वेद प्रकाश | बेलाड़ी शुक्ल(हर्रैया), बस्ती14 मिनट पहले
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बस्ती जिले के हर्रैया तहसील क्षेत्र के महादेवरी, देवरी, मरवट, बड़हर खुर्द, बड़हर कला, बेलाड़ी शुक्ल समेत पूरे इलाके में बुधवार को माताओं ने हल षष्ठी व्रत रखा। उन्होंने कुश पौधे की पूजा की और अपने बेटों की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना की।
हल षष्ठी या ललही छठ व्रत को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। जिन महिलाओं के पुत्र होते हैं, वे ही इस व्रत को रखती हैं।
मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से पहले बलरामजी का जन्म हुआ था। हलषष्ठी का व्रत बलरामजी के जन्म के मौके पर रखा जाता है। बलरामजी का हथियार हल है, इसलिए इस दिन महिलाओं को हल चले हुए खेत में चलने से मना किया गया है।
व्रत की पूजा के सामान के तौर पर दूध, दही-घी, महुआ, तिन्नी का चावल, फूल, दूब, रोली, चंदन, नारियल, कुश और भाजी का इस्तेमाल होता है। बुधवार सुबह से ही प्रतीक के तौर पर महुआ, ढाक और कुश लगाकर, गड्ढा खोदकर महिलाओं ने पूजा की।
उन्होंने बेटों के पैर गड्ढे के पानी में धोए और उनकी लंबी उम्र की कामना की। बेटों ने भी मां के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया।
इसी तरह घरों में भी कुंड बनाए गए और दिन भर पूजा-पाठ चलता रहा। खाने में महिलाओं ने बिना जोते खेत के अन्न-फल और दूसरी चीजों का इस्तेमाल किया। इसमें तिन्नी का चावल, दही और घी शामिल था।
ज्यादातर जगहों पर महिलाओं ने एक साथ मिलकर पूजा की और व्रत का महत्व बताया। इस दौरान महिलाओं ने मंगलगीत गाकर खुशी जताई।

































