श्रावस्ती में पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रस्तावित नई व्यवस्था के विरोध में गुरुवार को दोपहर 1:00 से 2:00 के बीच अधिवक्ताओं ने दीवानी न्यायालय के सामने कुछ देर के लिए सड़क जाम कर धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने परियोजना वापस लेने की मांग की। कुछ समय बाद अधिवक्ताओं के हटने पर यातायात सामान्य हो गया। प्रदर्शन में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश तिवारी और महामंत्री सतीश मौर्य समेत बड़ी संख्या मे अधिवक्ता शामिल हुए। वकीलों ने कहा कि सरकार चार जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है। श्रावस्ती भी इनमें शामिल है। यह व्यवस्था 1 नवंबर से लागू करने के लिए प्रस्तावित है। महामंत्री सतीश मौर्य ने कहा कि पहले लखनऊ समेत बड़े जिलों में ऐसी व्यवस्था लागू की गई थी। विरोध के बाद इसे वापस लेना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रावस्ती को पिछड़ा जिला समझकर यहां यह व्यवस्था लागू की जा रही है।
सतीश मौर्य ने आशंका जताई कि नई व्यवस्था से तहसील स्तर पर अधिवक्ताओं के रोजगार पर असर पड़ेगा। कई प्रक्रियाएं निजी और ऑनलाइन माध्यम से होने पर आम लोगों की परेशानियां भी बढ़ सकती हैं। उन्होंने बताया कि अधिवक्ताओं ने पहले भी ज्ञापन देकर सरकार से पायलट प्रोजेक्ट वापस लेने की मांग की थी, लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं हुआ। उन्होंने चेतावनी दी कि परियोजना वापस नहीं होने तक अधिवक्ता सभी न्यायालय संबंधी कार्यों का बहिष्कार करेंगे।
श्रावस्ती में अधिवक्ताओं ने सड़क जाम किया:1 नवंबर से प्रस्तावित पायलट प्रोजेक्ट वापस लेने की मांग, बहिष्कार की चेतावनी
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