श्रावस्ती के इकौना क्षेत्र में सालाना जलसे को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। सेमगढ़ा चौराहे के पास रंकीपुरवा में होने वाले इस आयोजन के लिए मंच से लेकर बैठने तक की व्यवस्थाएं की गई हैं। आयोजन स्थल पर रंग-बिरंगी लाइटिंग, आकर्षक झूमर और बड़े-बड़े तंबू-कनात लगाए गए हैं। रात 8 बजे के बाद शुरू होने वाले इस जलसे में उलेमा-ए-किराम, फुकहा और नातख्वां शिरकत करेंगे। आयोजकों को उम्मीद है कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे। हर साल की परंपरा को इस बार भी रखा जाएगा कायम रंकीपुरवा में हर साल की तरह इस बार भी सालाना जलसे का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम को लेकर स्थानीय लोगों और कमेटी के सदस्यों में उत्साह है। जलसे के माध्यम से धार्मिक तकरीर और नात के जरिए लोगों तक इस्लामी तालीम और संदेश पहुंचाने की तैयारी है। कार्यक्रम रात 8 बजे के बाद शुरू होगा। आयोजन को लेकर कमेटी के लोग लगातार व्यवस्थाओं में जुटे हैं। लखनऊ और उत्रौला से पहुंचेंगे इस्लामी विद्वान जलसे में अलग-अलग क्षेत्रों से इस्लामी विद्वानों को आमंत्रित किया गया है। इनमें मुफ्ती मसूदुद्दीन साहब उत्रौला और मुफ्ती सेरे मोहम्मद साहब लखनऊ प्रमुख रूप से शामिल होंगे। दोनों विद्वानों की मौजूदगी कार्यक्रम का खास आकर्षण रहेगी। इसके अलावा कारी इजाज इकौना भी जलसे में शिरकत करेंगे। आयोजकों ने सभी मेहमानों के स्वागत और कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की तैयारी की है। नातख्वां इरशाद रजा नैपाली पेश करेंगे नात जलसे में नातख्वां इरशाद रजा नैपाली भी शामिल होंगे। वह अपनी नात के माध्यम से महफिल में समां बांधेंगे। धार्मिक कार्यक्रम में नातख्वानी को खास स्थान दिया गया है। इसके साथ ही उलमा-ए-किराम और फुकहा की मौजूदगी भी रहेगी। उनकी तकरीर और धार्मिक विचारों को सुनने के लिए स्थानीय लोगों में उत्सुकता है। उलमा-ए-किराम और फुकहा की भी रहेगी मौजूदगी इस आयोजन में केवल मुख्य वक्ताओं और नातख्वां तक ही कार्यक्रम सीमित नहीं रहेगा। इसमें कई उलमा-ए-किराम और फुकहा भी शिरकत करेंगे। धार्मिक विद्वानों की मौजूदगी से जलसे को व्यापक स्वरूप देने की तैयारी है। कार्यक्रम में तकरीर और नातख्वानी के जरिए धार्मिक संदेश लोगों तक पहुंचाने की योजना है। झूमर और रंगीन रोशनी से सजाया गया आयोजन स्थल जलसे को लेकर आयोजन स्थल पर विशेष सजावट की गई है। पूरे परिसर में लाइटिंग की व्यवस्था की गई है। आकर्षक झूमर लगाए गए हैं, जबकि लोगों की सुविधा के लिए तंबू और कनात लगाकर बैठने की जगह तैयार की गई है। इसके अलावा कुर्सियों की भी व्यवस्था की गई है। आयोजकों का प्रयास है कि कार्यक्रम में पहुंचने वाले लोगों को बैठने और जलसे में शामिल होने में परेशानी न हो। मोहम्मद समीम कादरी और प्रधान रिजवान ने संभाली जिम्मेदारी जलसे के आयोजन में स्थानीय लोगों की भी भागीदारी है। मोहम्मद समीम कादरी, ग्राम पंचायत प्रधान रिजवान और अन्य लोगों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग किया है। कमेटी के सदस्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। आयोजन से जुड़े लोगों का प्रयास है कि सालाना जलसा व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो और बाहर से आने वाले मेहमानों को किसी तरह की असुविधा न हो।
श्रावस्ती के रंकीपुरवा में सजेगा जलसे का मंच:उलेमा और नातख्वां करेंगे तकरीर व नात पेश; रोशनी और झूमरों से सजा आयोजन स्थल
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