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योगी कैबिनेट का फैसला:18 शहरों में चलेंगी 1,725 एसी इलेक्ट्रिक बसें, 12 साल का होगा अनुबंध; जानिए डिटेल – Yogi Cabinet Decision: 1,725 Ac Electric Buses Will Run In 18 Cities, Contract Will Be For 12 Years; Know Th

योगी कैबिनेट का फैसला:18 शहरों में चलेंगी 1,725 एसी इलेक्ट्रिक बसें, 12 साल का होगा अनुबंध; जानिए डिटेल - Yogi Cabinet Decision: 1,725 Ac Electric Buses Will Run In 18 Cities, Contract Will Be For 12 Years; Know Th

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश की नगरीय परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके तहत उत्तर प्रदेश के 18 शहरों में ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल पर 1,725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन को व्यवस्थित करने के साथ यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

योजना के अंतर्गत आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी और नोएडा (जेवर सहित) में बसें संचालित की जाएंगी। इनमें 9 मीटर और 12 मीटर लंबाई की वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें शामिल होंगी। अनुबंध की अवधि वाणिज्यिक संचालन शुरू होने की तारीख से 12 वर्ष निर्धारित की गई है।

लखनऊ और कानपुर को मिलेंगी 300-300 बसें

नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि प्रदेश के 18 शहरों में जल्द ही 1,725 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। इनमें आगरा में 100, मथुरा-वृंदावन में 50, अलीगढ़ में 25, फिरोजाबाद में 25, गाजियाबाद में 100, मेरठ में 100, शाहजहांपुर में 25, बरेली में 25, मुरादाबाद में 25, सहारनपुर में 25, नोएडा (जेवर सहित) में 100, वाराणसी में 250, अयोध्या में 50, लखनऊ में 300, गोरखपुर में 150, कानपुर में 300, प्रयागराज में 50 और झांसी में 25 बसें चलाई जाएंगी।

निजी ऑपरेटर करेंगे बसों का संचालन

जीसीसी मॉडल के तहत निजी ऑपरेटर बसों की खरीद, चार्जिंग स्टेशन के लिए आवश्यक चार्जर की व्यवस्था, बस चालक एवं तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती तथा बसों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेंगे। निर्धारित प्रदर्शन मानकों के आधार पर ऑपरेटरों को संचालन एवं रखरखाव शुल्क (ओएंडएम फी) का भुगतान किया जाएगा। वहीं, टैरिफ/प्रयोक्ता शुल्क निर्धारण सरकार द्वारा किया जाएगा।

बसों की खरीद पर मिलेगा अनुदान

परियोजना के तहत 12 मीटर लंबी प्रत्येक इलेक्ट्रिक बस के लिए 40 लाख रुपये और 9 मीटर लंबी बस के लिए 35 लाख रुपये का अनुदान देने का निर्णय लिया गया है। बसों के संचालन के लिए डिपो निर्माण हेतु संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण की ओर से आवश्यकतानुसार भूमि निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।

निजी निवेश से सेवाओं में सुधार की उम्मीद

सरकार के अनुसार, निजी निवेश के माध्यम से बस संचालन में सरकारी व्यय का बोझ कम होगा और सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। निजी ऑपरेटर दक्षता, समयबद्धता एवं उपभोक्ता संतुष्टि पर विशेष ध्यान देंगे। निजी ऑपरेटरों को प्रतिस्पर्धा के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे नवीनतम तकनीक एवं सेवा सुधार लागू होंगे। निजी ऑपरेटर निविदा प्रक्रिया से चयनित होकर अनुबंधित किए जाएंगे और उपभोक्ताओं को सीधा लाभ प्राप्त होगा।

प्रदेश में निर्मित बसों को मिलेगी वरीयता

योजना के तहत नई इलेक्ट्रिक बसों के खरीद के संबंध में परिवहन विभाग द्वारा निर्धारित नीति के क्रम में एल-1 के रेट पर उत्तर प्रदेश में निर्मित बसों के क्रय को वरीयता प्रदान किया जाना प्रस्तावित है। इससे प्रदेश में बस निर्माण और आपूर्ति से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है।

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