालय, यूरिनल और पीने के पानी की समस्याएं शामिल थीं।
सबसे चिंताजनक बात यह रही कि 8 जगहों पर वाटर कूलर से लिए गए पानी के नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया का संक्रमण पाया गया, जो पानी की गुणवत्ता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ट्रेनों में साफ-सफाई का हाल
सफाई से जुड़ी समस्याएं सिर्फ स्टेशनों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि लंबी दूरी की ट्रेनों में भी बनी हुई हैं। वर्ष 2018-19 से 2022-23 के बीच लंबी दूरी की 96 ट्रेनों के 2,426 यात्रियों पर किए गए एक अन्य कैग सर्वे में सामने आया कि:
- 40% से अधिक यात्री शौचालयों की सफाई से असंतुष्ट थे।
- आधे से ज्यादा यात्रियों ने ऑनबोर्ड हाउसकीपिंग सेवाओं पर नाराजगी जताई।
- लगभग 15% यात्रियों ने शौचालयों या वॉशबेसिन में पानी न होने की शिकायत की।
- वर्ष 2022-23 में ‘रेल मदद’ पोर्टल पर ट्रेनों में पानी की कमी से जुड़ी एक लाख से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि बायो-टॉयलेट से स्वच्छता में सुधार हुआ है, लेकिन इनके सही रखरखाव और यात्रियों में जागरूकता की कमी अभी भी एक चुनौती है। हालांकि 89% शिकायतों का समय पर निपटारा किया जाता है, फिर भी जरूरत इस बात की है कि यात्रियों को शिकायत करने की नौबत ही न आए।
ट्रेनों की पंक्चुअलिटी में सुधार, लेकिन मंजिल अभी दूर
ट्रेनों के समय पर चलने को लेकर भी सुधार के प्रयास जारी हैं। रेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में ट्रेनों की समयबद्धता 73.62% थी। जो 2024-25 में बढ़कर 77.12% और फरवरी 2026 तक 77.24% तक पहुंची।
स्टेशनों पर भीड़ को नियंत्रित करना भी यात्री सुरक्षा का बेहद अहम पहलू है। फरवरी 2025 में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ में 18 लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
मार्च 2026 में रेलवे ने 76 चुनिंदा स्टेशनों पर स्थायी वेटिंग/होल्डिंग एरिया, चौड़े फुट ओवरब्रिज, ऑटोमैटिक निगरानी और प्रवेश नियंत्रण की योजना बनाई है। इसके अलावा त्योहारों और छुट्टियों के दौरान बड़े शहरों के मुख्य स्टेशनों पर दबाव कम करने के लिए ‘सैटेलाइट स्टेशन’ विकसित किए जा रहे हैं और मांग के आधार पर ज्यादा क्षमता वाली ट्रेनें चलाई जा रही हैं।
सिर्फ निर्माण नहीं, बेहतर सेवा है असली कसौटी
साल 2025-26 के लिए यात्री सुविधाओं के मद में 12118 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिसमें से अक्टूबर 2025 तक 7253 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे।
बजट और निर्माण कार्य अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आम यात्री को रोजाना के सफर में क्या अनुभव मिलता है।
आधुनिकीकरण का असली पैमाना केवल स्टेशन के नए शीशे या ट्रेन के चमकदार रंग-रूप से तय नहीं होगा, बल्कि एक साफ शौचालय, सुरक्षित पीने का पानी, चालू हालत में लिफ्ट और समय पर चलने वाली ट्रेन से तय होगा।
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