
बलरामपुर में पर्यावरण संरक्षण और जलस्रोतों को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के सदस्य/जज डॉ. अफरोज अहमद ने अधिकारियों को सीवेज के दूषित पानी की सीधी निकासी रोकने, सुआव नदी के पुनर्जीवन और बायोडायवर्सिटी पार्क विकसित करने के संबंध में प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इन निर्देशों में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु नालों से निकलने वाले दूषित पानी का शोधन है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि बिना उपचारित सीवेज को किसी भी स्थिति में नदियों या अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों में प्रवाहित न किया जाए। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का प्रभावी संचालन और निर्धारित मानकों के अनुरूप दूषित जल का वैज्ञानिक उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित विभागों को इसकी नियमित निगरानी करने को भी कहा गया है। सुआव नदी के पुनर्जीवन और चैनलाइजेशन को पर्यावरण एवं जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसके तहत नदी के प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए पुनर्जीवन कार्यों को आगे बढ़ाने, नदी और उसके आसपास स्वच्छता बनाए रखने तथा हरित क्षेत्र विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया है। जल संरक्षण से जुड़े कार्यों के माध्यम से नदी के पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत किया जाएगा। जनपद में एक उपयुक्त स्थल पर बायोडायवर्सिटी पार्क विकसित करने की भी योजना है। इस पार्क में स्थानीय जैव विविधता, देशी प्रजातियों के पौधों और वनस्पतियों का संरक्षण किया जाएगा, जिससे प्राकृतिक पारिस्थितिकी को बढ़ावा मिलेगा। डॉ. अहमद ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को केवल प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित न रखकर हरित क्षेत्र बढ़ाने, जलस्रोतों के पुनर्जीवन और जनभागीदारी से जोड़ने की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त, चीनी मिलों को कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी करने के निर्देश दिए गए हैं। सीएसआर फंड का उपयोग पौधरोपण, जल संरक्षण, हरित क्षेत्र के विकास, स्वच्छता और अन्य पर्यावरणीय गतिविधियों में किया जा सकेगा।


























