वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष के मध्य शनिवार को फारस की खाड़ी में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के अनुसार, ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खर्ग द्वीप के समीप एक तेल टैंकर को अमेरिकी सेना द्वारा निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट है। हमले के तत्काल बाद तटीय क्षेत्र में तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं, हालांकि प्राथमिक जानकारियों में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है।
खर्ग द्वीप के समीप तेल टैंकर को बनाया गया निशाना
प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, खर्ग द्वीप के आसपास हुए इस हमले से क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई:
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चार प्रोजेक्टाइल से हमला: दावा किया जा रहा है कि जब टैंकर से कच्चे तेल को उतारा जा रहा था, उसी दौरान उस पर चार प्रोजेक्टाइल दागे गए।
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स्थिति अस्पष्ट: हालांकि क्षेत्र में विस्फोटों की गूंज सुनी गई है, लेकिन टैंकर को पहुंचे वास्तविक नुकसान और उसकी वर्तमान स्थिति को लेकर विस्तृत आधिकारिक ब्योरा अभी आना शेष है। ईरानी अधिकारियों ने भी अब तक इस घटना पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना टकराव का मुख्य केंद्र
खर्ग द्वीप पर हुआ यह हमला पिछले कुछ दिनों से दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ रहे आक्रामक सैन्य अभियानों की ही एक कड़ी है:
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अमेरिकी सैन्य कार्रवाई: अमेरिकी सेना ने 30 अगस्त से ईरान के विरुद्ध सैन्य अभियानों का नया चरण प्रारंभ किया था, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य स्थित लारक द्वीप पर ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया गया। वाशिंगटन का दावा है कि यह कार्रवाई समुद्री मार्गों में बारूदी सुरंगें बिछाने वाले तत्वों को निष्क्रिय करने हेतु की गई थी।
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ईरान का पलटवार: अमेरिकी हमलों के उत्तर में ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं।
ईरानी वायु रक्षा और रडार तंत्र पर अमेरिका का बड़ा प्रहार
जवाबी कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए 1 सितंबर को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के दक्षिणी तटीय क्षेत्रों पर व्यापक हमला बोला:
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IRGC के ठिकानों पर हमला: अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वायु रक्षा प्रणालियों, रडार प्रतिष्ठानों, माइन बिछाने वाली क्षमताओं, समुद्री संसाधनों और संचार केंद्रों को पूरी तरह ध्वस्त करने का दावा किया।
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वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा का तर्क: अमेरिका का कहना है कि यह आक्रामक कदम होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों और अमेरिकी सैन्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
































